Course on computer concept
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Course on computer concept Education
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Big Sky News खबर वो जो आप तक पहुंचना जरूरी है।।।।।
10/01/2023
13/06/2022
04/01/2022
DNIA टेस्ट क्यों जरुरी है???
DNIA application integrate studies from different sciences like genetics, embryology, Dermatoglyphics, anthropology, psychology and neurosciences with biometrics.
• क्या आप जानते हैं की भारत में प्रतिवर्ष १२००० से अधिक स्टूडेंट्स परीक्षा सम्बंधित तनाव के कारण आत्महत्या करते हैं ?
• क्या आप जानते हैं की एक दो साल का बच्चा भी तनाव का शिकार हो सकता है?
• बचपन अब बच्चों का खेल नहीं है
और आप सोचते हैं की यह आपके बच्चे के साथ नहीं हो सकता ?
ठीक ?
क्योंकि आप अपने बच्चे को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, और अपने बच्चों की सभी जरूरतों के बारे में पूर्णतया समझते हैं.
तो क्या आप कुछ सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं ?
अपने बच्चे के बारे में………???
एक पेन और कागज लीजिये और
अपने जवाब लिखिए………
1. आपका बच्चा अच्छी तरह से कैसे सीखता है? “करकर” “देखकर” या “सुनकर“?
2. आपका बच्चा किस चीज में कुशल है? काम की योजना में या काम करने में.?
3. क्या आपका बच्चा “तार्किक” है या “रचनात्मक”?
4. क्या आपके बच्चे में कोई छुपी हुई विशेष प्रतिभा है, जो आप नहीं पहचानते ?
5. क्या आपका बच्चा उससे अधिक बुद्धिमान है जितना आप उसे समझते हैं?
6. क्या आप अपने बच्चे की ९ प्रकार की बुधिम्तायों में से सबसे ज्यादा प्रभावशाली बुधिमता के बारे में जानते हैं?
7. क्या आप वास्तव में “रूचि” और “प्रतिभा” में अंतर समझते हैं?
क्या आपको उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर नहीं मिल रहे हैं ? और क्या आप वास्तव में अपने बच्चे को जानना चाहते हैं???
यह सभी उत्तर तथा और भी बहुत कुछ आप अपने बच्चे के बारे में DNIA के द्वारा जान सकते हैं.
DNIA की मदद से आप अपने बच्चे की जन्मजात प्रतिभाएं, कैरियर चयन और मस्तिष्क के विकास के कई पहलूओं के बारे में जान सकते हैं.
http://www.exploringbrains.com
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TEAM
EXPLORING BRAINS
12/10/2021
................सही कैरियर का चुनाव..............
अभी हाल ही में कोचिंग केन्द्रो में पढ़ने वाले छात्रों की आत्महत्या किये जाने की खबरें प्रकाशित हुई थी। इन खबरों से मन में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि
आखिर क्या वजह है, जिससे ये छात्र आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहें हैं?
कहीं माता-पिता, कोचिंग संस्थानों और समाज के द्वारा उनके मन पर डाले जा रहे प्रतिकूल दबाव के कारण तो ऐसा नहीं हो रहा?
हमें अपने होनहारों को उनके मन के अनुकूल कैरियर चुनने में मदद करनी चाहिए ना की समाज या दूसरों के दबाव में आकर।
चलिए हम एक मछली, एक कुत्ता और एक चिड़िया के उदाहरण को देखते हैं, यदि तीनो से ही तैराक बनने के लिए कहा जाय, तो मछली वास्तव में बहुत अच्छी तैराक बनेगी, कुत्ता सिर्फ थोड़ा सा ही तैर पायेगा, और चिड़िया तो बेचारी पानी में घुस ही नही पायेगी और बेरोजगार ही रह जाएगी। तीनों की अपनी अलग-अलग शक्तियाँ हैं और तीनो को हमें एक ही कैरियर चुनने के लिए नहीं कहना चाहिए।
लेकिन आज के दौर में हम यही काम अपने बच्चों के साथ कर रहें हैं, हम सभी अपने बच्चों की रुचियाँ और विशेषताओं की परवाह किये बिना उन्हें इंजीनियर्, डॉक्टर और मैनेजर बनाना चाहते हैं।
07/10/2021
कैसे होता है मिड
ब्रेन एक्टिवेशन
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मिड ब्रेन एक्टिव होने पर बच्चा आंख पर पट्टी बांधकर •ाी चीजें और रंग पहचान लेता है। उसके लिए आंखों पर पट्टी बांधकर क्रिकेट खेलना मुमकिन होता है। उसे जटिल से जटिल रास्ता खोजने में कोई दिक्कत नहीं आती। इतना ही नहीं, इस थैरेपी के बाद बच्चे सामने खड़े हुए व्यक्ति के मनो•ााव तक को तुरंत समझ लेते हैं। सामने वाला व्यक्ति उनके प्रति क्या सोच रहा है या उसके मस्तिष्क में इस समय क्या चल रहा है, यह •ाी उन्हें पता चल जाता है।
महा•ाारत का संजय इस कलियुग में •ाी है।
शिमला के बच्चे 4-16 साल की उम्र के बच्चे सुई में धागा डालने का काम आंख बंद करके •ाी बड़ी आसानी से कर लेता है। रंगों की पहचान और सामने वाले की नकल तो उसके बाएं हाथ का खेल है। आंखें बंद करके साइकिलिंग या स्केटिंग उसके लिए सामान्य बात है। लेकिन उसे यह कला महा•ाारत के संजय की तरह वरदान में नहीं मिली है, बल्कि उसने ट्रेनिंग से अपने मिड ब्रेन को एक्टिव किया है। आज वह ऐसा काम करने में सक्षम है जो शायद ही कोई आंख बंद करके कर सकता हो। प्राय: स•ाी महानगरों में मिड डे एक्टिवेशन की सुविधा उपलब्ध है जहां बच्चों को देखने का काम अन्य इंद्रियों के माध्यम से करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मिड ब्रेन एक्टिव होने से ही ऐसा कर पाते है। जापान में यह थ्योरी 30 साल से •ाी पुरानी है, लेकिन Shimla में यह नई है। मिड ब्रेन को एक्टिव किया जाता है। इन सेंटरों पर बंद कमरे में ऐसे रिलैक्स और हैपी चाइल्ड को यह ट्रेनिंग दी जाती है, जिसकी उम्र 4 से 16 साल से कम हो। ट्रेनिंग के दौरान बंद कमरे में बच्चों को साउंडवेब देते हैं और फिर रिलैक्स होने के लिए छोड़ देते हैं, फिर साउंडवेब देते हैं। बार-बार दोहरायी जाने वाली इस प्रक्रिया में प्रैक्टिस से बच्चे कलर की पहचान करने लगता हैं। हां, यह जरूरी नहीं है कि प्रशिक्षण का स•ाी बच्चों पर समान असर हो।
Bhupesh Sharma का कहना कि इंसान के ब्रेन के अंदर नसों का जाल होता है, लेकिन इंसान पांच सेंस आॅर्गन का पूरा यूज नहीं कर पाता है। इसलिए ब्रेन के कई हिस्से सुस्त रह जाते हैं। इसे ट्रेनिंग के जरिए उन्हें एक्टिव किया जा सकता है और इसकी क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसे बेहतर से बेहतर किया जा सकता है। अगर यह बच्चा ऐसा कर पा रहा है तो इसके पीछे •ाी कुछ ऐसा ही है। अगर यह छोटी उम्र में डिवेलप किया जाए तो और बेहतर हो सकता है। इस सम्बंध में शरीर विज्ञानियों का मानना है कि बहुमुखी प्रति•ाा का धनी व्यक्ति •ाी अपनी पूरी जिंदगी में अपने ब्रेन का मात्र चार प्रतिशत ही उपयोग कर पाता है। यह चार प्रतिशत •ाी हम सिर्फ लेफ्ट ब्रेन का उपयोग करते हैं, जो लॉजिकल एप्रोच वाला है। राइट ब्रेन क्रिएटिव थिंकर होता है। दोनों ब्रेन के बीच का ब्रिज है मिड ब्रेन। वह यदि एक्टिव हो जाए, तो बच्चा आॅल राउंडर बनता है, उसका आइक्यू-ईक्यू बढ़ता है। लेफ्ट ब्रेन स्कूल की पढ़ाई, लॉजिकल सोच और याद करने के लिए काफी उपयोगी है। लेकिन, राइट ब्रेन इनोवेशन और क्रिएशन के लिए जरूरी है। हम अगर चाहते है बच्चा पूरे बैलेंस के साथ काम करे, तो राइट एवं लेफ्ट ब्रेन के बीच का पॉइंट यानी मिड ब्रेन एक्टिव करना जरूरी है।
स्मेल टचिंग से करते हैं काम। इस ट्रे्निंग में परफेक्ट होने के बाद बच्चे को हर रंग की एक विशेष स्मेल आती है। हर बच्चे की स्मेल अलग-अलग होती है। किसी को चॉकलेट की स्मेल रंगों से सकती है तो किसी को परफ्यूमस की। किसी को फूलों की गंध मिल सकती है। इसी तरह शब्दों या वस्तु को टच कर उसके कलर से उसे पढ़ा जा सकता है।
ट्रेनिंग के तीन मॉड्यूल
1.मिड ब्रेन एक्टिवेशन
विजुअल और विजन के लिए आंखों और मस्तिष्क का व्यायाम करना।
2.फोटोग्राफिक मेमोरी
सुपरसेंसरी पॉवर के जरिए बंद आंखों से किताब की लिपि पढ़ना।
3.सुपर स्पोर्ट्स
चीजों को छूकर उसका परफेक्ट आकलन करना।
16 साल की उम्र के बाद आने वाले हार्मोनल बदलाव मिड ब्रेन को पूरी तरह से एक्टिव नहीं कर पाते। इसलिए 16 की उम्र के बाद इसके एक्टिवेशन के चांस बहुत कम होते हैं। मिड ब्रेन एक्टिव होने पर बच्चा आंख पर पट्टी बांधकर •ाी चीजें और रंग पहचान लेता है। उसके लिए आंखों पर पट्टी बांधकर क्रिकेट खेलना मुमकिन होता है। उसे जटिल से जटिल रास्ता खोजने में कोई दिक्कत नहीं आती। इतना ही नहीं, इस थैरेपी के बाद बच्चे सामने खड़े हुए व्यक्ति के मनो•ााव तक को तुरंत समझ सकेंगे। सामने वाला व्यक्ति उनके प्रति क्या सोच रहा है या उसके मस्तिष्क में इस समय क्या चल रहा है, यह •ाी उन्हें पता चल जाएगा।
03/10/2021
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇DMIT क्या है?
(What is DMIT) | fullform
DMIT का full form
“Dermatoglyphics Multiple Intelligence Test “
DMIT को समजने के लिए “Dermatoglyphics” शब्द को समजना आवश्यक है| यह शब्द “Derma”और gly को मिलाकर बना हुआ है| Derma का अर्थ होता है स्किन और gly का अर्थ होता है कर्वे(Curve) पूरा अर्थ है की “स्किन पर बनने वाले कर्वे”
उंगलियों, हाथों और पैरों पर त्वचा के निशान या पैटर्न का अध्ययन करना को Dermatoglyphics कहते है|
Multiple Intelligence Test: प्रत्येक मनुष्य के पास कमसे कम 8 प्रकार की Multiple Intelligence होती है| इसके द्वारा मनुष्य के ब्रेन लॉब्स को समजना आसान होता है|
DMIT में फिंगरप्रिंट का अध्ययन करना होता है| फिंगरप्रिंट के अध्ययन से व्यक्ति की क्षमताओं को पहचानने के लिए Dermatoglyphics Multiple Intelligence Test का उपयोग होता होता है| यह एक ऐसी सुविधा प्रदान करता है की जिसमे छोटे बच्चे से लेकर किसी भी उम्र के व्यक्ति की मानसिक क्षमता क्या है और किस क्षेत्र में उसे आगे बढ़ाना चाहिए उसे जानने में मदद करता है|
DMIT टेस्ट में कभी कभी न्यूरोविज्ञान, जेनेटिक्स, मनोविज्ञान, भ्रूणविज्ञान, और Dermatoglyphics की मदद भी ली जाती है| सामान्य भाषा में कहे तो यह टेस्ट व्यक्ति की मानसिक क्षमता और टेलेंट किस क्षेत्र में अच्छा है उसे जानने के एक वैज्ञानिक विधि है|
DMIT क्यों जरूरी है? (Why DMIT is so Important)
अगर हम यह जानते है की इस क्षेत्र में हम काफी अच्छा कर सकते है तो यह हमारे लिये कितना फायदेमंद होगा| DMIT की मदद से कोई भी व्यक्ति कोनसी फील्ड में कितना अच्छ कर सकता है और उसे और बेहतर करने के लिए क्या करना चाहिए यह जाना जा सकता है|
अगर कोई विद्यार्थी है तो उसे पढ़ने लिखने और चीजे याद रखने के लिए क्या करना चाहिए| उसे किस क्षेत्र में आगे बढ़ाना चाहिए और कोनसी फील्ड को पसंद करना चाहिए जैसी हर बातो का पता DMIT के द्वारा लगाया जा सकता है|
DMIT के फायदे (Benefits of DMIT)
इसके कई सारे फायदे है| यह हम आपसे DMIT के प्रमुख फायदे दे रहे है|
इससे आंतरिक क्षमता को समजा जा सकता है|
Multiple Intelligence Distribution को समजने में आसानी होती है|
किसी भी चीज को जल्द से सिखने के लिए कोनसी पद्धति का उपयोग किया जान चाहिए|
कम्युनिकेशन स्किल को अच्छा बना सकते है|
लर्निंग सेंसिटिविटी
भविष्य में बच्चे कोनसी फील्ड में बहेतर कार्य कर सकते है यह जाना जा सकता है|
तनाव को जीवनं से दूर करने में मदद रूप होता है|
DMIT कैसे कार्य करता है?
किसी भी व्यक्ति का दिमाग विकास(Brain Development) गर्भ के 13वे सप्ताह से लेकर 21वे सप्ताह के बिच होता है| और इसी समय के दरमियान उंगलियों की फिंगरप्रिंट भी विकसित होती है| दिमाग के दो हिस्से होते है बाया दिमाग(Left Brain hemisphere) और दाहिना दिमाग (Right Brain hemisphere) और हर हिस्से में पांच लोब्स होते है जिसे ब्रेन लोब्स कहते है| कुल दस ब्रेन लोब्स दिमाग में होते है|
कई सारे रिसर्च में ऐसा पाया गया है की दिमागे के दाहिने हिस्से के लोब्स को बाए हाथ की उंगलीओं से कनेक्शन है और बाए हिस्से के दिमाग का दाहिने हाथ की उंगलियो से|कई रिसर्च में ऐसा सामने आया है की हाथ की ऊँगलीयो की पैटर्न दिमाग के बारे में बहोत कुछ जान जा सकता है|
इसी तरह फिंगरप्रिंट का अच्छे से अध्ययन करने से दिमाग के बारे में बहुत कुछ पता लागाया जा सकता है की वह कैसे कार्य करता है|
अधिक जानकारी के लिए,
आज ही संपर्क करे,
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