K. C. Prashant Path Lab
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With state-of-the-art technology and a commitment to patient care, we ensure timely and precise results for your health and wellness
Doctor ने Test लिखा है? पहले ये 3 सवाल पूछिए! 🧪
अगली बार कोई test recommend हो तो—
❌ घबराकर तुरंत “हाँ” मत कहिए।
❌ और बिना समझे “नहीं” भी मत कहिए।
अपने doctor से बस ये 3 simple सवाल पूछिए:
1️⃣ यह test मेरे लिए क्यों जरूरी है?
Test के पीछे clinical reason क्या है?
2️⃣ अगर test abnormal आया तो आगे क्या करेंगे?
क्या इसका result आपके treatment या आगे के management को बदल देगा?
3️⃣ अगर test normal आया तो क्या बदलेगा?
इससे आपको test की वास्तविक usefulness समझने में मदद मिलेगी।
क्योंकि एक smart patient वह नहीं है जो हर test करवाता है…
और न ही वह जो हर test को मना कर देता है।
Smart patient वह है जो समझता है कि test क्यों किया जा रहा है।
और याद रखिए—
आपको अपने doctor से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। 👨⚕️
🎥 बीमारी नहीं... उसकी असली कीमत | Episode 5
Ask Dr. Gupta
https://www.youtube.com/watch?v=XSJFakPM1zs&list=PLVHrzUoJ5za8&index=1
“मुझे कुछ महसूस नहीं होता, इसलिए मुझे कोई test नहीं चाहिए।”
क्या यह सोच सही है? 🤔
हर बार नहीं।
कई diseases, खासकर शुरुआत में, बिना किसी स्पष्ट symptom के भी मौजूद हो सकती हैं।
इसीलिए appropriate preventive care और screening महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि—
❌ हर व्यक्ति को हर test करा लेना चाहिए।
Smart screening का मतलब है:
🧑 सही व्यक्ति
🎂 सही उम्र / risk category
⏰ सही समय
🧪 सही test
यानी दो extremes से बचना जरूरी है:
Overtesting ❌
Ignoring necessary screening ❌
और इनके बीच है—
SMART SCREENING ✅
ज्यादा tests नहीं…
जरूरत के अनुसार सही tests।
🎥 बीमारी नहीं... उसकी असली कीमत | Episode 5
Ask Dr. Gupta
क्या ज्यादा tests का मतलब ज्यादा safety है? 🧪🤔
कई बार हम सोचते हैं—
“जितने ज्यादा tests होंगे, उतना कुछ छूटेगा नहीं।”
लेकिन overtesting की अपनी कीमत हो सकती है।
💰 पहली कीमत — पैसा
बिना जरूरत के किए गए tests पर ऐसा खर्च हो सकता है जिसकी medical necessity ही न हो।
😟 दूसरी कीमत — Anxiety
एक छोटी abnormal value देखकर व्यक्ति कई दिनों तक परेशान हो सकता है।
🚨 तीसरी कीमत — False Alarms
कुछ test results abnormal दिख सकते हैं, लेकिन इसका मतलब जरूरी नहीं कि कोई गंभीर disease मौजूद है।
इसके बाद शुरू हो सकती है:
Repeat Test → Consultation → Imaging → Further Investigation
और कभी-कभी एक incidental finding investigations की पूरी chain शुरू कर देती है।
इसलिए—
More Tests ≠ Always Better Healthcare
⚠️ लेकिन जरूरी tests को avoid करना भी सही नहीं है।
Smart healthcare का मतलब है—
सही व्यक्ति के लिए, सही समय पर, सही test।
🎥 बीमारी नहीं... उसकी असली कीमत | Episode 5
Ask Dr. Gupta
Watch Full Video-
https://www.youtube.com/watch?v=XSJFakPM1zs&list=PLVHrzUoJ5za8&index=1
Report में Normal है… तो क्या आप 100% Healthy हैं? 🤔
और अगर कोई value Abnormal है…
तो क्या इसका मतलब आपको कोई गंभीर बीमारी है?
जरूरी नहीं।
Laboratory report की reference range कोई ऐसी boundary नहीं है जहाँ:
🟢 अंदर = 100% Healthy
🔴 बाहर = निश्चित रूप से बीमार
Reference ranges statistical concepts पर आधारित होती हैं और अलग-अलग laboratories, testing methods और populations के अनुसार इनमें कुछ अंतर हो सकता है।
इसलिए किसी report को सिर्फ एक number देखकर interpret करना सही approach नहीं है।
एक responsible interpretation में देखा जाता है:
🩺 Symptoms
📋 Medical History
👨⚕️ Clinical Examination
🔬 Laboratory Results
🧩 Overall Clinical Context
याद रखिए:
Abnormal report देखकर तुरंत panic मत कीजिए।
और Normal report देखकर यह मत मान लीजिए कि हर बीमारी rule out हो गई।
क्योंकि…
Google की एक line, आपके doctor की पूरी clinical assessment का replacement नहीं हो सकती।
🎥 बीमारी नहीं... उसकी असली कीमत | Episode 5
Ask Dr. Gupta
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Test कराने से पहले एक सवाल पूछिए—“यह test क्यों?” 🧪
एक अच्छा medical test सिर्फ इसलिए नहीं किया जाता कि “report में कुछ भी छूटना नहीं चाहिए।”
Doctor के मन में एक clinical question होता है।
क्या diabetes का risk है?
क्या anemia है?
क्या thyroid function में समस्या हो सकती है?
क्या किसी symptom के पीछे कोई specific कारण है?
क्या किसी known disease की monitoring करनी है?
यानी—
पहले सवाल आता है… फिर appropriate test।
जब बिना clinical context के बहुत सारे tests करा लिए जाते हैं, तो किसी न किसी value के reference range से बाहर आने की संभावना बढ़ सकती है।
फिर एक abnormal number देखकर anxiety शुरू हो सकती है। 😟
इसलिए smart healthcare का मतलब ज्यादा tests नहीं… सही सवाल के लिए सही test है।
⚠️ और याद रखें—जरूरी tests को avoid करना भी सही नहीं है। अपने doctor की clinical advice को समझिए और सवाल पूछने में कभी hesitate मत कीजिए।
🎥 बीमारी नहीं... उसकी असली कीमत | Episode 5
Ask Dr. Gupta
Watch Full Video- https://www.youtube.com/watch?v=XSJFakPM1zs&list=PLVHrzUoJ5za8&index=1
हर टेस्ट जरूरी नहीं होता! 🧪
अगर कोई आपको कहे—
“50 tests वाला Full Body Checkup Package है…”
“70 tests हैं…”
“कुछ भी छूटेगा नहीं…”
तो क्या इसका मतलब है कि यह सबसे अच्छा health package है?
जरूरी नहीं।
Healthcare में हमेशा:
More Tests ≠ Better Healthcare
एक अच्छा medical test किसी specific clinical question का जवाब देने के लिए किया जाता है।
लेकिन बिना clinical context के बहुत सारे tests कराने से कभी-कभी—
💰 Unnecessary खर्च
😟 Anxiety
🚨 False alarms
🔄 Repeat tests और investigations
की शुरुआत हो सकती है।
इसलिए अगली बार जब कोई test recommend हो, तो अपने doctor से ये 3 सवाल जरूर पूछें:
1️⃣ यह test मेरे लिए क्यों जरूरी है?
2️⃣ अगर result abnormal आया तो आगे क्या करेंगे?
3️⃣ अगर result normal आया तो क्या बदलेगा?
और याद रखिए—
Screening का मतलब हर व्यक्ति को हर test कराना नहीं है।
Smart screening का मतलब है:
सही व्यक्ति + सही समय + सही risk category + सही test
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि जरूरी tests को avoid किया जाए।
Unnecessary testing से बचिए, लेकिन necessary testing में delay मत कीजिए।
🎥 देखिए “बीमारी नहीं... उसकी असली कीमत” – Episode 5 | Ask Dr. Gupta
ज्यादा टेस्ट नहीं…
सही टेस्ट, सही समय पर। 👨⚕️
😴 क्या 4 घंटे की नींद सच में काफी है?
आज हममें से बहुत लोग नींद को luxury समझने लगे हैं।
“चार घंटे सोना काफी है…”
“Weekend में पूरी कर लेंगे…”
लेकिन लगातार खराब sleep आपकी:
🔹 Energy
🔹 Mood
🔹 Concentration
🔹 Overall health
पर असर डाल सकती है।
और अगर आप लगातार खर्राटे लेते हैं, रात में सांस रुकने जैसा महसूस होता है, सुबह उठने के बाद भी बहुत थकान रहती है, या दिन में अत्यधिक नींद आती है—तो इसे ignore मत कीजिए।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से बात कीजिए।
क्योंकि…
“कभी-कभी नींद की समस्या सिर्फ नींद की समस्या नहीं होती।”
🎥 Sleep Deprivation Series | Episode 4
Ask Dr. Gupta - https://www.youtube.com/watch?v=5wx1ikIVlmE
सांस फूलना… सिर्फ थकान है या शरीर का कोई Warning Signal?
अगर पहले आप आसानी से दो मंजिल चढ़ जाते थे, लेकिन अब वही काम करने में असामान्य रूप से सांस फूलने लगी है—तो इस बदलाव को ignore मत कीजिए।
और अगर इसके साथ हो:
🔴 सीने में दर्द या दबाव
🔴 अचानक सांस लेने में परेशानी
🔴 बेहोशी
🔴 गंभीर कमजोरी
तो इसे Google या social media पर search करने का विषय मत बनाइए।
तुरंत medical evaluation की जरूरत हो सकती है।
लेकिन एक जरूरी बात—
हर सांस फूलना heart disease नहीं होता।
फिर भी कुछ symptoms ऐसे होते हैं जिनमें समय पर medical attention लेना बहुत जरूरी है।
न घबराइए। न नजरअंदाज कीजिए। सही समय पर सही सलाह लीजिए। 👨⚕️
🎥 Sleep Deprivation Series | Episode 4
Ask Dr. Gupta
Watch Full Video - https://www.youtube.com/watch?v=5wx1ikIVlmE
सांस फूलना… सिर्फ थकान है या शरीर का कोई Warning Signal?
अगर पहले आप आसानी से दो मंजिल चढ़ जाते थे, लेकिन अब वही काम करने में असामान्य रूप से सांस फूलने लगी है—तो इस बदलाव को ignore मत कीजिए।
और अगर इसके साथ हो:
🔴 सीने में दर्द या दबाव
🔴 अचानक सांस लेने में परेशानी
🔴 बेहोशी
🔴 गंभीर कमजोरी
तो इसे Google या social media पर search करने का विषय मत बनाइए।
तुरंत medical evaluation की जरूरत हो सकती है।
लेकिन एक जरूरी बात—
हर सांस फूलना heart disease नहीं होता।
फिर भी कुछ symptoms ऐसे होते हैं जिनमें समय पर medical attention लेना बहुत जरूरी है।
न घबराइए। न नजरअंदाज कीजिए। सही समय पर सही सलाह लीजिए। 👨⚕️
🎥 Sleep Deprivation Series | Episode 4
https://www.youtube.com/watch?v=5wx1ikIVlmE
Ask Dr. Gupta
09/09/2026
📰 Media Coverage | Dr. Prashant Gupta
“डेंगू में प्लेटलेट कम होने पर घबराने की जरूरत नहीं, हर मरीज को प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी नहीं।”
बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया के मामलों के साथ प्लेटलेट कम होने की रिपोर्ट देखकर अक्सर मरीज और परिवार घबरा जाते हैं। ऐसे समय में सही जांच और सही मेडिकल सलाह बेहद महत्वपूर्ण है।
🩸 सिर्फ प्लेटलेट काउंट कम होना ही प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन का आधार नहीं होना चाहिए।
🔬 IPF (Immature Platelet Fraction) जैसी जांच शरीर में नए प्लेटलेट बनने की प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकती है।
👨⚕️ मरीज की clinical condition, bleeding के लक्षण, platelet trend और अन्य जांचों को ध्यान में रखकर डॉक्टर उपचार का निर्णय लेते हैं।
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हुए अपील की है कि प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर खुद से निर्णय न लें और इंटरनेट या आसपास के लोगों की सलाह पर अपने आप platelet transfusion न करवाएं।
👉 सही जानकारी • सही जांच • सही समय पर सही उपचार
📌 यह जानकारी केवल जन-जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी मरीज के उपचार का निर्णय उसके चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही होना चाहिए।
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