Legal Reporter
Legal Reporter focused on Supreme Court, Constitution, and justice delivery in India.
Founded and edited by Viplava Awasthi, a senior legal journalist with over 22 years of experience in legal journalism.
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महिला दिवस के अवसर पर भारतीय समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं की असली शक्ति समाज और देश की प्रगति में उनकी सकारात्मक भागीदारी से दिखाई देती है। जब महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, न्याय, व्यवसाय और सामाजिक कार्यों में आगे बढ़कर योगदान देती हैं, तब देश की तरक्की और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को नई दिशा मिलती है।
समाज को ऐसी सोच विकसित करनी होगी जहाँ महिला सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों के खिलाफ संघर्ष या मुक़दमेबाज़ी नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और विकास की साझेदारी हो। पुरुष और महिलाएं जब एक-दूसरे के सहयोगी बनकर आगे बढ़ते हैं, तभी एक मजबूत, संतुलित और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव होता है।
महिला दिवस हमें यही संदेश देता है कि नारी शक्ति को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण में उसकी भागीदारी को और मजबूत किया जाए।
Advocate Viplava Awasthi
Mob- +91-9318428656
08/03/2026
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महिला दिवस के अवसर पर भारतीय समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं की असली शक्ति समाज और देश की प्रगति में उनकी सकारात्मक भागीदारी से दिखाई देती है। जब महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, न्याय, व्यवसाय और सामाजिक कार्यों में आगे बढ़कर योगदान देती हैं, तब देश की तरक्की और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को नई दिशा मिलती है।
समाज को ऐसी सोच विकसित करनी होगी जहाँ महिला सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों के खिलाफ संघर्ष या मुक़दमेबाज़ी नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और विकास की साझेदारी हो। पुरुष और महिलाएं जब एक-दूसरे के सहयोगी बनकर आगे बढ़ते हैं, तभी एक मजबूत, संतुलित और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव होता है।
महिला दिवस हमें यही संदेश देता है कि नारी शक्ति को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण में उसकी भागीदारी को और मजबूत किया जाए।
Advocate Viplava Awasthi
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होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, यह समरसता, समानता और सत्य की जीत का प्रतीक भी है।
जिस तरह होली के दिन रंग अमीर-गरीब, जाति-धर्म, ऊँच-नीच का भेद मिटा देते हैं, उसी तरह न्याय भी सबके लिए समान होना चाहिए।
⚖️ न्याय की असली भावना क्या है?
• कानून का समान रूप से पालन
• निर्दोष की रक्षा
• दोषी को उचित दंड
• पीड़ित को समय पर राहत
• बिना भेदभाव के सुनवाई
होली हमें यह संदेश देती है कि
👉 द्वेष की होलिका जलाएं
👉 अन्याय की मानसिकता को समाप्त करें
👉 सत्य, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपनाएं
आज आवश्यकता है कि हम न्याय को केवल अदालतों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार, प्रशासन और समाज में भी लागू करें।
जब हर व्यक्ति अपने स्तर पर न्यायपूर्ण आचरण करेगा, तभी “सत्यमेव जयते” का वास्तविक अर्थ साकार होगा।
इस होली संकल्प लें —
रंगों के साथ न्याय की भावना भी फैलाएँ।
सत्यमेव जयते 🇮🇳
🔥 होलीका दहन एवं होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 🎨
अधर्म पर धर्म की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पावन पर्व होलीका दहन हम सभी के जीवन से नकारात्मकता, अहंकार और अन्याय को समाप्त करे।
रंगों का यह पावन त्योहार होली आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए।
मेरे प्रिय मित्रों, आदरणीय वरिष्ठजनों, तथा छोटे भाई-बहनों को इस पावन अवसर पर हृदय से शुभकामनाएँ।
रंगों की यह छटा आप सभी के जीवन को खुशियों से भर दे और समाज में प्रेम, सौहार्द एवं न्याय की भावना को और सशक्त बनाए।
सादर,
Viplava Awasthi
Advocate & Editor, Legal Reporter
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देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब आधे-अधूरे कदम नहीं, ठोस कानून की जरूरत है।
भारत में समय-समय पर सरकारी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। जांच होती है, कार्रवाई भी होती है — लेकिन सवाल यह है कि क्या सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए कोई स्थायी और अनिवार्य व्यवस्था है?
अब समय आ गया है कि संसद में एक ऐसा प्रस्ताव आए जिसमें—
✔️ देश के सभी सरकारी अधिकारियों की
✔️ समय-समय पर अनिवार्य संपत्ति जांच
✔️ आय से अधिक संपत्ति की स्वतः जांच प्रक्रिया
✔️ संपत्ति विवरण का डिजिटल और सार्वजनिक रिकॉर्ड
को कानून के माध्यम से बाध्यकारी बनाया जाए।
जब जनता से टैक्स लिया जाता है, तो जनता को यह जानने का अधिकार भी होना चाहिए कि जिनके हाथ में सत्ता और प्रशासन है, उनकी संपत्ति का स्रोत क्या है।
पारदर्शिता ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
ईमानदार अधिकारियों को इससे डरने की जरूरत नहीं, बल्कि उनका सम्मान और बढ़ेगा।
क्या आपको लगता है कि संसद में ऐसा कानून आना चाहिए?
अपनी राय जरूर साझा करें।
Legal Reporter +91-9318428656
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जिस दिन झूठे मुकदमे पर सज़ा होगी, उसी दिन मिलेगी असली आज़ादी! When false cases are filed without accountability, justice suffers.
The day police officers are punished for fabricated FIRs, lawyers are held responsible for knowingly pursuing false cases, and judges are answerable for injustice — that day India will witness real freedom in its justice system.
Justice must not only be delivered, it must be fair, fearless, and accountable.
True democracy stands on transparency and responsibility.
अंतरराष्ट्रीय स्तर की एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा किए गये फर्जीवाडे ने न केवल देश का नाम डुबाया है बल्कि भारत की छवि को धूमिल किया है, सख़्त कार्यवाही हो
“सबूत नहीं, सत्य के आधार पर हो न्याय?” स्वामी देवकीनंदन ठाकुर का बड़ा बयान | न्याय व्यवस्था पर सवाल । स्वामी देवकीनंदन ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि देश की अदालतों में न्याय केवल सबूत (Evidence) के आधार पर नहीं, बल्कि सत्य (Truth) के आधार पर होना चाहिए।
क्या वर्तमान न्याय व्यवस्था में ‘सत्य’ और ‘सबूत’ अलग-अलग हो सकते हैं?
क्या अदालतों में केवल तकनीकी आधार पर फैसले हो जाते हैं?
या फिर कानून की मजबूती ही सबूतों पर आधारित व्यवस्था में है?
इस बयान ने न्याय प्रणाली, साक्ष्य अधिनियम और न्यायिक प्रक्रिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।
आपकी क्या राय है — न्याय सबूत से तय हो या सत्य से?
कमेंट में अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।
जब FIR ही संदिग्ध हो, तो न्याय कैसे संभव है?
FIR में किसी का नाम बढ़वाना, कटवाना, आरोपी बनाना या आरोपी सूची से हटवा देना —
यह कानून की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सिस्टम में घुस चुके भ्रष्टाचार का खतरनाक रूप बनता जा रहा है।
रुपयों और दबाव के दम पर
• कभी निर्दोष को फँसा दिया जाता है
• कभी असली दोषी को बचा लिया जाता है
और फिर वही झूठ, वही लेन-देन और वही मनमानी अदालत तक पहुँचती है।
न्यायालय तथ्यों पर निर्णय देता है,
लेकिन यदि शुरुआत ही संदिग्ध हो —
तो न्याय की नींव कैसे मजबूत होगी?
FIR केवल एक कागज़ नहीं है,
यह न्याय प्रक्रिया की पहली सीढ़ी है।
अगर पहली सीढ़ी ही हिल जाए,
तो पूरी इमारत कैसे टिकेगी?
अब समय है —
FIR प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल निगरानी की।
आपकी क्या राय है?
क्या FIR प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है?
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हर महिला बिचारी नहीं, हर पुरुष अत्याचारी नहीं —
समान न्याय के लिए ‘पुरुष आयोग’ अब ज़रूरी है।
देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई मजबूत कानून बने — यह समय की मांग भी थी।
लेकिन क्या यह भी सच नहीं है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग भी हो रहा है?
झूठे मुकदमों, 498A, घरेलू हिंसा और अन्य वैवाहिक विवादों में कई निर्दोष पुरुष वर्षों तक मानसिक, सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न झेलते हैं।
हर महिला पीड़िता नहीं होती, और हर पुरुष दोषी नहीं होता।
⚖️ न्याय का सिद्धांत कहता है — कानून संतुलित होना चाहिए, न कि एकतरफा।
इसी संतुलन और निष्पक्षता के लिए “पुरुष आयोग” की आवश्यकता पर अब गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
पुरुषों के अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या के बढ़ते मामलों और झूठे मुकदमों से संरक्षण के लिए एक संस्थागत व्यवस्था समय की मांग है।
👉 सवाल महिलाओं के अधिकार कम करने का नहीं,
👉 सवाल न्याय को समान बनाने का है।
समाज तभी मजबूत होगा जब न्याय दोनों पक्षों के लिए समान होगा।
आपकी क्या राय है?
अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें।
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16/02/2026
भारत में तलाक के कानूनी आधार क्या हैं?
भारत में तलाक अलग-अलग पर्सनल लॉ (धर्म के आधार पर बने कानून) के अनुसार दिया जाता है। प्रमुख कानूनी आधार इस प्रकार हैं:
🔹 हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act)
(हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध पर लागू)
तलाक के मुख्य आधार:
1. क्रूरता (Cruelty) – शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना
2. व्यभिचार (Adultery)
3. परित्याग (Desertion) – कम से कम 2 वर्ष तक छोड़ देना
4. धर्म परिवर्तन (Conversion)
5. मानसिक विकार (Mental Disorder)
6. असाध्य रोग (Venereal Disease)
7. संन्यास लेना (Renunciation)
8. 7 वर्ष तक जीवित होने की खबर न होना
9. आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce)
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15/02/2026
🕉️ महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🕉️
देवों के देव महादेव की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।
यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे।
भोलेनाथ आपके सभी कष्टों का नाश करें और सत्य व धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
🌿 इस महाशिवरात्रि पर आइए, हम सभी मिलकर प्रभु शिव से प्रार्थना करें कि हमारे देश और समाज में न्याय, सद्भाव और धर्म की स्थापना सुदृढ़ हो।
🔱 शिव मंत्र 🔱
🕉️ महामृत्युंजय मंत्र
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
हर हर महादेव! 🙏🔱
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