BABA YASH
Bihar/ Mumbai ✨🇮🇳
• Actor 🎬
ये शहर मुझे बेहद पसंद है
Delhi Dur nahi hai bhai log
07/01/2026
उस लड़की के लिए अपनी दीवानगी और मेरी खामोश तड़प को बयां करती है।
"वो ' ..... ' और मेरी खामोश मोहब्बत"
कहते हैं कि प्यार में इंसान को वजह नहीं चाहिए होती, बस एक चेहरा ही काफी होता है। मेरे लिए वो चेहरा, वो नाम '....' से शुरू होता है।
मैं अक्सर उसके घर, उसकी गली के चक्कर लगाता हूँ। वजह? कोई ख़ास नहीं, या यूँ कहूँ कि हजारों वजहें बना लेता हूँ। कभी कोई सामान लेने, कभी किसी काम का बहाना, तो कभी बस यूं ही। लेकिन सच तो मेरा दिल जानता है—मकसद सिर्फ एक होता है, उसकी एक झलक पाना।
जब मैं वहाँ पहुँचता हूँ, और वो सामने आती है, तो वक्त जैसे वहीं थम जाता है। मैं उसे देखता रहता हूँ... बस देखता ही रहता हूँ। दिल करता है कि नज़रे हटा लूँ ताकि उसे शक न हो, पर ये कम्बख्त आँखें मेरी सुनती ही नहीं।
मैं उससे बात करने की कोशिश करता हूँ। लेकिन बात क्या करूँ? मुझे कुछ समझ नहीं आता। तो मैं बेफिजूल की बातें करने लगता हूँ—मौसम की, पढ़ाई की , इधर-उधर की, जिनका कोई मतलब नहीं होता। मैं ये सब सिर्फ इसलिए करता हूँ ताकि वो जवाब दे। मैं बस उसकी आवाज़ सुनना चाहता हूँ। जब वो बोलती है, तो लगता है जैसे मेरे कानों में कोई धुन बज रही हो। उसकी वो हंसी, उसकी वो बातें... मैं सब अपने अंदर समेट लेना चाहता हूँ।
लेकिन फिर, एक डर मेरे सीने में घर कर जाता है।
"क्या वो किसी और की है? क्या वो सिंगल है या कमिटेड?"
ये सवाल मुझे अंदर ही अंदर खाए जाता है। मैं पूछना चाहता हूँ, पर हिम्मत जवाब दे जाती है। डर लगता है कि कहीं मेरे पूछने से जो थोड़ी बहुत बात होती है, वो भी बंद न हो जाए।
घर वापस लौटते वक्त मेरी हालत अजीब होती है। एक अजीब सी तड़प रहती है सीने में। एक तरफा प्यार का दर्द शायद यही होता है—आप चीखना चाहते हैं, बताना चाहते हैं कि "मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ", लेकिन आपके होंठ सिल जाते हैं।
आज भी मैं वही अधूरापन लेकर वापस आया हूँ। मैं, मेरी खामोशी, और वो '...' नाम का हसीन सपना, जिसे मैं छूना तो चाहता हूँ, पर बता नहीं पा रहा।
और कहते है न कि
"जाना होता है कहीं और, पर कदम तेरे घर की ओर मुड़ जाते हैं,
तुझे देखने के लिए, हम सौ बहाने जोड़ लाते हैं।
पता नहीं तुझे खबर है या नहीं मेरी दीवानगी की,
हम तो बस तेरी आवाज़ सुनने के लिए, बेमतलब की बातें किए जाते हैं।"
बाबा यश
नई दिल्ली भारत
07/01/2026
स्टेशन की सीढ़ियाँ और बाबा यश की अधूरी दास्तां
आज फिर मैं उसी स्टेशन की, उसी पुरानी बेंच पर बैठा हूँ। वक्त की सुइयां आगे बढ़ गई हैं, लेकिन मेरे दिल की घड़ी उसी पल पर रुकी है।
मुझे याद है वो मंजर, जब मैं पहली बार स्टेशन की सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था। भीड़ का शोर था, हर कोई अपनी धुन में था, लेकिन अचानक मेरी दुनिया थम गई। लोग कहते हैं इश्क 'फुल फेस' (पूरे चेहरे) से होता है, लेकिन मुझे तो उनके 'हाफ साइड' से ही मोहब्बत हो गई थी।
वो सीढ़ियों पर खड़ी थीं। मुझे उनकी सिर्फ एक आँख दिखाई दे रही थी, मगर वो एक आँख इतनी लाजवाब और नशीली थी कि मेरा मन किया कि सब कुछ छोड़कर बस उसी गहराई में डूब जाऊं। ऐसा लग रहा था मानो ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत से, बड़ी मेहनत से उन्हें गढ़ा हो।
वो दृश्य आज भी मेरी आँखों में कैद है—उनके भीगे बदन से गिरती वो पानी की बूँदें, जो धीरे-धीरे नीचे आ रही थीं... उनकी वो नशीली आँखें, उनका वो चलने का सलीका, और खामोशी में भी कुछ बोलने की वो अदा। सब कुछ मेरे मन को मोह गया।
हैरानी की बात है न? मुझे उनका नाम तक नहीं पता था। वो मेरे लिए अजनबी थीं। लेकिन कहते हैं न, प्यार होने के लिए सालों की पहचान जरूरी नहीं, बस एक नजर काफी होती है जो दिल को छू जाए। मुझे भी चंद सेकंड में उनसे बेइंतहा प्यार हो गया था।
पर मैं... मैं ठहरा एक बुद्धू, एक झिझकने वाला इंसान। मेरे अंदर जज्बातों का सैलाब था, पर जुबां खामोश । मैं सोचता ही रह गया कि एक अजनबी को अपने दिल का दर्द कैसे बयां करूँ? यही सोच, यही झिझक मेरे आड़े आ गई और वो मेरी नजरों के सामने से ओझल हो गईं।
आज जमाना मुझे 'बाबा यश' के नाम से जानता है। लोग मेरी शायरी, मेरे अल्फाजों की तारीफ करते हैं। लेकिन कोई नहीं जानता कि 'बाबा यश' की हर शायरी, हर गजल उसी एक अधूरे इश्क की याद है। मैं आज भी उसी स्टेशन पर बैठा, उन सीढ़ियों को देखता हूँ और सोचता हूँ—काश! उस दिन मैंने अपनी खामोशी तोड़ दी होती।
बाबा यश की कलम से:
"वो अजनबी थी मगर दिल की धड़कन बन गई,
उसकी एक झलक मेरे जीने की उलझन बन गई।
जमाना पढ़ता है 'बाबा यश' के लफ्जों को,
उन्हें क्या खबर, वो एक नजर ही मेरा जीवन बन गई।"
बाबा यश
नई दिल्ली भारत
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