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13/08/2021

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Profile pictures 18/07/2017
Photos 18/07/2017

मां गंगा की उत्तरवाहिनी धारा का पावन स्पर्श करती सिमरिया की धरा पर महाकुंभ का आगाज़ 06 अक्तूबर दिन शुक्रवार कार्तिक कृष्णपक्ष प्रतिपदा को होना है. इस तिथि से प्रारंभ होकर 16 नवंबर दिन गुरूवार अग्रहायण कृष्णपक्ष त्रयोदशी तक महाकुंभ का अद्भुत संयोग है. सिमरिया क्षेत्र ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण बिहार प्रदेश के लिए यह गौरव का अवसर है. धन्य है यह धरती जहां महाकुंभ के दौरान प्रवास के लिए देश भर के महान साधु-संतों, विद्वत मुनियों और श्रद्धालुओं का मेला लगेगा. यह पवित्र अवसर 2011 में प्रारंभ अर्द्ध कुंभ की अगली कड़ी है. स्वामी चिदात्मन जी महाराज के मार्गदर्शन और अनेक साधु-संतों व विद्वतजनों के अथक प्रयास से 2011 में सिमरिया घाट पर अर्द्ध कुंभ का आयोजन हुआ था. इस अर्द्ध कुंभ का उद्घाटन हिन्दु महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी श्री चक्रपाणी जी महाराज के कर कमलों के द्वारा संपन्न हुआ था. विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रवीण तोगड़िया जी सहित प्रसिद्ध राम कथा वाचक श्री प्रेम भूषण जी महाराज, कथावाचक श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी अर्द्ध कुंभ में उपस्थित हुए थे. कई राजनीतिक हस्तियों ने भी अर्द्ध महाकुंभ के दौरान अपनी मौजूदगी दर्ज की थी. तत्कालीन उप मुख्यमंत्री बिहार श्री सुशील कुमार मोदी जी, भाजपा के वरिष्ठ नेता पद्मश्री डा. सी. पी. ठाकुर जी, श्री मनोज तिवारी जी समेत कई शख्सियत गंगा तट पर उपस्थिति रहे थे. भजन और गायन क्षेत्र की नामचीन शख्सियत शारदा सिन्हा जी, विपिन सचदेवा जी, त्रिप्ति साकिया जी जैसे गणमान्य की मौजूदगी ने भी अर्द्ध कुंभ को यादगार बनाया था. अब छह वर्षों के बाद पूर्ण कुंभ का पावन संयोग है. इस महाकुंभ में मां गंगा के तट पर प्रवास और नित्य आरती एवं पूजन को निहारने का अवसर पाने के लिए सिमरिया आने की करें तैयारी. आपके स्वागत के लिए तैयार हो रहा है सिमरिया.

Photos 18/07/2017

अद्भुत आध्यात्मिक प्रारंभ और फिर परम्परा के रूप में सतत निर्वहन का पथ सरल नहीं होता. दृढ़ संकल्प, मजबूत ईच्छा शक्ति , धैर्य और धार्मिक -आध्यात्मिक मीमांसा के बगैर यह असंभव है. धार्मिक - पौराणिक साहित्य और वेद - ग्रंथों के ज्ञाता स्वामी चिदात्मन जी महाराज के साथ विद्वतजनों व महान साधु-संतों के गंभीर चिंतन व विमर्श के उपरांत मां गंगा की उत्तर वाहिनी धारा के तट पर सिमरिया में अर्द्ध कुंभ के शुरूआत की सोच बनी. छह वर्ष पूर्व पहला अर्द्ध कुंभ लगा. सिमरिया घाट पर अर्द्ध कुंभ से पूर्व प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक कुंभस्थल के रूप में हिन्दू श्रद्धालुओं और साधु-संतों की आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है. सिमरिया तट पर पहले ही अर्द्ध कुंभ में देश भर के महान साधु-संतों और श्रद्धालुओं का अपार समर्थन व सहयोग प्राप्त हुआ. श्रद्धालुओं व साधु-संतों का सैलाब उमड़ पड़ा. भारी जनसैलाब के बीच भव्य और सजे-धजे मंच से हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी जी महाराज ने अर्द्ध कुंभ का उद्घाटन किया. इस भव्य उद्घाटन समारोह के साथ ही अर्द्ध कुंभ का आगाज हुआ और सिमरिया में कुंभ का सपना साकार हुआ. सिमरिया को कुंभ स्थल के रूप में स्थापित करने में समाजसेवियों, राजनीतिक हस्तियों और साधु-संतों ने बढ़-चढ़ कर योगदान दिया. अर्द्ध कुंभ के आयोजन में कुंभ सेवा समिति की अग्रणी भूमिका रही. कुंभ तदर्थ समिति, खालसा समिति सहित अन्य कई सामाजिक संस्थाओं ने भी संचालन में अहम योगदान दिया.

Photos from inPR's post 05/04/2016

PATNA: बिहार में स्काई ट्रान की पहल. IN PR को मिली मीडिया मैनेजमेंट की जिम्मेदारी.

Photos 11/11/2015
Photos from inPR's post 03/11/2015

पुनर्वास विशेषज्ञों का राष्ट्रीय महाकुंभ 7वां पुनर्वास सम्मेलन 13 फरवरी से

पटना: भारतीय पुनर्वास परिषद भारत सरकार एवं इंडियन इंस्टिच्युट आफ हेल्थ एजुकेशन ऐंड रिसर्च, बेउर के संयुक्त तत्वावधान में पुनर्वास-विशेषज्ञों का महाकुंभ पुनर्वास-सम्मेलन 7वां रिहैब-मीट-2016 तेरह से पन्द्रह फरवरी को होगा । तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश भर के एक हज़ार से अधिक पुनर्वास विशेषज्ञ भाग लेंगे। यह भारत का एक मात्र सम्मेलन है, जो विकलांगता के क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी प्रकार के विशेषज्ञों को साझा मंच प्रदान करता है, जिसमें एक साथ मिलकर विकलांगता की जटिल और गंभीर समस्याओं के निदान का मार्ग खोजा जाता है।
आयोजन समिति की ओर से संवाददाता-सम्मेलन को संबोधित करते हुए समिति के संरक्षक और आईआईएचईआर के निदेशक प्रमुख डा. अनिल सुलभ ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के पुनर्वास-सम्मेलन में चिंतन का मुख्य-विषय “बहु विकलांगता और निदान”है। इस विषय पर, कृत्रिम अंग निर्माण-विशेषज्ञ, फ़िजियोथेरापिस्ट, अकुपेशनल थेरापिस्ट, औडियोलौजिस्ट, स्पीचपैथोलौजिस्ट, स्पेशल एजुकेटर, क्लीनिकल साइकोलौजिस्ट, हड्डी-रोग विशेषज्ञ, न्युरोलौजिस्ट, शिशु-रोग विशेषज्ञ व स्त्री-रोग विशेषज्ञ समेत विकलांगता के क्षेत्र में कार्यरत सभी प्रकार के विशेषज्ञ चर्चा में हिस्सा लेंगे और इस समस्या की रोकथाम और निदान के संबंध में एक साझा प्रतिवेदन तैयार करेंगे।
डा. सुलभ ने बताया कि सम्मेलन में 4 से अधिक वैज्ञानिक-सत्रों का आयोजन होगा, जिसमें विशेषज्ञ-गण अपने वैज्ञानिक-पत्र भी प्रस्तुत करेंगे, जिससे नयी तकनीक और विकास के संबंध में प्रतिभागियों को नवीनतम ज्ञान प्राप्त हो सकेगा। इस अवसर पर विगत वर्षों की भांति स्मारिका के रूप में ‘रिहैब जर्नल’ का भी प्रकाशन होगा, जिसमें विकलांगता की समस्याओं पर शोध-परक वैज्ञानिक-पत्रों का प्रकाशन होगा। इस हेतु भी विद्वान विशेषज्ञों से आलेख आमंत्रित किये गये हैं। इस अवसर पर विकलांगता के विविध क्षेत्रों में कार्यरत चयन किये गये मुर्द्धन्य विशेषज्ञों को, उनके विशिष्ट अवादानों के लिए ‘रिहैब-मीट प्रोफ़ेशनल एक्सीलेंस अवार्ड’ तथा ‘रिहैब-मीट लाइफ़ टाइम एचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया जायेगा। प्रतिभागिता हेतु, संस्थान में पंजीयन आरंभ हो चुका है।
संवाददाता सम्मेलन में आयोजन समिति के अध्यक्ष आकाश सुलभ, आयोजन सचिव डा. अनुप कुमार गुप्ता, डा. राजेश झा, डा. विकास कुमार सिंह, डा. पी कुमार, आभास कुमार, प्रो. संजीत कुमार, डा. प्रभात कुमार, डा. असगर अली खान, अभिजीत पाण्डेय, प्रो रणजीत कुमार, अंबिका दत्त पाण्डेय, कुमारी पूर्णिमा, सरिता कुमारी, विजय प्रकाश तिवारी तथा अंजु कुमारी समेत आयोजन समिति के सभी पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे।

Mobile uploads 04/09/2015

बंजारन मेरी ग़ज़ल का लोकार्पण कर याद किये गये विशाल

पटना: ख्यातिलब्ध ग़ज़ल गायक चंदन दास और सोनाली ठाकुर के द्वारा स्वरवद्ध किये गये ओडियो सीडी बंजारन मेरी ग़ज़ल का लोकार्पण कालिदास रंगालय में किया गया । बंजारन मेरी ग़ज़ल जाने-माने पत्रकार व गीतकार अंजनी कुमार विशाल के द्वारा शब्दवद्ध किये गये ग़ज़लों का संग्रह है। ओडियो सीडी का लोकार्पण अंजनी कुमार विशाल की प्रथम जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप किया गया । श्रद्धांजलि समारोह में मौजूद पत्रकारों, बुद्धिजीवियों एवं कलाकारों ने विशाल की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किया । विशाल को याद करते हुए कई वक्ताओं ने अपने संस्मरण भी सुनाये। समारोह की अध्यक्षता हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ ने की । उन्होंने इस अवसर पर कहा कि अंजनी कुमार विशाल सच्चे और अच्छे व्यक्तित्व थे । बाहैसियत पत्रकार विशाल समाचार और समाचार के कारणों को तो लिखते ही थे, वो समाचारों को पूर्णता तक पहुंचाते थे। पीड़ित व्यक्ति की सिर्फ दास्तां ही नहीं लिखते थे, बल्कि उसकी पीड़ा कैसे दूर हो यह समाधान भी लिखते थे। समारोह में मौजूद डा. शंकर ने विशाल के कई संस्मरण सुनाये । प्रो.ध्रुव कुमार ने भी अंजनी कुमार विशाल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास विशाल युग का जिक्र किये बगैर अधूरा होगा । परिमल राय, बी. एन. विश्वकर्मा, माेहन यादव, सुमन विशाल, कोमल विशाल, काजल विशाल, कुसुम विशाल ने भी अपने संस्मरण सुनाये। विशाल के द्वारा लिखी ग़ज़लों का शैलेन्द्र मिश्रा के द्वारा गायन भी किया गया ।

Photos from inPR's post 01/09/2015

डा. सीताराम दीन व डा. उषा रानी सिंह की याद में कार्यक्रम

पटना: प्रख्यात साहित्यकार डा. सीताराम दीन एवं डा. उषा रानी सिंह की पुण्य स्मृति में कार्यक्रम का आयोजन कालिदास रंगालय में किया गया । इस अवसर पर भजन, काव्य पाठ एवं विचार गोष्ठी हुए । कार्यक्रम की शुरूआत कबीर के भजनों से हुई। रेखा दास के स्वर में गाये सतगुरू हो महाराज मो पे साईं रंग डाला भजन से स्रोता मंत्रमुग्ध हो गये। तत्पश्चात ह्रदय नारायण झा ने भोजपुरी और मैथिली में कबीर के भजन गाये। तोर हीरा हेराइल बा किचड़े में, केहु ढूंढे पानी अ पत्थरे में और सपने में देखलों रे सुगना भजन ने कार्यक्रम को सुरमयी बना दिया । इसके बाद डा. सीमांचल दास के भक्तिगीतों का लुत्फ़ उठाया गया।
भजन के उपरान्त डा. दीन के विचारों एवं व्यक्तित्व पर चर्चा हुई। समारोह के मुख्य अतिथि चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय ने डा. दीन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीताराम दीन व उषा रानी दीन साहित्यसेवी थे। कबीर से भी उनका गहरा लगाव था। जिस व्यक्ति को कबीर अच्छा लगे वो औघर ही होता है। भारतीय ने डा. दीन के पुत्र पत्रकार व कार्यक्रम के आयोजक प्रभात रंजन दीन को ऐसे आयोजन के लिए धन्यवाद दिया । उन्होंने कहा कि किसी पिता के लिए यह सौभाग्य ही होता है जब उनके पुत्र उनकी याद में ऐसे आयोजन करे। इस अवसर पर मौजूद कवि सत्यनारायण ने डा. दीन के साथ अपने संस्मरणों को सुनाया। उन्होंने कहा कि डा. दीन फक्कड़ स्वभाव के किसी दायरे को पसंद न करने वाले साहित्यकार थे। दीन जी को विश्वास था कि कोई साथ दे न दे फूल की पंखुड़ियां और बारिश की बूंदें उनकी व्यथा-कथा जरूर सुनेंगे। प्रो उषा किरण खान ने डा.उषा रानी को सुव्यवस्थित, सुचिंतित और गहराई से अध्ययन करने वाला शख्सियत बताया । रंजन सूरीदेव एवं सियाराम तिवारी ने भी डा.दीन व उषा रानी सिंह के संस्मरण सुनाये । मेजर बलबीर सिंह भषीन ने भी डा. दीन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। प्रो. अमरनाथ ने डा. दीन को अनेक आयाम का व्यक्तित्व बताया। डा. शोभित प्रसाद सिंह समेत कई हस्तियों ने भी श्रद्धांजलि दी। समारोह की अध्यक्षता हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ ने की। इस अवसर पर साहित्य एवं सांस्कृतिक जगत के कई हस्तियों को सम्मानित भी किया गया । संयोजक प्रभात रंजन दीन ने इस अवसर पर यह घोषणा की कि अगले वर्ष से एक पुरूष साहित्यकार को डा. सीताराम दीन और एक महिला साहित्यकार को डा.उषा रानी सिंह सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन डा. सीताराम दीन - डा. उषा रानी सिंह स्मृति न्यास के द्वारा किया गया ।

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