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06/01/2026
#मुलेठी एक अत्यंत उपयोगी और बहुप्रचलित #औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में हजारों वर्षों से किया जा रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे “यष्टिमधु” कहा गया है, जिसका अर्थ है मीठी जड़। इसकी जड़ प्राकृतिक रूप से मधुर स्वाद वाली होती है और यही भाग औषधीय दृष्टि से सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है।
मुलेठी का वैज्ञानिक नाम Glycyrrhiza glabra है। यह पौधा ठंडी और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में की जाती है, जबकि भारत के बाहर ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों में भी इसकी व्यापक खेती होती है।
✅ मुलेठी (यष्टिमधु) के प्रमुख औषधीय फायदे
1️⃣ खांसी, जुकाम और गले की खराश में लाभकारी :-
मुलेठी गले की सूजन को कम करती है, कफ को ढीला कर बाहर निकालने में मदद करती है और आवाज बैठने की समस्या में राहत देती है। सूखी और बलगम वाली दोनों प्रकार की खांसी में इसका काढ़ा या चूर्ण प्रभावी माना जाता है।
2️⃣ अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की तकलीफ में सहायक :-
इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और ब्रोंकोडाइलेटर गुण सांस की नलियों की सूजन को कम करते हैं, जिससे अस्थमा और सांस फूलने जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।
3️⃣ पाचन तंत्र को मजबूत बनाए :-
मुलेठी पेट की अंदरूनी परत को सुरक्षा प्रदान करती है और एसिडिटी, गैस, अपच, सीने में जलन व पेट दर्द जैसी समस्याओं से राहत देती है। आयुर्वेद में इसे अम्लपित्त नाशक माना गया है।
4️⃣ पेट के अल्सर में उपयोगी :-
यह अल्सर के घाव भरने में सहायक होती है और पेट में बनने वाले अत्यधिक अम्ल के प्रभाव को कम कर जलन और दर्द से राहत देती है।
5️⃣ इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक :-
मुलेठी शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है, जिससे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है।
6️⃣ लिवर को डिटॉक्स और मजबूत बनाए :-
यह लिवर की कोशिकाओं की रक्षा करती है, फैटी लिवर और लिवर की कमजोरी में सहायक मानी जाती है तथा शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है।
7️⃣ थकान, कमजोरी और तनाव में लाभकारी :-
आयुर्वेद में मुलेठी को बलवर्धक और रसायन गुणों वाला माना गया है। यह शारीरिक व मानसिक थकान को कम कर ऊर्जा प्रदान करती है।
8️⃣ त्वचा के लिए प्राकृतिक औषधि :-
इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुंहासे, दाग-धब्बे, सूजन, सनबर्न और पिग्मेंटेशन को कम करने में सहायक होते हैं।
9️⃣ महिलाओं के स्वास्थ्य में सहायक :-
सीमित मात्रा में सेवन करने पर यह हल्के हार्मोनल असंतुलन, कमजोरी और थकान में लाभ पहुंचा सकती है।
🔟 एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण :-
मुलेठी शरीर को संक्रमण से लड़ने की क्षमता देती है और कोशिकाओं को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाती है।
✅ सेवन का सही तरीका और मात्रा —
■ मुलेठी का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करें।
■ वयस्कों के लिए सुरक्षित मात्रा: 250–500 mg, दिन में 1–2 बार।
■ इसे गुनगुने पानी, दूध या शहद के साथ लिया जा सकता है।
■ खांसी या गले की समस्या में छोटा टुकड़ा चूसना लाभकारी है।
■ एसिडिटी में ठंडे दूध या पानी के साथ लेना अधिक प्रभावी माना जाता है।
■ लंबे समय तक सेवन के बीच ब्रेक देना जरूरी है।
⚠️ सावधानियां (अत्यंत आवश्यक) —
● अधिक मात्रा या लंबे समय तक सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
● हाई BP, हार्ट, किडनी रोगी और गर्भवती महिलाएं डॉक्टर/वैद्य की सलाह लें।
● 4–6 सप्ताह के सेवन के बाद 2–3 सप्ताह का अंतराल अवश्य दें।
#मुलेठी
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🌿 हड्डियों की कमजोरी और घुटनों की घिसावट का घरेलू नुस्खा
🌟 सबको पता होना चाहिए
अगर आपको हड्डियों में कमजोरी, घुटनों में चिकनाई की कमी, चलने पर घिसावट या दर्द महसूस होता है,
तो बबूल की फली का चूर्ण थोड़ा-सा शहद में मिलाकर रोज़ सुबह-शाम 1 चम्मच लेना बेहद फायदे़मंद होता है।
यह हड्डियों को मज़बूती देता है, घुटनों में चिकनाई बढ़ाता है और टूटे हिस्सों के जुड़ने में मदद करता है।
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🍯 कैसे करें इस्तेमाल?
1. बबूल की सूखी फलियों का चूर्ण लें।
2. 1 चम्मच चूर्ण में 1 चम्मच शहद मिलाएँ।
3. सुबह-शाम खाली पेट सेवन करें।
4. एक हफ्ते में असर महसूस होने लगता है।
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⚠️ सावधानियाँ
शुगर के मरीज शहद सीमित मात्रा में ही लें।
अगर घुटनों में तेज दर्द या सूजन हो तो पहले डॉक्टर की सलाह लें।
लगातार दर्द रहने पर घरेलू नुस्खे के साथ फिजियोथेरेपी भी उपयोगी है।
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