Atul Rai

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गुरुर की सबसे गलत बात यहीं है कि वो कभी

Photos from Atul Rai's post 11/06/2026

ये आईपीएल नहीं है बाबू. इंटरनेशनल क्रिकेट में पाटा विकेट नहीं मिलते और ना ही बाउंड्री छोटी है कि छक्कों का रिकॉर्ड टूट जाए.

कुछ इन पंक्तियों के साथ ट्रोलिंग गैंग महज 15 साल के बच्चे के पीछे पड़ी है, जैसे कि बस इंतजार में बैठी हो कि एक खराब इनिंग आए और मधुमक्खियों की तरह क्रिकेट के गुलिस्तां के नए फूल पर टूट पड़ो. सोशल मीडिया, श्रीलंका में ट्राई सीरीज के पहले मैच में वैभव सूर्यवंशी की नाकामी के जश्न में डूबा है. तथाकथित क्रिकेट पंडित वैभव को इंटरनेशनल मैच का प्रेशर, पिच की क्वालिटी और बाउंड्री का साइज बताने के लिए बेहाल है.

अब उन्हें कैसे बताऊं कि जिस उम्र में आप बाप के पैसे पर ठेले पर मैगी चाट रहे थे, उससे कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने 22 गज की पट्टी पर इतिहास गढ़ दिया है. अब आप अगर वैभव सूर्यवंशी को पहले मैच में उनकी 14 रन की पारी के लिए ट्रोल करने में लगे हैं तो फिर अपने पहले मैच में 0 पर आउट हो जाने वाले सुरेश रैना और महेंद्र सिंह धौनी से क्या कहेंगे. ये दोनों खिलाड़ी तो आज लीजेंड कहे जाते हैं. इन्होंने भी घरेलू क्रिकेट ने रनों का अंबार लगाया था और अपने पहले अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट में फेल रहे थे.

दरअसल, वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पर की जा रही लानत–मलानत उस कुत्सित सोच का नतीजा है जिसमें असफल लोग ये सोचने में परेशान रहते हैं कि दूसरों को भी अपनी हालत में कैसे खींचा जाए. ये अकर्मण्य लोग हैं. अपनी जिंदगी से तंग आए हुए लोग जिन्हें कामयाब लोग चुभते हैं, और अगर वो कामयाब शख्स महज 15 साल का बच्चा है तो फिर ये नाकाबिल–ए–बर्दाश्त है.

जिन्हें लगता है कि वैभव सूर्यवंशी ने IPL में पाटा विकेट पर रन बनाकर मजमा लूट लिया है तो फिर उन्हें जिम्बाब्वे में हुए U 19 वर्ल्ड कप में वैभव सूर्यवंशी के बैटिंग का हाईलाइट्स देखना चाहिए. फाइनल में महज 80 गेंद पर 175 रन कूटा था लड़के ने.

अगर वैभव सूर्यवंशी कहते हैं कि मैं इंटरनेशनल क्रिकेट में अगले 20 साल डॉमिनेट करने आया हूं तो यह घमंड नहीं बल्कि बचपन से की गई जीतोड़ मेहनत का आत्मविश्वास है. रिकॉर्ड्स ऐसे ही नहीं बना करते. सूर्यवंशी अपनी मेहनत से अपना वैभव गढ़ते हैं.

10/06/2026

बीसीसीआई के बंद कमरों में इस वक्त एक ऐसा बवंडर उठ रहा है, जिसने चयनकर्ताओं के सिर में भयंकर दर्द पैदा कर दिया है। सवाल सिर्फ एक खिलाड़ी को चुनने का नहीं है, बल्कि टी20 विश्व कप 2026 के लिए एक ऐसे मोहरे को फिट करने का है, जहां एक का करियर हमेशा के लिए सेट हो जाएगा, तो दूसरे के सामने शायद गेम ओवर का खौफनाक बोर्ड लग जाएगा।

मिशन 2026 की पटकथा अभी से लिखी जा रही है और टीम का खाका लगभग शीशे की तरह साफ हो चुका है। ओपनिंग जोड़ी की तस्वीर तो मानो पत्थर की लकीर बन गई है। एक छोर पर होंगे गेंदबाजों के काल साबित होने वाले अभिषेक शर्मा, तो दूसरे छोर पर 15 साल का वो वंडर किड वैभव सूर्यवंशी। जरा सोचिए, जो बच्चा 237 की खौफनाक स्ट्राइक रेट से बैटिंग करता हो और 72 गगनचुंबी छक्कों की बारिश कर चुका हो, वो भला डगआउट में बैठकर बेंच थोड़ी गर्म करेगा! वो तो मैदान पर गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने के लिए ही बना है।

मिडिल ऑर्डर का किला भी पूरी तरह से महफूज और लॉक है। कप्तानी का ताज पहने श्रेयस अय्यर नंबर 4 पर मोर्चा संभालेंगे, और उनके ठीक पीछे नंबर 5 पर उपकप्तान तिलक वर्मा होंगे। ये दोनों ऐसे शातिर धुरंधर हैं जो न सिर्फ लड़खड़ाती पारी को संभालना जानते हैं, बल्कि आखिरी ओवरों में मैच को अपने शाही अंदाज में फिनिश करने का भी माद्दा रखते हैं।

लेकिन सारी जंग, सारी जद्दोजहद और सारा पेंच आकर फंसा है नंबर 3 की उस इकलौती कुर्सी पर। इस शाही कुर्सी के दावेदार दो बब्बर शेर हैं और दोनों ही आमने-सामने दहाड़ रहे हैं संजू सैमसन और ईशान किशन।

एक तरफ संजू सैमसन हैं। इस बंदे की क्लास, उसकी टाइमिंग और वो हीरो वाला स्वैग किसी को भी अपना मुरीद बना ले। जब संजू का बल्ला चलता है, तो वो गेंदबाजों की बेरहमी से धुलाई करते हैं और देखने वालों को लगता है मानो कोई खूबसूरत कविता गढ़ी जा रही हो। टी20 विश्व कप में उनके बल्ले से निकली वो खूंखार मैच-जिताऊ पारियां और विकेट के पीछे उनकी चीते जैसी फुर्ती उनके दावे को किसी चट्टान की तरह मजबूत बनाती है।

वहीं दूसरी तरफ ईशान किशन खड़े हैं बिल्कुल बेखौफ, बिंदास और निडर! यह लेफ्ट-हैंडर बल्लेबाज जब अपने असली रंग में होता है, तो 200 की स्ट्राइक रेट से गदर मचाने की ताकत रखता है। वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक ठोकने का भौकाल और टी20 विश्व कप जीत में उनकी उस अहम भूमिका को कोई कैसे भूल सकता है? और सबसे बड़ी बात, अभी उनकी उम्र महज 26 साल ही तो है।

अब बीसीसीआई के सामने सबसे बड़ा और क्रूर धर्मसंकट है। दोनों ही खिलाड़ी आईपीएल से लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट तक रनों का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं, दोनों अपने दम पर मैच का रुख पलटने वाले मैच विनर हैं और दोनों के ही फैंस किसी कट्टर आर्मी से कम नहीं हैं जो सोशल मीडिया पर अपनी जान छिड़कते हैं। लेकिन क्रिकेट का कड़वा सच यही है कि अगर संजू को मौका मिला, तो ईशान का टी20 करियर ठंडे बस्ते में चला जाएगा, और अगर ईशान को चुना गया, तो संजू का दिल टूट जाएगा।

सच कहूं तो 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के इस तूफानी आगमन ने टीम इंडिया में ऐसी आग लगा दी है कि पहले से जमे हुए सीनियर्स की नींदें हराम हो चुकी हैं। अब बस इंतजार इस बात का है कि चयनकर्ताओं की इस बिसात पर कौन सा शेर बाजी मारता है और किसे खामोशी से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है!

04/06/2026

बसनिया चट्टी में 29 नवंबर 2005 मे जो हत्याकांड मे हुआ उसका हिसाब यदि तत्काल हो गया होता आज जो धुरधंर बने फिरते है उनका नामो निशान मिट गया होता !
#गाजीपुर

03/06/2026

जब से अनिल अग्रवाल जी IPL में बिहार की टीम होनी चाहिए तब से केंद्र सरकार को मिर्ची लगी है की बिहार और वहां के बिजनेस मैन कैसे आगे बढ़ सकता है बाद बाकी अंबानी और अडानी तो दूध के धुले हैं l

31/05/2026

15 साल का बच्चा और उसके खिलाफ बॉडी लाइन बाउंसर...

गुजरात टाइटंस के पेसर्स ने वैभव सूर्यवंशी के खिलाफ जानलेवा बाउंसर की बारिश कर दी। गेंद सीधा कान के पास। एक-दो नहीं, लगातार।

इरफ़ान पठान से देखा नहीं गया। मैच के बीच X पर लिख दिया:
"15 साल के वैभव सूर्यवंशी को रोकने के लिए बॉडी लाइन बॉलिंग मुझे ठीक नहीं लगती। मुझे पता है कि वह बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेल रहा है लेकिन मेरे अंदर का पिता इससे सहमत नहीं है।"

यूट्यूब पर तो इरफ़ान और इमोशनल हो गए। बोले:
"एक पिता के तौर पर जब मैंने उसे देखा, तो बॉल उसके कान पर लगी। बाउंसर की बौछार थी। हमने खिलाड़ियों को बाउंसर के खिलाफ जान गंवाते देखा है। बेशक प्लानिंग शानदार रही होगी। मुझे डर लग रहा था। मैं इससे सहमत नहीं हूं।"

"मैं समझता हूं कि आप प्रोफेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं। मैं यह समझता हूं, लेकिन मैं एक बेटे का पिता भी हूं। मैं बहुत मुश्किल स्थिति में था।"

"मुझे उम्मीद है कि वह अपने हेलमेट में एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन इस्तेमाल करेगा। ऐसा इसलिए है कि लोग उसे बाउंसर फेकेंगे। गुजरात टाइटन्स के बॉलर्स की बॉडी लाइन, एक 15 साल के लड़के के खिलाफ उसे बाउंसर से आउट करने की कोशिश।"

क्रिकेट का नियम कहता है: मैदान पर उम्र नहीं देखी जाती।
पर इंसानियत का नियम कहता है: 15 साल का बच्चा है यार।

गुजरात की स्ट्रैटेजी सही थी या गलत? वैभव प्रोफेशनल है तो ट्रीटमेंट भी प्रोफेशनल मिलेगा। पर जब बॉल कान के पास से निकले तो किसी भी पिता का कलेजा मुँह को आ जाएगा।

वैभव ने फिर भी पुल मारा। अगली बॉल स्टैंड में। यही जवाब होता है खौफ का।

आप किसके साथ हो? इरफ़ान पठान वाले इमोशन के साथ या गुजरात वाले प्रोफेशनल प्लान के साथ? 👇

28/05/2026

सारे IPL कप्तानों को तराजू के एक पलड़े में फेंक दो,
दूसरे पलड़े में RCB का जांबाज रजत पाटीदार खड़ा कर दो।
भाई पलड़ा टूट जाएगा, पर पाटीदार नीचे नहीं आएगा - इतना वजन है इस बंदे के बैट में!

BCCI वाले अभी भी AC में बैठे हैं,
पर स्टेडियम चीख-चीख के बोल रहा है - ये हीरा है।
सूर्या का उत्तराधिकारी? अरे छोड़ो, ये तो सूर्या + धोनी + कोहली का मिक्सचर है।
वनडे की कप्तानी का ताज? बिना इलेक्शन के रजत के सिर पे रख दो।

2027 में साउथ अफ्रीका की सरजमीं पे सूखा खत्म करना है?
तो पेपर-कलम निकालो, कॉन्ट्रैक्ट लिखो - "कप्तान रजत पाटीदार"।
क्योंकि क्वालिफायर-1 में जो कत्लेआम मचाया,
उसके बाद तो सिलेक्टर भी कुर्सी से उछल गए।

33 बॉल... 93* रन... 5 चौके... 9 छक्के।
भाई ये पारी नहीं थी, GT के बॉलिंग अटैक की रिपोर्ट कार्ड थी।

राशिद खान को लॉन्ग-ऑन पे पर टांग दिया,
सिराज को देख के बोला "नेट में प्रैक्टिस करो
बाकी बॉलर्स का तो नाम लेते-लेते ओवर खत्म हो गया।

नेहरा जी डगआउट में कैलकुलेटर मांग रहे थे -
"भाई ये स्ट्राइक रेट है या साउथ अफ्रीका का STD कोड?"

ये सीजन का दूसरा तूफान था।
पहले वाले में बॉलर्स उड़े थे, इस वाले में तो कप्तानी की लाइन में लगे सारे पंडित जी उड़ गए।

254 का पहाड़ खड़ा किया RCB ने।
GT वाले चढ़ने आए थे, ऑक्सीजन खत्म हो गई।
63 पे 5 डाउन... गिल भाई की जेट अब रिवर्स गियर में है।

आंख बंद करो, सीन इमेजिन करो...
2027 वर्ल्ड कप फाइनल, वांडरर्स, जोहान्सबर्ग।
टॉस के लिए निकल रहा है कप्तान रजत पाटीदार,
बगल में खड़ा है ब्रह्मास्त्र - किंग कोहली।
टेबल माउंटेन गवाह बनेगा जब कमेंटेटर चिल्लाएगा - "ट्रॉफी इज कमिंग होम"।

GT ने "Unstoppable" का बैनर लगाया था,
पाटीदार ने पूरे पोस्टर को ही स्टॉप कर दिया।
अब वो बैनर हॉस्पिटल के बाहर लगेगा - "Get Well Soon GT"।

🔥 = 33 बॉल में GT का पूरा प्लान जला दिया
💣 = रजत ने बैट नहीं, बुलडोजर चलाया
👑 = 2027 में साउथ अफ्रीका फतह करने वाला कप्तान

24/05/2026

आज के मैच में विराट कोहली ने ट्रैविस हेड को जाने कितना कुछ बोला लेकिन ट्रैविस हेड बस मुस्कुराता रहा..
अभी जब मैच हारने के बाद सब हाथ मिलाने लगे तो ट्रैविस हेड ने हाथ आगे बढ़ाया लेकिन विराट कोहली ने उसे ऐसे इग्नोर किया जैसे वो कोई छोटा मोटा खिलाड़ी हो..और सच कहूँ तो खेल के मैदान में कोई छोटा होता ही नहीं है फिर वो तो ट्रैविस हेड है..
विराट कोहली का यही स्वभाव उसे सचिन के आस पास भी नहीं आने देता है..यही घमंड है जो उसे टेस्ट क्रिकेट में 10000 रन भी पूरे नहीं करने दिया..
रही बात ट्रैविस हेड की तो वो बस विराट को "2023" बोल देता तो इसको बरनाल की जरूरत तुरंत पड़ जाती..मगर दिक्कत ये है कि कोहली अपनी इन्हीं ओछी हरकतों की वजह से गाली भी खाता है..
अभी विराट के पंखे आयेंगे और रोयेंगे..लेकिन इनकी बुद्धि इतनी कम है कि इनको ये भी नहीं समझेगा कि ट्रैविस हेड मेहमान खिलाड़ी है..आपके बीच मैदान में जो भी हुआ उसे वहीं खत्म करके आगे बढ़ना ही एक सच्चे खिलाड़ी कि पहचान है..हाथ नहीं मिलाने से विराट कोहली छोटा साबित हो रहा है, ना कि ट्रैविस हेड..!

24/05/2026

जिंदा रहेंगे तो पलस्तर होता रहेगा।
अभी AC की सख़्त जरूरत है😃.l

22/05/2026

मैं इस पर पहले भी में लिख चुका हूँ, फिर भी दोबारा कह रहा हूँ। बहुत से राजपूत युवा ये बात कमेंट मे लिख के ऑर्गज्म का प्राप्ति करता है शुक्ला परिवार के कारण आनंद मोहन जेल गए , लेकिन सच्चाई यही है कि Anand Mohan के कारण ही Munna Shukla को जेल जाना पड़ा। यह बात पूरा बिहार जानता है कि शुक्ला परिवार आनंद मोहन की राजनीति के कारण बर्बाद हुआ। दो दो सहादत हुआ
छोटन शुक्ला या उनका परिवार कोसी क्षेत्र में लड़ाई करने नहीं गया था। आनंद मोहन अपने राजनीतिक विस्तार और संघर्ष के कारण तिरहुत पहुँचे। जमुना यादव से उनका टकराव हुआ, गाली-गलौज और तनाव बढ़ा तब उन्होंने छोटन शुक्ला को केशरिया भेजा बताया जाता है कि वे केसरिया उस रूट से जाना नहीं चाहते थे,वो लालगंज या कुढ़नी से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन आनंद मोहन अपना बेइज्जती का बदला लेने के लिए केशरिया भेजे लेकिन उन्हें उसी रास्ते से भेजा गया और उसी क्रम में उनकी हत्या हुई। अगर वे उस रास्ते से नहीं गए होते, तो शायद हत्या भी नहीं होती।
छोटन शुक्ला और भूटकुन शुक्ला के मौत के बाद मुजफ्फरपुर छोड़कर भाग गए आंनद मोहन , और जी कृष्णईया कांड मुजफ्फरपुर के भूमिहार को बर्बाद कर गया सैकड़ो लोग केस से परेशान हो गए दर्जनों लोग उसके आग मे झूलस गए चाहे वो प्रोफेसर अरुण कुमार हो या पूर्व मंत्री अख़लाख़ अहमद सभी का परिवार बर्बाद हुआ और बेहद बुरा तरिके से इन्हे पीटा गया था क्या इस्थिति था उस समय मुजफ्फरपुर का डीएम के हत्या के बाद का सब भूमिहार ही झेला आनंद मोहन तो उसके बाद राजनितिक गोटी फिट करने लगे आनंद मोहन की लड़ाई के कारण पूरे मुजफ्फरपुर-दियारा क्षेत्र में भूमिहार बनाम लालू &रामविचार राय गुट के बीच लंबे समय तक संघर्ष चला। इसमें दर्जनों भूमिहार मारे गए और राजनीतिक रूप से भारी नुकसान हुआ।
साहेबगंज, पारू और बरुराज जैसे इलाकों में भूमिहार राजनीति कमजोर हुई, और ये घटना के बाद से वहाँ राजपूत नेताओं का उभार शुरू हुआ। तब तक वहाँ भूमिहार ही विधायक बनते थे थे फिर भूमिहार लड़ने लगे और राजपूत नेता बनने लगे दूसरी ओर आनंद मोहन 1998 में लालू यादव से मेलमिलाप कर लिए सैकड़ो भूमिहार का कुर्बानी पे मिट्टी लगा दिये राजनीति में समीकरण बदलते रहे, लेकिन नुकसान झेलने वाले लोग अलग थे।
जब आनंद मोहन यहाँ आए थे, तब वे थ्रीनॉट रायफल के साथ आए थे, लेकिन बाद 47 जैसी ताकत लेकर गए। इसलिए शुक्ला परिवार को लेकर यह कहना कि “आनंद मोहन उनके कारण जेल गए ये चुतियापा है , आनंद मोहन के कारण तिरहुत के भूमिहार ने खून से लेकर राजनितिक जमीन तक खोया तुमने क्या खोया आनंद मोहन जेल मे भी सुविधाएं के साथ थे लेकिन शुक्ला परिवार दो दो मर्द का मौत झेल रहा था
अगर अभी मुन्ना शुक्ला जेल गए तो क्या आनंद मोहन के कारण गए हकीकत ये है की राजनितिक लड़ाई के कारण आनंद मोहन जेल गए इसलिए जो लड़का सब लिखता है वो गलत लिखकर ऑर्गज्म का प्राप्ति मत करो । लेकिन यह भी उतना ही सच है कि उस दौर की लड़ाइयों में कई साधारण भूमिहार परिवार बर्बाद हुए, कई लोग मारे गए। पारू, साहेबगंज और आसपास के इलाकों में 1994 के बाद जो संघर्ष हुआ, उसका दर्द आज भी बहुत लोग जानते हैं।

नोट -बिहार का कोई ऐसा डॉन नहीं था जो नया टोला जाकर छोटन शुक्ला से आशीर्वाद न लिया है
न इन जैसा कोई न पहले आया न इनके बाद आएगा
ऐसा ऐसा समांग हम खो दिये और हमपर एहसान जताते हो अरे
.प्यासा है तभी समुन्द्र का वजूद है
मेरे किरादार से ही तो तेरी कहानी मज़बूत है...

20/05/2026

अंकित बैयानपुरिया जो कि कुम्हार जाति से आते हैं और 75 दिन फिटनेस चैलेंज से फेमस हुए फिर प्रधानमंत्री स्वयं उनसे मिले थे। हाल में ही उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के अखाड़ों में भयंकर जातिवाद है और एक जाति (इशारों में जाट) किसी और को बर्दाश्त नहीं करते।

आरक्षण आंदोलन के बाद उगे हरियाणा के नास्तिक जाट , जाट नस्ल वाले जाट, जाट धर्म वाले जाट , जातिवाद से लड़ने वाले जाट , पाखंड से लड़ने वाले जाट क्रांतिकारी हैं। सभी के सभी अंकित बैयानपुरिया के पीड़ा पर चुप हैं या विरोध में बोल रहे हैं।

क्रांतिकारी नकुल ढुल , क्रांतिकारी हर्ष चिंकारा , क्रांतिकारी बिजेंद्र सिंह , क्रांतिकारी मनप्रीत सिंह व अन्य किसान व पहलवान आंदोलन के सारे क्रांतिकारी चुप हैं या प्रश्न पूछ रहे हैं कि अंकित बैयानपुरिया उस अखाड़े का नाम बता दे जहां उस से भेदभाव हुआ है। कुछ तो सीधे बता रहे हैं कि वो तो पहलवान ही नहीं रहा है।

अभी अगर यहीं बैयानपुरिया बयान दे दिया रहता कि उसे मंदिर मे प्रवेश से पहले जाति पूछी गई थी तो सब उसे कंधे पर बिठा चुके होते। धर्म का विनाश करने अपनी बुग्गी लेकर निकल चुके होते।

इस देश में जातिवाद का आरोप तभी सच लगता है जब सामने ब्राह्मण या ठाकुर हो।

बाक़ी सभी जातियों का जातिवाद दूध-भात होता है। भले वो EBC/दलित जातियों को मारपीटें कुछ भी करें।

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