Shivkumar patel

Shivkumar patel

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Journalist l RTI & Social Activist l Traveller l Spirituality l Multi Media l

Photos from Shivkumar patel's post 19/05/2026

राघव चड्ढा की अब क्या मजबूरी लाखों बच्चों का भविष्य दाव में लेकिन चुप्पी

12/05/2026

जब तक जर्मनी बर्बाद नहीं हो गया तब तक जनता को हिटलर के हर काम में देशभक्ति ही नजर आती थी आज हमारे भारत का भी यही हाल है! देश बरबादी की कगार पर खड़ा है फिर भी... 😕🤔

06/05/2026

जीवन मुश्किल नहीं होता…
हम अपने दिमाग से उसे मुश्किल बना देते हैं।

बार-बार सोचना, हर चीज़ को समझना,
हर स्थिति को पकड़कर बैठ जाना—
यही मन को भारी बना देता है।

लेकिन सच बहुत सरल है:

👉 हर विचार पर ध्यान देना ज़रूरी नहीं
👉 हर बात को समझना ज़रूरी नहीं
👉 हर चीज़ को कंट्रोल करना ज़रूरी नहीं

सादगी का मतलब कम करना नहीं है—
👉 अनावश्यक सोचना छोड़ देना है।

✨ थोड़ा भरोसा करो
✨ थोड़ा छोड़ दो
✨ जीवन को बहने दो

क्योंकि जैसे ही मन सरल होता है…
👉 जीवन अपने आप हल्का हो जाता है।

28/04/2026

छतरपुर में पत्रकारों का उग्र प्रर्दशन: SP हटाओ छतरपुर बचाओ
#छतरपुर #रीवा

Photos from Shivkumar patel's post 16/04/2026

बरस में इन दिन जंगल का
जायका, मन को खूब भाये,
चार,तेंदू,जंगल जलेबी,बेर,
बाजार में देख जीभ ललचाये।

14/04/2026

14/04/2026

भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि 💐💐

11/04/2026

मेरे प्यारे यंग फाउंडर्स, आज आपसे एक विचार साझा करना चाहता हूँ कि यहाँ कुछ भी निश्चित नहीं है। Certainty सिर्फ एक वहम है।

आप में से बहुत लोग जानते होंगे कि वेदांता से पहले मेरे 9 बिज़नेस फेल हुए थे। लेकिन एक बात आप नहीं जानते कि उस वक्त उनमें से हर एक बिज़नेस के कामयाब होने पर मुझे पूरा भरोसा था। अगर ऐसा नहीं होता, तो मैं उसे करता ही क्यों?

जब मैंने पेपर मिल ली थी, मुझे यकीन था कि यह चलेगी। जब मैंने मल्टीप्लेक्स बिज़नेस में इन्वेस्ट किया, तो मुझे लगा कि यह बहुत बड़ी चीज़ बनेगा। जब मैंने एल्युमीनियम फॉयल प्लांट खरीदा, मुझे लगा कि यह मेटल इंडस्ट्री में सबसे आगे होगा। लेकिन इनमें से कोई भी सफल नहीं हुआ।

आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो साफ़ समझ आता है कि वे बिज़नेस क्यों फेल हुए। वे सब बहुत तकलीफदेह गलतियां थीं जिनमें मेरा काफी पैसा और ज़िंदगी के कई साल चले गए। लेकिन सच कहूँ तो एक फाउंडर होने का असली मतलब यही है कि हर दिन यह जानते हुए भी फैसले लिए जाएँ कि आपके गलत होने की पूरी संभावना है।

दरअसल जीवन में कुछ भी निश्चित है ही नहीं। हमारे अंदर बस अनिश्चितता के बीच भी आगे बढ़ते रहने का जज़्बा होना चाहिए। अगर मैं सब कुछ निश्चित या अनुकूल होने का इंतज़ार करता, तो आज वेदांता नहीं होता।

दुनिया का हर सफल बिज़नेस शक और संदेह के पलों में ही बना है।
मेरे युवा फाउंडर्स, आपसे भी मैं यही कहूँगा कि आप सब कुछ निश्चित होने या एकदम सही परिस्थितियों का इंतज़ार मत करिए। आपको अनिश्चितता में काम करने के लिए अपने मन को तैयार करना ही होगा।

क्योंकि किस्मत उन्हीं का साथ देती है जो अंधेरे में भी कदम बढ़ाने की हिम्मत रखते हैं।

_--...*Vedanta Founder anil agrawal post*

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