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Facing hurdles in profession, health problems, delay in marriage, problem in identifying higher educ
एक बार तुलसीदास जी से किसी ने पूछा:-कभी-कभी भक्ति करने को मन नहीं करता फिर भी नाम जपने के लिये बैठ जाते है, क्या उसका भी कोई फल मिलता है ? तुलसी दास जी ने मुस्करा कर कहा
तुलसी मेरे राम को
रीझ भजो या खीज
भौम पड़ा जामे सभी
उल्टा सीधा बीज ।
अर्थात् ,भूमि में जब बीज बोये जाते है तो यह नहीं देखा जाता कि बीज उल्टे पड़े है या सीधे पर फिर भी कालांतर में फसल बन जाती है इसी प्रकार नाम सुमिरन कैसे भी किया जाये उसके सुमिरन का फल अवश्य ही मिलता है।
🙏 *ॐ शांति* 🙏
*स्वाद* और *विवाद* दोनो को छोड़ देना चाहिये। स्वाद छोड़ो तो *शरीर* को फायदा... विवाद छोड़ो तो *संबंधों* को फायदा...!!
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो ... 💐💐
🙏 *ॐ शांति* 🙏
*अवगुणों* की दुर्गंध से भरे इस संसार में सुखमय जीवन जीने का मार्ग है... स्वयं में *गुण* रूपी फूलों को उगाना, जिससे केवल स्वयं का जीवन ही नहीं *महकता* ... बल्कि इसकी सुगंध से आस-पास का वातावरण भी *सुगंधित* होने लगता है।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
*मौन बैठने से बदल सकता है*
*आपका जीवन*
अगर आप अपनी इच्छा से कुछ समय के लिए बोलना छोड़ दें, मौन धारण कर लें तो इससे आपको बहुत फायदे हो सकते हैं।
*➡मौन के लाभ*
मौन की शुरुआत जुबान के चुप होने से होती है। धीरे-धीरे जुबान के बाद आपका मन भी चुप हो जाता है। मन में चुप्पी जब गहराएगी तो आंखें, चेहरा और पूरा शरीर चुप और शांत होने लगेगा। तब आप इस संसार को नए सिरे से देखना शुरू कर पाएंगे। बिल्कुल उस तरह से जैसे कोई नवजात शिशु संसार को देखता है। जरूरी है कि मौन रहने के दौरान सिर्फ श्वांसों के आवागमन को ही महसूस करते हुए उसका आनंद लें। मौन से मन की शक्ति बढ़ती है। शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्यग्रता नहीं रहती। मौन का अभ्यास करने से सभी प्रकार के मानसिक विकार समाप्त हो जाते हैं। आइये जानते हैं मौन के सात महत्वपूर्ण फायदों के बारे में।
*➡संतुष्टि*
कुछ न बोलना, यानि अपनी एक सुविधा से मुंह मोड़ना। जी हां, बोलना आपके लिए एक बहुत बड़ी सुविधा ही होती है। जो आपके मन में चल रहा होता है उसे आप तुरंत बोल देते हैं। लेकिन, मौन रहने से चीजें बिल्कुल बदल जाती हैं। मौन अभाव में भी खुश रहना सिखाता है।
*➡अभिव्यक्ति*
जब आप सिर्फ लिखकर बात कर सकते हैं तो आप सिर्फ वही लिखेंगे जो बहुत जरूरी होगा। कई बार आप बहुत बातें करके भी कम कह पाते हो। लेकिन ऐसे में आप सिर्फ कहते हो, बात नहीं करते। इस तरह से आप अपने आपको अच्छी तरह से व्यक्त कर सकते हैं।
*➡प्रशंसा*
हमारे बोल पाने की वजह से हमारा जीवन आसान हो जाता है, लेकिन जब आप मौन धारण करेंगे तब आपको ये अहसास होगा कि आप दूसरो पर कितना निर्भर हैं। मौन रहने से आप दूसरों को ध्यान से सुनते हैं। अपने परिवार, अपने दोस्तों को ध्यान से सुनना, उनकी प्रशंसा करना ही है।
*➡ध्यान देना*
जब आप बोल पाते हैं तो आपका फोन आपका ध्यान भटकाने का काम करता है। मौन आपको ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर करता है। इससे किसी एक चीज या बात पर ध्यान लगाना आसान हो जाता है।
*➡विचार*
शोर से विचारों का आकार बिगड़ सकता है। बाहर के शोर के लिए तो शायद हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन अपने द्वारा उत्पन्न शोर को मौन जरूर कर सकते हैं। मौन विचारों को आकार देने में हमारी मदद करता है। हर रोज अपने विचारों को बेहतर आकार देने के लिए मौन रहें।
*➡प्रकृति*
जब आप हर मौसम में मौन धारण करना शुरू कर देंगे तो आप जान पाएंगे कि बसंत में चलने वाली हवा और सर्दियों में चलने वाली हवा की आवाज भी अलग-अलग होती है। मौन हमें प्रकृति के करीब लाता है। मौन होकर बाहर टहलें। आप पाएंगे कि प्रकृति के पास आपको देने के लिए काफी कुछ है।
*➡शरीर*
मौन आपको आपके शरीर पर ध्यान देना सिखाता है। अपनी आंखें बंद करें और अपने आप से पूछें, "मुझे अपने हाथ में क्या महसूस हो रहा है?" अपने शरीर को महसूस करने से आपका अशांत मन भी शांत हो जाता है। शांत मन स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है।
भस्म अंत है, भस्म अनंत है,भस्म ही है अंतिम सार
महाकाल तेरी तो बात ही निराली है भस्म ही है तेरा श्रृंगार
꧁༒ॐ जय श्री महाकाल ॐ ༒꧂
🙏 *ॐ शांति* 🙏
स्व-उन्नति का मूल मंत्र है... अपनी मन-बुद्धि पर सम्पूर्ण नियंत्रण। यही दो मंत्र हैं... जिससे हम जो चाहें..., जैसा *जीवन* चाहें..., बना सकते हैं।
🌸 सुप्रभात...
💐💐 आपका दिन शुभ हो... 💐💐
🌹🙏जय श्री लक्ष्मीनारायणजी🙏🌹
जय लक्ष्मीरमणा,
श्री लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी,
सत्यनारायण स्वामी,
जन पातक हरणा॥
ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥
रत्ना जटित सिंहासन,
अद्भुत छबि राजे,
स्वामी अद्भुत छबि राजे।
नाद करत निरंजन,
नाद करत निरंजन,
घंटा ध्वनि बजे॥
॥ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥
प्रगट भाई कलि कारन,
द्विज को दरस दियो,
स्वामी द्विज को दरस दियो।
बुढा ब्राह्मण बनके,
बुढा ब्राह्मण बनके,
कंचन महल कियो॥
॥ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥
दुर्बल भील कठारो,
जिनपर कृपा करी,
स्वामी जिनपर कृपा करी।
चन्द्रचूड एक राजा,
चन्द्र चूड एक राजा,
जिनकी विप्पति हारी॥
॥ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥
वैश्य मनोरथ पायो,
श्रद्धा तज दीन्ही,
स्वामी श्रद्धा तज दीन्ही।
सो फल भोग्यो प्रभुजी,
सो फल भोग्यो प्रभुजी,
फिर अस्तुति किन्ही॥
॥ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥
भाव भक्ति के कारन,
छीन छीन रूप धर्यो,
स्वामी छीन छीन रूप धर्यो।
श्रद्धा धारण किनी,
श्रद्धा धारण किनी,
तिनके काज सरयो॥
॥ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥
ग्वाल बाल संग राजा,
वन में भक्ति करी,
स्वामी वन में भक्ति करी।
मनवांछित फल दीन्हो,
मनवांछित फल दीन्हो,
दीनदयालु हरी॥
।। ॐ जय लक्ष्मी रमणा ।।
🙏🙏🙏🌷जय श्री लक्ष्मीनारायण जी 🌷🙏🙏🙏
आप सबको मकर संक्रांति एवं सूर्य उत्तरायण की हार्दिक शुभकामनाएं. जैसे-जैसे सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़े वैसे-वैसे सभी के ज्ञान, सम्रद्धि और तेजस्विता में बढोत्तरी करे, ऐसी मंगलकामना है....🙏 हर हर महादेव 🙏🙏
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*मीठे गुड़ में मिल गए तिल,*
*उड़ी पतंग और खिल गए दिल,*
*हर पल सुख और हर दिन शांति,*
*आप सबके लिए लाये मकर सक्रांति...*
इस साल की मकर सक्रांति आप सभी के लिए तिल-गुड़ जैसी मीठी और पतंग जैसी ऊंची उड़ान लाये...यही हमारी दिल की दुआएं और शुभ-कामनाएं हैं!!!💝
*आप सभी को मकर संक्रांति की ढेर सारी बधाइयाँ!!!*💐
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14/01/2021