Mukesh Gupta
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03/06/2026
"सत्ता का अहंकार जब आसमान छूने लगे, तब जमीन खिसकने की आहट सुनाई नहीं देती…!
कल तक जो खुद को बंगाल की राजनीति का अजेय किला समझ रहे थे, आज वे फुटपाथ पर आकर आमजनता से पीट रहे हैं और उनके ही विधायक दरवाज़ा तोड़कर बाहर निकल रहे हैं।इतने विधायक एक साथ हस्ताक्षर करके नया गुट बना लें और नेतृत्व भी चुन लें , यह कोई साधारण राजनीतिक घटना नहीं , बल्कि जनता और कार्यकर्ताओं के भीतर जमा हुए असंतोष का विस्फोट है।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को शायद लगा था कि पार्टी मतलब सिर्फ “परिवार” और बाकी सब कठपुतलियाँ हैं। लेकिन राजनीति में डर से भीड़ तो जुट सकती है, वफादारी नहीं।सबसे बड़ा संदेश तो उन मुस्लिम विधायकों ने दिया, जिनके बारे में दावा किया जाता था कि वे हर हाल में साथ रहेंगे।जब अपने ही लोग साथ छोड़ने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि जनता का विश्वास पहले ही जा चुका है।
इतिहास गवाह है , जिस दल में संवाद खत्म हो जाए वहां विद्रोह जन्म लेता है। और जिस नेतृत्व में अहंकार आ जाए , वहां पतन तय हो जाता है।टीएमसी को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में जनता “रानी” नहीं चुनती… सेवक चुनती है।और जब सेवक खुद को शासक समझने लगे , तो सिंहासन ज्यादा दिन नहीं टिकता।
03/06/2026
आजकल कुछ लोग समाज से अपेक्षा करते हैं कि उनकी प्रत्येक उपलब्धि पर समाज स्वतः उमड़ पड़े , बधाइयों की झड़ी लग जाए और प्रशंसा के स्वर गूंज उठें। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि सम्मान , शुभकामनाएँ और सद्भावना कभी माँगी नहीं जातीं बल्कि वे व्यक्ति के आचरण , व्यवहार और समाज के प्रति उसकी निष्ठा से स्वतः प्राप्त होती हैं।
यदि किसी व्यक्ति के कार्यों , व्यवहार अथवा निर्णयों से समाज की अंतरात्मा आहत हुई हो , समाज स्वयं को उपेक्षित अथवा ठगा हुआ महसूस करता हो , तो केवल किसी पद या नियुक्ति के आधार पर समाज से उत्साहपूर्ण समर्थन और प्रशंसा की अपेक्षा करना उचित नहीं कहा जा सकता। समाज केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का नहीं , बल्कि व्यक्ति के सामाजिक दायित्वों , उसके योगदान और उसके व्यवहार का भी मूल्यांकन करता है।
यह भी विचारणीय है कि जब समाज को आवश्यकता थी , जब समाज विभिन्न चुनौतियों और संघर्षों से जूझ रहा है , तब कौन लोग समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं और कौन लोग समाज को मझधार में छोड़कर अपने व्यक्तिगत हितों में व्यस्त हो गए हैं। समाज की स्मृति बहुत गहरी होती है प्यारे ; वह केवल पद और प्रतिष्ठा नहीं देखता , बल्कि यह भी देखता है कि कठिन समय में कौन उसके साथ था। शुभकामनाएँ और सम्मान सामाजिक विश्वास की पूंजी हैं। यह पूंजी केवल पद प्राप्त कर लेने से अर्जित नहीं होती , बल्कि वर्षों के समर्पण , सेवा , आत्मीयता और समाज के सुख-दुःख में सहभागिता से निर्मित होती है।
अतः किसी भी विषय पर समाज को दोष देने से पूर्व आत्ममंथन आवश्यक है। समाज की चुप्पी कई बार बहुत कुछ कह जाती है इसलिए कहा गया है कि "मौन सबसे बड़ी भाषा है"। यदि समाज का हृदय जीतना है , तो समाज के बीच विश्वास , अपनत्व और समर्पण का भाव भी उतना ही आवश्यक है जितनी व्यक्तिगत उपलब्धियाँ। धन्यवाद।।
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02/06/2026
समाज में कुछ विद्वान ऐसे भी हैं , जो हर सामाजिक विचार , हर सकारात्मक पहल और किसी के भी चिंतनपरक विचारपूर्ण लेख के नीचे अपने “विशेष ज्ञान” की टिप्पणी करना अपना नैतिक दायित्व समझते हैं। विशेष आश्चर्य तब होता है जब अत्यंत शिक्षित एवं प्रतिष्ठित पेशे से जुड़े लोग भी संवाद की गरिमा बढ़ाने के बजाय हर विषय में व्यंग्य , उपहास और अनावश्यक बौद्धिक श्रेष्ठता प्रदर्शित करने लगते हैं।
ज्ञात होगा कि हाल ही में एक महोदय ने सामाजिक ग्रुपों (सोशल मीडिया) पर लिखा था -“सोशल मीडिया विश्वसनीय स्रोत नहीं, यह केवल प्रचार और प्रभाव डालने का माध्यम है।”
विडंबना देखिए कि यही गूढ़ ज्ञान उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया पर ही पोस्ट किया। अर्थात् मंच अविश्वसनीय है , लेकिन उस मंच पर लिखे उनके विचार पूर्णतः प्रमाणिक और अंतिम सत्य हैं!यह वैसा ही है जैसे कोई डॉक्टर मरीजों से कहे कि “दवा पर भरोसा मत करो”… और फिर वही दवा अपनी दुकान से बेचने लगे।
कभी कहते हैं — “खोखले शब्दों से समाज नहीं बदलता”, लेकिन वही लोग प्रतिदिन सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी टिप्पणियों के माध्यम से ऐसा बौद्धिक धुआँ छोड़ते रहते हैं कि वास्तविक विषय कहीं पीछे छूट जाता है और मूल विषय को छोड़ वह अपना एक नया आईडिया समाज को परोस विषयांतरित कर देते हैं।किसी के भी विचार लेख में कमी निकालना , हर विचार पर कटाक्ष करना और हर चर्चा में स्वयं को अंतिम ज्ञानी सिद्ध करना शायद अब कुछ लोगों की आदत बन चुकी है।
सवाल ये हैं कि धरातल पर अपने समाजजनों की भलाई के खुद ने क्या किया ? पहले जो आईडिया समाज को परोसा , क्या उसे खुद पहल कर फलीभूत किया ? कौन समाज को जोड़ने का प्रयास कर रहा है और कौन हर सकारात्मक संवाद को उपहास में बदलने में लगा है ?ज्ञान तब सार्थक होता है जब वह मार्गदर्शन दे , पहल करे , प्रेरणा दे और समाधान प्रस्तुत करे , न कि केवल दूसरों को नीचा दिखाने का माध्यम बने।
समाज यह भी देख रहा है कि जो लोग “जमीनी कार्य” का सबसे अधिक शोर मचाते हैं , वे अक्सर संवाद के स्तर को सबसे अधिक गिराते हैं। हर समय उपदेश देना , दूसरों की नीयत पर प्रश्न उठाना और स्वयं को ही जागरूकता का केंद्र मान लेना , यह विद्वता नहीं, बल्कि बौद्धिक अहंकार का लक्षण है।
एक चिकित्सक का दायित्व केवल शरीर का उपचार करना नहीं होता, बल्कि समाज में संतुलन , संवेदना और सकारात्मकता का संदेश देना भी होता है। यदि शिक्षित वर्ग ही हर सार्थक चर्चा को व्यंग्य और उपहास में बदलने लगे, तो समाज में संवाद नहीं , केवल कटुता बढ़ेगी।
अतः बेहतर होगा कि कुछ स्वघोषित बुद्धिजीवी पहले अपने स्वयं के सुझावों और विचारों के विरोधाभास को समझें , फिर समाज को ज्ञान देने निकलें। क्योंकि किसी के भी सार्थक विचार पर अनावश्यक नकारात्मक टिप्पणी करना ही सामाजिक चेतना नहीं कहलाता। कभी-कभी मौन , विनम्रता और सकारात्मक सहयोग भी सबसे बड़ा ज्ञान होता है।
01/06/2026
श्रीपण्डोखर सरकार धाम में आगामी अमावस्या पर्व सोमवार 15 जून 2026 सोमवती अमावस्या से सोमवार 29 जून 2026 स्नानदान व्रत पूर्णिमा तक सम्पन्न होगा।
#विशेष अर्जी 365 दिनों में कभी भी लगाकर टोकन ले सकते हैं।
#आग्रह अमावस्या की पेशी (हाजिरी) अमावस्या से पूर्णिमा तक ही करें।
श्रीपण्डोखर सरकार आपके समस्त मनोरथ पूर्ण करें।💐
#शुभेच्छु : मुकेश कुमार गुप्ता (सागर)
31/05/2026
आज हमारी प्रिय भांजी और दामाद कीर्ति बृजनन्दन जी की 25 वीं विवाह वर्षगांठ है।
रजत विवाहोत्सव के पावन अवसर पर आप दोनों को हृदय की गहराइयों से हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
आपका दांपत्य जीवन प्रेम, विश्वास, समर्पण और मधुरता का अनुपम उदाहरण बना रहे।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपके जीवन का प्रत्येक क्षण सुख, शांति, समृद्धि और नई खुशियों से आलोकित रहे। परिवार पर पूज्यपाद सद्गुरुदेव भगवान का आशीर्वाद सदैव बना रहे।
आप दोनों सदैव स्वस्थ, प्रसन्न एवं आनंदमय जीवन व्यतीत करें तथा आने वाला हर दिन आपके जीवन में सफलता, प्रेम और मधुर स्मृतियों का नया उपहार लेकर आए।
रजतीय वैवाहिक वर्षगांठ के इस शुभ अवसर पर पुनः ढेरों मंगलकामनाएँ।
29/05/2026
सम्मानित मित्रगण ,
हमारे 33वें परिणय दिवस के अवसर पर आप सभी ने विभिन्न माध्यमों से जो शुभकामनाएँ , शुभाशीष एवं स्नेह प्रदान किया , उसके लिए हम हृदय से आभारी हैं।
आपके प्रेम , आत्मीयता और आशीर्वाद ने इस विशेष दिन को हमारे लिए अत्यंत यादगार एवं आनंदमय बना दिया।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सभी का स्नेह , सहयोग और शुभाशीष सदैव हम पर बना रहे।
सादर आभार 🙏
28/05/2026
हमारे वैवाहिक जीवन की बत्तीस वसंतों से आलोकित इस दीर्घ यात्रा के पश्चात जब आज 33 वें विवाह दिवस के द्वार पर खड़ा होकर पीछे मुड़कर देखता हूँ , तो स्मृतियों के आकाश में एक ही व्यक्तित्व सबसे अधिक दीप्त दिखाई देता है - मेरी सहधर्मिणी #श्रीमती_मधु
मेरे जीवन के आध्यात्मिक साधना-पथ पर यदि कहीं धैर्य की दीपशिखा जलती रही , सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में यदि कहीं संबल और प्रेरणा मिलती रही , तो उसके मूल में उनका मौन तप , निस्सीम त्याग , अटूट विश्वास और निष्कलुष स्नेह ही रहा है।
उन्होंने केवल जीवन-संगिनी का दायित्व ही नहीं निभाया , अपितु मेरे प्रत्येक संघर्ष में शक्ति , प्रत्येक विषाद में सांत्वना और प्रत्येक उपलब्धि में प्रेरणा बनकर मेरे अस्तित्व को पूर्णता प्रदान की है।
आज इस भावुक एवं पावन अवसर पर हृदय कृतज्ञता से भर उठता है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारा यह आत्मिक संबंध यूँ ही प्रेम , श्रद्धा , विश्वास और मंगलभाव की सुगंध से अनवरत महकता रहे।
स्नेह , सम्मान और अनंत आभार सहित…
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26/05/2026
#अभिनंदन_शुभेंदु 💐
शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चेतना किसी भी राज्य की वास्तविक पूंजी होते हैं। यदि विद्यालयों, महाविद्यालयों और धार्मिक स्थलों के आसपास का वातावरण स्वच्छ, सुरक्षित और सकारात्मक हो, तभी एक स्वस्थ एवं जागरूक समाज का निर्माण संभव है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों को अनुमति न देने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा सकता है।
यह निर्णय केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के मानसिक, नैतिक और बौद्धिक विकास की चिंता का प्रतीक है। शिक्षा के मंदिरों के आसपास नशे का वातावरण युवाओं को भटकाव की ओर ले जाता है, जबकि धार्मिक स्थलों की गरिमा भी प्रभावित होती है। ऐसे में यह पहल समाज में अनुशासन, संस्कार और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का कार्य करेगी।
आज आवश्यकता केवल आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि नैतिक और बौद्धिक विकास की भी है। जब सरकारें युवाओं के भविष्य को केंद्र में रखकर निर्णय लेती हैं, तभी समाज प्रगति और सभ्यता की सही दिशा में आगे बढ़ता है। यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकता है कि विकास का अर्थ केवल इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि स्वस्थ चरित्र और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है।
#शिक्षा #संस्कार #सामाजिक_जागरूकता #युवा_भविष्य #पश्चिम_बंगाल #सकारात्मक_विचार
26/05/2026
सौभाग्य की बात है कि मेरी पोस्टों के अनेक स्थायी पाठक हैं , एक पाठक ऐसे भी हैं जो बिना बुलाए आते हैं, बिना मुस्कुराए पढ़ते हैं और बिना नकारात्मक टिप्पणी किए कभी वापस नहीं जाते। 😄
उनकी यह निरंतरता देखकर लगता है कि मेरी पोस्टें उन्हें पसंद तो बहुत हैं, बस स्वीकार करने में संकोच होता है।
बाकी मित्र जहाँ श्रद्धा, आनंद, हास्य और संवाद लेकर आते हैं, वहीं ये महानुभाव आलोचना को अपना दैनिक योगासन मान चुके हैं। बावजूद इसके मैं इन्हें ही प्रत्युत्तर देता हूं (विगत की पोस्ट में इनकी टिप्पणी और मेरे जवाब को देखें तथा अपनी राय अवश्य दें।)
खैर… सभी प्रकार के पाठकों का स्वागत है।
प्रशंसा प्रेरणा देती है, और अनावश्यक आलोचना… Reach बढ़ा देती है। 🙏😄
24/05/2026
आज का दिन अत्यंत पावन और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज ही के दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं , बल्कि आस्था , श्रद्धा और आत्मशुद्धि का महापर्व है। इस दिन माँ गंगा की पूजा-अर्चना , स्नान एवं दान-पुण्य करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख , शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
इसी पावन अवसर पर श्री हाथीवान जी महाराज के सिद्ध धाम बरहा धाम में विशाल मेले का आयोजन भी होता है , जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु भक्त दर्शन हेतु पहुँचते हैं। श्री हाथीवान महाराज की अनन्य कृपा प्राप्त पूज्यपाद सद्गुरुदेव श्री गुरुशरण जी महाराज (पण्डोखर सरकार) के सान्निध्य में आज सभी भक्त और शिष्यगण बरहा धाम में अपने मंगल की कामना करते हैं। आज के दिन श्री हाथीवान जी महाराज के दर्शन कर सच्चे मन से अपने मनोरथों की प्रार्थना करने पर सभी दुखों , कष्टों और बाधाओं का निवारण होता है तथा भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
आइए , इस पवित्र अवसर पर माँ गंगा एवं श्री हाथीवान जी महाराज का स्मरण कर अपने जीवन में श्रद्धा , सेवा और सद्भाव का संकल्प लें।
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