Advocate Munish Raza
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22/02/2026
*⚖️ वाराणसी कोर्ट अपडेट⚖️*
*अपहरण के मामले में आरोपी को मिली जमानत*
*वाराणसी: न्याय की दहलीज पर तथ्यों और बयानों की अहमियत एक बार फिर साबित हुई है। वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपहरण के एक बहुचर्चित मामले में अभियुक्त प्रदुम उर्फ नन्दा की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने का आदेश जारी किया है।*
*🏛️ कोर्ट का फैसला और सुनवाई*
*जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत में हुई इस सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, विशेषकर पीड़िता के बयानों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया।*
📍 *मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)*
*आरोप: वादी (पिता) ने आरोप लगाया था कि 03 फरवरी 2026 को अभियुक्त उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था।*
*थाना: यह मामला वाराणसी के राजातालाब थाने में दर्ज किया गया था।*
🔍 *जमानत मिलने का मुख्य आधार: 'बयान की शक्ति'*
*इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद नदीम ने कोर्ट के सामने धारा 183 BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत दर्ज पीड़िता के बयान को पेश किया।*
*महत्वपूर्ण तथ्य: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वह "अपनी मर्जी से गई थी" और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था। कानूनन, जब पीड़िता स्वयं सहमति की बात स्वीकार करती है, तो अपहरण (Kidnapping) की धाराएं कमजोर हो जाती हैं।*
*🎓 डिफेंस टीम (Defense Legal Team)*
*वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद नदीम के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की एक मजबूत टीम ने अभियुक्त का पक्ष रखा। इस टीम में शामिल थे:*
*एडवोकेट जियाउल हक*
*एडवोकेट अब्दुल्ला खालिद*
*एडवोकेट मुनिस रजा*
*एडवोकेट तारिक सिद्दीकी*
*जमानत की शर्तें (Conditional Release)*
*न्यायालय ने जमानत तो मंजूर की, लेकिन अभियुक्त पर कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो:*
*वित्तीय सुरक्षा: ₹50,000 का निजी मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार।*
*न्यायिक उपस्थिति: अभियुक्त को ट्रायल के दौरान हर तारीख पर अदालत में पेश होना अनिवार्य है।*
*साक्ष्यों की सुरक्षा: वह गवाहों या पीड़िता को डराने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।*
*यात्रा प्रतिबंध: बिना न्यायालय की अनुमति के देश छोड़ने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।*
*दिनांक: 20 फरवरी 2026*
*यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल है जहाँ आपसी सहमति के मामलों को कानूनी पेचीदगियों में अपहरण का रूप दे दिया जाता है।*
21/02/2026
⚖️ वाराणसी कोर्ट अपडेट⚖️
अपहरण के मामले में आरोपी को मिली जमानत
वाराणसी: न्याय की दहलीज पर तथ्यों और बयानों की अहमियत एक बार फिर साबित हुई है। वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपहरण के एक बहुचर्चित मामले में अभियुक्त प्रदुम उर्फ नन्दा की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने का आदेश जारी किया है।
🏛️ कोर्ट का फैसला और सुनवाई
जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत में हुई इस सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, विशेषकर पीड़िता के बयानों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया।
📍 मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
आरोप: वादी (पिता) ने आरोप लगाया था कि 03 फरवरी 2026 को अभियुक्त उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गया था।
थाना: यह मामला वाराणसी के राजातालाब थाने में दर्ज किया गया था।
🔍 जमानत मिलने का मुख्य आधार: 'बयान की शक्ति'
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद नदीम ने कोर्ट के सामने धारा 183 BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत दर्ज पीड़िता के बयान को पेश किया।
महत्वपूर्ण तथ्य: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि वह "अपनी मर्जी से गई थी" और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था। कानूनन, जब पीड़िता स्वयं सहमति की बात स्वीकार करती है, तो अपहरण (Kidnapping) की धाराएं कमजोर हो जाती हैं।
🎓 डिफेंस टीम (Defense Legal Team)
वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद नदीम के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की एक मजबूत टीम ने अभियुक्त का पक्ष रखा। इस टीम में शामिल थे:
एडवोकेट जियाउल हक
एडवोकेट अब्दुल्ला खालिद
एडवोकेट मुनिस रजा
एडवोकेट तारिक सिद्दीकी
जमानत की शर्तें (Conditional Release)
न्यायालय ने जमानत तो मंजूर की, लेकिन अभियुक्त पर कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो:
वित्तीय सुरक्षा: ₹50,000 का निजी मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार।
न्यायिक उपस्थिति: अभियुक्त को ट्रायल के दौरान हर तारीख पर अदालत में पेश होना अनिवार्य है।
साक्ष्यों की सुरक्षा: वह गवाहों या पीड़िता को डराने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।
यात्रा प्रतिबंध: बिना न्यायालय की अनुमति के देश छोड़ने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।
दिनांक: 20 फरवरी 2026
यह फैसला उन मामलों में एक मिसाल है जहाँ आपसी सहमति के मामलों को कानूनी पेचीदगियों में अपहरण का रूप दे दिया जाता है।
22/12/2025
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14/12/2025
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