Bijay Rajat Vlog
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सफलता मे अपनो और बर्बादी मे गैरो की पहचान अक्सर हो ही जाती है।
26/02/2026
सेX पर नियंत्रण
जो #पुरुष अपनी यौ*न इच्छाओं पर #नियंत्रण रख सकता है, वही लंबे समय तक इस धरती पर सुख-शांति से जी सकता है।
पुरुषों को ये समझना चाहिए कि उनकी कई परेशानियों और पतनों की जड़ कई बार कई गर्लफ्रेंड्स होती हैं।
हर लड़की की आत्मा अच्छी नहीं होती।
कुछ राक्षसी स्वभाव की होती हैं, कुछ में ज़हर छिपा होता है, और कुछ औरतें किसी की किस्मत को बर्बाद करने वाली होती हैं। जैसा की अभी हाल में आप सब देख चुके हैं...!!
इसलिए सावधान रहें।
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1. हर बार अपने इरेक्शन (लिंगोत्थान) की बात मत मानो।
अधिकतर बार यह तुम्हें गलत दिशा में ले जाता है।
अगर आप अपने इरेक्शन पर नियंत्रण नहीं रख पाए, तो ज़िंदगी छोटी और गरीबी से भरी हो सकती है।
2. किसी लड़की के कर्व्स, बॉडी और फिगर को देखकर रिलेशनशिप मत बनाओ।
ये सब धोखा है, खासकर सोशल मीडिया पर। असली सुंदरता और मूल्य इससे कहीं ज्यादा होता है।
3. हर स्कर्ट के नीचे जो है, उसे हासिल करने की कोशिश मत करो।
कुछ स्कर्ट के नीचे सांप होते हैं, जो काटकर चैन छीन लेते हैं। संयम और अब्स्टिनेंस (संयमित जीवन) अक्सर सबसे अच्छा फल देता है।
4. कई गर्लफ्रेंड्स रखना मर्दानगी नहीं है।
ये सिर्फ आपको औरतबाज़, धोखेबाज़, और बच्चा बनाता है — असली मर्द नहीं।
5. सिर्फ बेड में अच्छे होने से मर्द नहीं बनते।
असली मर्द वह है जो अपनी जिम्मेदारियों से भागता नहीं, उन्हें पूरा करता है।
6. उस लड़की का सम्मान करो जो तुमसे सच्चा प्यार करती है।
किसी लड़की का प्यार और सपोर्ट मिलना आसान नहीं होता। यह उसकी भावनात्मक ताकत और ईमानदारी का सबूत है।
7. दुनिया उन्हीं पुरुषों को सम्मान देती है जो कामयाब होते हैं।
तुम्हारे पास अगर बहुत सारी गर्लफ्रेंड्स हैं, तो कोई तुम्हारी तारीफ नहीं करेगा।
ये सिर्फ समय, ऊर्जा, पैसा और वीर्य की बर्बादी है।
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याद रखो:
ईमानदार, वफादार और ज़िम्मेदार पुरुष ही असली मर्द कहलाते हैं।
संयम ही सफलता की कुंजी है
25/02/2026
"दिव्या को ऐसा लगता था जैसे उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्हें लगता था कि क्योंकि वो पैसा कमा रही हैं। काम कर रही हैं। इसलिए लोग उनके पैसों का मिसयूज़ कर रहे हैं। वो दुखी रहती थी इस बात से।" दिव्या भारती के बारे में बात करते हुए कुछ दिन पहले ही ये बात कही है एक्टर राजू श्रेष्ठ ने। राजू श्रेष्ठ सिद्धार्थ कन्नन के शो पर आए थे। बकौल राजू, दिव्या ने उन्हें अपने बारे में काफ़ी बातें बताई थी। और कई लोगों के एग्ज़ाम्पल्स भी दिए थे। दिव्या अकेली थी। और बहुत दुखी थी। राजू ने ये भी कहा कि अब उन लोगों के नाम लेकर विवाद खड़ा करना सही नहीं रहेगा। दिव्या अपने करियर से तो बहुत खुश थी। मगर निजी ज़िंदगी में वो कतई खुश नहीं थी।
राजू श्रेष्ठ ने ये भी कहा कि उस वक्त पूजा भट्ट और दिव्या भारती के वो सबसे करीब थे। क्योंकि ये दोनों एक्ट्रेस बहुत काइंड नेचर की थी। ये दोनों ज़रा भी फ़िल्मी नहीं थी। राजू ने बताया कि दिव्या के साथ उन्होंने बहुत समय बिताया था। कई बार वो दिव्या के साथ डिस्को और बार में भी गए थे। जैसे सलमान खान उनके करीबी दोस्त हुआ करते थे तब, वैसी ही दोस्त दिव्या भारती थी। दिव्या और राजू घंटों तक बातें करते थे। राजू श्रेष्ठ के मुताबिक, जब दिव्या ने साजिद नाडियाडवाला से शादी कर ली तो उन्हें बहुत इमोशनल स्टेबिलिटी मिली थी। साजिद को लेकर दिव्या बहुत पॉज़िटिव थी। वो सैटिसफाइड और होपफुल थी। और साजिद के साथ अपने फ्यूचर को फलता-फूलता देख रही थी। साजिद वाला दिव्या की ज़िंदगी का हिस्सा ठीक था।
आज दिव्या भारती का जन्मदिन है। दिव्या अगर ज़िंदा होती तो आज 52 साल की हो जाती। 25 फरवरी 1974 को दिव्या भारती का जन्म हुआ था। बहुत खूबसूरत और प्रतिभाशाली एक्ट्रेस थी दिव्या भारती। मगर उनकी अचानक मौत ने सबको बहुत हैरान और दुखी कर दिया था। राजू श्रेष्ठ ने सिद्धार्थ कन्नन से दिव्या भारती की मौत के बारे में भी बात की और बताया कि वही थे जो घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे थे। बकौल राजू, उस हादसे के वक्त वो बुरी तरह हिल गए थे। राजू वहां सबसे पहले पहुंचे थे। और वहां से सबसे आखिर में निकले थे। दिव्या की मौत एक बेहद दुखद घटना थी। वो हादसा नहीं होना चाहिए था। दिव्या भारती की मौत ने राजू श्रेष्ठ को भी भीतर तक तोड़कर रख दिया था।
साथियों पांच अप्रैल 1993 को दिव्या भारती अपने अपार्टमेंट की खिड़की से गिर गई थी। और बुरी तरह घाटल होने की वजह से उनकी मौत हो गई थी। उनका अपार्टमेंट 5वीं मंज़िल पर था। दिव्या भारती के साथ वो दुर्घटना जब हुई थी तो उन्हें फौरन अस्पताल लेकर जाया गया था। मगर दिव्या की जान नहीं बच सकी थी। दिव्या मात्र 19 साल की थी जब उनकी मृत्यु हुई थी। दिव्या की मौत पर कई तरह की कॉन्सिरेसी थियोरीज़ पढ़ने को मिलती है इंटरनेट पर। बहुत लोगों ने दिव्या के पति साजिद नाडियाडवाला पर भी बहुत शक किया था। लेकिन दिव्या के माता-पिता ने ऐसी बातों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि साजिद वैसा कर ही नहीं सकता कभी। वो साजिद को अच्छी तरह जानते हैं।
18/02/2026
रक्सौल के पावन धरती पर 5 फरवरी से लेकर 11 फरवरी तक श्री अनिरुद्ध महाराज जी ने भागवत कथा सुनाए।
लाखों की संख्या में भक्त श्रद्धालु आकर कथा का आनंद लिए।
28/01/2026
एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था। लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्मरोग (skinDisease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी। खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।
इस बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका accident हो गया। Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी। लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही। समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी। वह बदसूरत हो गई, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा। एकदिन उस लड़की की मौत हो गई। पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दु:खी था. वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।
उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा. तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा, “अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे? इतने साल तो तुम्हारी पत्नितुम्हारी मदद किया करती थी.” पति ने जवाब दिया, “दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ। मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था। क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता।
इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया. वह बहुत अच्छी पत्नि थी. मैं बस उसे खुश रखना चाहता था.” .. ...
सीख-- खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए.. और उन कमियो को नजरन्दाज कर देना चाहिए...
आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी मित्रों जवाब जरूर दीजिएगा।
07/01/2026
एक तस्वीर ने रोक लिया था कदम**
मैं एक ग्लोबल आईटी कंसल्टिंग फर्म में काम कर रही थी। जॉब शुरू किए हुए अभी डेढ़ साल ही हुए थे। नई-नई नौकरी, बड़े सपने और खुद को साबित करने की ललक—सब कुछ एक साथ चल रहा था। उसी दौरान कंपनी का एक बड़ा इंटरनेशनल प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इस खुशी में शनिवार की रात शहर के एक लग्ज़री होटल में सेलिब्रेशन पार्टी रखी गई।
उस दिन मेरे टीम लीड आदित्य मल्होत्रा ने मुझे अपने केबिन में बुलाया।
“अनन्या,” उन्होंने मुसकराते हुए कहा,
“इस प्रोजेक्ट में तुम्हारा योगदान बहुत अहम रहा है। मैं चाहता हूं कि तुम पार्टी में ज़रूर आओ। वहां बोर्ड लेवल के कुछ लोग भी होंगे, तुम्हें उनसे मिलवाऊंगा। तुम्हारे करियर के लिए अच्छा रहेगा।”
“थैंक यू सर,” मैंने औपचारिक मुसकराहट के साथ जवाब दिया।
आदित्य—लंबा कद, आकर्षक व्यक्तित्व, सलीके से सजा हुआ। बोलने का ढंग इतना नरम कि सामने वाला सहज हो जाए। ऑफिस में चर्चा थी कि वे डायरेक्टर के सबसे भरोसेमंद आदमी हैं। नए क्लाइंट्स से डील कराने की जिम्मेदारी अक्सर उन्हीं को दी जाती थी।
मैंने लंच ब्रेक में अपनी एक सीनियर कलीग माया से पूछा,
“तुम पार्टी में आ रही हो न?”
वह हंसते हुए बोली,
“अरे, आदित्य बुला रहा हो और कोई मना कर दे? बड़ा चार्मिंग है। पता नहीं कितनी लड़कियां उस पर फिदा हैं।”
“वो शादीशुदा नहीं हैं?” मैंने हल्के से पूछा।
माया ने कंधे उचकाए,
“कहते हैं शादीशुदा हैं। पत्नी किसी और शहर में जॉब करती है। लेकिन यहां ऑफिस में तो उनका नाम अक्सर किसी न किसी के साथ जुड़ता रहता है। अब सच क्या है, कौन जाने।”
शनिवार की रात मैं पार्टी में पहुंची। कोई खास मेकअप नहीं, वही सादा अंदाज़—नेवी ब्लू फ्लोर-लेंथ ड्रेस। अंदर पहुंचते ही देखा, आदित्य कुछ लोगों के बीच खड़े बातें कर रहे थे।
मुझे देखते ही उन्होंने आगे बढ़कर कहा,
“यू लुक अमेज़िंग, अनन्या। कम, आई विल इंट्रोड्यूस यू।”
उन्होंने मुझे कंपनी के रीजनल डायरेक्टर से मिलवाया।
“यह हमारी टीम की सबसे मेहनती एनालिस्ट्स में से एक हैं,” उन्होंने कहा।
तारीफ सुनकर मैं थोड़ा झेंप गई।
डिनर और ड्रिंक्स का दौर शुरू हुआ। आदित्य ने मुझसे पूछा,
“व्हाट विल यू हैव?”
“सॉफ्ट ड्रिंक,” मैंने कहा।
वे मुसकराए,
“कम ऑन, जस्ट वन ड्रिंक। रिलैक्स करो।”
मेरे गिलास में हल्की बीयर आ गई। पहले कुछ घूंट, फिर आधा गिलास। माहौल, म्यूज़िक और बातचीत—सब कुछ धीरे-धीरे असर करने लगा।
डांस फ्लोर पर फास्ट बीट्स शुरू हो चुकी थीं। आदित्य ने मेरा हाथ थामा।
“लेट्स डांस।”
पहले दूरी थी, फिर उन्होंने मेरी कमर पर हाथ रखा। आंखों में आंखें डालकर बोले,
“मुझे स्लो मूवमेंट्स पसंद हैं। बात करने का मौका मिल जाता है।”
मैं चुप रही। उनकी नज़दीकी मुझे बेचैन भी कर रही थी और कहीं न कहीं अच्छी भी लग रही थी।
“तुम शादीशुदा तो नहीं हो?” उन्होंने पूछा।
“नहीं… लेकिन सगाई हो चुकी है। मेरा मंगेतर अभी कनाडा में है, प्रोजेक्ट पर।”
उन्होंने मेरे बाल कान के पीछे करते हुए कहा,
“गुड। लेकिन ये चेहरा छुपाने के लिए नहीं है।”
उनकी उंगलियां मेरे होंठों की तरफ बढ़ीं, और तभी मैंने खुद को अलग कर लिया।
उस रात के बाद करीब दो महीने तक हम ऑफिस में बिल्कुल प्रोफेशनल रहे।
फिर एक दिन आदित्य ने कहा,
“हमें एक क्लाइंट मीटिंग के लिए सिंगापुर जाना है। तुम भी चलोगी।”
मैंने मना करने की कोशिश की, लेकिन मैनेजमेंट का फैसला तय था।
सिंगापुर में एक हफ्ते का काम था, जो तय समय में पूरा नहीं हो पाया। स्टे तीन दिन और बढ़ गया। वीकेंड था।
क्लाइंट ने सुझाव दिया,
“यहां होटल में स्पा अच्छा है। चाहें तो सेंटोसा आइलैंड भी घूम सकते हैं।”
हम सेंटोसा गए। घूमने के बाद आदित्य बोले,
“तुम स्पा ले लो। बहुत रिलैक्सिंग होता है।”
स्पा में माहौल शांत था—हल्की खुशबू, धीमी रोशनी, सॉफ्ट म्यूज़िक। महिला थैरेपिस्ट ने मसाज शुरू की। धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों ढीले पड़ते गए। मैं एक अजीब सी भावनात्मक और शारीरिक स्थिति में थी।
मसाज के बाद पार्टीशन हटा। सामने आदित्य भी थे—उसी हालत में।
थैरेपिस्ट मुसकराकर बोली,
“यू बोथ लुक… वेरी रिलैक्स्ड।”
होटल लौटते समय मुझे अजीब सी मदहोशी थी। आदित्य मुझे अपने कमरे तक ले आए। लाइट बंद थी। उनकी सांसें पास थीं। सब कुछ जैसे नियंत्रण से बाहर जा रहा था।
वे बाथरूम गए। तभी उनकी जैकेट से एक वॉलेट गिरा।
अनजाने में मैंने उठा लिया।
अंदर एक महिला और एक बच्चे की तस्वीर थी।
मैं सिहर गई।
वह महिला कोई और नहीं, बल्कि शालिनी दीदी थीं—मेरी कॉलेज सीनियर। वही, जिन्होंने कभी मेरी मदद की थी, जब मैं सबसे कमजोर थी।
मेरे अंदर कुछ टूट कर जुड़ गया। जैसे किसी ने मुझे गहरी नींद से जगा दिया हो।
आदित्य बाहर आए तो मैंने साफ कहा,
#ये @आपकी पत्नी हैं… और ये #मेरा @रिश्ता #हैं
वे कुछ कह पाते, उससे पहले मैं कमरे से बाहर निकल चुकी थी।
उस दिन मैं बच गई।
तीन दिन बाद हम भारत लौट आए। उसके बाद सब कुछ सामान्य रहा—सिर्फ काम।
कुछ समय बाद मैंने शालिनी दीदी को फोन किया। हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि जल्द ही वे उसी शहर में ट्रांसफर लेने वाली हैं।
फोन रखते हुए मुझे फिर वही एहसास हुआ—
अगर उस दिन वह तस्वीर न होती, तो शायद मैं किसी और की ज़िंदगी में ‘वो’ बन चुकी होती।
#हिन्दीकहानी
26/10/2025
#ऑस्ट्रेलिया में अंतिम विदाई: #रोहित और #कोहली का सिडनी में प्रेमगीत
शनिवार रात से पहले ऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली का हज़ारों लोगों ने ज़ोरदार स्वागत किया था। शनिवार रात से पहले विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया में सभी फ़ॉर्मेट में 3616 रन बनाए थे। लेकिन शायद इससे ज़्यादा ज़ोरदार स्वागत कभी नहीं हुआ था, जो शनिवार रात सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर उनके द्वारा बनाए गए एक रन पर हुआ।
ऑस्ट्रेलिया पहुँचने के लगभग 10 दिनों बाद यह उनका पहला रिकॉर्ड रन था। और वह भी उनके दौरे की आखिरी रात (वे रविवार सुबह रवाना हुए थे)। हालाँकि, तीसरे वनडे के लिए सिडनी में मौजूद 40 हज़ार से ज़्यादा भारतीय प्रशंसकों के लिए यह ज़रा भी मायने नहीं रखता था।
यह मिड-ऑन से थोड़ा बाहर, ऑन-साइड की ओर एक पुश था। कोहली खुद भी इस पल के महत्व और दर्शकों के ज़ोरदार स्वागत को समझने के लिए काफी विनम्र थे। इतना कि राहत और दिखावटी खुशी में हवा में मुक्का मारते हुए वे भी शर्मिंदगी भरी मुस्कान बिखेरने से खुद को नहीं रोक पाए। विडंबना का एहसास उन पर भी साफ़ था।
दूसरी तरफ, रोहित शर्मा को भारतीय प्रशंसकों की ओर से काफी ज़ोरदार प्रतिक्रियाएँ मिल चुकी थीं, जो सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर उनके लंबे समय के साथी खिलाड़ी के आने से पहले ही पूरी तरह से खचाखच भर चुके थे। एक तरह से यही पूरी शाम का थीम बन गया क्योंकि सिडनी के दर्शकों ने बारी-बारी से वनडे क्रिकेट खेलने वाले दो महानतम खिलाड़ियों का जश्न मनाया। और इन तटों पर आने वाले दो महानतम बल्लेबाजों का भी।
कोहली और रोहित एक-प्रारूप के खिलाड़ी के रूप में अपनी पहली सीरीज़ में उतरे थे और सारी चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि क्या उनमें अब भी इस स्तर पर स्टार बनने की क्षमता है। साथ ही, क्या उनमें अपने करियर को दो साल और आगे बढ़ाकर एक और 50 ओवर के विश्व कप में खेलने का दम है। लेकिन यह उस तरह की रात नहीं थी। यह परिणामों के बारे में नहीं थी। यह भविष्य के बारे में नहीं थी। यह सब कोहली और रोहित के ऑस्ट्रेलियाई धरती पर आखिरी बार संगीत के साथ स्वागत के बारे में था। यह एक जश्न था, जो एक शानदार विदाई में बदल गया, क्योंकि दोनों ने अपने पुराने दुश्मन के खिलाफ एक साथ मिलकर शानदार प्रदर्शन किया।
खेल में कई बार, भले ही वे दुर्लभ हों, ऐसे मौके आते हैं जब आप संदर्भ को दरकिनार कर देते हैं। जहाँ आप प्रासंगिकता को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, और वस्तुनिष्ठ तर्क को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ऐसे दिन और पल जब सब कुछ कहानी के बारे में होता है।
जब खेल दिमागी नहीं, बल्कि भावनाओं के बारे में होता है। जब खेल सिर्फ़ एक सुखद कहानी के बारे में होता है, और कुछ नहीं।
हाँ, ऑस्ट्रेलिया पहले ही वनडे सीरीज़ जीत चुका था। हाँ, यह एक बेमेल मैच था। और हाँ, जैसे ही मिशेल मार्श ने टॉस जीतकर अप्रत्याशित रूप से पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया, रोहित और कोहली के साथ रात का अंत होना तय था। हालाँकि, यह उन तकनीकी पहलुओं या विश्लेषणों में ज़्यादा गहराई से जाने की रात नहीं थी।
यह सब वनडे क्रिकेट के इतिहास के दो महानतम कलाकारों द्वारा अपने सबसे बेहतरीन हिट गाने बजाने के बारे में था। मानो दो अनुभवी बैंडमेट अपने विदाई दौरे पर उस देश में आखिरी बार प्रदर्शन कर रहे हों जो उनके कुछ सबसे यादगार प्रदर्शनों का केंद्र रहा है।
साउंडचेक पूरा होते ही उन्हें ताल मिलाने में ज़्यादा समय नहीं लगा, और इस मामले में कोहली बिलकुल सही थे। और मानो रटे-रटाए अंदाज़ में, दर्शक हर बोल, हर सुर, और इस मामले में, हर ट्रेडमार्क शॉट के साथ गा रहे थे और तालियाँ बजा रहे थे।
14/01/2025
प्रेम और संभोग एक दूसरे के पूरक है। दोनो एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। दोनो जरूरी है।
जिंदगी में ऐसा कोई जोड़ा नही है जो जंदगी भर प्रेम करे संभोग न करे। न ही ऐसा कोई है जो जिंदगी भर संभोग करे प्रेम न करे। केवल एक से ही जिंदगी भर नही जिया जा सकता है।
जैसे प्रेम गलत नही है। वैसे संभोग भी गलत नही है। लोगो की सोचने का तरीका गलत है
प्रेम से ही संभोग है
संभोग से ही प्रेम है
इसलिए जमकर प्यार करें और जमकर संभोग करें।।
09/12/2024
दुरदर्शन पर देखा था फिल्म को शुक्रवार को आई थी 9:30 बजे😊 शुनिल शेट्टी और करिश्मा कपूर की ये फिल्म पुरा मोहल्ले मे 1 ब्लेक ऐंड व्हाईट 1 ही टिवी था। पहले शुक्रवार वार को ऐड मे बताया था अगलै शुक्रवार को लक्स सुपरहिट मे देखीयेगा फिल्म "Karishna" ट्रेलर क्या धमाकेदार था उसमे बताया गया था।
शक्ती कपूर और शुनिल शेट्टी जी के धानसु डायलॉग 🔥
"मे तब तक नही थकता जब तक सामने वाला थक नही जाता" "घड़ी देखलो अपनी कही मेरे डर से आपकी घङी बंद ना हो जाए" "शेर कै बिल मे चूहा नही बब्बर शेर आता है" शक्ती कपूर का "वु.. वा" करना बहुत पसंद आया बिच मे पॉपुलर गाना "सर से सनक गयी झाझरियां" 🎼
जबरदस्त डायलॉग गानो को मिक्स करके ट्रेलर बताया था उसी टायम से इंतजार कि कब शुक्रवार वार आऐ और ये फिल्म देखै स्कुल मे दोस्तो मे सब एक ही चर्चा कि अगलै शुक्रवार को शुनिल शेट्टी कि गजब पिक्चर आ रही है दुरदर्शन पर
इंतजार करते-करते शुक्रवार आया टि. वी का ऐनटिना दिन मे अच्छै से रिपेयरिंग करके सेट करके अच्छे से लगा दिया,👌
शुक्रवार को शाम पुरा मोहल्ले कै सब 1जगह जहां टि. वी नही था दुसरे मोहल्ले कै भी फिल्म देखने आ गये थे उस दिल बिजली कि इतनी समस्या थी की बार-बार लाइट जा रही थी, आ रही थी😅
फिर भी टि.वी नही छोङ रहे थे सबको फिल्म बहुत अच्छी लग रही थी, डायलॉग गाने स्टोरी बहुत अच्छी लग रही थी।लास्ट मे लाइट ऐसै गयी कि वापस आई तब तक फिल्म पुरी हो गयी थी बहुत बुरा लगा था, फिल्म का ऐंड नही देख पायै ओर उस टायम फिल्म देखनै का ओर कोई साधन नहीं था। कभी कभी VCR गांव मे किराये पर लाते थे बाद मे हम सब ने पैसे जोङना सुरू किया कि ये फिल्म देखना जरूरी है, बाद मे 1महिने बाद 2 दोस्तो को शहर T.V और VCR लेने शहर भेजा था,😁👍उस दिन "बंटवारा" "कृष्णा" "कर्मा" फिल्मों को लेकर आऐ। और तब ये पुरी फिल्म देखी वो भी क्या जमाना था क्या दौर था बहुत याद आ रहे वो दिन पुरानी यादे वो दोस्त वो फिल्मे आज हर फिल्मों को मोबाईल पर देख लेते है पर पुराने समय मे फिल्म बङे चाव से 5...10 दोस्त देखते थे वो मजा ही कुछ अलग था। 🙌
आपकी भी ऐसी कोई पुरानी यादें है तो जरूर ताजा किजिए यहां बताकर।
पेज को Follow करना ना भुले ऐसी ही जानकारियां मिलती रहेगी🙏
30/11/2024
शादी से पहले हर लौंडा यही सोचता है कि रोज लूँगा... ऐसे लूँगा... वैसे लूंगा लेकिन जब शादी हो जाती है तब सच्चाई पता चलती है कि बोलना आसान है... और करना मुश्किल... आधे टाइम तो घरवाली काम कर के थक जाती है फिर अगर वो करवाने को राजी भी हो तो जितना मन आपका होता है उतना उसका नही होता...कभी रिश्तेदार आ जाते है...और सबसे बड़ी दिक्कत जब सर्दी में कर रहे हों तब बड़ा ध्यान रखना पड़ता है कि कही घरवालो को चप-चप की आवाज ना सुनाई दे तो कुल मिलाकर बात ये है कि शादी के बाद वैसा नही होता जैसा आप हस्तक्रिया के वक़्त सोचते है..!
• गार्ड साहेब की कलम से! ❤️
22/08/2024
एक पुरानी कहानीं
एक राजा को राज करते काफी समय हो गया था।उसके बाल भी सफ़ेद होने लगे थे।एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया।
राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दी, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे भी उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई, नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे। तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक *दोहा* पढ़ा -..✍
*"घणी गई थोड़ी रही, या में पल पल जाय।*
*एक पलक के कारणे, युं ना कलंक लगाय।"*..✍
अब इस *दोहे* का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला।
तबले वाला सतर्क होकर तबला बजाने लगा। ..✍
जब यह दोहा गुरु जी ने सुना तो गुरुजी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दी।..✍
दोहा सुनते ही राजकुमारी ने भी अपना नौलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया।..✍
दोहा सुनते ही राजा के युवराज ने भी अपना मुकुट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया ।
राजा बहुत ही अचम्भित हो गया।
सोचने लगा रात भर से नृत्य चल रहा है पर यह क्या! अचानक एक दोहे से सब अपनी मूल्यवान वस्तु बहुत ही ख़ुश हो कर नर्तकी को समर्पित कर रहें हैं ?
राजा सिंहासन से उठा और नर्तकी को बोला एक दोहे द्वारा एक सामान्य नर्तकी होकर तुमने सबको लूट लिया।..✍
जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरुजी कहने लगे - "राजा ! इसको नीच नर्तकी मत कह, ये अब मेरी गुरु बन गयी है क्योंकि इसके दोहे ने मेरी आँखें खोल दी हैं। दोहे से यह कह रही है कि मैं सारी उम्र जंगलों में भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई ! मैं तो चला ।" यह कहकर गुरुजी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े।..✍
राजा की लड़की ने कहा - "पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ। आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरा विवाह नहीं कर रहे थे। आज रात मैं आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद करने वाली थी। लेकिन इस नर्तकी के दोहे ने मुझे सुमति दी, कि जल्दबाज़ी न कर, हो सकता है तेरा विवाह कल हो जाए, क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?..✍
युवराज ने कहा - महाराज ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे। मैं आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपको मारने वाला था। लेकिन इस दोहे ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है! थोड़ा धैर्य रख।"..✍
जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया। राजा ने तुरन्त फैंसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ।" फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं। तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो।" राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।..✍
यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना नृत्य बन्द करती हूँ "हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना। बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करूं।
07/08/2024
**प्रेम और सेक्स**
अगर कोई पुरुष किसी स्त्री के पास जाता है और कहता है कि "मैं तेरे करीब इस कारण हूँ कि मैं प्यार करता हूँ," तो यह धोखा है। यह गलत है।
सेक्स शरीर की जरूरत है, तो यह गलत नहीं है। पर सेक्स को प्यार कहने की भूल से बचें। ईमानदार रहें। अगर सेक्स करना है, तो सामने वाले को साफ शब्दों में कहें। और साथी से पहले, खुद को स्पष्ट कर लें कि आप प्यार में हैं या वासना में।
स्त्री फूल की तरह कोमल होती है। और फूल को रगड़कर, नोचकर, उसके शरीर पर निशान बनाकर या बाहर-भीतर घिसकर, प्यार नहीं किया जाता। स्त्री का शरीर और उसकी योनि की नसें बेहद संवेदनशील होती हैं। बहुत ज्यादा बारीक होती हैं।
आज जो महिलाएं अपनी डॉक्टर के पास जा रही हैं, उसका एक कारण यह भी है कि उनके शारीरिक संबंधों में हिंसा है। वासना के वेग के चलते, न तो पुरुष को होश रहता है और न स्त्री इतनी हिम्मत कर पाती कि पुरुष को 'न' कह सके।
और फिर बच्चेदानी में हजारों बीमारियां लग जाती हैं। मासिक धर्म में भयानक दर्द, OCD, PCOD और पता नहीं क्या-क्या सहन करना पड़ता है।
पुरुष एक्टिव है स्वभाव से और स्त्री पैसिव। इसलिए यहां पुरुष को समझना चाहिए कि पल भर की वासना के लिए किसी स्त्री का शरीर खराब न करें। वैसे भी अगर सेक्स को धैर्य और तरीके से किया जाए, और एक ठहराव हो भीतर तो उसके परिणाम दोनों व्यक्तियों के लिए सुखद होते हैं। और संतुष्टि भी मिलती है। Bijay Rajat Vlog
लेकिन जोश में आकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाले पुरुष, कभी भी संतुष्टि को उपलब्ध नहीं होते। जो व्यक्ति विवाहित हैं, उन्होंने अनुभव किया होगा कि सालों तक सेक्स करने पर भी उनके भीतर सेक्स की इच्छा ज्यों की त्यों है। इसका कारण यही है कि उन्होंने गहराई से कभी इस चीज को नहीं जाना।
45 मिनट से पहले तो स्त्री का शरीर खुलता ही नहीं कि वह तुम्हें अपनी बाहों में भरे, या तुम्हें अनुमति दे कि तुम उसके भीतर प्रवेश करो। इसलिए फोरप्ले का इतना महत्व है। और ठीक उसी तरह आफ्टरप्ले भी अर्थ रखता है कि तुम्हारी वजह से मैं जीवन ऊर्जा का आनंद ले पाया।
केवल पेनिट्रेशन को सेक्स समझने वाले, बलात्कारी हैं। अपने ही साथी का बलपूर्वक हरण करना, बलात्कार ही होता है। आज जो 70 फीसदी महिलाएं ऑर्गेज़्म से अनजान हैं, उसका कारण सेक्स की अज्ञानता है। इस बात को अहंकार पर चोट न समझें, बल्कि अपने आपको बेहतर बनाने का प्रयास करें। अपनी महिला मित्र के पैर छुएं, उससे अनुमति लें, उसके प्रति श्रद्धा भाव रखें, और इस बात का ध्यान रखें कि उसे दर्द न दें, आनंद दें।
भले तुम दस मिनट, आधे घंटे का सेक्स कर लो, पर स्त्री अछूती ही रह जाती है तुम्हारे स्पर्श से, और तुम भी अधूरे ही लौटकर आते हो। बहुत धीरे-धीरे शरीर तैयार होता है, बहुत धीरे-धीरे वे द्वार खुलते हैं, जब तुम्हें अनुमति मिलती है।
और यह सब समझने के लिए भीतर स्थिरता चाहिए। और बिना मेडिटेशन के यह संभव नहीं। बिना मेडिटेशन जीवन उथला ही रहता है। अगर गहराई चाहिए जीवन में, तो ध्यान बहुत जरूरी है।
होश, ठहराव, स्थिरता, धीरज, प्रेम, श्रद्धा – ये सारे शब्द केवल ध्यान करने से ही जीवन में उतरेंगे। किताबें पढ़ने या ज्ञान सुनने से कुछ नहीं होगा।
07/08/2024
आमिर खान ने इसलिए हम आपके हैं कौन फिल्म में काम करने से मना कर दिया था क्योंकि उन्हें इसकी स्क्रिप्ट पसंद नहीं आ रही थी। आखिरकार सूरज बड़जात्या अपने पुराने हीरो सलमान खान के पास पहुंचे। उस दौर में वैसे भी सलमान खान का करियर बहुत अच्छा नहीं चल रहा था। सलमान को जब ये फिल्म ऑफर हुई तो उन्होंने फौरन ये फिल्म साइन कर ली। और ये तो हम सभी जानते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। सलमान खान के करियर को हम आपके हैं कौन फिल्म ने फिर किन बुलंदियों पर पहुंचा दिया।
आज हम आपके हैं कौन फिल्म को रिलीज़ हुए 30 साल हो गए हैं। 05 अगस्त 1994 को इस फिल्म ने सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी थी। और तूफान उठा दिया था। छह करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 135 करोड़ रुपए का कारोबार किया। और ये ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म बन गई। चलिए, इस फिल्म से जुड़ी और कुछ रोचक बातें भी जानते हैं।
हम आपके हैं कौन वास्तव में 1982 में आई राजश्री प्रोडक्शन्स की ही नदिया के पार का शहरी वर्ज़न है। नदिया के पार का निर्देशन Govind Moonish ने किया था। और वो इसी कहानी को बड़े बजट के साथ उन्नत तकनीक से बनाएं। उन्होंने सूरज को इस फिल्म पर काम करने को कहा। कहा जाता है कि अपने पिता से मिले निर्देश के बाद सूरज बड़जात्या स्क्रीनप्ले लिखने में जुट गए। और 1 साल 9 महीने की मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने स्क्रीनप्ले लिख लिया। नाम रखा हम आपके हैं कौन।
इस फिल्म का म्यूज़िक भी इसकी सफलता की अहम कड़ी थी। फिल्म का संगीत तैयार किया था रामलक्ष्मण ने। रामलक्ष्मण ने ही सूरज बड़जात्या और सलमान की डेब्यू फिल्म 'मैंने प्यार किया' का संगीत भी तैयार किया था। फिल्म में कुल 14 गीत थे जिन्हें देव कोहली व रविंद्र रावल ने लिखा था। महान लता मंगेशकर जी ने इस फिल्म में 11 गीत गाए थे। दीदी तेरा देवर दीवाना गीत ने तो धूम ही मचा दी थी। इस गीत के लिए लता जी को कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया था। फिल्मफेयर ने लता जी को इस गीत के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड दिया था। आज भी ये गाना लोग सुनते हैं। कई लोग अपनी शादी के वीडियो में इस गीत को रखवाना पसंद करते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के गाए एक गीत सारे नबियां से प्रेरित था।
देश में सिनेमाघरों को उन्नत बनाने का काम भी 'हम आपके हैं कौन' फिल्म ने किया था। दरअसल, सूरज बड़जात्या ने इस फिल्म को रिलीज़ करने के लिए बड़े शहरों में सिर्फ उन थिएटर्स को ही चुना जहां का साउंड सिस्टम बेस्ट माना जाता था। और जहां का विज़ुअल एक्सपीरियंस भी शानदार कहा जाता था। सूरज बड़जात्या के इस कदम ने अन्य सिनेमाघर मालिकों को भी अपने थिएटर को उन्नत करने के लिए पैसा खर्च करने को प्रेरित किया।
जब हिंदी भाषी दर्शकों में 'हम आपके हैं कौन' फिल्म का क्रेज़ चल रहा था तब राजश्री प्रोडक्शन्स ने इस फिल्म की कामयाबी को और भुनाने का प्रयास किया। फिल्म को तमिल में डब करके भी रिलीज़ किया गया था। और तमिल वर्ज़न को भी बढ़िया रेस्पॉन्स मिला था।
माधुरी दीक्षित की अदायगी और उनकी खूबसूरती ने 'हम आपके हैं कौन' देखने आए दर्शकों का दिल जीत लिया था। हालांकि इस बात से शायद बहुत कम लोग वाकिफ होंगे कि सूरज बड़जात्या इस फिल्म में पहले निकी अनेजा को कास्ट करना चाहते थे। लेकिन किन्हीं वजहों से निकी अनेजा से उनकी बात बन नहीं पाई। और ये फिल्म माधुरी दीीक्षित को मिल गई।
फिल्म में एक सीन है जिसमें अनुपम खेर शोले के वीरू और मौसी वाले सीन को रिक्रिएट करने की कोशिश करते हैं। अनुपम खेर जब ये सीन शूट कर रहे थे तब वो फेशियल पैरालाइसिस से जूझ रहे थे। उन्हें शूटिंग करने के लिए डॉक्टरों ने मना किया था। लेकिन इस फिल्म को वक्त पर रिलीज़ कराने के लिए अनुपम खेर ने बीमारी के बावजूद एक्टिंग जारी रखी।
कहा जाता है कि नेपाल में होने वाली शादियों में जूता चुराई की कोई रस्म नहीं मनाई जाती थी। लेकिन इस फिल्म का प्रभाव वहां के लोगों पर इतना ज़्यादा पड़ा कि वहां भी शादियों में जूता चुराई की रस्म शुरू हो गई। हम आपके हैं कौन फिल्म की काफी शूटिंग ऊटी में हुई थी।
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