Aditya comunication
Teliyana Hanuman Phatak Varanasi 221001
09/07/2019
बहुत समय पहले की बात है , एक
राजा को उपहार में किसी ने बाज
के दो बच्चे भेंट किये ।
वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे , और
राजा ने कभी इससे प हले इतने
शानदार बाज नहीं देखे थे।
राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक
अनुभवी आदमी को नियुक्त कर
दिया।
जब कुछ महीने बीत गए
तो राजा ने बाजों को देखने का मन
बनाया , और उस जगह पहुँच गए
जहाँ उन्हें पाला जा रहा था।
राजा ने देखा कि दोनों बाज
काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से
भी शानदार लग रहे थे ।
राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे
आदमी से कहा, ” मैं इनकी उड़ान
देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो ।
“ आदमी ने
ऐसा ही किया।
इशारा मिलते ही दोनों बाज
उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज
आसमान की ऊंचाइयों को छू
रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ
गया जिससे वो उड़ा था।
ये देख ,
राजा को कुछ अजीब लगा.
“क्या बात है जहाँ एक बाज
इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये
दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”,
राजा ने सवाल किया।
” जी हुजूर ,
इस बाज के साथ शुरू से
यही समस्या है , वो इस डाल
को छोड़ता ही नहीं।”
राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज
को भी उसी तरह
उड़ना देखना चाहते थे।
अगले दिन पूरे
राज्य में ऐलान
करा दिया गया कि जो व्यक्ति इस
बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम
दिया जाएगा।
फिर क्या था , एक
से एक विद्वान् आये और बाज
को उड़ाने का प्रयास करने लगे , पर
हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज
का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस
डाल पर आकर बैठ जाता।
फिर एक
दिन कुछ अनोखा हुआ , राजा ने
देखा कि उसके दोनों बाज आसमान
में उड़ रहे हैं। उन्हें अपनी आँखों पर
यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने
को कहा जिसने ये कारनामा कर
दिखाया था। वह व्यक्ति एक
किसान था।
अगले दिन वह दरबार में
हाजिर हुआ। उसे इनाम में स्वर्ण
मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा , ” मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ , बस तुम
इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े
विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे
कर दिखाया।
“ “मालिक ! मैं तो एक
साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान
की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस वो डाल काट दी जिसपर
बैठने का बाज आदि हो चुका था,
और जब वो डाल
ही नहीं रही तो वो भी अपने
साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा। “
दोस्तों, हम सभी ऊँचा उड़ने के लिए ही बने हैं। लेकिन कई बार हम जो कर
रहे होते है उसके इतने आदि हो जाते हैं
कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की , कुछ
बड़ा करने की काबिलियत को भूल
जाते हैं।
यदि आप भी सालों से
किसी ऐसे ही काम में लगे हैं जो आपके सही potential के मुताबिक
नहीं है तो एक बार ज़रूर सोचिये
कि कहीं आपको भी उस डाल
को काटने की ज़रुरत
तो नहीं जिसपर आप बैठे हैं ?
एक बच्चे ने अपनी माँ को रोते देखा तो पापा से
पुछा माँ क्यो रोती है,
पापा ने जवाब दिया सारी औरते बिना बात के
रोती है,
बच्चा कुछ समझ ना पाया और वो बड़ा हो गया,
एक दिन उसने भगवान से पूछा कि औरते क्यो रोती है
बिना बात के,
भगवान ने जवाब दिया,
जब मै औरत को बना रहा था,तो मैने
फैसला किया कि उसे
कुछ खास
बनाना हैं,
मैने उसके कँधे मजबूत बनाये, ताकि वह
दुनियादारी का बोझ
उठा सके।
उसके बाहो को कोमल बनाया,
ताकि बच्चो को आराम
महसूस हो सके।
मैने उसे इतनी आत्मशक्ति दी, ताकि वह नये जीव
को धरती पर
ला सके,
मैने उसे साहसी बनाया, ताकि मुशकिल वक्त मे वह
चट्टान
की तरह
खड़ी रहे और अपने परिजनो का ख्याल रख सके।
मैने उसे सवेदनशील और विवेकी बनाया,
ताकि वह सबकी मदद कर सके और माफ कर सके।
मैने उसकी आखो मे आँसू दिये, ताकि अपने दुख को कम
कर
सके ।
06/09/2013
choti Si Dosti,
Anjaani Mulakaatein;
Pal Bhar Mein Khatam Hote Din,
Khayalon Mein Doobi Lambi Raatein;
Yahin Se Shuru Hota Hai Pyaar, Hai
Na..??
`
Anjaan Hai, Anjaan Hi Rahne Do
Kisi Ki Yaado Me Pal Pal Yun Hi
Marne Do
Kyoun Badnaam Karte Ho Humara
NaamLeke
Ab Toh Iss Naam Ko Benaam Hi
Rahne Do
`
Jiski Yaad Me Sare Jahan Ko Bhul
Gaye
Suna Hai Aajkal Vo Humara Naam
Tak Bhul Gaye
Kasam Khai Thi Jisne Sath Nibhane
Ki Yaaro
Aaj Wo Humari Lash Par Aana Bhul
Gaye
Wo Choti Choti Baton Pe Ruth Jana,
Wo Ruthe Huye Ko Or Bhi Satana ,
Wo Kabhi Bhi Padh Kar Na Jana,
Jo Teacher Puche To Topiyan
Pehnana,
Wo Class Mai Beth Kay Gappey
Lagana,
Wo Ek Dosre Ko Qisse Sunana,
Na Hi Wo Din Rahenge Or Na Phir
Laut
Kar Ayenge,
Na Tafreeh,
Na Wo Dost,
Na Wo Batain :-(
Agar Kuch Reh Jayega To Bus
Yaadain :-
( !!
Dedicated To All My Old & New
Frnds..
Miss you Kambakhto ;-) !!'
dil ka dard dusre ko mahsoos
karaye kaise
apne dil ka jakhm dusro ko
dhikhaye kaise
log kehte hai itne gum main
bhi kaise muskurate ho
jin ankho ki nami hi chali
gayi ho unme anshoo laye
kaise
Woh nadiyan nahi aansu
they mere, jinpar woh kashti
chalate rahe.
Manzil mile unhein yeh
chahat thi meri, isliye hum
aansu bahate rahe.
Dost Wo Nahi Jo Aap Ke Kaam
Aaye
Dost Wo Hai Jo Aapki T-Shirt
Maang Kar Le Jaye
Aur Kabhi Wapis Na Kare…
Dost Wo Bhi Nahi Jo Aapko Treat
De
Dost Wo Hai Jo Aap Ke Ghar
Aaye,
Aur Kahe, “Aaj Kya Pka Hai, Jo
Bhi Hai Jaldi Se Le Aa…”
Dost Wo Nahi Jo Call Kar Ke
Milne Aaye
Dost Wo Hai Jo Ghar Ke Saamne
Message Kare, “Kaminey Bahar
Aa…”
Dost Wo Nahi Jo Janaze Pe Aaye
Dost Wo Hai Jo Kabar Pe T-Shirt
Le Aaye Aur Kahe,
“Le Nahi Chahiye Tera Ehsaan
Chal Uth Aur Meri Dosti Wapis
Kar…”
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