Simple Road

Simple Road

Share

सोचो लिखो बातें जो दिल को छू जाए

09/03/2026

हमें दुःख तब नहीं होता जब कुछ बुरा होता है, बल्कि तब होता है जब हम उस बुरे को स्वीकार नहीं कर पाते जब वर्तमान की सच्चाई आँखों के सामने होती है, मगर दिल बार-बार बीते हुए कल में भटकता है हम जानते हैं अतीत को बदला नहीं जा सकता,वो लोग, वो पल, वो फैसले सब गुजर चुके हैं, पर फिर भी भीतर से एक आवाज़ आती है काश मैंने ऐसा न किया होता, काश वो रुक जाता, काश वक़्त थोड़ी मोहलत और दे देता यही काश हमारे दुःख का असली कारण बन जाता है। खैर.. इन सब बातों से दूर आगे अपने जीवन में बढ़ते रहना चाहिए.....!!!!!

08/03/2026

इतिहास फिर से दोहराया गया! लगातार दूसरी बार T20 वर्ल्ड चैंपियन। गर्व है अपनी टीम इंडिया पर! साल बदलते गए, पर दुनिया ने देखा कि हर बार इतिहास के पन्नों पर इंडिया का ही नाम लिखा गया। 2007, 2024 और अब 2026 में भी T20 विश्व चैंपियन 🏆 🏏 बनी। बैक-टू-बैक वर्ल्ड चैंपियन बनना कोई इत्तेफाक नहीं, हमारी मेहनत का जवाब है। ये सिर्फ एक टीम नहीं, करोड़ों भारतीयों का गर्व है। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन दिखाया। 🇮🇳❤️

06/03/2026

जीवन हाँथ पे हाँथ रखकर बैठने का नाम नहीं परन्तु सदैव आगे आगे बढ़ते रहने वाली एक नाव है। हम ज्यादातर वक्त सोचने में ही निकाल देते हैं और यही हमारे पीछे रह जाने का मुख्य कारण होता है। जितना हम तय करें उससे दस प्रतिशत अधिक करना चाहिए..... अपनी लक्ष्यों की ओर निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए यही ज़िंदगी की सार्थकता है.....!!!!!

05/03/2026

शानदार खेल, जानदार जीत यही है हमारी टीम इंडिया की असली पहचान। 💥🏏 चक दे इंडिया! 🇮🇳❤️ शानदार खेल, अटूट जज्बा और एक और फाइनल का टिकट! यह सिर्फ क्रिकेट नहीं, यह करोड़ों का जुनून है, और इस जीत में छिपा देश का सुकून है। हमारी टीम ने दिखा दिया कि असली चैंपियन कौन है। अब बस एक कदम और.... ट्रॉफी घर लानी है! बहुत-बहुत बधाई टीम इंडिया!

05/03/2026

बड़ी बड़ी बातें करना और दूसरों को मोटिवेशन का टॉनिक देना बहुत आसान है परंतु जब आप धरातल स्तर पर पैसे कमाने निकलते हैं तब समझ आता है ये जीवन क्या है? और असल में संघर्ष किसे कहते हैं। जो व्यक्ति पैसा देता है वो आपको हमेशा गुलाम समझेगा। आपके स्वाभिमान से उसे कोई फर्क नही पड़ता। जीवन में बेरोजगारी का दौर सभी अपने-पराए में भेद करवा देती है। आपके सबसे करीबी दोस्त, रिश्तेदार या प्रियजन भी आपसे मुंह मोड़ लेते हैं.... हर कोई आपकी विफलताओं पर टिप्पणियाँ करता है। किसी को फ़र्क नहीं पढ़ता तुम कहां हो, कैसे हो; पर तुम सबका ज़बाब अपनी मुस्कुराहट से देना....!!!!!

03/03/2026

जीवन को अक्सर हम जीत और हार के चश्मे से देखते हैं, पर हकीकत में यह केवल 'लड़ने' का नाम है। कभी-कभी लगता है कि हम एक ऐसे सफर पर हैं जहाँ मंज़िल से ज़्यादा रास्ते की थकान हावी होने लगती है। हम दौड़ते हैं सपनों के पीछे, उम्मीदों के पीछे और कभी-कभी बस अपनी जिम्मेदारियों के पीछे। इस दौड़ में हम अक्सर भूल जाते हैं कि हमारे भीतर भी एक इंसान है जो थक चुका है, जो बस थोड़ी देर ठहरना चाहता है। मैंने सीखा है कि 'असफलता' कोई अंत नहीं है, बल्कि यह खुद को और गहराई से जानने का एक जरिया है। जब दुनिया आपकी उपलब्धियों का हिसाब मांग रही होती है, तब आपका अपना मन आपसे शांति मांगता है। लोग कहते हैं कि समय हर घाव भर देता है, पर सच तो यह है कि समय बस हमें उन घावों के साथ जीना सिखा देता है। आजकल मैं शोर से ज़्यादा सन्नाटे को पसंद करने लगा हूँ। यह सन्नाटा खालीपन नहीं है, बल्कि एक मौका है खुद से रूबरू होने का। मुझे अब किसी को यह साबित करने की जल्दी नहीं है कि मैं सही हूँ या मैं कितना काबिल हूँ। मेरी लड़ाई अब दुनिया से नहीं, खुद के बीते हुए कल से है। मैं बस चाहता हूँ कि आने वाला कल आज से थोड़ा बेहतर हो, थोड़ा और शांत हो। सफर लंबा है, रास्ते कठिन हैं और साथी बहुत कम। पर फिर भी, कदम रुकने नहीं चाहिए। लड़खड़ाना स्वभाव है, पर गिरकर संभल जाना ही असली उपलब्धि है। मैं शायद अभी वहां नहीं पहुँचा जहाँ मुझे होना चाहिए था, पर मैं वहां भी नहीं हूँ जहाँ मैं कल था। जीवन कोई रेस नहीं है जिसे जीतना अनिवार्य हो, यह तो एक अनुभव है जिसे गरिमा के साथ जीना ही सबसे बड़ी जीत है.....!!!!!!

28/02/2026

सत्य तो यह है कि बाहरी दिखावे से अंतर्मन की वास्तविक परिस्थितियों का अनुमान लगाना असंभव है। कभी-कभी एक अत्यंत व्यथित व्यक्ति भी अपनों के संतोष और प्रसन्नता की वेदी पर अपनी पीड़ा की बलि चढ़ा देता है और मुख पर एक बनावटी मुस्कान सजाए रखता है। हम अपनी वेदनाओं को अपने भीतर इस प्रकार संजो लेते हैं, मानो वे हमारे अस्तित्व का ही एक अभिन्न अंग हों और हमें उनसे कोई विशेष अंतर न पड़ता हो। किंतु यह केवल एक छलावा है। वह व्यक्ति स्वयं भली-भांति परिचित है कि वह भीतर से कितना टूटा हुआ हो चुका है। उसकी आत्मा के कोनों में बिखरे हुए उन कांच के टुकड़ों की चुभन केवल वही अनुभव कर सकता है। अब उसने अपनी पीड़ा का प्रदर्शन करना त्याग दिया है। उसने संसार की सहानुभूति से स्वयं को अलग कर लिया है और अपने अश्रुओं को पलकों की ओट में छिपाना सीख लिया है। यह मौन किसी अभाव की निशानी नहीं, बल्कि उस पराकाष्ठा का प्रमाण है जहाँ शब्द भी अपनी सार्थकता खो देते हैं और व्यक्ति स्वयं की पीड़ा का स्वयं ही संरक्षक बन जाता है....!!!!!

27/02/2026

छत पर टहलते हुए अक्सर यह विचार मन को झकझोर देता है कि क्या यह जीवन वास्तव में हमारा अपना है? कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है मानो हम किसी वृहद नाटक के मात्र एक पात्र हैं, जिसे हम विवश होकर निभा रहे हैं। इस जीवन की पटकथा को लिखने वाला कोई और है और इसका निर्देशन भी किसी अदृश्य शक्ति के हाथ में है। मैं जो करना चाहता हूँ, जो पाना चाहता हूँ, वह अंततः मेरी पहुँच से दूर ही रह जाता है। स्वयं की इस विवशता को देखकर कभी-कभी मन आत्मग्लानि और दुर्बलता से भर जाता है। आज अपने बंद कमरे की रिक्तता (खालीपन) मुझे भीतर तक कचोट रही थी। उस अकेलेपन से बचने के लिए मैंने सोचा कि क्यों न पुराने मित्रों से संवाद किया जाए, शायद मन का बोझ कुछ हल्का हो सके। इसी आशा में मैंने कुछ पुराने साथियों को संपर्क किया, किंतु प्रत्येक ओर से एक ही रटा-रटाया उत्तर प्राप्त हुआ "मित्र, अभी अत्यंत व्यस्त हूँ, रात्रि में वार्तालाप करते हैं।" उस क्षण एक कठोर सत्य मेरे सामने पूरी नग्नता के साथ खड़ा था। सत्य यही है कि यह संसार केवल 'उपयोगिता' का है। जब तक आप किसी के प्रयोजन (काम) के हैं, तभी तक आपका मोल है। यदि आप किसी के स्वार्थ की कसौटी पर खरे नहीं उतरते, तो आपकी पीड़ा और आपकी उपस्थिति, दोनों ही इस जगत के लिए अर्थहीन हैं। खैर... इस एकांत ने आज एक बड़ा पाठ पढ़ाया है। साथ होने का दावा करने वाले बहुत हैं, पर अंततः अपनी लड़ाई स्वयं के ही कंधों पर लड़नी होती है। और जीवन ऐसे ही निरंतर चलते रहता है और हम ही स्वयं को बेहतर तरीके से जान सकते है.....!!!!!

26/02/2026

जीवन के इस पड़ाव पर खड़े होकर जब मैं स्वयं के व्यवहार का विश्लेषण करता हूँ, तो एक अजीब सी कड़वी सच्चाई सामने आती है। जब भी मुझे आभास होता है कि कोई मुझसे कोई अपेक्षा रख रहा है, मैं तुरंत उस व्यक्ति से दूरी बना लेता हूँ। अपनी इस प्रवृत्ति के कारण कई बार मैं स्वयं की दृष्टि में कायर सिद्ध हो जाता हूँ। पर मनुष्य के भीतर की गहराई इतनी असीम है कि कभी-कभी हम स्वयं की परतों को भी नहीं पहचान पाते। हमारे भीतर क्या कुछ दबा हुआ है, इसका आकलन करना कठिन है।मेरा जीवन अब तक अत्यंत साधारण रहा है। मेरे पास सफलताओं की ऐसी कोई बड़ी पूंजी नहीं है, जिसे आपके सम्मुख प्रदर्शित कर मैं प्रशंसा का पात्र बन सकूँ। सच तो यह है कि मुझे जीवन का यह तंत्र कभी समझ ही नहीं आया। कभी-कभी एक विचित्र सा भ्रम होता है जैसे जो अभी घटित हो रहा है, वह पूर्व में भी कहीं घट चुका हो। यह समस्त जीवन मेरे लिए किसी रहस्यमयी क्रीड़ा की भांति है, जिसके नियम आज भी मेरी समझ से परे हैं।खैर.. ठोकर खाकर पुनः संभलने का अभ्यास मुझे बचपन से ही रहा है। गिरना और फिर से धूल झाड़कर खड़े हो जाना मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुका है। मुझे अटूट विश्वास है कि बहुत जल्द मैं अपने भटके हुए रास्तों को पुनः खोज लूँगा और अपने गंतव्य की ओर अग्रसर होऊँगा।मेरा संकल्प दृढ़ है: रुकना मेरे स्वभाव में नहीं। निरंतर आगे बढ़ते रहना ही अब मेरी एकमात्र प्राथमिकता है.....!!!!!

25/02/2026

अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर खड़े होकर जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो सफलता की कहानियों के शोर में अपनी 'असफलताओं' की खामोशी ज्यादा चुभती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो नियति ने हर कदम पर मेरी संकल्पशक्ति का उपहास उड़ाने का बीड़ा उठा रखा हो। जितनी बार मैंने पूरी ऊर्जा और निष्ठा के साथ स्वयं को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया, उतनी ही निर्दयता से परिस्थितियों ने मुझे धरातल पर ला पटका। दुनिया का दस्तूर है कि वह केवल 'परिणाम' देखती है। लोग सुगमता से कह देते हैं "परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।" किंतु वे उन रातों के साक्षी नहीं होते, जब मैंने निस्तब्धता में छत को निहारते हुए स्वयं के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। वे रातें, जहाँ सपनों का भव्य महल वास्तविकता की कठोरता से टकराकर कांच की तरह बिखर गया। आज जब मैं दर्पण के सम्मुख खड़ा होता हूँ, तो प्रतिबिंब में दिखने वाला वह व्यक्ति अपरिचित सा लगता है। मन के किसी कोने में एक द्वंद्व चलता है क्या मैं वास्तव में अक्षम हूँ, या मेरी योग्यता को अभी समय के सही सांचे में ढलना शेष है? आत्म-संदेह की इस धुंध में कभी-कभी अपना ही चेहरा धुंधला होने लगता है। परंतु, इस गहन अंधकार के बीच भी अंतर्मन की एक सूक्ष्म 'उम्मीद' आज भी जीवित है। वह धीमे स्वर में कहती है कि यह 'अंत' नहीं, बल्कि एक 'अंतराल' है। यह संघर्ष केवल हारने के लिए नहीं, बल्कि खुद को तराशने के लिए है.....!!!!!!!

23/02/2026

मैं महसूस कर रहा हूँ कि भीतर कुछ धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। ये अचानक नहीं हुआ। कोई एक घटना नहीं थी जिसने सब बदल दिया। ये बहुत शांत तरीके से हुआ, जैसे दीवारों का रंग समय के साथ फीका पड़ता है और एक दिन अचानक ध्यान जाता है कि चमक कब की जा चुकी है। पहले भीतर हलचल रहती थी। कुछ पाने की बेचैनी, कुछ बनने की भूख, किसी को साबित करने की जिद, अब वो सब नहीं है। अब किसी से आगे निकलने की इच्छा नहीं, किसी मंज़िल तक पहुँचने की अधीरता नहीं। यहाँ तक कि अपने ही सपनों से भी एक दूरी बन गई है। जैसे वे किसी और के हों, और मैं सिर्फ दूर से उन्हें देख रहा हूँ। अजीब बात है कि दर्द भी बहुत तीखा नहीं है। काश दर्द होता तो कम से कम पता चलता कि कुछ जीवित है, पर ये जो स्थिति है, ये उससे भी भारी है। ये एक सपाटपन है, जैसे मन ने खुद को बचाने के लिए हर तीव्र भावना को धीमा कर दिया हो। अब हँसी भी आती है तो भीतर तक नहीं जाती। खुशी मिलती है तो कुछ देर टिकती है और फिर लौट जाती है। दुख आता है तो वह भी ज़्यादा देर नहीं ठहरता। सब कुछ एक समान-सी परत में ढल गया है। जैसे जीवन रंगों से निकलकर अंधकार में बदल गया हो। बहुत दूर चले जाने की जो इच्छा है वो दरअसल गायब हो जाने की इच्छा नहीं है। वो शोर से दूर होने की इच्छा है। उन भूमिकाओं से दूर जो निभाते-निभाते थकान जमा हो गई है। हमेशा मजबूत दिखना, समझदार बनना, संभालना, सहना इन सबने भीतर की कोमलता को घिस दिया है। कभी लगता है कि क्या मैं ही बदल गया हूँ, या दुनिया? या ये सब हमेशा से ऐसा ही था और मैं ही भ्रम में था? पहले जो बातें महत्वपूर्ण लगती थीं, अब वे हल्की लगती हैं। पहले जिन लोगों की राय मायने रखती थी, अब उनसे भी मन हट गया है। रात में जब सन्नाटा फैलता है, तब एक खालीपन साफ सुनाई देता है। ये खालीपन डराता नहीं, पर साथ छोड़ता भी नहीं। वह मेरे पास बैठा रहता है बिना बोले, और मैं भी उससे कुछ नहीं कहता। हम दोनों बस एक-दूसरे की उपस्थिति स्वीकार करते हैं। मैंने महसूस किया है कि जब आकांक्षाएँ टूटती हैं तो आवाज़ नहीं होती। वे चुपचाप गिरती हैं और भीतर एक सूक्ष्म धूल छोड़ जाती हैं। वही धूल अब हर सोच पर जमी हुई है। उत्साह इसलिए नहीं उठता क्योंकि मन को भरोसा नहीं रहा कि किसी दिशा में जाने से कुछ बदलेगा। शायद ये हार नहीं है, शायद ये थकान है, या शायद ये वह पड़ाव है जहाँ आदमी अपने ही भ्रमों से मुक्त होता है और फिर कुछ समय के लिए बिल्कुल खाली हो जाता है.....!!!!!
©️ ट्विटर से

20/02/2026

जिन्दगी बहुत उथल-पुथल सी हो गई है। ना जाने किस मोड पर आ खड़ा हूं मुझे खुद भी नही मालूम। हर रोज बस इसी उम्मीद में सुबह से रात हो जाती है, शायद कल आज से कुछ अच्छा होगा लेकिन अगले दिन ठीक इसका उल्टा हो रहा है। दिमाग मे अनेक तरह की बातें चलती रहती है। करता कुछ हूं, हो कुछ और जाता है। एक समय के बाद हम समझ जाते है कि शिकायतों का भी कोई मतलब नहीं जब कोई आपको सुनना और समझना ना चाहे पर जो मन में इतनी सारी बातों का बोझ होता है उसका क्या करना चाहिए अपने मन को कितना बहलाते रहे कभी ये भी तो अपनी जिद्द पर अड़ा रहता है.....!!!!!

Want your business to be the top-listed Media Company in Siwan?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Website

Address


Siwan