Samvaad.in
आओ संवाद करें, विचारों को समझें और समझाएं।
राहें छूटती जाती हैं
मंज़िल को पाने के लिए
तो बताओ
इसमें लगे कितने रोज़ 🙃
तुम्हारा कहा हर शब्द भी
आजाद हो
किताबें ख़याल रखती हैं
अपने हर शब्द का!
#विश्वपुस्तकदिवास23अप्रैल
इश्क़ में ख़ुद को बदल डालो
तो क्या बात हुई !
कभी
ख़ुद को ख़ुद से चुरा लूँ
रात और इश्क़
जिसको महसूस कर सकते हैं पर छू नहीं सकते
मोहब्बत किसी शक्ल की मोहताज नहीं
हक़ मत जताया करो
10/02/2026
आदर्श ग्राम
असीमित होने के साथ साथ संभावनाएं अनियंत्रित भी होती हैं , संभावनाओं को एक रूप देने के लिए उनका नियत उद्देश्य के प्रति निष्ठावान होना भी ज़रूरी है ।
सुप्रभात
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