Janardan Rai Nagar Rajasthan Vidyapeeth
Pandit Janardan Rai Nagar established "Rajasthan Vidyapeeth" in 1937 to uplift the down-trodden comm Janardan Rai Nagar.
Janardan Rai Nagar Rajasthan Vidyapeeth is started in 1937 as Hindi Vidyapeeth by Pdt. Started as Night Study Centre for the Elementary, Secondary and Advanced Courses in Hindi, our national language, Rajasthan Vidyapeeth has grown into a large complex of more than 50 institutions spread over several districts of Rajasthan. In the year 1987 Ministry of Human Resource Development, Government of Ind
24/05/2026
विद्यापीठ आज के समाचार पत्रों में
23/05/2026
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23/05/2026
पीजी डिप्लोमा इन योग एज्यूकेशन का वाषिर्कोत्सव समारेाह सम्पन्न
राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय की संघटक इकाई लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के अंतर्गत संचालित पीजी डिप्लोमा इन योग एज्यूकेशन के वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। समारोह में योग, स्वास्थ्य एवं भारतीय परंपरा के महत्व पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए गए।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों को व्यक्ति विभिन्न स्तरों पर प्रबंधित कर सकता है, लेकिन स्वास्थ्य को केवल योग एवं आसनों के माध्यम से ही संतुलित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक शांति के लिए योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कोरोना महामारी के बाद पूरे विश्व में योग के प्रति जागरूकता और आकर्षण तेजी से बढ़ा है तथा योग विश्व को भारत की अमूल्य देन है।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि योग दिवस से पूर्व विद्यापीठ के तीनों परिसरों में योग गुरुओं द्वारा कार्यकर्ताओं को योग का नियमित अभ्यास कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति तनाव, चिंता, रोग और अनेक प्रकार की मानसिक समस्याओं से घिरा हुआ है, ऐसे में केवल एक योग पद्धति नहीं बल्कि समग्र योग का अभ्यास आवश्यक हो गया है।
समारोह में कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने योग को एक व्यापक विज्ञान बताते हुए कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों — श्रीमद्भागवत गीता, विज्ञान भैरव तंत्र, योग वशिष्ठ और पातंजलि योग दर्शन — में योग के विभिन्न स्वरूपों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य की प्रकृति और मानसिक अवस्था के अनुसार योग के विभिन्न प्रकार हैं — राजयोग, हठयोग, भक्तियोग, लययोग एवं कुंडलिनी योग — जो व्यक्ति के जीवन को संतुलित और सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
आयोजन सचिव डॉ. रोहित कुमावत ने बताया कि समारोह के दौरान आगामी योग दिवस की थीम “स्वास्थ्य, ज्ञान और विश्व शांति के लिए योग” विषयक पोस्टर का विमोचन किया गया तथा विद्यार्थियों को ट्रैक सूट वितरित किए गए। प्रारंभ में प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इंदू बाला आचार्य ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन योग प्रभारी डॉ. रोहित कुमावत ने दिया।
इस अवसर पर प्रो. बलिदान जैन, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. रचना राठौड़, प्रो. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. सरिता मेनारिया, डॉ. हरीश मेनारिया, डॉ. पुनीत पण्ड्या, डॉ. रेणु हिंगड़, डॉ. पल्लव पांडे, डॉ. हिम्मत सिंह चुंडावत, डॉ. सुभाष पुरोहित, डॉ. ममता कुमावत सहित कार्यकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह में योग एवं भारतीय संस्कृति के प्रति विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
22/05/2026
भारतीय ज्ञान परम्परा - प्राचीन से आधुनिक शिक्षा तक विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
राजस्थान विद्यापीठ के संघटक माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के शिक्षा संकाय द्वारा “भारतीय ज्ञान परम्परा - प्राचीन से आधुनिक शिक्षा तक” विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय शिक्षा, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर गंभीर चिंतन किया गया। प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय में आयोजित इस संगोष्ठी में कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला है।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि भारत सदैव ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म की भूमि रहा है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मबोध, अनुशासन, प्रकृति से जुड़ाव और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि गुरुकुल व्यवस्था में जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान की जाती थी, जिससे विद्यार्थी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सक्षम बन सके।
उन्होंने भारतीय वैदिक शिक्षा प्रणाली को “लाइफ लॉन्ग लर्निंग” की अवधारणा पर आधारित बताते हुए कहा कि वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, भाषा विज्ञान और दर्शन जैसे विषय अनुभव आधारित पद्धति से पढ़ाए जाते थे। उन्होंने कहा कि आज विश्व जिन अवधारणाओं को आधुनिक शोध का परिणाम मान रहा है, उनके मूल तत्व भारतीय ज्ञान परंपरा में हजारों वर्षों पूर्व विद्यमान थे।
प्रो. सारंगदेवोत ने भारतीय तर्कशास्त्र, न्याय दर्शन और पाणिनि के व्याकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के विकास में भी प्रेरणास्रोत बन रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एआई ने कार्यप्रणाली को सरल, त्वरित और प्रभावी बनाया है, लेकिन तकनीक तभी सार्थक है जब उसमें नैतिकता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का समावेश हो। भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा का आधार बनेगा।
उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 को भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास बताते हुए कहा कि इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, योग, भारतीय दर्शन और मूल्यपरक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे शिक्षा अधिक व्यवहारिक, रोजगारपरक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनेगी।
प्रारंभ में निदेशक प्रो. सुनिता मुर्डिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया that सेमीनार में राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश से 150 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल शिक्षा, एआई आधारित शिक्षण प्रणाली तथा मूल्य आधारित शिक्षा जैसे विषयों पर दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. एम पी शर्मा एवं डॉ. अंशु माथुर तथा द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. अमृता मेहता एवं डॉ. फरजाना इरफान ने भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में अतिथियों द्वारा डॉ. अर्पिता मट्ठा द्वारा लिखित पुस्तक “रसायन विज्ञान का मूल सिद्धांत” का विमोचन भी किया गया।
संगोष्ठी में प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. बलिदान जैन, प्रो. रचना राठौड़, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. सुनीता मुर्डिया, डॉ. ललित श्रीमाली, डॉ. दर्शना दवे, डॉ. अर्पिता मट्ठा, डॉ. सरोज प्रजापत, ओजस्वी सारंगदेवोत, नलिनी चुंडावत, मोनिका शांडिल्य, डॉ. भारती वर्मा, डॉ. कैलाश चंद्र चौधरी, डॉ. हरीश मेनारिया, डॉ. रेनू हिंगड़, डॉ. हिम्मत सिंह चुंडावत, डॉ. हरीश चौबीसा सहित शिक्षा एवं शोध क्षेत्र से जुड़े विषय विशेषज्ञ एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अर्पिता मट्ठा एवं ओजस्वी सारंगदेवोत ने किया, जबकि आभार डॉ. ललित कुमार श्रीमाली ने व्यक्त किया।
#भारतीय_ज्ञान_परंपरा िक्षा_नीति
21/05/2026
“कर्पूर चन्द्र कुलिश शोध संस्थान” की स्थापना
राजस्थान विद्यापीठ में पत्रकारिता, वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना को समर्पित “कर्पूर चन्द्र कुलिश शोध संस्थान” की स्थापना एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आई।
समारोह से पूर्व विद्यापीठ के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया।
प्रतापनगर स्थित परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में राजस्थान पत्रिका के प्रधान सम्पादक डॉ. गुलाब कोठारी ने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच एक सशक्त सेतु है। यदि पत्रकारिता सत्ता के साथ खड़ी दिखाई देने लगे, तो समाज की पीड़ा और वास्तविक समस्याएँ शासन तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँच पाएंगी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज की आवाज और लोकतंत्र का धर्म है तथा पाठक और समाज का विश्वास ही पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी है।
डॉ. गुलाब कोठारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से जुड़ा व्यापक सामाजिक दायित्व है। उन्होंने पत्रकारिता को संवेदनशीलता, जनहित, नैतिकता और आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम बताते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा ने मनुष्य को बुद्धि से तो जोड़ दिया है, लेकिन संवेदनाओं से दूरी बढ़ने के कारण जीवन-मूल्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में पत्रकारिता को अधिक संवेदनशील और समाजोन्मुख बनने की आवश्यकता है।
कुलपति प्रो. कर्नल (मानद) एस.एस. सारंगदेवोत ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शोध संस्थान में कर्पूर चन्द्र कुलिश के साहित्य, पत्रकारिता, विचारधारा एवं जीवन यात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, पुस्तकें तथा संस्मरणों का संग्रह रखा जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय पत्रकारिता के मूल्यों, सामाजिक सरोकारों तथा राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।
इस अवसर पर कपूर चंद्र कुलिश के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा गया कि उन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा, वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। उनकी निर्भीक लेखनी, जनहितकारी दृष्टि और मूल्यों आधारित पत्रकारिता ने समाज में नई चेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार नहीं, बल्कि विचार, संकल्प, दर्शन और समाज की चेतना की प्रभावी अभिव्यक्ति है।
कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि यह शोध संस्थान भावी पीढ़ियों के वैचारिक विकास का केंद्र बनेगा। उन्होंने कर्पूर चन्द्र कुलिश के जीवन को संघर्ष, संकल्प और निर्भीक पत्रकारिता का प्रेरक उदाहरण बताते हुए कहा कि उनकी लेखनी ने समाज में नई चेतना का संचार किया। उन्होंने लोकभाषा, ग्रामीण पत्रकारिता, भारतीय मूल्यों और शोधपरक चिंतन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में कर्पूर चन्द्र कुलिश की जीवन यात्रा पर आधारित संस्मरण डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया तथा छात्राओं द्वारा घूमर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। संचालन डॉ. हरीश चौबीसा एवं डॉ. सिद्धिमा शर्मा ने किया, जबकि आभार डॉ. तरूण श्रीमाली ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर जिला कलक्टर डॉ. गौरव अग्रवाल, निहार कोठारी, सिद्धार्थ कोठारी, कोमल कोठारी, डॉ. आनंद गुप्ता, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, डॉ. विपिन माथुर, प्रो. जीएम मेहता, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, प्रो. युवराज सिंह राठौड़, प्रताप भंडारी, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, कांग्रेस नेता पंकज शर्मा, समाजसेवी हरीश राजानी, भंवर सेठ, कवि अजातशत्रु, राजेश अग्रवाल, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. मलय पानेरी, प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, प्रो. कला मुणेत, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. एसबी नागर, प्रो. धीरज प्रकाश जोशी, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो. बलिदान जैन, प्रो. अमी राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, प्रो. रचना राठौड़, डॉ. हिना खान, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. लिली जैन, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. सपना श्रीमाली सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर, कार्यकर्ता एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
16/05/2026
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13/05/2026
विद्यापीठ के विधि महाविद्यालय द्वारा ग्रामीण विधिक सहायता शिविर का आयोजन
राजस्थान विद्यापीठक की संघटक इकाई विधि विभाग द्वारा साकरोदा सेंटर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए विधिक सहायता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाना एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति ग्रामीण महिलाओं को सजग बनाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने सहभागिता करते हुए साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी एवं डिजिटल सतर्कता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
शिविर का शुभारंभ कुलाधिपति व कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, प्राचार्य डॉ. कला मुणेत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र जैन, एडवोकेट लोकेश गुर्जर महासचिव, एडवोकेट महेंद्र मेनारिया उपाध्यक्ष एवं डॉ. मीता चौधरी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उत्कृष्ट विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता एवं सतर्कता है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या पासवर्ड साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध लिंक या वेबसाइट पर अपनी निजी जानकारी अपलोड करने से बचें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति को साइबर सुरक्षा की मूलभूत जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने विधि विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए कहा कि साइबर ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया फ्रॉड एवं ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से समाज तक पहुंचाना एक सराहनीय प्रयास है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को आत्मरक्षा के प्रति भी सजग बनाते हैं।
कुलाधिपति व कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, ऐसे में साइबर सुरक्षा की जानकारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ डिजिटल रूप से जागरूक बनाना भी जरूरी है ताकि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या भ्रमित करने वाली गतिविधियों का शिकार न हों। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विधि विभाग द्वारा आयोजित यह शिविर सामाजिक दायित्व, कानूनी शिक्षा एवं जनजागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र जैन ने वर्तमान में हो रहे साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों से ग्रामीण महिलाओं को अवगत कराया तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपाय भी बताए।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ. कला मुणेत ने बताया कि विधि विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया धोखाधड़ी एवं डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रित्वि धाकड़ ने किया, जबकि आभार डॉ. प्रतीक जांगीण द्वारा व्यक्त किया गया।
13/05/2026
डिजिटल मार्केटिंग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ की संघटक इकाई डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा “डिजिटल मार्केटिंग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल मार्केटिंग की आधुनिक तकनीकों, व्यावहारिक उपयोग, बढ़ते महत्व तथा रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचय कराना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापार, शिक्षा एवं सेवाओं के विस्तार की नवीनतम प्रक्रियाओं को समझा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग की निदेशक प्रो. मंजू माण्डोत के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय डिजिटल तकनीकों का युग है, जहाँ डिजिटल मार्केटिंग प्रत्येक क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं सेवा क्षेत्रों में डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल विकसित करने तथा डिजिटल माध्यमों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रवि वाघेला ने विद्यार्थियों को डिजिटल मार्केटिंग की कार्यप्रणाली को सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों दृष्टिकोणों से विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने सोशल मीडिया मार्केटिंग, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO), कंटेंट मार्केटिंग, ई-मेल मार्केटिंग, ऑनलाइन ब्रांड प्रमोशन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मार्केटिंग तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। लाइव डेमो के माध्यम से उन्होंने बताया कि किस प्रकार डिजिटल मार्केटिंग छोटे व्यवसायों से लेकर बड़े उद्योगों तक को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में डिजिटल मार्केटिंग केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि व्यवसायिक सफलता का एक प्रभावी और अनिवार्य उपकरण बन चुकी है। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं की मांग और अधिक बढ़ेगी, जिससे इस क्षेत्र में कुशल युवाओं के लिए रोजगार की अपार संभावनाएँ उपलब्ध होंगी।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने डिजिटल विज्ञापन, सोशल मीडिया अभियान निर्माण, ग्राहक व्यवहार विश्लेषण एवं ऑनलाइन प्रमोशन से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया। विद्यार्थियों को डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े करियर विकल्पों, फ्रीलांसिंग, स्टार्टअप अवसरों तथा ऑनलाइन उद्यमिता के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर विभाग के संकाय सदस्य डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. भारत सिंह देवड़ा, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. प्रदीप सिंह शक्तावत, डॉ. भरत सुखवाल, डॉ. दिलीप चौधरी, श्री मुकेश नाथ, श्री दुर्गाशंकर, श्री त्रिभुवन सिंह बमनिया, मानसी नागर, मनोज यादव एवं चिराग दवे उपस्थित रहे। सभी संकाय सदस्यों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए डिजिटल शिक्षा एवं नवाचार के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं भविष्य उन्मुख सिद्ध हुई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभाग के सभी संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय योगदान दिया। अंत में आयोजकों द्वारा मुख्य वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार की तकनीकी एवं कौशल आधारित कार्यशालाओं के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
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