Ground zero ki Halchal

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15/03/2026

देश में एलपीजी गैस को ले फैली भ्रांति पर समस्तीपुर प्रशासन द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस बताया गैस की कमी नहीं

02/09/2025

मोदी के मां को गाली बिहार के हर मां को गाली।

25/08/2025

समस्तीपुर के बाद लखीसराय में भी दो फर्जी प्रमाण पत्र बना कर आधार सुधार करने वाले हुए गिरफ्तार।

24/08/2025

samastipur के खानपुर प्रखंड से बिहार के अलग अलग जिलों में फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र बनाने वाले राजन कुमार को किशनगंज पुलिस ने किया गिरफ्तार। बिहार में SIR के बीच बड़ा खुलासा। क्या कुछ नया करना मजबूरी होगा चुनाव आयोग को।

20/07/2025
Photos from हिन्दू वाहिनी, भारत भाग्य विधाता's post 21/06/2025
06/06/2025

भगवान का शुक्र है कि उस दौर में सोसल मीडिया नहीं था नहीं तो राहुल गांधी से भी बड़े पप्पू थे राजीव गांधी।
आज कुछ किस्से मै आपको बताने जा रहा हूं जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे कि राजीव गांधी जैसे लोग इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री भी थे..?
उनके पास सिर्फ एक ही योग्यता थी कि वो फिरोज गांधी के बेटे थे माफ करना वो पंडित नेहरू के नाती (नवासे) थे।राजीव गांधी कोई पढ़ाई लिखाई में अच्छे नहीं थे 5 सितारा दून स्कूल से स्कूलिंग के बाद 1961 में उन्हें इंजियनीरिंग पढ़ने लन्दन के ट्रिनिटी कॉलेज कैब्रिज भेजा गया,

यहीं पर राजीव एक छोटे से रेस्ट्रॉन्ट में वेट्रेस के तौर पर काम कर रही एडवीज अंतोनियो अल्बिना माइनो जिसे आज हम सोनिया गांधी के नाम से जानते हैं के सम्पर्क में आये,1965 तक वो भोग विलास में डूबे रहे निरंतर फेल होते रहे और पास नहीं हो सके जिसके बाद कॉलेज ने राजीव को निकाल दिया, फिर राजीव ने 1966 में लन्दन स्थित इम्पीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, किन्तु वहां भी फेल हुए, उसी वर्ष राजीव की मां इंदिरा प्रधानमंत्री बनी और राजीव भारत आ गए, 1966 में दिल्ली फ्लाइंग क्लब ज्वाइन किया और प्लेन उड़ाना सीखा। अब 1970 में प्रधानमंत्री इंदिरा ने जुगाड़ लगवा कर राजीव को सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया में कमर्शियल पायलट के तौर पर नौकरी में लगवा दिया,
1971 में भारत पाक युद्ध हुआ भारतीय सेना व् वायु सेना को लाजिस्टिक स्पोर्ट के लिए पायलट्स की आवश्यकता थी और एयर इंडिया के कमर्शियल पायलट्स को रसद व् हथियार एयर ड्राप करने हेतु बुलाया गया, सारे के सारे पायलट्स तुरन्त युद्ध क्षेत्र में सेवाएं देने को आ गये सिवाय एक के और वो राजीव गांधी थे जो डर के मारे सोनिया गांधी संग व् इटली के दूतावास में जा छिपे थे, अगले 8 वर्षों तक राजीव के भाई संजीव ने उन्हें भोग विलास के सभी साधन उपलब्ध करवाए और खुद राजनीती में सक्रिय रह अपनी पकड़ मजबूत करते रहे 1980 में संजीव का काम तमाम करवाये जाने के बाद राजीव राजनीती में आये।1984 में इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने दोपहर में गोली मार दी, राजीव गांधी ने भावनाओं से ऊपर उठकर शोक संताप में समय लगाने के बजाय उसी दिन शाम को भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर अपनी तशरीफ़ रख दी,
और कांग्रेसियों को सिखों का नरसंहार करने का आदेश दे डाला, कांग्रेसियों ने स्कूलों के रजिस्टरों और वोटर लिस्ट निकाल निकाल कर सिखों के घर खोजे और घरों में घुसकर हजारों सिखों को काटा.महिलाओं से बलात्कार किया कई गर्भवती महिलाओं को जीवित ही जला दिया, कांग्रेस नेताओं के पेट्रोल पंपों से तेल सप्पलाई किया गया सिखों को उनके बच्चो को उनकी सम्पत्तियों को फूंकने हेतु, सड़क चलते सिखों के गले में टायर डालकर जला दिया गया, यहाँ तक की राष्ट्रपति जैल सिंह को भी नहीं बख्शा गया और जब वो गाड़ी में थे तो उनपर भी कांग्रेसियों ने हमला किया,गाड़ी के कांच तोड़ दिए गए, दिल्ली में कांग्रेसियों का हिंसा का तांडव शुरू हुआ और शीघ्र ही ये देश के कोने कोने में फ़ैल गया
और राजीव गांधी ने देश भर में करीब 35000 निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतरवाकर इंदिरा की मृत्यु का बदला लिया, और बाद में राजीव गांधी ने उसे “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है” वाला ब्यान देकर उसे न्यायोचित ठहरा दिया, खैर अगले चुनाव हुए और जनता ने राजीव द्वारा करवाये सिख नरसंहार को महत्व दिए बिना राजीव को इंदिरा की सहानुभूति के नाम पर 411 सीटें देकर असीम शक्ति दे दी और राजीव् ने निरंकुश होकर उस बहुमत का दुरूपयोग किया, 1985 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहबानो को न्याय देकर मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक से बचने और गुजारे भत्ते का जो मार्ग खोला था उसपर आतातायी राजीव ने अपनी अक्ल पर पड़ा बड़ा वाला भीमकाय। और अपुर्व बहुमत का प्रयोग कर मुस्लिम तुष्टिकरण का नया अध्याय लिखा और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटकर मुस्लिम महिलाओं को पुनः गुलाम बना दिया भोपाल गैस कांड हुआ हजारों निर्दोष लोगों के हत्यारे यूनियन कार्बाइड के मालिक वारेन एंडरसन को राजीव ने अमेरिकी सरकार से सौदेबाजी कर सुरक्षित अमरीका भेज दिया, क्योंकि राजीव की मां इंदिरा के बॉयफ्रेंड यूनुस खान का लड़का आदिल शहरयार जो अमेरिकी जेल में बंद था और उसे छुड़वाने हेतु राजीव ने 30,000 निर्दोष भारतियों के हत्यारे एंडरसन को अमरीका भगा दिया और आदिल शहरयार को छुड़वाकर भारत ले आया, वैसे कहा जाता है कि संजीव गांधी उर्फ़ संजय गांधी यूनुस खान की ही संतान था, सच्चाई तो राम ही जाने...राजीव में न वैश्विक कूटनीति की समझ थी न सैन्य शक्ति के सदुपयोग की अतः अपनी सिमित विवेक क्षमता से ग्रस्त राजीव गांधी ने श्रीलंका में LTTE से लड़ने भारतीय फोर्सेज जबर्दस्ती भेज दीं। और इंडियन पीस कीपिंग फोर्सेस के 1400 सैनिक मरवाये और 3000 सैनिक घायल करवाये हलांकि बाद में राजीव को थूककर चाटना पड़ा और सैनिकों को वापस बुलाना पड़ा, राजीव को अपनी उस मूर्खता के कारण ही श्रीलंका दौरे पर श्रीलंकाई सैनिक द्वारा कूटा गया था, और वो पहले व् एकमात्र प्रधानमंत्री बने जिन्हें विदेशी धरती पर विदेशी सैनिक द्वारा लतियाया गया,1989 में बोफोर्स का घोटाला खुला
जिसमे पता चला की राजीव गांधी ने सोनिया के अत्यंत “करीबी मित्र” जिसे सोनिया अपने संग इटली से दहेज़ में लायी थी और जो सोनिया राजीव के घर में ही रहता था
उस ओटावियो कवात्रोची के द्वारा बोफोर्स सौदे में राजीव ने दलाली खायी थी, राजनितिक नौटँकियां करने में भी राजीव किसी से पीछे न थे, टीवी पर आने वाले रामायण सीरियल में राम का पात्र निभाने वाले अरुण गोविल को लेकर राजनितिक यात्राएं शुरू की हिंदुओं को मुर्ख बनाकर उन्हें उनकी आस्था द्वारा विवश कर उनका वोट हथियाने हेतु, अगर श्रीलंका में भारतीय सेना की शांति दस्ता न गया होता तो पढ़े लिखे क्या तमिलनाडु, केरल, पूरा दक्षिण भारत आज की स्थिति में होता?
मतलब अंधभक्ति में इतना भी न लिखें
भारत की शांति सेना तो और भी कई देशों में जाती रहती है और माहौल शांत करके ही लौटती है इसपर कोई शक नहीं है।

06/06/2025

सरदार पटेल पर नेहरू की ओछी हरकत जिस पटेल जी के सामने नेहरू की एक नहीं चलती थी उसी नेहरू ने सरदार पटेल की मृत्यु पर अपनी ओछी हरकत से बता दिया कि महात्मा गाँधी की अल्पसंख्य नीति के कारण गाँधी और नेहरू की देश की एकता अखंडता पर कितने घटिया सोच और नीति थी। सरदार पटेल के सामने गांधी और नेहरू की एक नहीं चलती थी। उनकी मृत्यु के पश्चात....
सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जब मृत्यु हुई तो एक घंटे बाद तत्कालीन-प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एक घोषणा की। घोषणा के तुरन्त बाद उसी दिन एक आदेश जारी किया गया, उस आदेश के दो बिन्दु थे। पहला यह था, की सरदार पटेल को दी गयी सरकारी-कार को उसी वक्त वापिस लिया जाय, और दूसरा दूसरा बिन्दु था की गृह मंत्रालय के वे सचिव/अधिकारी जो सरदार-पटेल के अन्तिम संस्कार में बम्बई जाना चाहते हैं, वो अपने खर्चे पर जायें। लेकिन तत्कालीन गृह सचिव वी. पी मेनन ने प्रधानमंत्री नेहरु के इस पत्र का जिक्र ही अपनी अकस्मात बुलाई बैठक में नहीं किया और सभी अधिकारियों को बिना बताये अपने खर्चे पर बम्बई भेज दिया। उसके बाद नेहरु ने कैबिनेट की तरफ से तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद को सलाह भेजवाया की वे सरदार-पटेल के अंतिम-संस्कार में भाग न लें। ये वही नेहरू है, जिससे को सुनने के बाद दिल गुस्से से भर जाता है। लेकिन राजेंद्र-प्रसाद ने कैबिनेट की सलाह को दरकिनार करते हुए अंतिम-संस्कार में जाने का निर्णय लिया। लेकिन जब यह बात नेहरु को पता चली तो उन्होंने वहां पर सी. राजगोपालाचारी को भी भेज दिया और सरकारी स्मारक पत्र पढने के लिये राष्ट्रपति के बजाय उनको पत्र सौप दिया। इसके बाद कांग्रेस के अन्दर यह मांग उठी की इतने बङे नेता के याद में सरकार को कुछ करना चाहिए और उनका 'स्मारक' बनना चाहिए तो नेहरु ने पहले तो विरोध किया फिर बाद में कुछ करने की हामी भरी। लेकिन इस हामी के पीछे भी नेहरू ने अपने अंदर छुपे उस पटेल जी के सामने हमेशा हुए बेइज्जती को नहीं भूल सका और कुछ दिनों बाद नेहरु ने कहा की सरदार-पटेल किसानों के नेता थे, इसलिये सरदार-पटेल जैसे महान और दिग्गज नेता के नाम पर हम गावों में कुआँ खोदेंगे। यह योजना कब शुरु हुई और कब बन्द हो गयी किसी को पता भी नहीं चल पाया।
उसके बाद कांग्रेस के अध्यक्ष के चुनाव में नेहरु के खिलाफ सरदार-पटेल के नाम को रखने वाले पुराने और दिग्गज कांग्रेसी नेता पुरुषोत्तम दास टंडन को पार्टी से बाहर कर दिया। जबकि उसके संरक्षक बने गांधी ने आरम्भ में ही कहा था कि इस कांग्रेस की जो एक मात्र लक्ष्य आजादी थी जो पूरा हुआ अब इस पार्टी को समाप्त कर दिया जाय जिससे आगे कोई इसका अनुचित राजनीतिक लाभ नहीं लेने लगे, लेकिन नेहरू ने अपनी निजी स्वार्थ के कारण इसे बनाए रखा और जनमत में गांधी की उस मनसा को सही साबित कर अनुचित राजनीतिक लाभ लेता रहा। ये सब बाते बरबस ही याद दिलानी पङती हैं, जब इन कांग्रेसियों को सरदार-पटेल जी का नाम जपते देखता हूँ ।

06/06/2025

कुछ दिन पहले तक जो भारतीय राजनीतिक दल छाती पीट पीट कर चिल्ला रहे देवकी मोदी की विदेशनीति फैल है, यूके लिए रूस से आई खबर, जो उन्हें अब एक बार फिर देश में मुंह दिखाने लायक नहीं छोरा। बार बार एक्सपोज होने पर भी अपनी नीति और देश की भावना से खेलने वालो को देश से जवाब मिलना ही चाहिए। ये खबर है, पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में और भारत में भी कुछ लोगों द्वारा दावा किया गया कि दोनों देशों के बीच 2.6 अरब डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर किये गए हैं, जिसके तहत कराची में सोवियत काल के स्टील प्लांट को पुनर्जीवित किया जाएगा। रूस ने अब इन रिपोर्टों को फर्जी बताया है। रूस ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया है कि मॉस्को ने पाकिस्तान के साथ अरबों डॉलर की डील पर हस्ताक्षर किए हैं। रूस ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए भारत के साथ अपने संबंधों को पटरी से उतारने का प्रयास बताया है। रूस ने साफ तौर पर कहा कि यह अफवाह रूस और भारत के बीच प्रगाढ़ संबंधों को बिगाड़ने के इरादे से फैलाई गई। मॉस्को ने इसे पाकिस्तान में मौजूद शरारती तत्वों पर भारत-रूस की मज़बूत रणनीतिक साझेदारी को बाधित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया

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06/06/2025

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