Current affeiars Upsc/State PCS

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12/03/2023

Upsc pre 2012 PYQ

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07/03/2022
20/02/2022

राज्यपालों और राज्य सरकारों में बढ़ता मतभेद

हाल ही में कुछ राज्य सरकारों और उनके राज्यपालों के बीच मतभेद की खबरें आती रही हैं। इनमें केरल और महाराष्ट्र की चर्चा प्रमुख है। राज्यपाल और राज्य सरकारों के बीच की तनातनी कोई नई बात नहीं है। परंतु अब यह खुलकर सामने आने लगी है। पश्चिम बंगाल में यह मुद्दा आम हो चला है। राजस्थान के राज्यपाल ने भी राज्य मंत्रिपरिषद् की सलाह मानने से इंकार कर दिया है। इस प्रकार के विवादों ने अब संवैधानिक मर्यादा की सीमाओं को लांघना शुरू कर दिया है।

राज्यपाल का अस्तित्व –

भारत के संविधान में राज्यपाल, संविधान सभा से उभरा एक ऐसा पद है, जिसे विवेकाधीन शक्तियां दी गई हैं। इसके अलावा, अनुच्छेद 163, भारत सरकार अधिनियम 1935 की धारा 50 की ज्यो की त्यों कॉपी है। 1935 के अधिनियम के इस प्रावधान में, सरकार की तुलना में राज्यपाल की वास्तविक शक्तियों के बारे में अस्पष्टता है। इसे शमशेर सिंह से लेकर रबिया वाले मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल को राज्य मंत्रिपरिषद् की सलाह पर ही चलना होगा।

महाराष्ट्र और केरल का मामला

पिछले दिनों महाराष्ट्र के राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की तिथि को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उनका यह कदम संवैधानिक सरकार के विरूद्ध था।

केरल के राज्यपाल ने कन्नूर विश्वविद्यालय के उपकुलपति की पुनर्नियुक्ति के बाद, राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसके दबाव में उन्हें ऐसा करना पड़ा है।
सार –

राज्यपाल एक उच्च संवैधानिक पद देखते हैं। उन्हें संविधान की चारदीवारी के भीतर काम करना चाहिए। उन्हें अपनी सरकार का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक बनना चाहिए। संविधान उन्हें समानांतर सरकार बनने की अनुमति नहीं देता है। न ही उन्हें राज्यपाल के रूप में उनके कार्यों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाता है।

इस प्रकार के टकराव केवल विपक्षशासित राज्यों में होते हैं। यह दर्शाता है कि राजनैतिक औचित्य, संवैधानिक औचित्य से आगे निकल गया है।

20/02/2022

इज़रायली प्रधानमंत्री की बहरीन यात्रा

चर्चा में क्यों

हाल ही में, इज़रायल के प्रधानमंत्री ने बहरीन की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की।
इसे अत्यधिक ऐतिहासिक माना जा रहा है।यात्रा का महत्त्व

इस यात्रा को इज़रायल और खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, इराक, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के मध्य विकसित हो रहे संबंधों का संकेत माना जा रहा है।

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के कारण इन सात खाड़ी देशों के साथ इजरायल के संबंधों में कड़वाहट आ गई थी।
इस यात्रा का लक्ष्य अब्राहम समझौते में व्यापार, जन संपर्क सहित अन्य आयामों को जोड़ना है। यह अमेरिका के सहयोग से वर्ष 2020 में इज़रायल और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य हस्ताक्षरित 'अब्राहम समझौते' के पश्चात प्रमुख बैठक है।
उल्लेखनीय है दिसंबर 2021 में पहली बार इज़रायल के किसी प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया था।
दोनों पक्षों ने एशिया और यूरोप के बीच वस्तुओं की आवाजाही के साथ-साथ यहूदी एवं मुस्लिम आर्थिक उद्यमियों व व्यापारियों द्वारा इज़राइल और बहरीन के भौगोलिक लाभों का उपयोग करने पर चर्चा की।

अब्राहम समझौता

सितंबर 2020 में इज़रायल ने बहरीन तथा यू.ए.ई. के साथ सामान्यीकरण समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
इसको सामूहिक रूप से अब्राहम समझौते के नाम से जाना जाता है।

यह समझौता ईरान का मुकाबला करने के लिये खाड़ी देशों के क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंडा का हिस्सा है। इसके तहतइज़रायल, वेस्ट बैंक के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा करने की अपनी योजना को विराम देने पर सहमत हो गया है।

14/09/2018

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