Open truth
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जब भूमिहार भाइयों ने इंसानियत को ही दुल्हन बना दिया”
"कहा बारात आयेगी परन्तु शोर मत करना"
29 नवंबर की रात…की कहानी Asif Khan जी की जुबानी
तरया सुजान का हमारा पठानी टोला ग़म में डूबा था।
मेरे गांव के ही एक शख़्स, मेराज खान, अचानक बीमारी से चल बसे।
घर के बाहर सन्नाटा था… पर दिलों के भीतर तूफ़ान।
हर आंख नम थी, माहौल भारी था।
इसी ग़म के बीच, हमारे पड़ोसी टोले—तरया पश्चिम (भूमिहार टोला)—में अमर मिश्रा जी की बेटी की शादी थी।
घर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था।
महुला–महुला रिश्तेदारों की भीड़, गीत, हंसी और हजारों उम्मीदें…
लेकिन किस्मत ने दो बिल्कुल उलटे रंग एक ही दिन सामने रख दिए—
एक तरफ मातम, दूसरी तरफ शादी का जश्न।
और यहीं से उस रात की सबसे खूबसूरत कहानी शुरू होती है…
एक ऐसी कहानी, जिसने मुझे इंसानियत पर और भी यकीन दिला दिया।
“शोर मत करना, हमारे भाई के घर में ग़म है” — भूमिहार भाइयों का निर्णय
जैसे ही हिन्दू भाइयों को खबर मिली कि मेराज भाई का इंतक़ाल हुआ है,
एक आवाज़ उठी—
“बारात इसी रास्ते से आएगी… शोर-गुल से घरवालों को तकलीफ़ होगी। चलो, खुशी मनाते हैं… पर इंसानियत के दायरे में।”
और उस आवाज़ को किसी ने नहीं रोका।
हर किसी ने दिल से सुना।
घर से करीब 1 किलोमीटर पहले ही पटाखे बंद कर दिए गए।
डीजे की आवाज़ थम गई।
बाराती धीरे-धीरे, सिर झुकाए, पूरी इज्जत और खामोशी के साथ हमारे टोले से गुज़रे।
मैंने अपनी आंखों से देखा —
खुशी चलते-चलते रुक गई और इंसानियत आगे बढ़ गई।
“टिकाना बदल दो… नहीं तो दुखियों को चुभेगा” — एक और मिसाल
असल में बारात का टिकाना भी हमारे टोले में और मेराज खान के घर पास था।
इससे रात में शोर हो सकता था, जो परिवार को परेशान कर देता।
भूमिहार भाइयों ने यह बात सुनी… और बिना एक मिनट सोचे कहा—
“नहीं! बारात 2 किलोमीटर दूर तरया बाजार में टिकेगी। अगर किसी का दिल दुखे, तो ऐसी खुशी का क्या मतलब!”
और वो तुरंत 2 किलोमीटर दूर तरया बाजार चले गए।
किसी ने बहाना नहीं बनाया।
किसी ने नाराज़गी नहीं दिखाई।
उस पल मैंने महसूस किया—
आज के जमाने में भी ऐसा दिल रखने वाले लोग मौजूद हैं।
“हम हमेशा भाई थे… और आज और भी करीब हो गए”
पठानी टोला और तरया पश्चिम हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।
लेकिन 29 नवंबर की रात ने इस रिश्ते पर और भी सुर्ख चादर चढ़ा दी।
लोग कह रहे थे—
“आज के नफ़रत वाले दौर में ऐसे लोग होना, किसी वरदान से कम नहीं।”
और मैं भी यही कहना चाहता हूँ…
भूमिहार भाइयों ने सिर्फ एक बारात नहीं रोकी,
सिर्फ पटाखे नहीं बंद किए,
सिर्फ टिकाना नहीं बदला…
उन्होंने इंसानियत को जिंदा रखा।
उन्होंने मोहब्बत को सबसे ऊपर रखा।
उन्होंने हमारे दिल जीत लिए।
उस रात मुझे समझ आया कि रिश्ते खून से नहीं,
दिलों से बनते हैं।
और मेरे गांव के भूमिहार भाइयों के दिल…
वाकई बहुत बड़े हैं।
धन्यवाद
दिल की कलम से
आसिफ खान
तरया पठानी टोला का एक वासी.
चमचे : भाजपा हिंदू मुस्लिम के नाम पे लड़वाती है ।
मैं : तो फिर 1947 में तो भाजपा नहीं थी तो धर्म के नाम पर भारत के दो टुकड़े किसने किये थे ?
15/06/2025
जब सारे इस्लामिक देश Egypt, Iraq, Jordan, Lebanon, Syria मिलकर इजरायल को हरा नहीं पाए थे और अब उनकी हरामी औलादों को लगता है ईरान जीत जाएगा।
मजाक थोड़े है हमारे साहब ने दूध बेचना शुरु किया अंत चारा बेचकर किया ।
06/06/2025
भाई ने सही कहा है क्या।
24/05/2025
तेजू भैया तो छुपा रुस्तम निकले । Bihar Politics
27/04/2025
Masterstroke
23/04/2025
😌😌 सबका हिसाब लिया जाएगा ।
15/04/2025
दो शेर एक साथ ।
14/04/2025
अभी जो सुप्रीम कोर्ट के जज जेबी पारदीवाला ने फैसला दिया है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अगर किसी बिल पर 3 महीने में फैसला न लें तो वह कानून लागू माना जाएगा
जब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को वेबसाइट पर अपलोड किया तब पूरा भारत यह देखकर चौंक गया कि जस्टिस जेबी पारदीवाला ने इसके लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व निर्णय को या संविधान के किसी धारा को आधार नहीं बनाया बल्कि इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के संविधान को आधार बनाकर यह फैसला दिया
न्यायिक रूप से कोई भी जज या तो भारत के किसी संवैधानिक पीठ या सुप्रीम कोर्ट के किसी पुराने निर्णय को अपना आधार बना सकता है या फिर भारत के संविधान के किसी अनुच्छेद को अपना आधार बनाकर फैसला सुना सकता है
लेकिन जज साहब ने तो हद कर दिया उन्होंने दूसरे देश के संविधान वह भी पाकिस्तान के संविधान को आधार बनाकर फैसला सुना दिया
पाकिस्तान की मीडिया में बल्ले बल्ले हो रहा है यह देखो भारत हमसे सीख ले रहा है
अब केंद्र सरकार जस्टिस जेबी पारदीवाला के इस निर्णय के खिलाफ रिव्यू पोजीशन फाइल कर रही है
वैसे सुप्रीम कोर्ट के कई अन्य जज भी पाकिस्तान के संविधान का उदाहरण देकर फैसला सुनाए जाने को बहुत आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं
इसी जज साहब ने कन्हैयालाल की हत्या के लिए नुपुर शर्मा को जिम्मेदार बताया था और नूपुर शर्मा को फटकार लगाई थी
मतलब भारत में कुणाल कमरा को अभिव्यक्त की आजादी का अधिकार है असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी को हिंदू धर्म पर कुछ बोलने का अधिकार है लेकिन नूपुर शर्मा को अधिकार नहीं है
सुप्रीमकोर्ट के जज जे.बी. पारदीवाला पूरा नाम जमशेद बुरजोर पारदीवाला
पिता - बुरजोर कवाशज़ी पारदीवाला गुजरात के वलसाड से कांग्रेस के दो बार विधायक
भारत की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस जज का चपरासी अर्दली पेशकार भी एक परीक्षा पास करके अपनी योग्यता से चपरासी बनता है वह जज खुद बिना कोई परीक्षा दिए सिर्फ इस आधार पर जज बन जाता है कि वह एक विशेष परिवार में पैदा हुआ है
और यही कोलोसियम सिस्टम भारत की न्यायपालिका को पूरी तरह से बर्बाद कर चुका है
जब तक जज भी यूपीएससी की तरह किसी प्रतियोगी परीक्षा के द्वारा अपनी काबिलियत के दम पर न्यायपालिका में नहीं आएंगे तब तक भारत की न्यायपालिका बर्बाद होती रहेगी
All India Trinamool Congress Samajwadi Party BSP INDIA Jairam Mahato JLKM\JBKSS Jairam Ramesh Rahul Gandhi Kanhaiya Kumar I Am With Pappu Yadav Mamunur Rashid मैं सभी से ये पूछना चाहता हूं कि बंगाल में हिंदुओं के साथ इतना जुल्म हो रहा आप लोग का जवान से एक उफ्फ भी नहीं निकल रहा है क्या secularism इसको ही बोलते हैं क्या।
11/04/2025
जिनकी वजह से आज़ाद भारत में तुम आज़ादी से ब्राह्मण-विरोध कर पा रहे हो,
उन्हीं ब्राह्मणों ने अंग्रेज़ों की गोलियाँ खाई थीं.
ब्राह्मणों ने जान दी ताकि तुम बोल सको
और तुमने बोलकर ब्राह्मणों को ही निशाना बना दिया!! Bhumihar Brahmin Parshuram Sena
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