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03/01/2025

सिंदूर के बीज भेजे जाने के लिए तैयार हैं।


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90s की ये वीडियो देखकर आपको बचपन के सुनहरे पल रुला देंगे || Kuchh Purani Yaaden || पुराना जमाना 20/08/2024

Bachpan ki yaadain

90s की ये वीडियो देखकर आपको बचपन के सुनहरे पल रुला देंगे || Kuchh Purani Yaaden || पुराना जमाना 90s की ये वीडियो देखकर आपको बचपन के सुनहरे पल रुला देंगे || Kuchh Purani Yaaden || पुराना जमाना ...

12/07/2024

आजकल जब भी किसी से खाद्य उत्पादों की बात होती है तो तीन तरह की श्रेणी हो जाती हैं
1= वेजिटेरियन
2= नॉन वेजिटेरियन

और तीसरी श्रेणी तो भाई कतई भोकाली ही है

3= वीगन

ठीक है सबकी अपनी अपनी पसंद है और अपना अपना खानपान। कोई भी बांदा या बंदी ज्ञान तो पेल पेल कर देंगे पर एक भी आपको ईट राईट के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं देगा।

नॉर्मल, केमीकल फ्री, ऑर्गेनिक सभी पर ज्ञान बांटते हुए मिल जाएंगे हर कहीं... फिर चाहे वो घर हो बाज़ार हो या सोशल मीडिया। सही खाने का पूछो तो सिर्फ़ अपने मत को ही प्रमोट करते रहते हैं... अरे भाई कभी ईट राईट के बारे में भी बतिया लिया करो।

ये जो आप फोटो देख रहे हो ये सभी हेल्दी स्नैक्स हैं।

ऊपर से बांए से दाएं क्रम में

टैपेयोका (सागो) चिप्स
साल्टेड बनाना (केला)चिप्स
जेगरी बनाना (केला) चिप्स
बीट रूट (चुकंदर) चिप्स
मसाला बनाना चिप्स और मेरा सबसे पसंदीदा

जैकफ्रूट (कटहल) चिप्स

ये सभी नारियल के तेल में बने हैं और बहुत ही कम मसालों का प्रयोग किया गया है।



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Photos from Agronics's post 07/04/2024

Hello Hello🥳 dosto

Freshly picked Shahtoot (Mulberry)😋😋😋

Aajao cheti cheti pher ni kaina ki pucchiya ni

01/04/2024

खेती किसानी एक बहुत ही नाज़ुक काम है और कुछ लोग इसी बात का जम कर लाभ कमाते हैं।
इसी का एक उदाहरण...

पंजाब में सड़क के किनारे सैकड़ों लोग कन्नू रखकर ₹5 में गिलास जूस बेच रहे हैं और वह भी ताजा किन्नू का और आंखों के सामने जूस निकालते हैं।
अब आगे की सच्चाई सुनिए अदानी ग्रुप ने पंजाब में और 8 से ज्यादा विशाल कोल्ड स्टोरेज बनाने की प्लानिंग की थी। उनकी प्लानिंग थी कि पंजाब और उसके आसपास के एरिया राजस्थान हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर में जितने भी फल होते हैं उनका भंडारण किया जा सके। और इसमें दो ऑप्शन थे या तो किसान अपना फल अदानी एग्रो को बेच सकता था या किसान अपना फल अडानी के कोल्ड स्टोरेज में भाड़े पर रख सकता था। और जब ऑफ सीजन हो तब उस फल को ऊंची कीमत पर बाजार में बेच सकता था।
अदानी जी का कहना था कि हर क्षेत्र में उनका जो भी कारोबार है वह दुनिया में सर्वश्रेष्ठ लेवल का है चाहे वह दुनिया की सबसे बड़ी तांबे की फैक्ट्री हो या दुनिया का सबसे बड़ा कोयले का कारोबार या दुनिया का सबसे बड़ा निजी पोर्ट हो। हमको फलों के भंडारण वाले काम में कुछ भी मुनाफा नहीं चाहिए था और हम यह काम मुनाफे के लिए कर ही नहीं रहे थे। हमारे पास इतने सारे क्षेत्र हैं कि हम सिर्फ़ उनमें फोकस कर सकते थे लेकिन यह सिर्फ हमनें समाज को और किसानों की मदद के लिए प्लानिंग किया था। क्योंकि हमने देखा था कि किसानों को फलों के उचित स्टोरेज नहीं होने की वजह से उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रही थी।

लेकिन किसान आंदोलन में किसानों को अडानी अंबानी के खिलाफ भड़का कर आंदोलन करवाया गया पंजाब में उनके बन रहे कोल्ड स्टोरेजों पर हमले किए गए जिओ के टावरों को तोड़ा गया। तो अडानी जी ने कहा कोई बात नहीं भैया तुम अपनी जिंदगी में खुश रहो और उन्होंने सब कुछ समेट लिया।
और आज देखिए बेचारे कन्नू उगाने वाले किसान फेसबुक पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। पंजाब में अपने किन्नू के बगीचे के सामने स्टॉल लगाकर अपने किन्नू का जूस बेच रहे हैं। किसानों ने भी यही कड़वी बात बताई की भैया जी अदानी कोल्ड स्टोरेज बनवा रहे थे और हम लोगों को यह कह कर भड़काया गया की अदानी हमारा माल लूट लेगा। अब शाम तक जितना भी जूस बिक जाता है बाकी का कन्नू हमको सड़कों पर फेंकना पड़ता है। जितने भी पंजाब के फल उत्पादक किसान मित्र होंगे वह गवाह होंगे कि आज पंजाब में फल उगने वाले किसानों की कितनी बुरी हालत हो गई है।

इसी लिए कहा जाता है कि भेड़ मत बनो भड़काने वाले मौज काट रहे हैं और उगाने वाले परेशानियां झेल रहे हैं।

30/03/2024

पूर्णतः जैविक एवं शुद्ध
ताज़ी सब्जियाँ, अनाज, दालें, मसाले, हर्बल चाय, घी, जड़ी-बूटियाँ, जैविक खाद, और भी अन्य कई प्रकार की सामग्री लेकर आ रहे हैं आपके अपने नीमच के जैविक किसान!!

आइये जुड़ते हैं है जैविक किसानों से डायरेक्ट!!!
और जानते हैं:
असली जैविक क्या है और जैविक ही क्यों???......

🗓️ तारीख : 31/3/24
रविवार
🕰️ प्रारम्भ: 7.30am
📍 कृषि विभाग परिसर, टीवीएस शोरूम के सामने

अयोजक: जैविक उत्पादक संघ, नीमच

28/03/2024

Part-2

भारत में जनसंख्या विस्फोट हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। तेजी से हो रहे शहरीकरण, बेहतर जीवनशैली और भोजन की बढ़ती खपत के कारण आज देश में भोजन की मांग में भारी वृद्धि हुई है।

इसलिए, खाद्य सुरक्षा बनाए रखने और उपभोक्ता मांग को पूरा करने के लिए खाद्य उत्पादन में वृद्धि आवश्यक है। ठीक इसी कारण से 1960 के दशक में हरित क्रांति की शुरुआत की गई थी। आज भारत में आम उपभोक्ताओं के लिए भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सर्वोपरि है। खाद्य पदार्थों को पारंपरिक रूप से कैसे उगाया जाता है, इसके बारे में बढ़ती जागरूकता के साथ, लोग अब पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित खाद्य उत्पादन प्रथाओं की ओर अधिक इच्छुक हैं।

जैविक खेती किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक बनकर उभरी है, जो टिकाऊ कृषि पद्धतियों का भी उपयोग करती है। अपने पोषण के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभों के कारण इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।
मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता को बढ़ावा देना, प्रदूषण को कम करना, कीटनाशकों और सिंथेटिक उर्वरकों के उपयोग से बचना, आनुवंशिक विविधता की रक्षा करना और प्राकृतिक कृषि प्रणाली चक्र को बढ़ाकर बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना है।

जैविक खेती दो प्रकार की होती है; शुद्ध जैविक खेती और एकीकृत जैविक खेती।

शुद्ध जैविक खेती - इसमें सभी अप्राकृतिक रसायनों से बचना शामिल है। इसके बजाय, उर्वरक और कीटनाशक प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं। इसे शुद्ध जैविक खेती के नाम से जाना जाता है।
एकीकृत जैविक खेती - इसमें पारिस्थितिक मानकों और आर्थिक मांगों को पूरा करने के लिए पोषक तत्व प्रबंधन और कीट प्रबंधन के प्रति एक एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है।
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27/03/2024

Part-1

भारत ने साल 2005 में अपनी जैविक खेती नीति पेश की थी। भारत में 2.78 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को जैविक खेती के अंतर्गत कवर किया गया था, जो देश में 140.1 मिलियन हेक्टेयर शुद्ध बोने योग्य क्षेत्र का लगभग दो प्रतिशत है।
एनपीओपी योजना, जो साल 2001 में शुरू हुई, देश के लगभग 70 प्रतिशत जैविक क्षेत्र को कवर करती है, जिसमें से 30 प्रतिशत रूपांतरण के अधीन है। PKVY और MOVCDNER योजनाएं 2015-16 में शुरू हुईं और देश में कुल जैविक क्षेत्र का 21.5 प्रतिशत और 2.6 प्रतिशत कवर करती हैं।

जैविक खेती के अंतर्गत शेष 6.1 प्रतिशत क्षेत्र या तो राज्य योजना के अंतर्गत हैं या किसी योजना से संबंधित नहीं है। 2015-16 से 2018-19 के दौरान, कुल प्रमाणित जैविक खाद्य उत्पादन का लगभग 96 प्रतिशत एनपीओपी प्रमाणीकरण के तहत था और शेष चार प्रतिशत प्रमाणीकरण की भागीदारी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के तहत था।
मार्च 2020 तक भारत में 1.9 मिलियन से अधिक किसान हैं, जो कुल 146 मिलियन कृषि भूमिधारकों का 1.3 प्रतिशत है।
कुछ राज्यों ने जैविक खेती कवरेज में सुधार करने का बीड़ा उठाया है, क्योंकि इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा केवल कुछ मुट्ठी भर राज्यों में ही केंद्रित है। जैविक खेती के तहत 0.76 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र के साथ मध्य प्रदेश इस सूची में शीर्ष पर है - जो कि भारत के कुल जैविक खेती क्षेत्र का 27 प्रतिशत से अधिक है।

शीर्ष तीन राज्य - मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र का जैविक खेती के तहत लगभग आधे क्षेत्र का हिस्सा हैं।
वर्तमान में, केवल लगभग 12 राज्यों - मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, सिक्किम, बिहार, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश - के पास कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास(एपिडा) द्वारा मान्यता प्राप्त अपनी राज्य जैविक प्रमाणन एजेंसियां हैं।


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Photos from Agronics's post 24/03/2024

आज बड़ा ही सुखद दिन रहा... एक छोटी सी शुरुवात जिसकी रूप रेखा 7 मार्च को रची गई थी वो आज भले ही कुछ किसानों के साथ पर धरातल पर प्रत्यक्ष रूप से क्रियान्वित हुई। जो की समय के साथ और भी बड़ी होती जाएगी और हमारे किसान समृद्ध।

हमारे शहर नीमच का पहला ऑर्गेनिक हाट बाजार

अनंत शुभकामनाएं
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