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धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा जी
28/05/2024
High Court: सच की हुई जीत, रंजीत मर्डर केस में पूज्य गुरु जी के खिलाफ केस खारिज
#रंजीतमर्डरकेस
High Court: सच की हुई जीत, रंजीत मर्डर केस में पूज्य गुरु जी के खिलाफ केस खारिज High Court: सच की हुई जीत, रंजीत मर्डर केस में पूज्य गुरु जी के खिलाफ केस खारिज बरी | Ranjeet murder case....
24/05/2024
सभी साध संगत को सूचित किया जाता है कि सत्संग भंडारा, MSG डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र, शाह सतनाम- शाह मस्तान जी धाम, सिरसा, हरियाणा में 26 मई 2024 को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक मनाया जाएगा जी| आगे से आगे सूचित करें व शेयर करें जी|
24/05/2024
आज के दिन 24 मई 1993 को पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपनी पावन रहनुमाई में डेरा सच्चा सौदा शाह सतनाम जी धाम का निर्माण कार्य शुरू करवाया था।
03/05/2024
#अनमोल_वचन
पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि भगवान हर इन्सान के अंदर समाया हुआ है। भगवान को देखने के लिए किसी जंगल, पहाड़ आदि कहीं पर भी जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। इन्सान भगवान को अपने घर-परिवार में रहते हुए ही देख सकता है। ऐसे-ऐसे रोग जिनको डॉक्टर लाईलाज बता देते हैं, राम-नाम के द्वारा वो लाईलाज रोग भी ठीक होते हुए देखे गए हैं। भगवान सर्वव्यापक है। भगवान को अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब चाहे जो भी नाम दें लेकिन वो एक ही है। जिस तरह पानी को जल, आब, वाटर, नीर आदि कहने से उसके रंग, स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं आता, उसी तरह भगवान का नाम बदलने से उसकी ताकत नहीं बदलती।
01/05/2024
#अनमोल_वचन
पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दुनिया में राम-नाम ही ऐसा है, जो इन्सान के सारे दु:ख-दर्द, चिंता, परेशानियों को दूर करता है। राम-नाम लेने के लिए कोई काम-धन्धा, घर-परिवार, धर्म नहीं छोड़ना और न ही कोई रुपया-पैसा लगता है। राम का नाम अनमोल है और संत इसे बिना दाम के देते हैं। जो दान-दक्षिणा लेते हैं, वो संत ही नहीं होते, क्योंकि संत माया के लिए नहीं बल्कि राम-नाम जपाने के लिए इस दुनिया में आते हैं। जब भगवान ही पैसा नहीं लेते तो संत पैसा क्यों लें? सभी धर्मों में लिखा है कि भगवान दाता था, दाता है और दाता ही रहेगा।
11/04/2024
#अनमोल_वचन
पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान का मन बहुत जालिम है। वह उस मालिक के नाम का जाप न करने का कोई न कोई तोड़ तैयार ही रखता है। जो इन्सान गलती करके भी उसे नहीं मानता तो उसको कैसे बख्शा जाएगा, उसे खुशियां कैसे मिलेंगी, किसी-किसी को ऐसा मौका मिल भी जाता है, लेकिन वह ऐसे-ऐसे बहाने बना लेते हैं कि कभी सुना ही न हो। इसलिए रूहानियत में कभी झूठे बहाने नहीं चलते, अगर इन्सान से कोई गलती हुई है और उसे कभी फकीर से बात करने का मौका मिलता है। उस दौरान अगर आप तौबा कर लेते हैं तो जल्द ही आप उस मालिक की भक्ति करना आरंभ कर देते हैं, लेकिन अगर इन्सान बयानबाजी करता रहता है तो उस पर उसका मन हमेशा हावी रहता है।
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