Nav Chetna Rishikesh
Nav Chetna School is situated at Virbhadra, near Rishikesh. This school has been imparting education continuously for the last 20 years.
नव चेतना
सीख, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य
ऋषिकेश, बाबा नीम करौली नगर, नीम करोली हनुमान मंदिर
Admissions Open
Nav Chetna Vidya Mandir Committee, Rishikesh has been working on education, yoga, health, environmen The main aim of opening this School is to provide opportunities for all round development of the children in the nearby areas.. It is an endeavor of Nav Chetna School to give interesting and fruitful education to its children, so that children could devote themselves and learn in a fun and playful environment. The school organizes various social, cultural, historical & exhibition functions from time to time. For the mental & physical development of school children, the school has included yoga, exercises and Ayurveda in its curriculum.
नव चेतना में धूमधाम से मनाई गई राधा अष्टमी ...
नव चेतना में आज राधा अष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने राधा-कृष्ण की भक्ति से ओतप्रोत सामूहिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। बच्चों की सुंदर प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विद्यालय परिसर में भक्ति, उल्लास और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।
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भगवान विश्वकर्मा जी — सृष्टि के दिव्य शिल्पकार..
भगवान विश्वकर्मा जी को सनातन परंपरा में देवताओं के दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में उन्हें अद्भुत निर्माण-कला, वास्तुकला और शिल्पविद्या का ज्ञाता बताया गया है।
मान्यता है कि देवताओं के अनेक दिव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
ऋग्वेद में विश्वकर्मा नाम से सृष्टि के रचनात्मक और सर्वदर्शी स्वरूप का उल्लेख मिलता है।
बाद की हिंदू परंपरा में विश्वकर्मा जी को देवशिल्पी के रूप में विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
उनका संबंध निर्माण, वास्तु, शिल्प, कला और तकनीकी कौशल से जोड़ा जाता है।
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर औजारों, मशीनों और कार्यस्थलों की पूजा की जाती है।
यह पर्व हमें श्रम और हुनर के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
विश्वकर्मा जी की आराधना केवल समृद्धि के लिए नहीं, बल्कि कर्म में कुशलता और सृजनशीलता के लिए भी की जाती है।
उनका संदेश है कि ज्ञान, कौशल और परिश्रम से साधारण कार्य भी असाधारण बन सकता है..
निर्माण करने वाले प्रत्येक हाथ में सृजन की शक्ति होती है।
इसीलिए कारीगर, शिल्पकार, इंजीनियर, तकनीशियन और श्रमिक इस दिन विशेष श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
भगवान विश्वकर्मा जी हमें अपने कार्य के प्रति निष्ठा और ईमानदारी की प्रेरणा देते हैं।
उनकी पूजा हमें यह भी सिखाती है कि श्रम कभी छोटा नहीं होता और हुनर हमेशा सम्मान के योग्य है।
आइए, देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करें।
ईश्वर सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, कुशलता और उन्नति प्रदान करें।
देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी को कोटि-कोटि नमन...
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वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, शुभ कार्येषु सर्वदा॥
प्रकृति की हरियाली में गणपति बप्पा का सुंदर स्वरूप
नव चेतना एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मक सोच, कला और कल्पनाशीलता से हरी पत्तियों को एक नया रूप देते हुए भगवान गणेश जी की सुंदर आकृति तैयार की।
साधारण सी दिखने वाली हरी पत्तियों को बच्चों ने अपनी मेहनत और हुनर से गणपति बप्पा के मनमोहक स्वरूप में ढाल दिया। यह सुंदर प्रयास हमें सिखाता है कि रचनात्मकता के लिए महंगे साधनों की नहीं, बल्कि सुंदर सोच और कल्पना की आवश्यकता होती है।
बच्चों की इस अनूठी कला में प्रकृति के प्रति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण का संदेश और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था तीनों का सुंदर संगम देखने को मिलता है।
गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया..
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नव चेतना एकेडमी में हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया
हिंदी दिवस के अवसर पर नव चेतना एकेडमी, नीम करौली नगर, वीरभद्र में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान छात्र-छात्राओं ने हिंदी भाषा की समृद्धता और सुंदरता को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामने रखा।
बच्चों ने अलंकार, समास सहित हिंदी व्याकरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने हिंदी से संबंधित सुंदर एवं आकर्षक चित्र और पोस्टर भी तैयार किए।
बच्चों की रचनात्मकता और हिंदी के प्रति उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने हिंदी को समझने और उसे जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और भावनाओं की अभिव्यक्ति भी है।
बच्चों की मेहनत और सुंदर प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
विद्यालय परिवार ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
आइए, हम सभी मिलकर हिंदी का सम्मान करें और इसके प्रयोग को बढ़ावा दें।
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मिट्टी थी साधारण… मगर कल्पना ने उसे बना दिया खास..
छात्रा के नन्हे हाथों से साकार हुए गणपति बप्पा, जिनमें दिखी आस्था, कला और मेहनत की खूबसूरत झलक।
बप्पा की कृपा यूँ ही बनी रहे… गणपति बप्पा मोरया
दया, प्रेम और करुणा ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पहचान हैं।
जहाँ प्रेम होता है, वहाँ अपनापन होता है; जहाँ करुणा होती है, वहाँ इंसानियत जीवित रहती है।
आइए, हम सभी के जीवन में दया और प्रेम का प्रकाश फैलाएं और एक-दूसरे के सुख-दुःख में साथ खड़े हों।
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बाबा जी का प्रेम सदा दिलों में उजाला करता रहे,
उनकी दया हर भक्त के जीवन को खुशहाल करता रहे।
स्थूल शरीर भले ही आज हमारे बीच नहीं है,
पर बाबा का आशीर्वाद हर पल हमारे साथ बना रहे।
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🌺 बाबा नीम करोली महाराज जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🌺
आज विख्यात संत एवं महान आध्यात्मिक विभूति बाबा नीम करोली महाराज जी की पुण्यतिथि के अवसर पर नव चेतना एकेडमी, नीम करोली नगर, वीरभद्र (ऋषिकेश) में श्रद्धापूर्वक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में बाबा नीम करोली महाराज जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया।
बच्चों द्वारा सामूहिक रूप से किए गए हनुमान चालीसा के पाठ से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने बाबा जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इस मौके पर बाबा नीम करोली महाराज जी के जीवन और उनके विचारों को याद किया गया।
कहा गया कि बाबा जी दया, प्रेम और करुणा के सागर थे।
उन्होंने सदैव मानवता की सेवा, प्रेम और परोपकार का संदेश दिया।
बाबा जी का जीवन आज भी लाखों श्रद्धालुओं को सेवा और सद्भाव की प्रेरणा देता है।
उनकी शिक्षाएं हमें हर जीव के प्रति प्रेम, करुणा और दया का भाव रखने की सीख देती हैं।
कार्यक्रम में बच्चों ने भी बाबा जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
हनुमान जी के प्रति बाबा जी की अटूट भक्ति को याद करते हुए बच्चों ने श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ किया।
इस दौरान विद्यालय परिसर में भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
बाबा नीम करोली महाराज जी का संदेश था—प्रेम करो, सेवा करो और सभी के प्रति दया का भाव रखो।
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
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