Deen ki Rasta
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10/07/2024
हमारी और आपकी।प्यारी मस्जिद
10/07/2024
09/07/2024
09/07/2024
09/07/2024
09/07/2024
08/07/2024
08/07/2024
ज़ुल्म की हद ए इंतेहा को मिटाने का वक़्त है
अब मज़लूमों का साथ निभाने का वक़्त है,
वो जो सोये हुए हैं ख़्वाब ए ख़रगोश की नींद
उन मुर्दा ज़मीरों को फिर से जगाने का वक़्त है,
वो जो बने बैठे हैं आज ठेकेदार सारे आलम के
उनकी ठेकेदारी फिर आज़माने का वक़्त है,
वो जिन्हें परवाह नहीं किसी के जीने मरने की
उन्हे मौत का एहसास याद दिलाने का वक़्त है,
क्यूँ डरे सहमे जिये हम मौत के खौफ़ से ?
आँखों मे आँख डाल ज़ुर्रत दिखाने का वक़्त है,
शहादत अगर नसीब है तो ज़हे नसीब अपने
हो मुबारक़ तुमको खुल्द जश्न मनाने का वक़्त है,
मुसलमां हो कर और डर जाएँगे ज़ालिम से
दुश्मन की ये खाम ख़याली मिटाने का वक़्त है,
दीन ए हक़ इस्लाम है और बाक़ी सब बातिल
यहूद ओ नसारा को ये बावर कराने का वक़्त है॥
08/07/2024
सताते हो तुम मज़लूमों को सताओ
मगर ये समझ के ज़रा ज़ुल्म ढहाओ
मज़ालिम का लबरेज़ जब जाम होगा
तो हिटलर के जैसा ही अंज़ाम होगा,
तुम्हे है हम को मिटाने की ख्वाहिश
तो हमें भी है सर कटाने की ख्वाहिश..
07/07/2024
हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें
ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें ?
तुम ने मेरे घर न आने की क़सम खाई तो है
आँसुओं से भी कहो आँखों में आना छोड़ दें,
प्यार के दुश्मन कभी तू प्यार से कह के तो देख
एक तेरा दर ही क्या हम तो ज़माना छोड़ दें,
घोंसले वीरान हैं अब वो परिंदे ही कहाँ
एक बसेरे के लिए जो आब ओ दाना छोड़ दें..
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