Anshul Gupta
Digital Creator
बीजेपी का दूसरा रूप देखने मिला, जो अपने मुख्यमंत्री का नहीं हुआ, वो जनता का क्या होगा??
क्या है कोई जवाब हिंदुस्तान की सरकार के पास?
19/08/2025
अब ट्रेन यात्रियों के लिए भी एयरलाइंस जैसी सख्ती लागू होने जा रही है. भारतीय रेलवे लगेज नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है. जल्द ही रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान की जांच एयरपोर्ट की तर्ज पर की जाएगी. स्टेशन में प्रवेश से पहले यात्रियों का सामान तौला जाएगा. तय सीमा से अधिक वजन होने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा. फिलहाल, उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे ने इस व्यवस्था की शुरुआत लखनऊ और प्रयागराज मंडल के प्रमुख स्टेशनों से करने का फैसला किया है.
19/08/2025
ये कह जा रहा है मानव समाज? कितने ही लोग आज एक बच्चे के लिए तड़प रहे हैं, लेकिन हरामखोरों को बच्चों को मारने में जरा भी दया नहीं आई.😡😡🤬🤬🤬
18/08/2025
केचुआ जी के इस बारे में क्या विचार है?
Election Commission of India
18/08/2025
The Gauhati high court recently expressed shock over the fact that nearly 3000 bighas of land were given to a private cement company – Mahabal Cements – for mining in the tribal district of Dima Hasao in Assam, Bar and Bench reported.
The bench was hearing a set of pleas on August 12 filed by local villagers seeking directions against their eviction in the region.
Justice Sanjay Kumar Medhi, remarked that the company must be “very influential” to have “almost half of the district allotted” in its favour, observing that this was extraordinary.
“What kind of a decision is this? Is this some kind of joke or what? How do you allot 3,000 bighas to a company? Do you understand the magnitude of 3,000 bighas? It will be half of the district,” Justice Medhi asked, as quoted by Bar and Bench.
The counsel for the cement company told the court that the land allotted was barren land and that it was needed for the operation of the company. The bench, however, observed, “Your need is not the issue… the public interest is the issue,” as quoted in a LiveLaw report.
It also noted that the Dima Hasao is a 6th scheduled district under the Indian constitution and priority has to be given to the rights and interests of the tribal people residing there.
Umrangso, the area in Dima Hasao where the mining project was planned, is an environmental hotspot owing to its hot springs and a stopover for migratory birds and wildlife, the court recorded and ordered the North Cachar Hills Autonomous Council (NCHAC) to obtain and submit the records regarding the policy of allotting the land to Mahabal Cements.
“A cursory glance into the facts of the case would reveal that the land which has been sought to be allotted is about 3000 bighas which itself appears to be extraordinary,” it said.
The next hearing is on September 1
सत्ता और धर्म का धंधा ज्वाइंट वैंचर का व्यापार है । एक के बग़ैर दूसरा संभव नहीं !
Narendra Modi Donald J. Trump Swami Ramdev
03/07/2025
नो ईडी, नो सीबीआई, मानसून खोलता है भ्रष्टाचार की पोल
********************************************
भारत में भ्रष्टाचार की जांच के लिए बना प्रवर्तन निदेशालय हो या सीबीआई फेल हो सकता है लेकिन वर्षा इकलौती एजेंसी है जो निर्माण कार्यों में हुए बडे से बडे भ्रष्टाचार की पोल खोल देती है. दुर्भाग्य ये है कि हमारी सरकारें फिर भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करतीं और न उन्हे सजा दिला पाती हैं, क्योंकि ये तमाम भ्रष्टाचार सरकार के संरक्षण में ही फलता -फूलता है.
देश में हर साल मानसून बिना किसी भेदभाव या पक्षपात के निर्माण कार्यों में आकंठ भ्रष्टाचार की पोल खोलता है. मानसून के आते ही हमारे हवाई अड्डों की छतें आंसू बहाने लगती हैं. सडकें बहने लगतीं है और बडे से बडे पुल-पुलियां टूटने लगते हैं. पहाड धंसने लगते हैं, जल भराव होने लगता है. बडी संख्या में धनहानि के साथ जनहानि होती है किंतु किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती. सजा देने की बात तो छोड दीजिये.
सामंतों के शहर ग्वालियर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बनाई गई सडकें पहली बरसात में धंस जातीं हैं, सुपर मल्टी स्पेशल अस्पताल की सीलिंग टपकने लगती है तो देश की राजधानी दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे का टर्मिनल नंबर 1टपकने लगता है लेकिन न कसी को कोई लज्जा आती है, न किसी की आंखें शर्म से झुकतीं हैं. सुदूर गांवों से लेकर महानगरों तक में अकल्पनीय थल भराव से बिना लागत के स्वीमिंग पूल बन जाते हैं. लोग मरते हैं, घायल होते हैं लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पडता, सिवाय गरीब जनता के. इस खौफनाक, शर्मनाक मंजर से घबडाकर हमारे प्रधानमंत्री जी विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं और पूरी सरकार बिहार जीतने में लग जाती है.
मानसून न आए तो देश में निर्माण कार्यों में बडे पैमाने पर होने वाले भ्रष्टाचार की पोल ही न खुले. देश में निर्माण कार्य चाहे रक्षा मंत्रालय में हों या लोकनिर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के लिए अभिशप्त हैं. 40 प्रतिशत तक कमीशन पर ठेके होते हैं. स्थानीय निकाय नदी-नालों के जल निकासी के रास्तों पर अतिक्रमण को अनदेखा कर देते हैं और खामियाजा भुगतती है जनता. शहरों में जलभराव की असली जड नालों पर अवैध कब्जे और अवैध निर्माण ही हैं लेकिन मजाल कि कोई इसके खिलाफ कार्रवाई कर दिखाए. सरकारी बुललडोजर केवल अल्पसंख्यकों के मकान गिराती है.
भारी बारिश और बाढ़ के कारण अकेले हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही हुई.। 30 जून तक, राज्य में 39 लोगों की मौत और 129 सड़कों के बंद होने की खबर थी।कुल्लू जिले में ब्यास नदी के उफान पर होने की वजह से भारी नुकसान।1 और 2 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी, जिसमें भूस्खलन और जलभराव का खतरा बताया गया।उत्तराखंड:भारी बारिश और भूस्खलन से चारधाम यात्रा प्रभावित। यमुनोत्री ट्रेक रूट पर 23 जून को भूस्खलन में 5 लोगों की मौत।रुद्रप्रयाग में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना, जिसमें खराब मौसम के कारण पायलट समेत 7 लोगों की मौत।देहरादून में घरों में पानी घुसने की घटनाएँ।
पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन से 50 से अधिक लोगों की मौत और 15,000 हेक्टेयर फसलों का नुकसान हो गया ।मणिपुर, मिजोरम, और नगालैंड जैसे राज्यों में मानसून की शुरुआत विनाशकारी रही।गुजरात और महाराष्ट्र में चक्रवात बिपरजॉय (2023 में) जैसे पिछले अनुभवों की तरह, 2025 में भी भारी बारिश और तेज हवाओं (40-60 किमी/घंटा) की वजह से तटीय जिलों (वेरावल, पोरबंदर, जामनगर, नवसारी, वलसाड) में भारी नुकसान आपके सामने है.
महाराष्ट्र में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, स्कूल बंद, और मुंबई में रेड अलर्ट। बिहार में बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत और 13 से अधिक जिलों में खतरे की चेतावनी।झारखंड में बाढ़ और बारिश से तबाही, मैदानी इलाकों में तालाब जैसे हालात। मोटे अनुमान के हिसाब से वर्ष 2013-2022 के दशक में प्राकृतिक आपदाओं से औसतन 8 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 66,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ, जिसमें बाढ़ का हिस्सा 63 प्रतिशत था. बाढ आती ही भ्रष्टाचार के कारण है. 2023 में यह नुकसान 12 अरब डॉलर तक पहुंचा। 2025 के लिए अभी पूर्ण आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थिति गंभीर है।
मानसून में विभिन्न स्रोतों के आधार पर, हिमाचल (39), उत्तराखंड (12+), पूर्वोत्तर (50+), और बिहार (10) में कुल मिलाकर 100 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। यह संख्या और अधिक हो सकती है, क्योंकि पूरे देश के आंकड़े एकत्रित नहीं हैं। अंधाधुंध विकास के नाम पर प्रकृति से छेडछाड के चलते हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, राजस्थान, और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश, बाढ़, और भूस्खलन की घटनाएँ हो रहीं हैं, लोग मर रहे हैं।आर्थिक नुकसान हो रहा है लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पडता क्योंकि ये मौसम ही तो खाने- कमाने का और उजागर हो रहे भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का मौसम है. आपदा राहत के नाम पर भ्रष्टाचार के अलाबा और क्या होता है? देश में कितने पुल गिरे, कितनी सडकें बहीं किसी ने नैतिकता के चलते इस्तीफा दिया? किसी एक इंजीनियर को सजा हुई. मप्र में एक महिला मंत्री पर एक हजार करोड का कमीशन लेने का आरोप लगा, जांच हुई, लेकिन न मंत्री जेल गई और न लोनिवि का कोई अधिकारी. फिर भी भारत महान है.कांग्रेस के जमाने भी महान था और भाजपा के जमाने में भी भारत महान है. आंखें बंद कीजिए और चैन से सोइए. प्रतिकार करने से आखिर लाभ क्या है. अंधेर नगरी, अंधेर राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा, की व्यवस्था जिंदाबाद.
@ राकेश अचल जी को जरूर पढो.
#है #है #है
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Telephone
Website
Address
Pune