YAARI Coaching Classes

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Education for all.

शिक्षा सभी के लिए l

'पढ़ेगा भारत तो बढेगा भारत'

14/02/2025

For LKG to Class 8th

Enquiry : 73889 77266

Venue : Paramanandpur Shivpur Varanasi

Run by Er. Anand sir (b. Tech, Mechanical Engineer )

Photos from YAARI Coaching Classes's post 12/02/2025

YAARI Coaching Classes Yaari kids tuition

Photos from YAARI Coaching Classes's post 27/01/2025
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Happy Republic Day 🇮🇳

26/10/2023
24/10/2023

रावण आज हसरत भरी निगाहों से देखेगा कि इतनी भीड़ में केवल मैं ही रावण हूं बाकी सब राम हैं...

अपने अंदर के रावण को जलाइये, बाहर का रावण तो हर हर साल जलता है...

दशहरा की बहुत बहुत शुभकामनायें 🙏

Photos from YAARI Coaching Classes's post 14/10/2023

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पढ़ेगा भारत, बढेगा भारत
Contact no. +91 73889 77266
परमानंदपुर शिवपुर वाराणसी
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Photos from YAARI Coaching Classes's post 11/10/2023

"Empowering Tomorrow's Innovators Today."

Photos from YAARI Coaching Classes's post 08/10/2023

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पता : परामानंदपुर शिवपुर वाराणसी
नियर : 1)दि रॉयल ग्रीन गार्डेन
2)दास मोटर ड्राइविंग स्कूल
Mobile No. 9901506022
--(Yaari Group)

02/10/2023

लाल बहादुर शास्त्री को शास्त्री की उपाधि काशी विद्यापीठ से मिली थी।
उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने ननिहाल मिर्जापुर से ही ग्रहण की।
लाल बहादुर को बचपन में सब प्यार से ‘नन्हें’ कहकर बुलाते थे।

उन्होंने खुद अपने नाम से जातिसूचक शब्द “श्रीवास्तव” हटा दिया था।
उनका विवाह गणेश प्रसाद की बेटी ललिता देवी से हुआ था।
उनकी दो बेटी तथा चार बेटे थे।
इन्होनें संस्कृत में स्नातक किया था।
भारतीय स्वाधीनता संग्राम में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी।

आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
उन्होंने ‘करो या मरो’ नारे को “मरो नहीं, मारो!” में बदलकर लोगों में क्रांति की ज्वाला फूँकी।

शास्त्री जी ने 1929 में इलाहाबाद में भारत सेवक संघ के सचिव के रूप में कार्य किया था।
लाल बहादुर शास्त्री 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
“जय जवान जय किसान” का नारा इन्होंने 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान दिया था।

इनके शासनकाल में भारत पाकिस्तान का 1965 का युद्ध हुआ था।

रूस और अमेरिका ने शास्त्री जी को ताशकंद में समझौते के लिए बुलाया था।

शास्त्री जी समझौते की सारी शर्त मानने को तैयार थे सिवाय जीती हुई जामिनों को वापस करने के।

11 जनवरी 1966 को समझौते पत्र पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटे बाद उनकी मृत्यु हो गई।

1966 में उनकी देश के प्रति निष्ठा के लिए मरणोपरांत भारत रत्न से सुशोभित किया गया।

1978 में “ललिता के आँसू” नामक पुस्तक में शास्त्री जी के मृत्यु के बारे में बताया गया है।
राजनैतिक विद्वानों का मानना है कि शास्त्री जी का कार्यकाल बहुत मुश्किल था जिसे उन्होंने बखूबी निभाया था।

शास्त्री जी गाँधीवादी विचारधारा के समर्थक थे, उन्होंने हमेशा यही कोशिश की कि खाद्य सामग्री का मूल्य न बढ़ने पाए। उन्होंने अपना सारा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया, परंतु आज तक उनके मौत के रहस्य से कोई भी पर्दा नहीं उठा पाया।

02/10/2023

गांधी जयंती, जो हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है, एक महत्वपूर्ण दिन है जो महात्मा गांधी की जयंती का प्रतीक है। गांधी जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके जीवन और सिद्धांतों ने इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी है। महात्मा गांधी, जिन्हें अक्सर भारत में राष्ट्रपिता के रूप में जाना जाता है, सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के प्रतीक थे। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में, हिन्दी में गांधी जयंती पर निबंध (Gandhi Jayanti essays in Hindi) काफी महत्वपूर्ण हैं। यह लेख हर किसी को अलग-अलग शब्द गणना में हिन्दी में गांधी जयंती पर निबंध (Gandhi Jayanti essays in Hindi) को समझने और संदर्भित करने में मदद करेगा। अलग अलग शब्द सीमाओं में गांधी जयंती पर निबंध हिन्दी में (Gandhi Jayanti essays in Hindi) नीचे देखें.

150 शब्दों में गांधी जयंती पर निबंध | Gandhi Jayanti Essay in Hindi in 150 Words
गांधी जयंती पर निबंध हिन्दी में
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के सम्मान में भारत में हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है। यह दिन अत्यधिक महत्व रखता है क्योंकि यह उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि देता है जिसने अहिंसक तरीकों से भारत को आजादी दिलाई।

महात्मा गांधी का जीवन और शिक्षाएं दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए शक्तिशाली उपकरण के रूप में सत्य, अहिंसा और सविनय अवज्ञा के सिद्धांतों का समर्थन किया। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके नेतृत्व ने इसे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक जन आंदोलन में बदल दिया।

गांधी जयंती (Gandhi Jayanti in Hindi) पर उनकी विरासत को याद करने के लिए देश भर में विभिन्न कार्यक्रम और समारोह आयोजित किए जाते हैं। स्कूल, कॉलेज और संस्थान युवा पीढ़ी को गांधीजी के जीवन और दर्शन के बारे में शिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

इसके अलावा, 2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जो गांधी के सिद्धांतों की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है। अक्सर संघर्षों से जूझती दुनिया में, शांति और सहिष्णुता का उनका संदेश सभी के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है। गांधी जयंती एक बेहतर और अधिक न्यायपूर्ण दुनिया को आकार देने में सत्य और अहिंसा की शक्ति की याद दिलाती है।

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