Atul Rai

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गुरुर की सबसे गलत बात यहीं है कि वो कभी

16/07/2026
06/07/2026

झारखंड के इस जंगल में कभी दिन नहीं होता. रहस्य जान कर हो जाएँगे हैरान. सारंडा का जंगल (Saranda Forest) एशिया का सबसे बड़ा और सबसे घना साल के पेड़ों का जंगल है। इस जंगल के बारे में कहा जाता था कि इसके अंदर एक बार जो खो गया, वो कभी वापस नहीं आ सका। यह झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित है और उड़ीसा की सीमा से सटता है। स्थानीय भाषा में 'सारंडा' का सीधा मतलब होता है—"सात सौ पहाड़ियों की भूमि" (The Land of Seven Hundred Hills)।
​इस जंगल की कहानी जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमयी और डरावनी भी है।
​सारंडा का इतिहास बेहद पुराना है। यह इलाका सदियों से हो (Ho) और मुंडा (Munda) जैसी आदिवासी जनजातियों का घर रहा है.
​जंगल इतना विशाल है कि यह लगभग 820 स्क्वेअर किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।

ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व: सारंडा का जंगल अपनी अथाह खनिज संपदा (Iron Ore) के लिए भी जाना जाता है। लेकिन 90 के दशक से लेकर 2010-12 तक, इस घने जंगल का फायदा उठाकर यह इलाका नक्सलियों का सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित गढ़ (Red Zone) बन गया था। जंगल के भीतर 'सारंडा एक्शन प्लान' चलने से पहले तक यहां सरकार का कानून नहीं, बल्कि नक्सलियों की हुकूमत चलती थी।
​इसके 'कोर जंगल' (Core Zone) में लोग क्यों नहीं जाते?
​सारंडा के बाहरी हिस्सों में तो अब माइनिंग (खनन) और कुछ हद तक लोगों का आना-जाना होता है, लेकिन इसके Core Area (गहरे मध्य भाग) में आज भी कोई आम इंसान, टूरिस्ट या यहां तक कि स्थानीय लोग भी अकेले जाने की हिम्मत नहीं करते। इसके पीछे ये मुख्य कारण हैं:
​1. "सूर्यास्त का नियम" और गहरा अंधकार
​सारंडा के कोर हिस्से में साल (Sal) के पेड़ इतने ऊंचे और एक-दूसरे से सटे हुए हैं कि वहां आसमान दिखाई नहीं देता। इसे "Thick Canopy" कहते हैं। आलम यह है कि दोपहर के 12 बजे भी जंगल के अंदर बिल्कुल शाम या रात जैसा अंधेरा रहता है। सूरज की किरणें जमीन तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में वहां दिशा का अंदाजा लगाना असंभव हो जाता है और इंसान बहुत आसानी से रास्ता भटक सकता है।
​2. जंगली हाथियों का आतंक (The Elephant Corridor)
​यह जंगल उड़ीसा और झारखंड के जंगली हाथियों का मुख्य प्राकृतिक रास्ता (Corridor) है। सारंडा के कोर ज़ोन में हाथियों के कई ऐसे झुंड रहते हैं जो इंसानों को देखते ही आक्रामक हो जाते हैं। इसके अलावा यहां बेहद जहरीले सांप, भालू और तेंदुए भी पाए जाते हैं। बिना किसी सुरक्षा या गाड़ी के वहां जाना सीधे मौत को दावत देना है।
​3. 'नो नेटवर्क' और खो जाने का डर
​कोर जंगल में मोबाइल का नेटवर्क मिलना तो दूर की बात है, वहां जीपीएस (GPS) और कंपास भी कई बार सही से काम नहीं करते क्योंकि जमीन के नीचे भारी मात्रा में आयरन ओर (लोहा) मौजूद है, जो मैग्नेटिक फील्ड को प्रभावित करता है। अगर कोई वहां एक बार रास्ता भटक गया, तो मीलों तक सिर्फ एक जैसे दिखने वाले घने पेड़ हैं, जहां से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझता।
​4. कानूनी पाबंदी (Forest Act)
​पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार के वन विभाग (Forest Department) ने इसके कोर एरिया को 'प्रोटेक्टेड' घोषित किया हुआ है। बिना स्पेशल परमिशन के कोई भी आम इंसान कानूनी रूप से भी इस एरिया में कदम नहीं रख सकता।
​5. स्थानीय मान्यताएं और भूत-प्रेत के किस्से
​यहां के स्थानीय आदिवासियों का मानना है कि कोर जंगल के कुछ हिस्से पूरी तरह से "प्राकृतिक शक्तियों और आत्माओं" के अधीन हैं। उनका मानना है कि जंगल के कुछ गहरे हिस्सों में उनके 'बोंगा' (देवता) निवास करते हैं और अगर कोई बाहरी इंसान वहां जाकर शांति भंग करता है, तो जंगल उसे कभी वापस लौटने नहीं देता।
​संक्षेप में कहें तो: सारंडा का कोर जंगल आज भी प्रकृति का वो अनछुआ रूप है, जहां इंसान की तकनीक और आधुनिकता हार मान जाती है। यही वजह है कि लोग इसके बाहरी नजारों को देखकर ही लौट आते हैं, इसके सीने के अंदर जाने की हिमाकत कोई नहीं करता।

05/07/2026

जब बोया बीज बबूल का तो आम कहां से होय? अब जो बीज बोया गया था पेड़ भी उसी का ही तो होगा। फल भी उसी का मिल रहा है। अब उस फल को ही एंज्वॉय करने में भलाई है। अच्छा खासा टीम इंडिया टी20आई फार्मेट में चैंपियन की तरह खेल रही थी लेकिन टी20 विश्वकप 2026 के बाद जब आईपीएल होने लगा तो कोच गौतम गंभीर खलिहर हो गए थे।

यह दो ढाई महीने का वह समय होता है जब हेड कोच गौतम गंभीर खाली रहते हैं। पुरुष टीम इंडिया कोई अंतर्राष्ट्रीय मैच आईपीएल के दौरान नही खेलती। कहा गया है खाली दिमाग शैतान का घर होता है। लगता है यही बात हेड कोच गौतम गंभीर साहब और मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर साहब पर भी लागू होती है।

पिछले साल जब फरवरी मार्च में चैंपियंस ट्रॉफी रोहित शर्मा की कप्तानी में जीतने के बाद टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी आईपीएल खेलने में बिजी हुए तो इस दौरान भी हेड कोच गौतम गंभीर और हेड चयनकर्ता अजीत आगरकर साहब खाली थे और आईपीएल के तुरंत बाद ही रोहित शर्मा की टेस्ट कप्तानी पर अंदर ही अंदर मंथन हुआ जिसकी भनक लगने के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा बोल दिया था।

एक साल बाद फिर से वही हुआ। भारतीय खिलाड़ी इस बार टी20 विश्वकप जीतने के बाद आईपीएल में बिजी हुए तो हेड कोच गौतम गंभीर और हेड चयनकर्ता अजीत आगरकर साहब ने इस खाली टाइम में खेला कर दिया। इस बार बारी सूर्यकुमार यादव की थी। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी छीनने के साथ साथ टीम से भी बाहर फेंक दिया गया। लगातार दो साल आईपीएल के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और हेड चयनकर्ता अजीत आगरकर की जोड़ी ने बहुत बड़े उलटफेर किए।

अब जब इस तरह के फैसले ले ही लिए गए हैं कि जो खिलाड़ी टी20आई टीम में अपनी जगह खो चुका था उसी को सीधा कप्तान बनाकर टीम में वापसी कराई गई है तो लगातार हार तो मिलनी ही है। पिछले 4 टी20आई मुकाबलों में टीम इंडिया दो सौ का स्कोर भी नही बना सकी है। तीन मैच हार चुकी है। एक में बारिश ने बचा लिया था। अभी लगातार कितने मैच हारेंगे यह वक्त बताएगा लेकिन लग रहा इंग्लैंड के खिलाफ तीन और हारेंगे। दूसरे टी20आई मुकाबले में हार के लिए रवि विश्नोई को दोष देना ठीक नही क्योंकि टीम इंडिया ने बल्लेबाजी में रन भी कम बनाए थे। बीसीसीआई को चाहिए कि हेड कोच गौतम गंभीर और हेड चयनकर्ता अजीत आगरकर साहब के कार्यकाल पर पुनर्विचार करे अन्यथा ऐसे ही टीम इंडिया की हाल होती रहेगी।

Photos from Atul Rai's post 03/07/2026

मार्केट में वैभव नाम की टेस्ला खड़ी है, लेकिन सिलेक्टर्स ने जानबूझकर तिलक वर्मा नाम का भाप कइंजन टीम में खिला रखा है।

और ऊपर से सूर्या जैसा सुपरसोनिक जेट ग्राउंड कर दिया, उसकी जगह ले आए अय्यर नाम का वो रेल इंजन, जो हर सिग्नल पर खड़ा होकर धुआं छोड़ता है।

2024 में जब सूर्या ने स्टीयरिंग संभाली थी, तब उसने कहा था गाड़ी वही है, बस ड्राइवर नया है।”

और फिर जो रफ्तार पकड़ी, स्कोरबोर्ड पर 220 से नीचे ब्रेक ही नहीं लगता था।

मैदान का हर कोना उसका था। 360 डिग्री में चौके-छक्के, गेंदबाज़ों की लाइन-लेंथ और होश — दोनों उड़ जाते थे।

अब नया ड्राइवर आया है।
क्लच दबाते ही गाड़ी खांसने लगती है। तीन मैच हो गए, 200 का मीटर छुआ तक नहीं।

150 के बाद पूरी टीम का इंजन जवाब देने लगता है। हालत ये है कि नया लड़का प्रिंस यादव आता है और पहली ही गेंद पर छक्का मारकर कहता है “लो भैया, अब मैं दिखाता हूं स्पीड क्या होती है।”

इंग्लैंड वाला मैच याद है?
बादल गरज रहे थे, मौसम साफ बता रहा था कि बारिश आने वाली है। लेकिन कप्तान को लगा मौसम से तेज मैं हूं। टॉस जीता और बैटिंग चुन ली।

अभिषेक शर्मा ने 24 गेंदों में 59 रन की आंधी ला दी। लगा आज 230 तो पक्का है।

फिर स्टेज पर एंट्री हुई टेस्ट मोड वाले अय्यर की बल्लेबाज़ की 47 गेंद, 68 रन, सिर्फ 1 छक्का।

भाई ये कौन सा टी20 मॉडल है?
जहां दुनिया 12 गेंद में 50 मार रही है, वहां तुम 47 गेंद में एंकरिंग कर रहे हो।

ऐसी एंकरिंग कि न्यूज चैनल वाले भी शर्मा जाएं टीम 189 पर रुक गई।

अब बताओ दर्शकों, आपको रॉकेट वाला सूर्या वापस चाहिए या ये सीटी बजाती पैसेंजर ट्रेन?

03/07/2026

खाने में नमक का स्वाद समझते हो. गोलगप्पे के पानी में इमली या खिचड़ी में 2 चम्मच देशी घी. ठंड में अंगीठी या लिहाफ़ l दिखते नहीं हैं पर जरूरी हैं l ना हों तो कहीं स्वाद बिगड़ जाएगा तो कहीं इनके बिना राहत नहीं है l टीम इंडिया में शिवम दुबे वही हैं. इनका कंट्रीब्यूशन दिखता नहीं है, लेकिन है l इसे निकाल दो तो कई मुकाबले हम गंवाने वाले थे. वर्ल्ड कप में भी l

इंग्लैंड के खिलाफ चेस्टर ली स्ट्रीट में पहले टी20 मैच में जब आए तो स्कोर 127 था और 20वें ओवर में लौटे तो टीम इंडिया बोर्ड पर 189 रन टाँग चुकी थी. शिवम दुबे के 21 गेंद पर 42 रन थे. 2 चौके और 3 छक्के. स्ट्राइक रेट 200 का. ये पहली बार नहीं है कि शिवम दुबे ने ऐसा किया है l

एप्रिसिएशन तो भूल ही जाइए, एकाध पारी खराब बीती नहीं कि सोशल मीडिया में ट्रोल आर्मी मिशन में लग जाती है कि क्यों है दुबे टीम में? निकालो इसको. यहां तक कि अभी आयरलैंड सीरीज में एक्सपर्ट तक ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी को शिवम दुबे की जगह खिलाओ. पता नहीं किस लॉजिक पर. टीम के लिए लगातार परफॉर्म करने के बाद भी शिवम हमेशा सूली कि नोंक पर रहते हैं l

हालांकि, चेस्टर ली स्ट्रीट में 42 रन की पारी को लेकर फॉर्मर क्रिकेटर दिनेश कार्तिक ने शिवम को कंप्लीट टीममेट बताया है l कहते हैं कि वो तब आते हैं जब खेलने को ज्यादा गेंदें नहीं बचती, बावजूद इसके वह इंपॉर्टेंट अंडरेटेड इनिंग्स खेलते हैं जिन्हें कभी नोटिस नहीं किया जाता l मुझे शिवम की कम से कम आधा दर्जन ऐसी पारियां याद हैं जिन्होंने खेल पर बड़ा प्रभाव डाला है l वह कभी 10 गेंद पर 25 तो कभी 12 गेंद पर 28 जैसी पारियां खेलते हैं. उन्होंने शिवम दुबे को एक जरूरी एसेट बताया है ये इंडिया के लिए l

2024 के टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में शिवम दुबे जब 14वें ओवर में बल्लेबाजी करने आए तो स्कोर 106 पर 4 था l उन्होंने महज 16 गेंद पर 27 रन बनाए और विराट कोहली के साथ 57 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की जिसकी बदौलत टीम इंडिया 176 के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रही l

शिवम ने एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दबाव वाले क्षण में 22 गेंद पर 33 रन बनाकर 5 विकेट से जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन नाम केवल तिलक वर्मा का लिया जाता है l

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में शिवम दुबे ने महज 8 गेंद पर 26 रन कूटे इनमें से 24 रन तो उन्होंने पारी के 20वें ओवर में जिमी नीशम की गेंदों पर बनाए l इस पारी की बदौलत टीम इंडिया ने 255 रन का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया l

शिवम दुबे ने खुद को लगातार इवॉल्व किया है l एक टाइम शॉर्ट गेंदों पर परेशानी थी तो उसे भी दूर कर लिया l कल सैम करन को ऐसी ही एक गेंद पर बॉडी को पूरा घुमाते हुए डीप स्क्वायर लेग में शानदार छक्का मारा l आदिल राशिद की एक गेंद को स्टेप आउट करके डाउन द स्ट्रेट बाउंड्री के पार भेजा. लॉन्ग ऑन में भी छक्का जड़ा l शानदार टाइमिंग दिखाते हुए एक बेहतरीन कवर ड्राइव भी लगाया l

शायद शिवम दुबे के कंट्रीब्यूशन का महत्व तब समझ में आयेगा, जब वे ये मैदान छोड़कर जाएंगे l हालांकि, इस अनसंग हीरो को फर्क नहीं पड़ता है कि एप्रिसिएशन मिली है कि नहीं l कर्मयोगी अपना काम करता जा रहा है बस l

Photos from Atul Rai's post 11/06/2026

ये आईपीएल नहीं है बाबू. इंटरनेशनल क्रिकेट में पाटा विकेट नहीं मिलते और ना ही बाउंड्री छोटी है कि छक्कों का रिकॉर्ड टूट जाए.

कुछ इन पंक्तियों के साथ ट्रोलिंग गैंग महज 15 साल के बच्चे के पीछे पड़ी है, जैसे कि बस इंतजार में बैठी हो कि एक खराब इनिंग आए और मधुमक्खियों की तरह क्रिकेट के गुलिस्तां के नए फूल पर टूट पड़ो. सोशल मीडिया, श्रीलंका में ट्राई सीरीज के पहले मैच में वैभव सूर्यवंशी की नाकामी के जश्न में डूबा है. तथाकथित क्रिकेट पंडित वैभव को इंटरनेशनल मैच का प्रेशर, पिच की क्वालिटी और बाउंड्री का साइज बताने के लिए बेहाल है.

अब उन्हें कैसे बताऊं कि जिस उम्र में आप बाप के पैसे पर ठेले पर मैगी चाट रहे थे, उससे कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने 22 गज की पट्टी पर इतिहास गढ़ दिया है. अब आप अगर वैभव सूर्यवंशी को पहले मैच में उनकी 14 रन की पारी के लिए ट्रोल करने में लगे हैं तो फिर अपने पहले मैच में 0 पर आउट हो जाने वाले सुरेश रैना और महेंद्र सिंह धौनी से क्या कहेंगे. ये दोनों खिलाड़ी तो आज लीजेंड कहे जाते हैं. इन्होंने भी घरेलू क्रिकेट ने रनों का अंबार लगाया था और अपने पहले अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट में फेल रहे थे.

दरअसल, वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पर की जा रही लानत–मलानत उस कुत्सित सोच का नतीजा है जिसमें असफल लोग ये सोचने में परेशान रहते हैं कि दूसरों को भी अपनी हालत में कैसे खींचा जाए. ये अकर्मण्य लोग हैं. अपनी जिंदगी से तंग आए हुए लोग जिन्हें कामयाब लोग चुभते हैं, और अगर वो कामयाब शख्स महज 15 साल का बच्चा है तो फिर ये नाकाबिल–ए–बर्दाश्त है.

जिन्हें लगता है कि वैभव सूर्यवंशी ने IPL में पाटा विकेट पर रन बनाकर मजमा लूट लिया है तो फिर उन्हें जिम्बाब्वे में हुए U 19 वर्ल्ड कप में वैभव सूर्यवंशी के बैटिंग का हाईलाइट्स देखना चाहिए. फाइनल में महज 80 गेंद पर 175 रन कूटा था लड़के ने.

अगर वैभव सूर्यवंशी कहते हैं कि मैं इंटरनेशनल क्रिकेट में अगले 20 साल डॉमिनेट करने आया हूं तो यह घमंड नहीं बल्कि बचपन से की गई जीतोड़ मेहनत का आत्मविश्वास है. रिकॉर्ड्स ऐसे ही नहीं बना करते. सूर्यवंशी अपनी मेहनत से अपना वैभव गढ़ते हैं.

10/06/2026

बीसीसीआई के बंद कमरों में इस वक्त एक ऐसा बवंडर उठ रहा है, जिसने चयनकर्ताओं के सिर में भयंकर दर्द पैदा कर दिया है। सवाल सिर्फ एक खिलाड़ी को चुनने का नहीं है, बल्कि टी20 विश्व कप 2026 के लिए एक ऐसे मोहरे को फिट करने का है, जहां एक का करियर हमेशा के लिए सेट हो जाएगा, तो दूसरे के सामने शायद गेम ओवर का खौफनाक बोर्ड लग जाएगा।

मिशन 2026 की पटकथा अभी से लिखी जा रही है और टीम का खाका लगभग शीशे की तरह साफ हो चुका है। ओपनिंग जोड़ी की तस्वीर तो मानो पत्थर की लकीर बन गई है। एक छोर पर होंगे गेंदबाजों के काल साबित होने वाले अभिषेक शर्मा, तो दूसरे छोर पर 15 साल का वो वंडर किड वैभव सूर्यवंशी। जरा सोचिए, जो बच्चा 237 की खौफनाक स्ट्राइक रेट से बैटिंग करता हो और 72 गगनचुंबी छक्कों की बारिश कर चुका हो, वो भला डगआउट में बैठकर बेंच थोड़ी गर्म करेगा! वो तो मैदान पर गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने के लिए ही बना है।

मिडिल ऑर्डर का किला भी पूरी तरह से महफूज और लॉक है। कप्तानी का ताज पहने श्रेयस अय्यर नंबर 4 पर मोर्चा संभालेंगे, और उनके ठीक पीछे नंबर 5 पर उपकप्तान तिलक वर्मा होंगे। ये दोनों ऐसे शातिर धुरंधर हैं जो न सिर्फ लड़खड़ाती पारी को संभालना जानते हैं, बल्कि आखिरी ओवरों में मैच को अपने शाही अंदाज में फिनिश करने का भी माद्दा रखते हैं।

लेकिन सारी जंग, सारी जद्दोजहद और सारा पेंच आकर फंसा है नंबर 3 की उस इकलौती कुर्सी पर। इस शाही कुर्सी के दावेदार दो बब्बर शेर हैं और दोनों ही आमने-सामने दहाड़ रहे हैं संजू सैमसन और ईशान किशन।

एक तरफ संजू सैमसन हैं। इस बंदे की क्लास, उसकी टाइमिंग और वो हीरो वाला स्वैग किसी को भी अपना मुरीद बना ले। जब संजू का बल्ला चलता है, तो वो गेंदबाजों की बेरहमी से धुलाई करते हैं और देखने वालों को लगता है मानो कोई खूबसूरत कविता गढ़ी जा रही हो। टी20 विश्व कप में उनके बल्ले से निकली वो खूंखार मैच-जिताऊ पारियां और विकेट के पीछे उनकी चीते जैसी फुर्ती उनके दावे को किसी चट्टान की तरह मजबूत बनाती है।

वहीं दूसरी तरफ ईशान किशन खड़े हैं बिल्कुल बेखौफ, बिंदास और निडर! यह लेफ्ट-हैंडर बल्लेबाज जब अपने असली रंग में होता है, तो 200 की स्ट्राइक रेट से गदर मचाने की ताकत रखता है। वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक ठोकने का भौकाल और टी20 विश्व कप जीत में उनकी उस अहम भूमिका को कोई कैसे भूल सकता है? और सबसे बड़ी बात, अभी उनकी उम्र महज 26 साल ही तो है।

अब बीसीसीआई के सामने सबसे बड़ा और क्रूर धर्मसंकट है। दोनों ही खिलाड़ी आईपीएल से लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट तक रनों का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं, दोनों अपने दम पर मैच का रुख पलटने वाले मैच विनर हैं और दोनों के ही फैंस किसी कट्टर आर्मी से कम नहीं हैं जो सोशल मीडिया पर अपनी जान छिड़कते हैं। लेकिन क्रिकेट का कड़वा सच यही है कि अगर संजू को मौका मिला, तो ईशान का टी20 करियर ठंडे बस्ते में चला जाएगा, और अगर ईशान को चुना गया, तो संजू का दिल टूट जाएगा।

सच कहूं तो 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के इस तूफानी आगमन ने टीम इंडिया में ऐसी आग लगा दी है कि पहले से जमे हुए सीनियर्स की नींदें हराम हो चुकी हैं। अब बस इंतजार इस बात का है कि चयनकर्ताओं की इस बिसात पर कौन सा शेर बाजी मारता है और किसे खामोशी से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है!

04/06/2026

बसनिया चट्टी में 29 नवंबर 2005 मे जो हत्याकांड मे हुआ उसका हिसाब यदि तत्काल हो गया होता आज जो धुरधंर बने फिरते है उनका नामो निशान मिट गया होता !
#गाजीपुर

03/06/2026

जब से अनिल अग्रवाल जी IPL में बिहार की टीम होनी चाहिए तब से केंद्र सरकार को मिर्ची लगी है की बिहार और वहां के बिजनेस मैन कैसे आगे बढ़ सकता है बाद बाकी अंबानी और अडानी तो दूध के धुले हैं l

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