SIWAN

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IT'S JUST TO JOIN THE PEOPLES LIVING IN SIWAN DISTRICT Currently it is not located as border district of Bihar. It is now dominated by Yadavs and Rajputs.

Siwan, situated in the western part of the State, was originally a sub-division of Saran District, which in ancient days formed a part of Kosala Kingdom.[3] Siwan became a fully-fledged district when it was split from Saran in 1976.[4]

Siwan derived its name from "Shiva Man", a Bandh Raja whose heirs ruled this area till Babar’s arrival. Maharajganj, which is another subdivision of Siwan district

16/06/2021

एक बार फिर आप सबों से विनम्र आग्रह 🙏

● कोरोना के पहले और दूसरे लहर में हम सबने कई लोगों को खोया है. कई बच्चे अनाथ हो गए तो कई ने अपने पिता, मां, भाई, बहन, पति या पत्नी को खोया। कोरोना की भयावहता क्या है, यह वही बता सकते है, जिसने किसी अपने को खोया है।

● आग्रह है कि आप बिना मास्क के बाजार में न निकलें। घर से निकलते समय मास्क व सेनेटाइजर लेकर बाहर निकले। कोरोना वायरस (Covid-19) एक खतरनाक बीमारी है, जिसका परहेज ही बचाव है। ऐसे में सिर्फ आपको जागरूक होने की नहीं बल्कि अपने परिजनों और समाज के हर तबके को जागरूक करने की जरूरत है।

● कोरोना का वायरस लगातार रूप बदल रहा है। समाज के वरीय लोगों फिर युवाओं के बाद अब बच्चों को संक्रमित करने की बात कही जा रही है। ऐसे में इससे सावधान रहने की जरूरत है और टीका लेकर इससे बचा जा सकता है।

● यह भी आग्रह है कि जिन्होंने वैक्सिन ले लिया है वे अपने परिजनों और आस पड़ोस के लोगों को वैक्सिन लेने के लिए प्रेरित करें। यह भी कि जिन्होंने अबतक वैक्सिन नही लिया है, वे जरूर वैक्सिन लें ताकि अपने साथ परिजनों, बच्चों और समाज के हर तबके को सुरक्षित रखा जा सकें।
एक बार फिर आप सबों से विनम्र आग्रह 🙏

● कोरोना के पहले और दूसरे लहर में हम सबने कई लोगों को खोया है. कई बच्चे अनाथ हो गए तो कई ने अपने पिता, मां, भाई, बहन, पति या पत्नी को खोया। कोरोना की भयावहता क्या है, यह वही बता सकते है, जिसने किसी अपने को खोया है।

● आग्रह है कि आप बिना मास्क के बाजार में न निकलें। घर से निकलते समय मास्क व सेनेटाइजर लेकर बाहर निकले। कोरोना वायरस (Covid-19) एक खतरनाक बीमारी है, जिसका परहेज ही बचाव है। ऐसे में सिर्फ आपको जागरूक होने की नहीं बल्कि अपने परिजनों और समाज के हर तबके को जागरूक करने की जरूरत है।

● कोरोना का वायरस लगातार रूप बदल रहा है। समाज के वरीय लोगों फिर युवाओं के बाद अब बच्चों को संक्रमित करने की बात कही जा रही है। ऐसे में इससे सावधान रहने की जरूरत है और टीका लेकर इससे बचा जा सकता है।

● यह भी आग्रह है कि जिन्होंने वैक्सिन ले लिया है वे अपने परिजनों और आस पड़ोस के लोगों को वैक्सिन लेने के लिए प्रेरित करें। यह भी कि जिन्होंने अबतक वैक्सिन नही लिया है, वे जरूर वैक्सिन लें ताकि अपने साथ परिजनों, बच्चों और समाज के हर तबके को सुरक्षित रखा जा सकें।
राजेश सिंह

18/04/2020

स्विट्जरलैंड और इटली के बॉर्डर पर स्थित पर भारत के #तिरंगे की चमक बिखेर कर बनाया गया मिलकर कोरोना से लड़ने का प्रतीक....पूरे विश्व को इस महामारी से निपटने के लिए दवाएँ देकर भारत ने #वसुधैव_कुटुम्बकम् की अपनी सदियों पुरानी परम्परा को पुनः प्रतिष्ठित किया है ।

कोरोना वाइरस के खिलाफ जंग में भारतीय योगदान के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए स्विटजरलैंड ने अपने विश्व प्रसिध्द आल्प्स पर्वत की समूची मेटरहोर्न पहाड़ी को भारतीय तिरंगे से प्रकाशित कर दिया है...ऐसा लगता है जैसे पूरे पहाड़ को तिरंगे से रंग दिया हो... जय हो !

िन्द

Photos 30/03/2018
Photos 27/03/2018

सिवान में अपराधियों ने दावा दुकानदार को मारी गोली,

नगर थाना क्षेत्र के फतेहपुर दुर्गा मंदिर के समीप एक दवा दुकानदार अनिल कुमार यादव को 5 अपराधियों ने गोली मारकर हत्या दी है। सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि अनिल कुमार यादव अपने दुकान पर बैठ थे तभी अचानक एक साथ 5 अपराधियों ने हमला बोल दिया। जिस पर दुकानदार अनिल कुमार यादव को सूझ बूझ होती उस से पहले ही अपराधियो ने पिस्तौल निकल कर गोली चला दी जिस पर अनिल यादव को आँख हाथ से पर लगी गोली जिससे गंभीर रूप से धायल हो गये, अपराधियो की संख्या भी 5 बताई जा रही है।

घायल अनिल कुमार यादव को सिवान सदर अस्पताल में इलाज के लिये भेज दिया गया।जहाँ गंभीर रूप से धायल होने के वजह से पटना PMCH रेफर कर दिया गया।

पुलिस मौके पर पहुँच कर बयान दर्ज किया, आगे की करवाही का जांच हो रही है। देखने वाली बात यह है की। बताते चले कि सिवान शहर के प्रशिद्ध चन्दरज्योति वस्त्रालय के मालिक के बेटे अनिल कुमार यादव बताया गया। जो अपना दवा की दुकान, साधु मेडिसिन काम्प्लेक्स में खोला था।

Photos from SIWAN's post 08/01/2018

सीवान: जिला प्रशासन ने किया गरीबों के बीच कंबल का वितरण

सीवान: बड़हरिया ठंड से निजात पाने के लिए जिला प्रशासान एवं सीओ वकील सिंह के सौजन्य से प्रखंड के भामोपाली, राछोपाली रामपुर ,भोपतपुर, पंचायत में गरीबों के बीच प्रत्येक पंचायत में पांच पांच कंबल का वितरण किया गया जहा भमोपाली पंचायत में मुसमात लालझारी कुँवर, फुलकेशरी कूवर ,श्री भगवान सिंह,शिवजी साह को दिया गया वही राछोपाली पंचायत के शामपुर में शिवझरी कुँवर, कांति कुँवर, रामजीत मुसहर, द्वरिका मुसहर, गीता देवी,

भोपतपुर पंचायत के मुसहर टोला में शायमदेव मुसहर,फागुनी देवी, बदरी मुसहर,सरस्वती देवी, चवारपतो देवी, लाल मुनि देवी,के बीच कंबल का वितरण किया गया जहा इस अवसर पर सीओ वकील सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन के द्वारा कंबल का वितरण किया जा रहा है ताकि गरीब और असहाय लोगो को इस कड़ाके की ठंड से निजात मिल सके।

Photos 24/09/2017

उत्तर बिहार के प्रख्यात देवी मंदिर यमुना गढ़ बड़हरिया से लिया गया खूबसूरत दृश्य ।

Photos 26/01/2017

जय हिंद .......!!

Photos 21/01/2017

मानव शृंखला (बिहार)

Photos 18/12/2016

सीवान का स्पेशल लिट्टी चोखा ।

Photos from SIWAN's post 05/11/2016

Chhath (Devanagari: छठ, छैठ, छठी, छठ पर्व, छठ पुजा, डाला छठ, डाला पुजा, सूर्य षष्ठी) is an ancient Hindu Vedic festival dedicated to the Hindu God Sun (सूर्य देव) & Chhathi Maiya (ancient Vedic Goddess ; Usha - wife of Sun God ) historically native to North Bihar of India and Mithila State of Nepal.[3][4][5][6] The Chhath Puja is performed in order to thank Surya for sustaining life on earth and to request the granting of certain wishes.[7] This festival is observed by Nepalese people and Indian people along with their diaspora.

The Sun, considered as the god of energy and of the life-force, is worshiped during the Chhath festival to promote well-being, prosperity and progress. In Hinduism, Sun worship is believed to help cure a variety of diseases, including leprosy, and helps ensure the longevity and prosperity of family members, friends, and elders.

The rituals of the festival are rigorous and are observed over a period of four days. They include holy bathing, fasting and abstaining from drinking water (Vratta), standing in water for long periods of time, and offering prashad (prayer offerings) and arghya to the setting and rising sun.

Although the festival is observed most elaborately in Mithila Region of Nepal, Terai-Madhesh of Nepal, Indian states of Bihar, Jharkhand and eastern UP, it is also more prevalent in areas where migrants from those areas have a presence. It is celebrated in all Northern regions and major Northern urban centers in India bordering Nepal. The festival is celebrated in the regions including but not exclusive to the northeast region of India, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Chhattisgarh, Chandigarh, Gujarat[8][9] Bangalore,[10] Mauritius, Fiji, South Africa, Trinidad and Tobago, Guyana, Suriname, Jamaica, other parts of the Caribbean, United States, United Kingdom, Republic of Ireland, Australia, New Zealand, Malaysia, Macau, Japan, and Indonesia.

Photos from SIWAN's post 07/07/2016

Photos from SIWAN's post 10/06/2015

जामुन के छांव ।

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