Shivam Raj

Shivam Raj

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Jai hind ���

11/03/2024

रसोई में भोजन बनाना
छोड़ने का दुष्परिणाम जानिए।

अमेरिका में क्या हुआ, जब
घर में भोजन बनाना बंद हो गया ?

1980 दशक के
अमेरिकी अर्थशास्त्रियों ने
अमेरिकी लोगों को चेतावनी दी, कि
यदि वे परिवार में आर्डर देकर
बाहर से भोजन मंगवायेंगे, तो
परिवार व्यवस्था धीरे-धीरे
समाप्त हो जाएगी.

साथ ही दूसरी चेतावनी दी, कि
यदि उन्होंने बच्चों का पालन पोषण
घर के बुजुर्गों के स्थान पर
बाहर से व्यवस्था की तो यह भी
परिवार व्यवस्था के लिए घातक होगा.
लेकिन बहुत कम लोगों ने
उनकी सलाह मानी.
घर में भोजन बनाना
लगभग बंद हो गया है, और
बाहर से मंगवाने की आदत
(यह अब नॉर्मल है),
अमेरिकी परिवारों के
विलुप्त होने का कारण बनी है,
जैसा कि ....
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी.

प्यार से भोजन बनाना, मतलब
परिवार के सदस्यों के साथ
प्यार से जुड़ना.

● पाक कला ●
अकेले भोजन बनाना नहीं है,
बल्कि ... केंद्र बिंदु है,
पारिवारिक संस्कृति का.

अगर कोई किचन नहीं है,
तो बस एक बेडरूम है,
यह परिवार नहीं है,
यह एक हॉस्टल है.

उन अमेरिकी परिवारों के बारे में जानें
जिन्होंने अपनी रसोई बंद कर दी और
सोचा कि अकेले बेडरूम ही काफी है.

★ 1971 में, लगभग 72%
अमेरिकी परिवारों में
केवल पति और पत्नी थे,
जो अपने बच्चों के साथ रह रहे थे.
2020 तक, यह आँकडा
22% पर आ गया है.

★ पहले साथ रहने वाले परिवार
अब नर्सिंग होम (वृद्धाश्रम) में
रहने लगे हैं.

★ अमेरिका में, 15% महिलाएं
एकल महिला परिवार के रुप में
रहती हैं.

★ 12% पुरुष भी
एकल परिवार के रूप में रहते हैं.

★ अमेरिका में 19% घर या तो
अकेले रहने वाले पिता या
माता के स्वामित्व में हैं.

★ अमेरिका में आज पैदा होने वाले
सभी बच्चों में से 38%
◆ अविवाहित महिलाओं से
पैदा होते हैं.
उनमें से आधी लड़कियाँ हैं,
जो स्कूलों में जा रही हैं.

★ संयुक्त राज्य अमेरिका में
लगभग 52% पहली शादियाँ
तलाक में परिवर्तित होती हैं.
67% दूसरी शादियाँ भी
समस्याग्रस्त हैं.

अगर किचन नहीं है और सिर्फ
बेडरूम है तो वह पूरा घर नहीं है.
संयुक्त राज्य अमेरिका
विवाह की संस्था के टूटने का
एक उदाहरण है.

हमारे आधुनिकतावादी भी
अमेरिका की तरह दुकानों से या
ऑनलाईन भोजन ख़रीद रहे हैं
और खुश हो रहे हैं कि
भोजन बनाने की समस्या से
हम मुक्त हो गए हैं.
इस कारण भारत में परिवार
धीरे-धीरे
अमेरिकी परिवारों की तरह
नष्ट हो रहे हैं.

जब परिवार नष्ट होते हैं , तो
मानसिक और शारीरिक
दोनों ही स्वास्थ्य बिगड़ते हैं.
बाहर का खाना खाने से
अनावश्यक खर्च के अलावा
शरीर मोटा और संक्रमण के प्रति
संवेदनशील हो सकता है.

इसलिए ... घर पर भोजन बनाना,
परिवार के सुखी रहने का
एकमात्र कारण नहीं है.
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी
देश की अर्थव्यवस्था के लिए
आवश्यक है.

इसलिए ....
हमारे घर के बड़े-बूढ़े लोग,
हमें बाहर के भोजन से
बचने की सलाह देते थे.
लेकिन आज
हम अपने परिवार के साथ
रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं.

स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से
अजनबियों द्वारा पकाए गए
भोजन को ऑनलाइन
ऑर्डर करना और खाना,
उच्च शिक्षित, मध्यवर्गीय
लोगों के बीच
फैशन बनता जा रहा है.

दीर्घकालिक आपदा होगी -->
ये आदत.
अगर वो ऑनलाइन कंपनियाँ
जो मनोवैज्ञानिक रूप से
तय करती हैं , कि हमें
क्या खाना चाहिए.

हमारे पूर्वज किसी भी यात्रा पर
जाने से पहले घर से भोजन
बनाकर ही ले जाते थे.

इसलिए ... भोजन घर में ही बनायें,
मिल-जुलकर खायें और
खुशी से रहें.

पौष्टिक भोजन के अलावा,
इसमें प्रेम और स्नेह निहित है।
कृपया

Shivam Raj Kumar
Rajiv Dixit
Shivam Raj

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गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया...
 गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं 11/12/2023

मुझे अपनी हालिया लोकप्रिय पोस्ट पर 1 रिएक्शन मिला! मुझे सपोर्ट करते रहने के लिए आपका धन्यवाद. आप सभी के बिना यह नहीं हो पाता. 🙏🤗🎉

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11/12/2023

मैंने पिछले 90 दिनों में 37 फ़ॉलोअर मिले, 2 पोस्ट की गईं और 11 रिएक्शन मिले! मुझे सपोर्ट करते रहने के लिए आपका धन्यवाद. आप सभी के बिना यह नहीं हो पाता. 🙏🤗🎉

11/08/2023

शर्मनाक राजस्थान की गहलोत सरकार.... Ashok Gehlot जी राजस्थान के गौभक्त माटी पर गौद्रोह मत फैलाओ... इस काले कानून को वापिस लो...

ऊंट, घोड़ा आदि तो बहाना है दरअसल लोगो को गौपालन एवं गौसेवा से दूर करने के लिए आने वाले यह कानून राजस्थान में मात्र उदाहरण है जो आगे चलकर पूरे देश में लागू होगा। इसके तहत आप के पास उपयुक्त भूमि संसाधन होने पर आप पैसों में लाइसेंस ले सकेंगे और तभी गायों को रख सकेंगे। अभी राजस्थान सहित देशभर में अपने छोटे से घर में भी एक गौमाता कोई गौसेवक रख रहा है किंतु इस कानून के अधीन जीवों की सुविधा हेतु बने नियामक का क्षेत्रफल और स्थान के अभाव में उसे लाइसेंस भी नही मिल सकेगा और फिर प्रत्येक साल पैसे कौन दे सकता है। यहां चारे की दिक्कत है और ऊपर से यह अतिरिक्त कानून बनाना निश्चित तौर पर लोगो को गौसेवा सहित अन्त जीवों से दूर करने का षड्यंत्र है। 8 करोड़ से अधिक गांव के लोग प्रत्यक्ष तौर पर दुग्ध के इस कारोबार में लगे हैं । इसी के साथ गांव गांव में दूध के स्वदेशी घरेलू डेयरी सेक्टर को बर्बाद करने का बड़ा मकड़जाल है जो प्रतिदिन दूध डेयरी के माध्यम से क्रय और विक्रय करते हैं। इस स्वदेशी छोटे डेयरी उद्योगो के बर्बाद होने से बड़ी बड़ी MNC और कॉरपोरेट इस डेयरी को पूर्णतः कंट्रोल करेंगे।

देश में ऐसे विभत्स SDO और NWO के अधीन बन रहे कानूनों और हरामखोरी के खिलाफ ही आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ता है फिर चाहे वो कांग्रेस अधीन राज्य हो या भाजपा...
महत्वपूर्ण है सरकारो को सही दिशा दिखाने के लिए और उचित कार्यवाही हेतु समाज को आंदोलित होना ही पड़ता है।
साम दाम दण्ड भेद जिस भी नीति से हो गौमाता का कार्य होना ही चाहिए। अतः उठिए और इस कुव्यवस्था से लड़ने को खड़े होइए। गौमाता पर आघात मानवजाति के अस्तित्व पर संकट है।
#गौमाता_राष्ट्रमाता_महाअभियान #गौमाता_राष्ट्रमाता

27/06/2023

सावधान दुप्पटा बांधने की झंझट से बचने के लिए आप ये हिजाब मत अपनाना
हिन्दू औरतें और हिन्दू लड़कियों मार्केट में धूप से बचने के लिए ये हिजाब आ गया है, जी हाँ, हिन्दू इलाको की दुकानों में भी, लेकिन इसको नही खरीदना है, आप दुप्पटा ही बांधना ना की ये हिजाब,

फैशन के नाम पर तुम पर ये हिजाब थोपने की तैयारी है, हिन्दू व्यापारियों से निवेदन है की इस तरह के हिजाब ना बेचे

01/03/2023
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