Magic Science
Vastu and numerology consultant
24/01/2017
यदि पढ़ाई करते वक्त बहुत ज़्यादा नींद आती हो, पढ़ाई में मन न लगे, रुकावटें आए तो इसके लिए छात्र को पूर्व की तरफ सिरहाना करके सोना चाहिए.
If your child falls asleep during study hours, is unable to concentrate and keeps looking for excuses for not to study, then ask him to sleep with his head towards east direction.
note:-ऐसे ही ओर बहुत से उपाए जानने के लिए संपर्क करें
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20/01/2017
Vastu Shastra
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02/01/2017
12/10/2016
वास्तुशास्त्री कहते हैं,रोग और शोक से बचने के लिए
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वास्तु शास्त्र मानव मात्र को यह बताता है कि गृह निर्माण में किन दोषों के कारण रोगों की उत्पत्ति संभव है। यदि इन दोषों से बचकर हम अपने घर का निर्माण कराएं तो हम निरोगी रह सकते हैं।
भूमि परीक्षण : गृह निर्माण के लिए शास्त्र सम्मत भूमि कैसी हो इसकी परीक्षा करने के लिए भूमि के बीचों-बीच एक लम्बा, एक हाथ चौड़ा और एक ही हाथ गहरा गड्ढा खोदें। गड्ढे से निकाली हुई सारी मिट्टी फिर से इसमें भरें। गड्ढे भरने के बाद यदि कुछ मिट्टी शेष रह जाती है तो यह भूमि श्रेष्ठ मानें। यदि मिट्टी गड्ढे के बराबर निकलती है तो मध्यम और यदि गड्ढा नहीं भर पाता और मिट्टी खत्म हो जाती है तो भूमि को अधम मानें। इस बात का ध्यान भी रखें कि भूमि पर यदि चूहों के बिल, बांबी, भूमि ऊबड़-खाबड़ या फटी हो, गड्ढे वाली या टीलेदार हो तो ऐसी भूमि रहने योग्य नहीं मानी जाती।
भूमि की सतह : पूर्व, उत्तर व ईशान कोण में नीची भूमि सभी तरह से शुभ मानी जाती है। आग्नेय, दक्षिण, नैर्ऋत्य, पश्चिम, वायव्य और मध्य में नीची भूमि रोगों को देने वाली होती है।
गृहारम्भ : आरोग्य और धनधान्य के लिए वैशाख, श्रावण, कार्तिक, मार्गशीर्ष और फाल्गुन के महीने में गृह निर्माण का कार्य शुरू करें।
गृह आकार : चौकोर या आयताकार मकान सबसे अच्छा माना जाता है। आयताकार मकान में चौड़ाई के दोगुना से अधिक लम्बाई नहीं हो। मकान को किसी एक दिशा में आगे न बढ़ाएं। यदि बढ़ाना ही हो तो सभी दिशाओं में समान रूप से बढ़ाएं। घर यदि वायव्य दिशा में आगे बढ़ाया जाए तो मृत्यु भय, उत्तर में बढ़ाने पर रोगों में वृद्धि और दक्षिण में बढ़ाने पर जय होती है।
निर्माण सामग्री : ग्रह निर्माण में काम आने वाली ईंट, लकड़ी, लोहा, पत्थर सब कुछ नया ही लगाना चाहिए। दूसरे मकान से काम में ली गई निर्माण सामग्री लगाने से गृह स्वामी का नाश होता है।
घर के द्वार : जिस दिशा में घर का दरवाजा बनाना हो उस ओर मकान की लम्बाई को बराबर नौ भागों में बांट कर पांच भाग दाएं और तीन भाग बाएं छोड़कर शेष भाग में द्वार बनाएं। दायां और बायां भाग उसको मानें जो घर से बाहर निकलते समय हो। पूर्व और उत्तर दिशा में बना द्वार सुख-समृद्धिदायक और दक्षिण में बना द्वार स्त्रियों के लिए अशुभ है।
यहां यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि द्वार वेध भी होते हैं। घर के दरवाजे के सामने पेड़, कुआं, खंभा या बावड़ी होना अशुभ है। हां, यदि घर की ऊंचाई से दोगुना जमीन छोड़कर वेध हो तो उसका दोष नहीं होता है।
घर में कमरों की स्थिति : घर में यदि एक कमरा पश्चिम में व एक कमरा उत्तर में हो तो यह गृह स्वामी के लिए अच्छा नहीं है। शास्त्रानुसार बाथरूम पूर्व में, किचन आग्नेय में, स्लीपिंग रूम दक्षिण में, बड़े भाई या पिता का कमरा नैर्ऋत्य में, शौचालय नैर्ऋत्य, वायव्य या दक्षिण नैर्ऋत्य में, डाइनिंग रूम पश्चिम में, पूजा घर उत्तर या ईशान में और धन संग्रह यानी तिजोरी उत्तर में रखनी चाहिए।
11/08/2016
Vaastu projects
15/07/2016
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05/05/2016
क्यों मना किया जाता है किचन उत्तर या उत्तर -पूर्व में बनाने से
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क्यों मना किया जाता है किचन उत्तर या उत्तर -पूर्व में बनाने से
जब भी किसी घर में कोई वास्तु उपाय करवाया जाता है तो लोगों की रूचि रहती है की ऐसा क्यूँ कराया जा
रहा है. और भी जब हमें हमारा संतुष्टि पूर्ण जवाब मिल जाता है तो उपाय करने में आसानी रहती है. हम आपको बतायंगे के क्यों kitchen को नार्थ व नार्थ-ईस्ट दिशा shift से मना किया जाता है.
नार्थ-ईस्ट - ये घर की सबसे पवित्र दिशा होती है. इसी दिशा में सकारात्मक ऊर्जा उत्तपन होती है. इस दिशा को five elements में जल का स्थान दिया जाता है. आप कभी भी किसी vastu expert को बुलाते है या किसी किताब में भी पड़ते है इस दिशा को खाली रखने या जल का स्त्रोत रखने के लिए कहा जाता है. जल सम्बन्ध हमारे सभी कार्य व् शरीर इसी सम्बन्ध रखते है.
kitchen in ishaan kon
किचन - किचन का relation अग्नि से होता है. अग्नि तत्व (fire element) का सम्बन्ध हमारे शरीर की अग्नि, खून, गुस्सा, लाल रंग, शादी, लड़ाई-झगड़ा , कोर्ट, एक्सीडेंट, कैंसर, त्यौहार है.
north-east kitchen
नार्थ-ईस्ट में किचन - जब किचन इस दिशा में आता है तो जल और अग्नि का मिलान हो जाता है. और जब इन दोनों का मिलान होता है तो दोनों तत्व destroy है. जल जिसका सम्बन्ध हमारी दैनिक आमदनी से व् सामजिक प्रतिष्ठा से होता है उसमे कमी आती है. अग्नि तत्व बिगड़ने के कारन बीमारियां ऐसे घरो से नही जाती, कोर्ट केस भी परेशानी डाले रखते है.
उपाय - अब बात आती है उपाय की. आजकल में तोड़फोड़ करवाना मुश्किल व खर्चीला हो गया है. इसीलिए वास्तु में कुछ छोटे उपयो से इस दोष को कम किया जा सकता है.
1. किचन में काला रंग बिलकुल भी ना लगायें। ऐसे में काली स्लैब होना और ज्यादा परेशानी देता है.
2. जहां तक हो सके पूर्व मुखी होकर ही खाना बनाये.
3. किचन में हल्का पिला रंग करवाये, नील व् काले रंग से बचें
4 अक्सर देखा जाता है जिन घरो में किचन ईशान में हो तो ऐसे घरो में कबाड़ बहुत ज्यादा इकट्ठा होता है यदि ऐसा है तो कबाड़ को घर से बाहर करें, ये काम सबसे पहले ही करें
5. खाना बनाते समय मुख पूर्व की और करे, उत्तर की और बिलकुल भी ना करे.
6 यदि हो सके तो पूर्व या उत्तर में एक खिड़की का निर्माण करे व् खाना बनाते समय खिड़की खुली रखें यदि खिड़की बनना मुश्किल है तो पूर्व या उत्तर दिशा में एक शीशा लगा दे
7 किचन के बिलकुल बाहर उत्तर की तरफ एक rock salt lamp लगाये ये किचन की नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की क्षमता रखता है
8 किचन में चूल्हे के दोनों तरफ एक पिरामिड चिप लगाएं
9. यदि किचन का फर्श उठा हुआ है तो उसे लेवल में कराये यदि नीचा तो उसे ऐसा ही रहने दें
10 किचन में उत्तर या ईशान में एक पिरामिड भी रखा जा सकता है
11 ऐसे किचन भारी सामान रखना और भी खतरनाक हो जाता है ऐसा ना करें
05/05/2016
Vastu expert + pyra vastu expert + numerology expert etc....
Consultant without demolition
Via Chandni gumber nd her team
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Agar aap ko life mai settlement ki problem aa rahi hai thow aap 24 shukravaar lagataar maa santoshi ki pooja karey,kamaal aap ko khud he dikh jaayeygaa.
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