Kiissago by Rupam

Kiissago by Rupam

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Writer

03/04/2025

Thank you so much, Sushil Bharti ji, Sandeep Marwa ji, and Rahi Publication for considering me worthy of the “भारतीय लेखन सम्मान 2025”. I am truly honored and feel privileged.
Due to unavoidable reason, I couldn’t be present there to receive the award. Please consider my apologies.
I am extremely grateful for this. Thanks to the entire team .💕🙏

23/08/2024

अधिकांश माता-पिता , उनकी बच्ची जब युवावस्था में प्रवेश करती है तब वो उस पर अपनी पैनी नज़र रखते हैं , की “वो किसके साथ” है , मगर जब वो छोटी होती है तब ये नहीं देखते कि “कौन उसके साथ “है ?
सोचने वाली बात है ।

रूपम

12/03/2024
08/03/2024

स्त्री रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना ही अपने आप में ख़ास है ♥️

19/09/2023

इत्तेफ़ाक

ये महज़ इतेफ़ाक था की नियति ? मैंने जैसे ही नज़र उधर घुमाई कबीर को देखा , यक़ीन नही हुआ अपनी आँखे मींची फिर देखा , अरे ये तो कबीर ही है । मन से ये आवाज़ आयी की ऐसा इत्तेफ़ाक़ ?
महज़ तीन दिन पहले की ही तो बात है । मैं अपनी भाग दौड़ भरी ज़िंदगी से ब्रेक लेकर दार्जिलिंग के लिए solo trip पे निकल पड़ी । मैंने प्लेन पीले रंग की साड़ी पहनी, माथे पे बिंदिया लगाई , हाथों में पीली चूरियाँ पहनी । इस तरह सज-संवर कर एयरपोर्ट पहुँची और सारी प्रक्रिया के बाद फ़्लाइट में अपनी सीट पर बैठ गई । बहुतों की निगाहें मुझे पे जमीं थी । मैंने कहीं ध्यान नही दिया , अपना एयरपॉड लगा कर गाना सुनने लगी। इतने में एक लड़का आया और मेरी बगल वाली सीट बैठ गया । वो मुझ से बातें करने की कोशिश करने लगा। उसने पहल करते हुए कहा , आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं । मैंने बस मुस्कुरा कर अपना पल्ला झारने की कोशिश की, मगर वो कहाँ मानने वाला था । उसकी बातें थीं जो ख़त्म ही नही हो रही थीं... न जाने क्यूँ , मुझे भी उस से बात करना अच्छा लग रहा था । एक दूसरे का परिचय हुआ फिर इधर उधर की बातें । इस तरह हमारा वो सफ़र प्यारा और ख़ूबसूरत रहा । थोड़े पल का ही साथ था मगर लम्हा ख़ूबसूरत था। सफ़र के बाद हमदोनों अपने - अपने स्थान के लिए निकल गये। होटेल पहुँच कर भी मैं उसे ही याद कर के मुस्कुरा रही थी , उस दिन बारिश हो रही थी सो कहीं जाना भी नहीं हुआ । अगले तीन दिनों तक मैंने वहाँ के नज़ारों का आनंद लिया और फिर जाने का समय भी हो गया। मन में यादों को समेटें मैं एयरपोर्ट पहुँच गई । और ये क्या ? अचानक मेरी नज़र कबीर पे गई । मैंने कहा , कबीर तुम यहाँ? उसने भी अचंभित होते हुए कहा तुम ? हमदोनों हंसने लगे । और सबसे ताज्जुब की बात तो ये थी की फिर वही फ़्लाइट , वही मेरी बग़ल वाली सीट और वही destination....🥰

रूपम ❤️

14/09/2023

हिंदी दिवस की बहुत सारी शुभकामनाएँ ....!!!!💐💐

Photos from Kiissago by Rupam's post 08/09/2023

❤️❤️❤️❤️

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