Prayas Rang Samooh - Theater Group
Prayas Sahityik, Samajik Evam Sanskritik Sanstha is an Association of literary, social and cultural group.
19/03/2026
लगभग पैंतालीस वर्षों से सांस्कृतिक सरोकारों और सृजनात्मक गतिविधियों के लिए पहचानी जाने वाली इस संस्था ने इस प्रस्तुति में सर्वथा नए कलाकारों को मंच देकर रंगकर्म की परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करने का कार्य किया है।
Rewa
नाटक मध्यम वर्गीय जीवन की उस मौन पीड़ा को उजागर करता है जो रोजमर्रा की भागदौड़ में अनकही रह जाती है। जैसे किसी थके हुए पथिक को छायादार वृक्ष के नीचे कुछ क्षणों का विश्राम मिल जाए, वैसे ही इस कथा का नायक खुली खिड़की के पास बैठकर एक प्याली चाय के साथ सुकून के कुछ पल तलाशता है, परंतु विडंबना यह है कि अपनों से घिरे रहने के बावजूद वह अपने ही घर में अजनबी-सा महसूस करता है।
19/03/2026
Rewa News: रीवा के प्रयास रंग समूह ने 'चाय अकेली है' का किया प्रभावपूर्ण मंचन शानदार प्रस्तुति ने नए कलाकारों को मंच देकर रंगकर्म की परंपरा को प्रदान की नई ऊर्जा
19/03/2026
https://youtu.be/wFiKoplZHOU
प्रयास साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा नाटक *चाय अकेली है* का सफल मंचन भगवान शीत भंडार कैंपस के मुक्ताकाशी मंच पर किया गया। रंग निर्देशक हीरेन्द्र सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित यह नाटक मध्यम वर्गीय परिवारों के संघर्षों की आंतरिक वस्तु स्थिति और मानवीय मूल्यों को लेकर लोगों की संशय ग्रस्त स्थिति को रेखांकित करता है। हास-परिहास से शुरू हुआ यह नाटक अपने भीतर कई परतें खोलता दिखाई देता है।
कवि परमानंद 'व्यथित' की भूमिका में राजेश शुक्ल राजन् ने बहुत अच्छा अभिनय किया है। विनय की भूमिका में सत्येन्द्र सेंगर ने संवेदना के स्वर संप्रेषित किए हैं। सुरभि की भूमिका में ज्योति मिश्रा प्रभावित करती हैं। बर्मा जी और बर्माइन जी पड़ोसी की भूमिका में रमज़ान ख़ान और प्रभा मिश्रा सहज रहे हैं
कवियत्री राधिका जी और कवि समरेश बाबू किरदारों में अनुराधा पांडेय और आशीष मिश्रा प्रमाणिक लगते हैं। रज्जन की छोटी सी भूमिका में बालकृष्ण यादव ने अच्छा प्रभाव छोड़ा है। आंचल साहू राजेश सिंह ओम प्रकाश चतुर्वेदी, कमल पांडेय, सीमा रानी झा, प्रशांत सिंह दीपेश्वर सिंह बाबूलाल साकेत डबल कास्ट में थे जिन्होंने इस मंचन के पार्श्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रमुख सहयोगियों में दादा अशोक सिंह, राजेन्द्र सोनी, शैलेंद्र द्विवेदी,शालिवाहन सिंह उपस्थित रहे।
Play - Chai Akeli Hai -16 March 2026 प्रयास साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा नाटक *चाय अकेली है* का सफल मंचन भगवान शीत भंडार कैंपस के मुक्...
27/02/2026
चाय अकेली है प्रयास संस्था द्वारा इस नाटक का मंचन जल्द ही bharat live ...
16/02/2026
मऊगंज जिले के नईगढ़ी में त्रिदिवसीय वालीवुड फेस्टिवल के पहले दिन ख्यातिलब्ध साहित्यकार गोपालशरण सिंह राष्ट्रीय अवार्ड 2026. प्रयास संस्था के संस्थापक, बघेली नाटकों के पहले नाटककार एवं रंग निर्देशक हीरेन्द्र सिंह को बघेली रंग आंदोलन के लिए समर्पण के लिए दिया गया है। यह सम्मान साहित्यकार डॉ सत्येन्द्र शर्मा को भी दिया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक वसीम ख़ान, मिन्हाज प्रोडक्शन मुंबई तथा vsc क्रिएशन रीवा एवं सत्यार्थी फिल्म्स रीवा रहे।
सम्मानित अतिथियों में रिटायर्ड ब्रिगेडियर देवेन्द्र सिंह गढ़ी कृपालपुर शहीद पद्मधर सिंह के परिवार से एवं सतपाल सिंह फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सतना से पधारे। इस कार्यक्रम के आयोजन समिति में लवलेश रजक जी का विशेष योगदान रहा। ठाकुर गोपाल शरण सिंह जी के घराने से ठाकुर अजीत सिंह जी पधारे।
10/02/2026
रीवा प्रयास संस्था के कार्यालय में संगीतकार भुवन राजन् अजयगढ़ से पधारे संस्था के ग्राम्यांचल शाखा बढै़या भगवान सिंह जिला मऊगंज में स्थित कार्यालय में भी जा कर सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अपने अमूल्य विचार प्रदान किए। राजा जी राव संस्था के स्थापना वर्षों के वरिष्ठ रंगकर्मी, रेडियो ड्रामा आर्टिस्ट की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही। 1985 में प्रोफेसर राजीव त्रिवेदी और राजा जी राव साहब ने रीवा शहर में सबसे पहले पांच दिवसीय रंग महोत्सव किया था।
इस फेस्टिवल में प्रयास संस्था द्वारा बादल सरकार द्वारा लिखित मशहूर नाटक पगला घोड़ा का बेहद सफल मंचन किया गया था। 🌺🙏
24/12/2025
*अब कभी मिलना नहीं होगा*
श्रद्धेय विनोद कुमार शुक्ल हमारी माटी के कवि उपन्यासकार हम सब के प्रिय कवि की ये पंक्तियां जाग उठी हैं... एक आत्मीय धवल रोशनी का जाना तय था और रह रह कर उनकी अप्रतिम सादगीपूर्ण सौम्य जीवन की दृश्य श्रंखलाओं का याद आना भी।
हम अपने जिन प्रियजनों को खो देने के डर से घिरे रहते हैं उनमें से विनोद कुमार शुक्ल जी ने हम सब को उस डर से राहत दे दी है। और यह बता गए हैं कि
अपने सृजन में वे सदैव तत्पर हैं कि उनके लिखे को पढ़ा जाए। उनकी साधना और उसमें अनूदित होकर बहती तल्लीनता जंगल, ज़मीन, जल में कल-कल करती प्रवाहित है।
किसी सच्चे लेखक से मिलने पर एक विस्तृत संसार में प्रवेश करना होता है जो बहुत छोटे-छोटे दृश्यों से, ध्वनियों से, उष्मा और नमी से मिल कर आत्मा को आलोकित करने वाले आप के भीतर की एकांतिकता में हस्तक्षेप करता है। आपको सृजनात्मक रूप से सक्रिय करता है।
यह उन सभी का सौभाग्य है जो उनसे मिलने पर उन्हें जान पाए, कि जो दिखते हैं वही लिखते हैं। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत सी कहानियां रची हैं। एक सोची-समझी ज़िम्मेदारी ली और उस उम्र में पहुंच कर उनसे बतियाते हुए दाईत्व का निर्वहन करते रहे। हम में से बहुत जन यह जानते हैं कि उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार दे कर ज्ञानपीठ ने अपनी साख बचाई है। *हमें अपने लेखकों को, सृजन करने वालों को सेलीब्रेट करना चाहिए* मानव कौल के इस कथन को सराहनीय माना जाएगा। कोई लेखक अपने पाठकों तक कैसे पहुंचे। यह सुसंस्कृत समाज का दाईत्व है।
हम संस्था प्रयास में लेखकों और उनकी रचनाओं पर विमर्श करते रहे हैं।
हम उनके पुत्र शाश्वत शुक्ल जी और उनके परिवार के सभी सदस्यों के साथ हैं वे जानते हैं दादा (विनोद कुमार शुक्ल जी) का पाठकों का परिवार बहुत आत्मीयता से उनका आभार व्यक्त कर रहा है। विनोद कुमार शुक्ल जी की प्रासंगिकता बनी हुई है... बनी रहेगी....
हीरेन्द्र सिंह
प्रयास द्वारा - नाट्य अभ्यास , जिसकी प्रस्तुति की कुछ क्लिप |
सूचित किया जाता है कि इस दिसम्बर २०२५ इसका मंचन प्रस्तावित है |
तैयारियां ज़ोर शोर से सभी सदस्यगण द्वारा की जा रही है |
Hirendra Singh Rajan Shukla Ramjan Khan Satyendr Sengar Rajendra Ramgopal Virendra Sharma Vivan Karan Singh Shalivahan Singh Sengar Deepeshwar Singh Prashant Singh Kamal Pandey
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