Rahul Kumar Bharat
अपनी तन्हाई की पलकें भिगो लू पहले,
फिर ग़ज़ल तुझ पे लिखूं, बैठ के रो लू पहले.
मोहब्बत चाहिए नहीं हम अकेले ठीक हैं हमारे साथ दोस्त है वही ठीक है
तुझे भुलाने के लिए तेरी यादों को भुलाना होगा बेवफ़ा है तु
मां की आंखों का तारा था मैं पिता का सहारा था मैं
meri zindagi railway station Jaisi ho gayi hai
जिसने जैसा समझा वैसा हूं मैं वह वह वह बाकि मेरा रब जनता है कैसा हु मै
मैंने भगवान को नहीं देखा है पर अपने मां को दिखा है मेरी तकलीफ में मुझसे ज्यादा उन्हें तड़पते हुए देखा है
बुरे वक्त पर छोड़कर जा रही हो जाओ शौख से जाओ पर वादा करता हूं अपनी मेहनत
कोई तलवार नहीं जिसे कोई ढाल रोक दे मां बाप का आर्शीवाद है मुझपे
आज के दुनिया में कोई इज्जत नहीं पैसा है तो इज्जत है तो भाई पैसा कमाना जरुरी है
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Patna