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Neo Dalit Movement in eyes of born Dalit
Photo by: Rohit Kumar as initiative of PVCHR: life and struggle of Neo Dalit Movement through camera of born Dalit
01/08/2016
मातृत्व शिशु स्वास्थ्य मुद्दे पर चुनौतियां एवं आपबीती इंटरफेस
माँ एवं नवजात शिशु की मृत्यु की घटना में हर स्तर पर प्रतिबद्ध होने की आवश्यकता है, हम एक भी माँ और शिशु को मरने नही देंगे इसके लिए शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) जैसे अभियान की बहुत ही सम्वेदनशील तरीके से चलाए जाने की आवश्यकता है |
स्वास्थ्य विभाग से स्वास्थ्य संस्थानों चुनौतीपूर्ण स्थितियों, सुविधा एवं संसाधनो के अभावों, स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लापरवाही, दुर्व्यवहार एवं उपेक्षा की घटनाओं की शिकायत, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, इलाज में कर्ज लेने को बाध्य स्थितियां, को साझा किया गया |
मातृ शिशु स्वास्थ्य मुद्दे पर चुनौतियां एवं आपबीती इंटरफेस जगतगंज स्थित कामेश हट होटल में जनमित्र न्यास/मानवाधिकार जननिगरानी समिति के द्वारा आयोजित किया गया | स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित महिलाओं बच्चों की पहुंच सुनिश्चित हो, उनमें आ रहे बाधाओं की पहचान करके उन्हें दूर किया जा सके जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारणों को दूर करते हुए एनीमिया, कुपोषण एवं बच्चों में रुग्णता की दर में कमी लाया जाए, वंचित वर्ग का सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर विश्वास बढ़े | इसी उद्देश्य की अपेक्षा से संस्था द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ इंटरफेस का आयोजन किया गया |
सेवा प्राप्त करने में आ रही चुनौतियों, व्यवहारिक समस्याएँ बाधाओं को स्वास्थ्य विभाग से साझा किया गया | इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों उपस्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला महिला चिकित्सालय आदि की स्थितियों, स्वास्थ्य कर्मीयों के कमी उनके कार्यदबाव आदि को इस उद्देश्य के साथ साझा किया गया कि विभाग कमियों को पहचान कर उनमें सुधार और गुणवत्ता विकास का कार्य करें, जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सूचकांक बेहतर हो सकें |
इस मौके पर सरकार द्वारा संचालित सेवाओं के मानकीकरण के आधार “मातृत्व नवजात शिशु स्वास्थ्य टूलकिट”/ MNH toolcit के अनुसार मातृ नवजात शिशु स्वास्थ्य संस्थानों वर्गीकृत Level 1 के 33 केन्द्र, Level 2 के केन्द्र 10, Level 3 के 3 कुल 46 स्वास्थ्य केन्द्र स्थितियों का आंकलन रिपोर्ट भी साझा किया गया जो बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति में है |
इलाज के लिए कर्ज लिए परिवारों का विश्लेषणात्मक अध्ययन भी रखा गया जिसमें यह तथ्य उभरकर आया कि गरीब एवं वंचित समुदाय से सम्बध ये परिवार पहले सरकारी चिकित्सालय में इलाज के लिए गए | लेकिन उपेक्षा का शिकार होकर विवशता में ग्रामीण क्षेत्र के कस्बे बाजार के गैर पंजीकृत प्राइवेट क्लिनिक में भारी कर्ज लेकर इलाज कराया | ये प्राइवेट क्लिनिक वे हैं जिनके दक्षता का कोई भी प्रमाण उनके पास नही होता है | जब इस इलाज से भी बीमार नही ठीक हो पाया तो उनके द्वारा झाड़फूंक के लिए भी कर्ज लिया गया | अधिकांश परिवार बीमारी ठीक नही होने के कारण झाड़फूंक भी कराया गया |
यंहा तक कि सरकारी चिकित्सालय में JSSK एवं JSY के तहत प्रसव सेवा पूर्णत: निःशुल्क है लेकिन उन पर आने वाले खर्चो के लिए भी कर्ज लेना पड़ा क्योंकि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उनकी खतरे की स्थिति बताकर प्राइवेट में भेंज दिया गया | समिति द्वारा विभागीय सोशल आदित पद्धति के आधार पर किया गया जिसके अनुसार मातृ मृत्यु की इन सभी धटनाओं में डाक्टरों ने महिलाओं में खून की कमी को ही प्रमुख कारणों बताया | लेकिन गर्भवती महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड की गोली समय से मिले और वे 100 गोली खाए इसके लिए समय से प्रबन्धन उपलब्धता, खाने के तरीके पर कोई ठोस पहल और प्रयासों में भारी कमीयां हैं | सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य में शिशु एवं मातृ मृत्यु को न्यूनतम किया जाएगा तय किया गया | हाल के समय में मातृ मृत्यु, नवजात शिशु मृत्यु, के दर में काफी गिरावट आया है, लेकिन क्या संतोष कर लिए जाने का विषय हो सकता है | ऊतर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 392 है वंही भारत में 178 है |(SRS 2010-2012) AHS 2012-2013 के अनुसार वाराणसी 281 मातृ मृत्यु के आकड़ें हैं | माँ एवं नवजात शिशु की मृत्यु की घटना में हर स्तर पर प्रतिबद्ध होने की आवश्यकता है हम एक भी माँ और शिशु को मरने नही देंगे इसके लिए शून्य सहिष्णुता ( Zero Tolerance) जैसे अभियान की बहुत ही सम्वेदनशील तरीके से चलाए जाने की आवश्यकता है | एनम के वर्कलोड का अध्ययन भी रखा गया, अध्ययन में स्पष्ट रहा कि, एनम पर अधिक मानव भार का दबाव है, वे माईक्रोप्लान के दिन भी वे अपने परियोजना क्षेत्र के सभी लाभार्थी समूह को टीकाकरण एवं स्वास्थ्य जाँच सेवा नही दे पा रही हैं | जिससे गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को समय से निर्धारित सभी टीके नही लग पाता है | कोल्डचेन की दुरी, आशा बहु की नियुक्ति ना होना, एनम की कम संख्या होने के कारण कार्य की गुणवत्ता एवं सम्पूर्ण टीकाकरण बहुत ही प्रभावित है | पुआरी कला, पुआरी खुर्द, आयर, (2 वर्ष से जिलाधिकारी द्वारा गोद लिया गया) जैसे ग्रामों में मानक अनुसार आशा की नियुक्ति नही की जा सका है | पुआरी कला में 14 हजार की आबादी पर 3 आशा, पुआरी खुर्द में 5 हजार की आबादी पर 2 आशा, आयर में 6 हजार की आबादी पर 2 आशा बहु की नियुक्ति है जिनकी मांग के बावजूद भी नियुक्ति नही किया जा सका है |
बलात्कार एवं घरेलू महिला हिंसा की घटनाओं में पीड़िताओं के चिकित्सीय परिक्षण/मेडिकल किए जाने के मामले में डाक्टरों द्वारा की जा रही हीला हवाली, लापरवाही उत्पीडकों से गठजोड़ की शिकायत भी सिफारिशों के साथ की गई |
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. बी. बी. सिंह, संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक डा. प्रसून कुमार, शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय से सुपरिटेंडेट डा. अरविन्द सिंह, राजकीय महिला चिकित्सालय से डा. प्रियंका, काउंसलर सारिका चौरसिया, पंडित दीनदयाल जिला चिकित्सालय से डा. अनूप कुमार, सामाजिक चिंतक एवं मानव अधिकार कार्यकर्ता डा. मोहम्मद आरिफ समिति के निदेशक डा. लेनिन रघुवंशी प्रमुख रूप से शामिल हुए और स्वास्थ्य की समस्याओं को बड़ी गम्भीरता से सुना और समस्याओं के निदान की बात कही |
कार्यक्रम का संचालन श्रुति नागवंशी ने किया एवं स्तिथियों को धन्यवाद ज्ञापन डा0 राजीव सिंह ने दिया |
27/06/2016
मुल्क में यातना मुक्ति और अमनो-अमान के लिए एतेहासिक कबीर मठ में रोज़ा अफ़्तार और अल्लाहो अकबर के जरिये गूंजी कौमी यक्ज़हती की सदाएं मानवाधिकार जननिगरानी समिति/जनमित्र न्यास, बुनकर दस्तकार अधिकार मंच, सावित्री बा फूले महिला पंचायत, बाल पंचायत के बैनर तले एवं टाटा ट्रस्ट, डिग्निटी के सहयोग से “संयुक्तराष्ट्र द्वारा 26 जून को यातना पीड़ितो लोगों के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय दिवस” के अवसर पर आज 26 जून, 2016 को वाराणसी के ऐतिहासिक मूलगादी कबीर मठ में मनाया गया | जिसमे एक बार फिर बनारस व आस-पास के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जमीनी जनप्रतिनिधियों एवं शिक्षा जगत के लोगों के साथ ही विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओ का जमवाड़ा हुआ | जिसमे सभी सम्मानित जन ने अंतर्राष्ट्रीय यातना मुक्ति दिवस-26 जून पर राज्य सभा में लंबित यातना विरोधी बिल को पास कराये जाने की पुरजोर अपील एवं हस्ताक्षर अभियान द्वारा इसे जल्द से जल्द लागू कराये जाने के लिए प्रधानमंत्री एवं महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौपने का निश्चय किया | जिसमे काशी के गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूती प्रदान करने के लिए सर्वधर्म सम्भाव के तहत रोज़ा अफ़्तार का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया |
कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए मानवाधिकार जननिगरानी समिति के सीईओ डा0 लेनिन रघुवंशी ने कहा कि समाज में मानवाधिकार संरक्षण एवं मज़बूतीकरण के लिये पूरे विश्व में यातना मुक्ति हेतू 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय यातना मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है | यातना मुक्त समाज निर्माण हेतू सरकार को यातना विरोधी क़ानून बनाकर अधिक जवाबदेह एवं संवेदनशील बनाया जाना चाहिये | यातना विरोधी कन्वेंशन (UNCAT/PTB) क़ानून को भारत में अविलम्ब लागू कराने में सभी राजनैतिक पार्टियों को अपनी महती भूमिका अदा करना चाहिये |
वरिष्ठ इस्लामिक विद्वान एवं मुफ़्ती मौलाना हारून रशीद नक्शबंदी ने कहा कि आज जरूरत है कि कौमी यकजहती और भाईचारा के नज़रिए से यातना विरोधी बिल को अवाम के हक़ में जल्द ब जल्द लागू किया जाए | ताकि ग़रीब,मज़लूमों के साथ इंसाफ हो सके और बनारस इस तरह के पहल के लिए हमेशा आगे रहा है |
मानवाधिकार जननिगरानी समिति के महासचिव जै कुमार मिश्रा ने कहा कि भारत में बढ़ते हुए मानवाधिकार हनन की घटनाओं एवं विभिन्न हिंसात्मक गतिविधियों से प्रभावित पीड़ित लोगों को जोड़ते हुए हम लोग यह वर्ष “यातना मुक्ति एवं सामाजिक एकता व अंतर्धार्मिक सौहार्द स्थापना वर्ष” के रूप में मना रहे है |
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता डा0 मोहम्मद आरिफ़ ने कहा कि भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ के यातना विरोधी कन्वेंशन (UNCAT) पर हस्ताक्षर तो किया गया है, किन्तु “यातना विरोधी बिल” राज्य सभा में लम्बित है | जिसके कारण भारत में यातना के विभिन्न स्वरूप से रोकथाम एवं पुनर्वास का कोई मज़बूत व प्रभावशाली नीति-नियम नहीं है |जिसे राज्य सभा में लागू कराये जाने के लिए हमारा यह अभियान जारी रहेगा |
विख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता व प्रसिद्द इतिहासकार डा0 महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्व पटल पर लोकतांत्रिक मानवीय क़ानून एवं संविधान के प्रति सरकार को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यातना विरोधी कन्वेंशन (UNCAT) क़ानून को यू०एन० द्वारा सभी देशों के लिए अनिवार्य किया गया है | जिस पर भारत ने भी हस्ताक्षर किया है|लेकिन यह बिल अभी राज्य सभा में लंबित है, जिस पर हम सभी की मांग है कि उसे अविलम्ब लागू किया जाए |
समाजसेवी व वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी ने कहा कि पुलिस व संगठित यातना जैसे गंभीर मुद्दे पर यातना विरोधी बिल को पास कराये जाने हेतू सभी राजनैतिक पार्टियों से अपील की है | उन्होंने कहा कि रोज़ा अफ़्तार जैसे पवित्र कार्यक्रम से इसकी शुरुआत निश्चय ही फलदायक होगी |
प्रोफ़ेसर शाईना रिजवी ने कहा कि ज़ुल्म व ज्यादती का कोई भी तरीका इंसानी हक़ व हुकूक को पामाल करता है और आज के दौर में अकलियत तबके के लोग इसके सबसे ज्यादा शिकार है | आज मुल्क के सभी जेलों में मुस्लिमों व दलित कैदियों की तादाद सबसे ज्यादा है | ऐसे में यातना विरोधी बिल जैसे अहम विधेयक के लागू होने से जम्हूरियत व इंसाफ पसंदी को मज़बूती मिलेगी |
सुप्रसिद्ध समाज सेवी मुनीज़ा रफीक खान ने कहा कि आम जनमानस के परिपेक्ष्य में यातना विरोधी बिल को पास कराये जाने की उपयोगिता व महत्त्व को रेखांकित किया और मौजूदा समय में बढ़ते मानवाधिकार हनन की घटनाओं की रोकथाम में इस विधेयक को प्रासंगित बताया |
बौद्ध धर्म के अनुयायी अशोक आनंद ने कहा कि समाज के सभी वर्ग के बुद्धिजीवियों के संयुक्त प्रयास से एक सामूहिक हस्ताक्षर अभियान व अपील कार्यक्रम चलाया जा रहा है | इसमें हम सभी लोगो को अपनी महती भूमिका निभाने की अति आवश्यकता है जिससे ये पैगाम आम जन मानस तक पहुच सके और सरकार पर दबाव बनाया जा सके |
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता बल्लभाचार्य पाण्डेय ने जोर देते हुए कहा कि क़ानून के अंतर्गत यातना के विभिन्न खतरनाक स्वरूप को समाप्त कर मानवाधिकार संपन्न समाज का निर्माण किया जाए और इस लोकतंत्र को और मजबूत बनाया जा सके |
इस कार्यक्रम के अंतर्गत शाम को पवित्र रमज़ान माह के रोज़ा अफ़्तार कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया |मुल्क में यातना मुक्ति और अमनो-अमान के लिए एतेहासिक कबीर मठ में रोज़ा अफ़्तार का भी किया गया और कबीर की इस ऐतिहासिक प्रांगण में रोजेदारो ने नमाज अदा की अपने रोज़े खोले |
लाल बहादुर राम, सिद्दीक हसन, इदरीश अंसारी, महंत गोपाल दास, देव शरण शाश्त्री, आफ़ताब आलम, फादर आनंद, प्रोफ़ेसर महेश विक्रम, प्रोफ़ेसर शैला परवीन, सागिर, बाबुदीन, मुख़्तार, महताब, इरशाद अहमद, रहमानी, अजय सिंह, उमेश, छाया, आनंद, रोहित, अरविन्द, शिव प्रताप चौबे, क्रांति, राजेंद्र, घनश्याम विभिन्न मदरसों के शिक्षक व प्रबंधक शामिल रहे | अंत में धन्यवाद ज्ञापन मानवाधिकार जननिगरानी समिति की प्रोग्राम डायरेक्टर सुश्री शिरीन शबाना खान ने किया |
in support of of
08/06/2016
17/02/2016
इन्डो जर्मन सोसाईटी की 50वीं वर्षगाठ पर संम्पन्न हुआ दो दिवसीय कार्यक्रम
12 फरवरी, 2016 को मानवाधिकार जननिगरानी समिति व मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च बी0एच0यू0, वाराणसी के संयुक्त तत्वाधान में इंडो जर्मन सोसाइटी रेम्मसाइड जर्मनी के 50वी सालगिरह के उपलक्ष्य में मालवीय पीस सेंटर में संगोष्ठी के आयोजन का शुभारम्भ किया गया |
जिसमे इंडो जर्मन सोसाइटी की सुश्री हेलमा रिच्चा द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को जो अपने बहुत सघर्षों के बाद भी अपनी शिक्षा जारी रखे है उनकी शिक्षा जारी रखने इंडो जर्मन सोसाइटी रेम्मसाइड जर्मनी द्वारा 100 बच्चो को स्कालरशिप पिछले कई वर्षों से दिया जा रहा है | ऐसे 50 बच्चों को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया |
साथ ही सामाजिक व शिक्षा के क्षेत्र में अतुल्यनीय योगदान देने के लिए प्रोफेसर प्रियंकर उपाध्याय, डॉ0 मोहम्मद आरिफ व आचार्य मृत्युंजय त्रिपाठी को उनके सराहनीय कार्यो हेतु “जनमित्र सम्मान” से सम्मानित किया गया | इस अवसर पर हेलमा रिचा के उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें भी सम्मानित किया गया था |
इस अवसर पर इन्डो जर्मन सोसाईटी द्वारा किये गए के इतिहास पर एक स्मारिका का विमोचन किया गया, जिसे जर्मनी में जून में होने वाले कार्यक्रम में इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाईन किया जाएगा |
जर्मनी के बोन शहर में दुनिया का प्रथम महिला म्यूजियम की 37वीं वर्षगाँठ व बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की 100वीं वर्षगाँठ व इन्डो जर्मन सोसाईटी की 50वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष में इन्डो जर्मन सोसाईटी रेमसाईड की अध्यक्षा हेल्म रिचा ने म्यूजियम में शांति के प्रतीक स्वर्ग की सीढी (जो बोन की वूमेंस म्यूजियम (Frauenmuseum) में स्थापित है) का प्रतीक शांति के लिए काम करने वाले मालवीय सेंटर फार पीस रिसर्च के निदेशक व यूनेस्को चेयर डा0 प्रियंकर उपाद्ध्याय को एक सम्मान भेट किया |
13 फरवरी, 2016 को मानवाधिकार जननिगरानी समिति के संयुक्त तत्वाधान में इंडो जर्मन सोसाइटी रेम्मसाइड जर्मनी के 50वी सालगिरह के उपलक्ष्य में कामेश हट होटल, जगतगंज में संगोष्ठी का आयोजन किया गया | इस संगोष्ठी में भारत और जर्मनी के आम लोगों के रिश्ते को कैसे मजबूत बनाया जाय इस पर परिचर्चा की गयी | जिसमे इंडो जर्मन सोसाइटी की अध्यक्षा सुश्री हेलमा रिचा द्वारा वाराणसी में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को जो अपने बहुत सघर्षों के बाद भी अपनी शिक्षा जारी रखे है उनकी शिक्षा जारी रखने इन्डो जर्मन सोसाइटी रेमसाईड जर्मनी द्वारा 100 बच्चो को स्कालरशिप पिछले कई वर्षों से दिया जा रहा है | ऐसे 50 बच्चों होटल कामेश हट में सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया
रेमसाईड शहर के लार्ड मेयर बुरखर्ड मस्त वेस्ज़ (Burkhard Mast-Weisz) को बनारस के बुनकरों-दस्तकारो की ओर से श्री सिद्दीक हसन द्वारा रेमसाईड शहर के प्रतीक चिन्ह को 5 मई, 2015 को रेमसाईड शहर के सिटी हाल में डा0 लेनिन रघुवंशी ने दिया था | उस प्रतीक के रूप में मेयर ने एक प्रतीक चिन्ह व अपनी और हेलमा की फोटो उपहार स्वरुप डा0 लेनिन रघुवंशी को भेट किया |
इन्डो जर्मन सोसाईटी जर्मनी रेमसाईड क्षेत्र के राज्य संसद के सदस्य श्री स्वेन वोल्फ (Swen wolf) और इन्डो जर्मन सोसाईटी के चेयरमैन श्री हंस (Hans-Joachim Kiderlen) और जर्मन दूतावास ने भी अपना शुभ सन्देश भेजा है |
कार्यक्रम में स्कालरशिप पाने वाली बच्चियों ने सामाजिक गीत गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की इसके साथ ही कई बच्चियों ने अपना अनुभव साझा किया कि इस स्कालरशिप कार्यक्रम के सहयोग से कैसे उनके जीवन में बदलाव आया |
इस अवसर पर मानवाधिकार जननिगरानी समिति की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रुति नागवंशी और असोसिएट प्रोफ़ेसर अर्चना कौशिक की लिखी किताब “Margins To Centre Stage” हेलमा रिचा को भेट स्वरुप दिया गया |
इसके साथ ही दो दिवसीय इस संगोष्ठी का समापन किया गया | जिस पर सात सूत्रीय “बनारस घोषणा” पत्र जारी किया गया | जिसे दुनिया भर की सरकारों को प्रेषित किया जाएगा | विदित है कि इन्डो जर्मन सोसाईटी, रेमसाईड के 50वीं वर्षगाँठ पर जारी “बनारस घोषणा” पत्र ने 9 अगस्त, 2014 के बनारस घोषणा पत्र का समर्थन करते हुए हुए वाराणसी/बनारस/काशी को यूनेस्को द्वारा बहुलतावाद व समवेशीवाद संस्कृति के इतिहास वाला शहर घोषित करने की मांग की है |
17/02/2016
09/11/2015
14/10/2015
14/10/2015
Rally against torture and organised violence
04/07/2015
वाराणसी, मानवाधिकार जननिगरानी समिति/जनमित्र न्यास के बैनर तले अंतर्राष्ट्रीय यातना मुक्ति दिवस-26 जून की पूर्व संध्या पर आज 25 जून, 2015 को वाराणसी के ऐतिहासिक मूलगादी कबीर मठ में “अंतर्राष्ट्रीय यातना मुक्ति दिवस-26 जून” मनाया गया| जिसमे एक बार फिर बनारस व आस—आस के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जमीनी जनप्रतिनिधियों एवं शिक्षा जगत के लोगों के साथ ही विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओ का जमवाड़ा हुआ | जिसमे सभी सम्मानित प्रतिभागियों ने अंतर्राष्ट्रीय यातना मुक्ति दिवस-26 जून पर राज्य सभा में लंबित यातना विरोधी बिल को पास कराये जाने की पुरजोर अपील एवं हस्ताक्षर अभियान द्वारा इसे जल्द से जल्द लागू कराये जाने के लिए प्रधानमंत्री एवं महामहिम राष्ट्रपति को निम्न मांगो पर ज्ञापन सौपने का निश्चय किया :-
1-यातना पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCAT) का अनुमोदन किया जाय। 2-यातना और संगठित हिंसा के शिकार पीडि़तों का पुनर्वासन नीति बनायी जाय।
3-संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCAT) के मद्देनजर यातना पर घरेलू कानून अविलम्ब बनाया जाय।
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