Tree Foundation

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Tree Foundation is an NGO focused on planting trees and promoting environmental awareness for a greener, healthier future.

18/05/2026

गरुड़ वृक्ष, एक ऐसा पेड़ है जिसके बारे में लोकमान्यता है कि यह सांपों को दूर रखता है और इसके फल में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह पेड़ भारत के कई राज्यों में मिलता है, खासकर ऊँचाई वाले और पहाड़ी इलाकों में। गरुड़ वृक्ष को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है— जैसे गरुड़ संजीवनी, खडशिंगी, नागदौन और कई जगह इसे “सर्परक्षक वृक्ष” भी कहा जाता है।

🔹️ गरुड़ वृक्ष के बारे में कुछ मुख्य बातें —

✅️ सांपों को दूर भगाता है :-
ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में यह मान्यता बहुत प्रचलित है कि गरुड़ वृक्ष के पास सांप नहीं भटकते। इसके लंबे, कठोर और सूखे फलों को घर के दरवाजे पर टांगने से सांप घर में प्रवेश नहीं करते। कहा जाता है कि इसकी लकड़ी में एक विशिष्ट गंध या तत्व होता है, जिसका सांपों पर दमनकारी प्रभाव पड़ता है। यदि यह लकड़ी किसी सांप के पास रख दी जाए, तो सांप सुस्त हो जाता है और अपनी गति खो देता है।

✅️ सांप के काटने का इलाज :-
आदिवासी और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस वृक्ष का उपयोग सांप के विष को शांत करने के लिए किया जाता रहा है। इसकी पत्तियों और छाल से तैयार किए गए काढ़े का उपयोग पुराने समय में विषाक्तता कम करने के लिए किया जाता था। हालांकि, आधुनिक विज्ञान इसकी पुष्टि नहीं करता, लेकिन स्थानीय मान्यता आज भी जीवित है।

✅️ घाव भरने में मदद :-
गरुड़ वृक्ष की पत्तियों में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं। ग्रामीण लोग इसके पत्तों का लेप बनाकर छोटे-मोटे घावों, कटने-छिलने या फोड़े-फुंसी पर लगाते हैं। यह घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करने में सहायक माना जाता है।

✅️ अन्य बीमारियों का इलाज :-
इसके फल और बीज का उपयोग कई पारंपरिक उपचारों में किया जाता है। माना जाता है कि यह हीट स्ट्रोक में आराम देता है, शरीर की गर्मी कम करता है, पेशाब संबंधी समस्याओं (डिसुरिया) में राहत देता है, अनियमित मासिक धर्म को संतुलित करता है और पीलिया के उपचार में सहायक होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे शरीर को ठंडक प्रदान करने वाले पौधे के रूप में भी जाना जाता है।

🔹️ कहाँ पाए जाते है गरुड़ वृक्ष —

गरुड़ वृक्ष (Radermachera xylocarpa) भारत के मध्य और दक्षिणी राज्यों के घने जंगलों में पाया जाता है। विशेष रूप से यह मिलता है,

● तमिलनाडु
● मध्यप्रदेश
● गुजरात
● राजस्थान
● हिमाचल प्रदेश

ये वृक्ष अधिकतर पहाड़ी, पथरीली और कम उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में उगते हैं। ये प्राकृतिक रूप से उगने वाले, सदाबहार और बहुत सहनशील पेड़ होते हैं।

🔹️ विलुप्त होने के कगार पर है गरुड़ वृक्ष —

अत्यधिक दोहन, अनियंत्रित कटाई, इसके औषधीय फलों की अधिक मांग और जंगलों के निरंतर घटते क्षेत्र के कारण यह वृक्ष अब दुर्लभ श्रेणी में पहुँच चुका है। प्राकृतिक रूप से इसकी संख्या तेजी से घट रही है। यदि इसे संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह पेड़ बहुत कम दिखाई देगा। वन विभाग कई जगहों पर इसके संरक्षण और पुनर्संवर्धन की कोशिश कर रहा है, लेकिन जनभागीदारी भी ज़रूरी है।

🔹️ ध्यान दें —

गरुड़ वृक्ष के सभी औषधीय लाभों की वैज्ञानिक पुष्टि अभी तक पूरी तरह नहीं हुई है। यह जानकारी पारंपरिक उपयोग और लोकमान्यता पर आधारित है।

18/05/2026

07/05/2026

हड़जोड़ (Cissus quadrangularis) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे आयुर्वेद में हड्डियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह फ्रैक्चर के बाद हड्डियों को जल्दी जोड़ने और उन्हें मजबूत बनाने में सहायक होता है। साथ ही, यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है, पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और गैस व अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है।

इसके अलावा हड़जोड़ इम्युनिटी बढ़ाने और वजन को संतुलित रखने में भी उपयोगी माना जाता है। सही मात्रा में इसका सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। ध्यान दें — गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक वैद्य से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

#हड़जोड़

04/05/2026

पान (Betel Leaf) एक बारहमासी औषधीय बेल है, जो अपने धार्मिक महत्व और स्वास्थ्य लाभों के कारण भारतीय घरों में खास स्थान रखती है। इसके दिल के आकार वाले पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सांस संबंधी समस्याओं को कम करने, जोड़ों के दर्द में राहत देने और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक माने जाते हैं, साथ ही पान पूजा-अर्चना में भी शुभ माना जाता है।

✅️ गमले में पान उगाने का सही तरीका —
पान लगाने के लिए वसंत और बरसात का मौसम सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय मिट्टी में नमी और गर्मी का संतुलन पौधे की तेज़ वृद्धि में मदद करता है। गमले के लिए 12–15 इंच गहराई वाला चौड़ा गमला चुनें, जिसमें जल-निकासी के छेद हों। मिट्टी तैयार करने के लिए —

● 50% बगीचे की मिट्टी

● 30% गोबर की खाद / वर्मीकम्पोस्ट

● 20% रेत मिलाएँ।

बेल को कटिंग या तैयार पौधे से लगाया जा सकता है। कटिंग में 4–5 गांठें होनी चाहिए और इसे मिट्टी में लगभग 2–3 इंच गहराई तक रोपें। शुरुआत में इसे छायादार जगह पर रखें और रोज़ हल्का पानी दें।

✅️ पान के पौधे की देखभाल का सही तरीका जाने —

■ पान को हमेशा अप्रत्यक्ष धूप में रखें, सीधी धूप से बचाएँ। पान की पत्तियाँ नाजुक होती हैं, इसलिए तेज धूप में रखने से वे जल सकती हैं और उनकी ग्रोथ रुक सकती है।

■ मिट्टी हल्की नमी वाली रखें लेकिन ओवर-वॉटरिंग से बचें। ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं, इसलिए तभी पानी दें जब मिट्टी हल्की सूखी लगे।

■ बेल को सहारा देने के लिए लकड़ी की छड़ी या जाली लगाएँ। इससे बेल सही दिशा में बढ़ती है और पत्तियाँ भी अच्छी क्वालिटी की मिलती हैं।

■ पत्तियों पर हर 15 दिन में पानी का छिड़काव करें ताकि वे साफ, हरी और चमकदार बनी रहें।

■ हर महीने गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें और समय-समय पर मिट्टी की गुड़ाई करें। इससे पौधे को पोषण मिलता है और जड़ों तक हवा पहुंचती है।

■ कीटों से बचाने के लिए नीम की खली का घोल महीने में एक बार दें। इससे कीट और फंगस से सुरक्षा मिलती है।

■ सर्दियों में बेल को घर के अंदर रखें ताकि ठंडी हवा और पाले से नुकसान न हो।

■ हर 2–3 साल में गमला बदलें और बेल को घना रखने के लिए हल्की प्रूनिंग करें, इससे नई ग्रोथ तेजी से आती है।

■ समय-समय पर सूखी या पीली पत्तियों को हटा दें, इससे पौधा स्वस्थ और साफ-सुथरा बना रहता है।

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26/04/2026
25/04/2026

तुलसी, एक ऐसा पौधा हैं जो हर भारतीय घरों में पूजा जाता हैं और इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। गर्मियों में जब तापमान अधिक होता हैं, तब तुलसी के पौधे को सूखने से बचाने के लिए कुछ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं।

🔷️ तुलसी के पौधे की गर्मियों में देखभाल :--

✅ तेज धूप से बचाए :
तुलसी के पौधे को सीधी धूप में रखने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पत्तियाँ झुलस सकती हैं। इसे सुबह की हल्की धूप में रखें और दोपहर की तेज धूप से बचाए। आप चाहे तो ग्रीन नेट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

✅️ नियमित पानी दें :
गर्मियों में तुलसी को रोजाना सुबह और शाम पानी दें, लेकिन पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। गमले के नीचे छेद होने चाहिए ताकि पानी आसानी से निकल सके।

✅️ मिट्टी की गुड़ाई करें :
गर्मियों में मिट्टी की हल्की गुड़ाई करने से पौधे को फायदा होता हैं, इसे पौधे की जड़ों में वायु का संचार बना रहता हैं।

✅️ मल्चिंग करें :
पौधे की मिट्टी की मल्चिंग (पत्तों या सूखी घास से मिट्टी की परत को ढ़कना) करें, इससे मिट्टी की नमी बनी रहती हैं और पौधा सूखने से बचा रहता हैं।

✅️ प्राकृतिक खाद डालें :
तुलसी के पौधे को हरा-भरा रखने के लिए प्राकृतिक खाद का उपयोग करें, जैसे कि गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट, चायपत्ती की खाद या छाछ। पौधे में केमिकल वाली खाद डालने से बचें।

✅️ कीट-नियंत्रण :
गर्मियों में तुलसी के पौधे पर अक्सर कीट-फंगस का अटैक देखने को मिलता हैं, इससे बचाव के लिए हल्दी, नीम का पानी या फिटकरी का उपयोग कर सकते हैं।

इन सुझावों का पालन करके आप तुलसी के पौधे को गर्मियों में भी हरा-भरा रख सकते हैं।

#तुलसी

24/04/2026

शतावरी एक अत्यंत उपयोगी और शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसे “जड़ी-बूटियों की रानी” भी कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से पोषण देकर उसे पुनर्जीवित करती है और दीर्घकालीन स्वास्थ्य प्रदान करती है।

यह एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिजों से भरपूर होती है, जो शरीर की शक्ति बढ़ाने, हार्मोन संतुलन बनाए रखने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक होती है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी मानी जाती है।

✅️ शतावरी के 7 अद्भुत औषधीय फायदे —

1️⃣ महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए वरदान :-
शतावरी महिलाओं के हार्मोन संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। यह मासिक धर्म की अनियमितता, दर्द, कमजोरी और थकान में राहत देती है। साथ ही प्रसव के बाद शरीर को पुनः शक्ति देने और स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की मात्रा बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।

2️⃣ पुरुषों में ताकत और ऊर्जा बढ़ाए :-
यह पुरुषों में शारीरिक कमजोरी को दूर करती है, स्टैमिना बढ़ाती है और मानसिक तनाव व थकान को कम करने में मदद करती है। नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।

3️⃣ इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक :-
शतावरी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद करती है।

4️⃣ पाचन तंत्र को मजबूत बनाए :-
यह गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देती है। आंतों को ठंडक पहुंचाकर पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है और भूख बढ़ाने में सहायक होती है।

5️⃣ शरीर को ठंडक और संतुलन प्रदान करें :-
इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करती है। यह मूत्र संबंधी जलन और डिहाइड्रेशन से बचाव में सहायक है।

6️⃣ त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद :-
शतावरी त्वचा को अंदर से पोषण देती है, जिससे त्वचा में निखार आता है। यह झुर्रियाँ कम करने और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में भी मदद करती है।

7️⃣ मानसिक तनाव और अनिद्रा में लाभकारी :-
शतावरी दिमाग को शांत करती है, जिससे तनाव, घबराहट और बेचैनी कम होती है। यह नींद की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करती है।

✅️ शतावरी का सेवन करने का तरीका —

■ शतावरी चूर्ण
आधा से एक चम्मच शतावरी चूर्ण गुनगुने दूध या पानी के साथ दिन में 1–2 बार लिया जा सकता है।

■ शतावरी काढ़ा
एक चम्मच शतावरी चूर्ण या जड़ को 1 कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो छानकर सुबह खाली पेट सेवन करें।

✅️ सावधानियाँ —
शतावरी का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में करें। अधिक मात्रा लेने से पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। गर्भावस्था, स्तनपान या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में सेवन से पहले योग्य वैद्य की सलाह अवश्य लें।

🌿 नियमित और सही मात्रा में शतावरी का सेवन करने से शरीर स्वस्थ, ऊर्जावान और संतुलित बना रहता है।

#शतावरी

22/04/2026

अमलतास का फूल जब झाड़ पर दिखाई दे तो मान लीजिए ६० दिनों के बाद बारिश होगी, इसे बारिश का "नेचर इंडीकेटर" भी कहा जाता है। इस साल यह जल्दी फूला है, अब लगभग २८ मई के बाद बारिश होगी। इस पेड़ को शॉवर ऑफ फॉरेस्ट भी कहा जाता है और इसका अनुमान सटीक होता है।
#अमलतास

17/04/2026

पान (Betel Leaf) एक बारहमासी औषधीय बेल है, जो अपने धार्मिक महत्व और स्वास्थ्य लाभों के कारण भारतीय घरों में विशेष स्थान रखती है। इसके दिल के आकार वाले पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सांस संबंधी समस्याओं में राहत देने, जोड़ों के दर्द को कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा पान को पूजा-पाठ में भी इस्तेमाल किया जाता है।

✅️ गमले में पान उगाने का सही तरीका —
पान लगाने के लिए वसंत और बरसात का मौसम सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय मिट्टी में नमी और गर्मी का संतुलन पौधे की तेज़ वृद्धि में मदद करता है। इसे लगाने के लिए 12–15 इंच गहराई वाला चौड़ा गमला चुनें, जिसमें जल-निकासी छेद हों।

मिट्टी तैयार करने के लिए —
● 50% गार्डन की मिट्टी
● 30% गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट
● 20% रेत (बालू)

पान की बेल को कटिंग या तैयार पौधे से लगाया जा सकता है। कटिंग में 4–5 गांठें होनी चाहिए और इसे मिट्टी में लगभग 2–3 इंच गहराई तक रोपें। शुरुआती दिनों में इसे छायादार जगह पर रखें और रोज़ हल्का पानी दें, जिससे पौधा जल्दी जड़ पकड़ ले।

✅️ पान के पौधे की देखभाल का आसान तरीका —

■ पान को हमेशा इनडायरेक्ट सनलाइट में रखें, सीधी धूप से बचाएँ।

■ मिट्टी हल्की नमी वाली रखें लेकिन ओवर-वॉटरिंग से बचें।

■ बेल को सहारा देने के लिए लकड़ी की छड़ी या जाली लगाएँ।

■ पत्तियों पर हर 15 दिन में पानी का छिड़काव करें ताकि वे चमकदार रहें।

■ हर महीने गोबर खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें और समय-समय पर मिट्टी की गुड़ाई करें।

■ कीटों से बचाने के लिए नीम की खली का घोल महीने में एक बार दें।

■ सर्दियों में बेल को घर के अंदर रखें ताकि ठंडी हवा से नुकसान न हो।

■ हर 2–3 साल में गमला बदलें और बेल को घना रखने के लिए हल्की प्रूनिंग करें।

✨ अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो पोस्ट को लाइक करें और हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें ताकि आप रोजाना ऐसे ही उपयोगी पौधों और गार्डनिंग टिप्स की जानकारी पा सकें, धन्यवाद 🌱

16/04/2026

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