our nature
हमारी प्रकृति हमारी संस्कृति की सुंदरता यही इस पेज़ की भूमिका है
01/09/2025
बात छोटी सी मगर बहुत गहरी है क्या आपने कभी सोचा आज हम पूर्णतः भौतिकवादी और मशीनरी पर निर्भर हो चुके हैं जिसे हम तरक्की बोलते हैं और इस तरक्की ने हमें प्रकृति का अनादर और उसे को नज़रंदाज़ करना सिखाया है जिसका परिणाम हम भुगत रहे हैं हमने पौधे लगाना छोड़ दिया पर हमें घर में हवा की आवश्यकता पड़ी हमने पंखे,कूलर, ऐ सी का अविष्कार कर लिया,हमें पानी लेने घर से दूर न जाना पड़े हमने बार वेल का अविष्कार कर लिया,ठंडे पानी के लिए मिट्टी के वर्तनों को छोड़ दिया हम फ्रिज,वाटर कूलर पर निर्भर हो गए,हम बैलगाड़ी और घोड़ा गाड़ी से शुरू हो कर आज इलेक्ट्रिक वाहन पर आ गए, नीम की दातून से शुरू होकर टूथपेस्ट तक ओर कच्चे मकानों से सीमेंट कंक्रीट के बहुमंजिला इमारतों तक आ गए,हम संयुक्त परिवार से एकल परिवार पर आ चुके हैं हम प्राकृतिक आयुर्वेद और व्यायाम शालाओं से चल कर अच्छे स्वास्थ्य के लिए मल्टीसीटी हस्पताल और जीमो तक आ पहुंचे। आज 100 में से करीब 60 प्रतिशत लोगों का शाम का भोजन रेस्टोरेंट और होटलों में होता है।जिसका परिणाम नई नई बीमारियां आज संयुक्त परिवार से घटते हुए हम एकल परिवार पर आ गए। आज आवश्यकता है हम सभी को प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की। इसलिए हमें भौतिकवादी परिवेश के साथ प्राकृति वादी बनने की भी आवश्यकता है। ये मेरे अपने विचार है ये जरूरी नहीं कि आप मुझसे सहमत हो।
आपका -- दीपक कुमार श्रीवास्तव
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