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पाली जिला भारत के राजस्थान प्रान्त का एक जिला है जिसकी पूर्वी सीमाएं अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़ी हैं। इसी सीमाएं उत्तर में नागौर और पश्चिम में जालौर से मिलती हैं। पाली शहर पालीवाल ब्राह्मणों का निवास स्थान था जब मुगलों ने कत्लेआम मचा दिया तो उन्हें यह शहर छोड़ कर जाना पड़ा। वीर योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म भी यहीं पर अपने ननिहाल में हुआ था। यह नगर तीन बार उजड़ा और बसा। यहां के प्रसिद्ध जैन मंद
िर भक्तों के साथ-साथ इतिहासवेत्ताओं को भी आकर्षित करते हैं।
श्री बांगड़ राजकीय उच्च माध्यमक विद्यालय, पाली जिले का अग्रणी शिक्षा संस्थान है, इसका इतिहास बहुत पुराना है. दानवीर सेठ श्री मगनीराम बांगड़ की याद में उनके परिवार द्वारा बनवाए गए भवन में स्थानान्तरित होने से पूर्व यह शिक्षण संस्थान दरबार हाई स्कूल के नाम से जाना जाता था.
दरबार हाई स्कूल का प्रारम्भ दरबार प्राथमिक विद्यालय के रूप में 1876 के भी पूर्व हुआ था. 1925 में यह दरबार वर्नाकुलर मिडिल स्कूल में क्रमोन्नत हुआ. 1949 में हाई स्कूल बनने के साथ ही तहसील कार्यालय के अन्यत्र स्थानान्तरित होने से रिक्त भवन भी विद्यालय को मिलने से विद्यालय के विस्तार की सम्भावनाऐं बढ़ गई.
वर्तमान विद्यालय भवन बनने की बात 17 फरवरी, 1951 को प्रारम्भ हुई. 14 जुलाई, 1951 शनिवार को तत्कालीन शिक्षा मंत्री राज. श्रीमान् मथुरादास माथुर ने इस भवन का शिलान्यास किया. 1954 में यह भवन तैयार हो गया। 15 अगस्त 1954को स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम इस नये भवन में आयोजित किया गया। शरद पूर्णिमा 12 अक्टूबर 1954 से इस विद्यालय में शिक्षण कार्य प्रारम्भ हुआ साथ ही विद्यालय का नाम श्री बांगड़ राजकीय हाई स्कूल में बदल गया। 1961 में श्री बांगड़ हाई स्कूल श्री बांगड़ उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत हुआ. 1986 में जब पूरे राज्य में 10+2 प्रणाली लागू की गई तो यह विद्यालय राज्य में कुछ चुने हुए विद्यालयों में से एक था. गतिविधियों की विविधता तथा सुयोग्य संस्था प्रधानों व दक्ष शिक्षकों की प्रेरणा व योगदान से यहां के विद्यार्थियों ने न केवल सम्पूर्ण भारत वर्ष में वरन् विश्व के कोने-कोने तक अपनी प्रतिभा व गुरुजनों के आशीर्वाद से पाली व राजस्थान को गौरवान्वित किया है. यहां के पूर्व विद्यार्थी शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान व व्यवसाय के क्षेत्र में नव कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं कई विद्यार्थी उच्च पदों पर आसीन है. विद्यालय अपने छात्रों को भौतिक सुविधाओं के साथ शैक्षणिक वातावरण प्रदान कर रहा है. विद्यालय में कला, विज्ञान व वाणिज्य संकाय में अनेकानेक विषयों के साथ विद्यालय विकास समिति के माध्यम से स्ववित्तपोषी योजनान्तर्गत अंग्रजी साहित्य व हिन्दी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाये जाने की व्यवस्था की जा रही है. यह जिले में एक मात्र राजकीय विद्यालय में दी जा रही सुविधा है. स्ववित्तपोषी योजना में अंग्रजी साहित्य व टंकण का शत प्रतिशत बोर्ड परीक्षा परिणाम उत्साहवर्द्धक है जो शिक्षा की क्षमता व समर्पण के साथ छात्रों की रुचि व लगन का द्योतक है.