We are running movement for make Awareness. Card holder authorized for RTI Awareness. Solution of Indian corrupted administration.
1) राज्य सम्प्रदाय , जाति , धर्म , लिंग एवं रूप - . रंग तथा क्षेत्र का भेदभाव किये वगैर सभी के प्रति समान व्यवहार करेगा तथा इसका उल्लंघन करने वाले विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्व कठोर कार्यवाही की जायेगी .
2) सामाजिक चुनौतियों का सामाजिक स्तर पर हल ढूंढा जायेगा . इसे अनिवार्यतः कानून एवं व्यवस्था का प्रश्न नहीं बनाया जायेगा . राज्य की पहल को माफियाओं की विकृत पहल द्वारा किसी भी प्रका
र की छेड़ - छाड़ की इजाजत नहीं होगी तथा कानून का राज स्थापित करने का हर संभव प्रयास होगा .
3) देश की समाज व्यवस्था के आमूलचूल परिवर्तन के लिए राजसत्ता का उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्व है . वास्तव में राजसत्ता का उपयोग राष्ट्र की सेवा के लिए हो , न कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा की पूर्ति हेतु . वास्तव में राजनीति जीविका का साधन नहीं होना चाहिए , बल्कि राष्ट्र सेवा का उपकरण मात्र . दरअसल इसीलिए युनानियों ने राजनीति को आदर एवं सम्मान की दृष्टि से देखा था लेकिन हमारे देश में वर्तमान समय में पदलोलुप , अवसरवादी , महाभ्रष्ट , बिकाऊ एवं नग्न स्वार्थी नेताओं के कारण राजनीति घृणा की दृष्टि से देखी जाती है तथा उपहास का पात्र हो गयी है . इसी का परिणाम है कि जीवन - मूल्यों एवं आदर्शों के प्रतिसमर्पित व्यक्ति राजनीति को गन्दा , तिरस्कृत एवं घृणित समझ कर उसमें भाग लेने का साहस नहीं जुटा पाते .
4) हर किस्म की साम्प्रदायिकता , धार्मिक संकीर्णता , धर्मान्धता एवं कठमुल्लापन का कठोरता से दमन
5) 2005 में भारत में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल नामक एक संस्था द्वारा किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि 62 % से अधिक भारतवासियों को सरकारी कार्यालयों में अपना काम करवाने के लिये रिश्वत या ऊँचे दर्ज़े के प्रभाव का प्रयोग करना पड़ा . वर्ष 2008 में पेश की गयी इसी संस्था की रिपोर्ट ने बताया है कि भारत में लगभग 20 करोड़ की रिश्वत अलग - अलग लोकसेवकों को ( जिसमें न्यायिक सेवा के लोग भी शामिल हैं ) दी जाती है . उन्हीं का यह निष्कर्ष है कि भारत में पुलिस और कर एकत्र करने वाले विभागों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है . आज यह कटु सत्य है कि किसी भी शहर के नगर निगम में रिश्वत दिये बगैर कोई मकान बनाने की अनुमति नहीं मिलती . इसी प्रकार सामान्य व्यक्ति भी यह मानकर चलता है कि किसी भी सरकारी महकमे में पैसा दिये बगैर गाड़ी नहीं चलती .
6) राजनीतिक पार्टियों का मूल उद्देश्य सत्ता पर काबिज रहना है . इन्होंने युक्ति निकाली है कि गरीब को राहत देने के नाम पर अपने समर्थकों की टोली खड़ी कर लो . कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए भारी भरकम नौकरशाही स्थापित की जा रही है . सरकारी विद्यालयों एवं अस्पतालों का बेहाल सर्वविदित है . सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 40 प्रतिशत माल का रिसाव हो रहा है . मनरेगा के मार्फत् निकम्मों की टोली खड़ी की जा रही है . 100 रुपये पाने के लिये उन्हें दूसरे उत्पादक रोजगार छोड़ने पड़ रहे हैं . अत : भ्रटाचार और असमानता की समस्याओं को रोकने में हम असफल हैं . यही हमारी महाशक्ति बनने में रोड़ा है .
7) जनता के प्रमुख कार्यों को पूरा करने एवं शिकायतों पर कार्यवाही करने के लिए समय सीमा निर्धारित हो. लोकसेवकों द्वारा इसे पूरा न करने पर वे दंड के भागी बने.
8) लोकशाही व्यवस्था में जादा से जादा वोट लेनेवाला विजयी घोषित किया जाता है . भारत में चुनाव में वोट डालने वालों की औसत 50 फी सदी है . यह अनुभव है कि , 15 प्रतिशत वोट मिलनेवाला विजयी घोषित किया जाता है . यह 15 प्रतिशत लोगों का लाडला ( या लाडली ) 100 प्रतिशत वोटरों की पसंद माना जाता है . उसे जनता का प्रतिनिधी माना जाता है . मैं लोकतंत्र का यह अपमान समझता हूँ . 100 प्रतिशत वोट ले के जीतना नामुमकीन है , यह मैं मानता हूँ . मगर जैसे विद्यार्थी को परिक्षा उत्तीर्ण होने के लिये 35 से लेकर 50 प्रतिशत तक का बंधन होता है वैसाही बंधन चुनाव जीतने के लिये भी होना चाहिये . 50 प्रतिशत मर्यादा अच्छी होगी . जनताने इसपर गौर कर के निर्णय लेना चाहिये . जो भी निर्णय होगा उस के लिये 100 प्रतिशत वोटिंग होना जरुरी है . इस लिये जनता के लिये वोटिंग अनिवार्य करना होगा . इस के साथ यदि कोई वोटर सोचता है कि चुनाव लड़नेवालो में कोई भी प्रत्याशी लायक नही है तो उसे " कोई लायक नही " यह कहने का अधिकार होना चाहिये . प्रत्याशिओं की यादी ( लिस्ट ) में इस नाम का यह प्रत्याशी शासनने जोड़ना चाहिये . यदी इस प्रत्याशी को बहुमत मिलता है तो बाकी सभी प्रत्याशी को 6 साल तक कोईभी चुनाव लढ़ने के लिये परवानगी ( परमिशन ) नही होनी चाहिये . याने बाकी सब प्रत्याशी 6 साल तक चुनाव में शामिल नही होंगे .
9) आर टी आई, 2005 के अंतर्गत वैधानिक सूचना
10) अगर सरकारी तंत्र हमरी कमप्लेन करने के बाद भी कोई कडी कार्यवाही नही करती है तो हम उस मुद्दे को न्यायलय तक ले जा कर उस पर न्याय प्राप्त करने के लिये बाधय है.