Third View
We present you Another View of World
कल बस दिन बदलेगा
हम वही हालात वही किस्मत वही रहेंगे
काल मेरा क्या कर लेगा
महाकाल का आशीष मुझे
भाग्य के पीछे क्यों भागूं
जब भाग्यविधाता साथ मेरे
न तब जीए (भूतकाल)
न अब जी रहे (वर्तमान)
हम जीए भी तो क्यों जीए
मेरा गुरु समय है
जिससे मैं हर पल सीख रहा
हे प्रभु जो प्राप्त है
मेरे लिए पर्याप्त है
मन बहुत ही चंचल है
वैराग्य से काबू संभव है
पानी बहता है ठहराव कहां
लेकिन बांध से मुमकिन है
वक्त की इक खासियत है
वक्त इक सा नहीं रहता
जिन्दगी की किताब का सबसे यादगार पन्ना
हमने फाड़ दिया
कहीं कोई चुरा न ले
चलो अच्छा हुआ
हम फिर हार गए
इसी बहाने
नया प्रयास तो होगा
शून्य
शून्य से शुरुआत
शून्य से समाप्त
शून्य से जीवन
शून्य से मरण
शून्य से जीव
शून्य से निर्जीव
शून्य से कण
शून्य से संपूर्ण
शून्य ही यत्र
शून्य ही सर्वत्र
शून्य से इंसान
शून्य से भगवान
शून्य से ही मैं
शून्य से त्वमेव
फिर क्यों बेचैन?
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