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17/11/2024
हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे यांच्या स्मृतीस विनम्र अभिवादन
समस्त हिंदू जन महाराष्ट्र
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14/11/2024
माऊली,
आपले आपले असतात
नेते येत नायत कुणाच्यासाठी,
आपलेच येत्यात
अजून बी यळ गेली नाय,
नगा राजकारन्यांपाय आपल्यांना तोडू
13/08/2024
सत्याची बाजू असल्यास कायदा तुमच्या बाजूने भक्कमपणे उभा राहतो याचे खूप मोठे उदाहरण.
Social responsibility of actors is not to push yoth into bad habits, Actor Gobind namdev criticise on this in very true words
अद्भुत
15/07/2021
नव्या शासन निर्णयाचे मुळे अनधिकृत गुंठेवारी धोक्यात आली आहे. संबंधित अधिकारी यांनाच थेट जबाबदार धरले जाण्याची शक्यता असलेने असे व्यवहार नोंदले जाण्याची शक्यता दुरापास्त झाली आहे. मात्र, मंजूर ले आऊट हा नवा पर्याय देखील उपलब्ध झाला आहे.
अधिक माहितीसाठी वाचा दी. 12/07/2021 चा शासन निर्णय किंवा आम्हाला तुमच्या शंका विचार 7293843333 वर
श्री लिगल
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल फीस मामले में अभिभावकों को बड़ा झटका देते हुए फीस वसूलने के मामले में रोक लगाने से साफ़ इंकार किया है। निजी स्कूलों की तरफ से ऑनलाइन क्लास के नाम पर स्कूलों की तरफ से पूरी फीस वसूलने के खिलाफ दायर पेटिशन पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ मना किया है। कोर्ट ने कहा कि हर राज्य की स्थिति अलग है, उसे वहीं हाई कोर्ट में ही उठाया जाए। अगर हाई कोर्ट के आदेश के साथ कोई समस्या है तो ही सुप्रीम कोर्ट आया जाए। हर राज्य की स्थिति अलग होने के कारण पूरे देश पर लागू होने वाला कोई एक आदेश नहीं दिया जा सकता।
निजी स्कूलों और विद्यार्थियों के माता-पिता के बीच चल रहे स्कूल फीस विवाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सुनाए फ़ैसले को पंजाब सरकार ने चुनौती देने का फैसला किया था।
कोरोना महामारी के लॉकडाउन दौरान बंद पड़े निजी स्कूलों के प्रबंधकों और बच्चों के माँ बाप बीच पैदा हुए फ़ीस के झगड़े पर हाईकोर्ट ने स्कूलों को दाख़िला और ट्यूशन फ़ीस वसूलने की छूट देने का निर्णय किया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट के बैंच ने यह भी कहा है कि लॉकडाउन दौरान स्कूल चलाने पर आया जायज खर्चा भी वसूला जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस साल स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।
इस के साथ ही विद्यार्थियों के माँ बाप को थोड़ी राहत देते हाईकोर्ट ने यह बात ज़रूर कही है कि यदि वह फ़ीस न देने की हालत में हैं तो वह अपनी वित्तीय हालत संबंधी ठोस सबूतों के साथ स्कूल को विनती कर सकते हैं और स्कूलों को इस पर गौर करना होगा और जो कोई हल न निकला तो रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास संपर्क किया जा सकेगा। जो स्कूलों की वित्तीय हालत पतली है और उन के पास रिज़र्व निधि नहीं हैं, वह ज़िला शिक्षा अफसरों के पास पहुँच कर सकेंगे।
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https://www.outlookhindi.com/country/india/supreme-court-refuses-to-entertain-parents-plea-on-school-fees-50285
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