Human Rights Activist Welfare Committee

Human Rights Activist Welfare Committee

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These rights include the right to life, liberty, equality Human Right Activist Welfare Committee is an independent agency that brings public grievances.

Human rights are the basic freedoms and protections that belong to every person simply because they are human—regardless of nationality, place of residence, language, religion, or any other status. About Human Right Activist Welfare Committee:-
Human Right Activist Welfare Committee is a name of Human Right Activist team, operating across Punjab with support of good officers and powerful legal tea

26/04/2026

कल अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर हमला हुआ था
और उसके तुरंत बाद नरेंद्र मोदी जी ने ट्वीट किया और लिखा कि मैं उनके स्वास्थ्य और मंगल की कामना करता हु लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं

अब आप सोचिए कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अमरीका में चली हुई एक गोली भी भारत में सुनाई दे रही है या उस घटना का तुरंत पता लग जाता है

तो क्या मोदी जी बीजेपी शासित राज्य मणिपुर, मध्य प्रदेश उड़ीसा का हाल नहीं जानते है आप देखिए , देश के 4, से 5 राज्यों में धरने प्रदर्शन आंदोलन चल रहे है लेकिन मोदी जी मजे और आनंद लेते हुए झालमुडी खाते हुए , फोटोग्राफी करते हुए
चुनाव प्रचार और रैलियों रोड शो कर रहे है देश के कितनी शर्म की बात है

अमरीका में चली एक गोली का दुःख मोदी जी के गले उतर आया और देश की लाखों आबादी सड़को , फांसी डाले पानी में खड़ी है लेकिन एक शब्द तक उनके मुंह से नहीं निकला

सोचिए हमने सता में किस व्यक्ति को बिठा रखा है किसान आंदोलन में 800 शहादत हुई एक शब्द नहीं निकला , और एक क्रिकेटर की उंगली की चोट पर मोदी जी फफक पड़े थे

पहलगाम में 28 लोगों शहीद हुए थे और इनकी सुबह बिहार में रैली थी कोई फर्क पड़ा

नोटबंधी में देश की जनता 🏧 और बैंकों की लाइनों में लेकर डंडे खा रही थी लेकिन नॉन बायोलॉजिकल अवतार दिव्य पुरुष विदेशों में फोटोग्राफी कर रहे थे

करोना में लाशों को अग्नि नहीं मिली थी लेकिन साहब साउथ में चुनाव प्रचार करने में व्यस्त थे

पुलवामा घटना हुई और साहब किसी शूटिंग में बिजी थे और उसे टस से मस भी नहीं हुए थे

जनता खून के आंसु रो रही है मगर राजा अपनी मस्ती मे मस्त
है खूब सता का आनंद उठाया जा रहा है इनको रती भर भी फर्क नहीं पड़ रहा है उत्तर प्रदेश के व्यापारी और दुकानदारों की दुकानों पर बुलडोजर चल रहा है लोग सड़को पर छाती पीट पीट कर रो रहे है , नोएडा पानीपत भिवाड़ी गुरुग्राम सूरत में मजदूरों का पलायन सैलरी बढ़ाने के लिए धरना प्रदर्शन आंदोलन हो रहा है मगर किसको कोई सुध नहीं है

मोदी जी सुबह तमिलनाडु , दुपहर केरला , शाम पांडुचेरी ओर अगले दिन बंगाल चुनाव प्रचार बस चुनाव प्रचार में व्यस्त है

बाकी बचे बीजेपी नेता कार्यकर्ता , मंत्री , सांसद , सीएम विधायक महिलाओं का अपमान हो गया अपमान हो गया वाला प्रोपगेंडा फैला कर , खुद सता में होते हुए भी विपक्ष का विरोध
कर रहे सड़को पर ,जनता की सुध कौन ले इधर

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26/04/2026

किसी ने अपनी बीबी के कुंडल गिरवी रखे होंगे,
किसी बेटी ने नानी के दिए हुए रुपये संभालकर पापा को दिए होंगे…

और फिर एक दिन, किसी ने आकर सब छीन लिया—
पापा की वो छोटी-सी रेहड़ी, जो उनके सपनों का सहारा थी,
उसे बेरहमी से कुचल दिया गया।

अब वो पापा क्या जवाब देंगे अपनी बेटी को?
कैसे लौटाएंगे वो मासूम भरोसा, वो छोटी-सी उम्मीद?

ये सिर्फ एक रेहड़ी नहीं टूटी,
किसी घर की हिम्मत टूटी है,
किसी बेटी का विश्वास टूटा है,
और एक बाप का सीना चुपचाप रो पड़ा है… 💔

26/04/2026

मध्यप्रदेश हो या मणिपुर… दर्द एक ही है—
चीखती हुई जनता, और खामोश गलियां।

आंसू सूख जाते हैं, उम्मीदें टूट जाती हैं,
लेकिन सत्ता के कानों तक आवाज़ नहीं पहुंचती।

कब तक सहेंगे लोग ये अन्याय?
कब तक जलती रहेगी इंसानियत?

अब सवाल सिर्फ राज्यों का नहीं,
ये सवाल पूरे देश की आत्मा का है—
आखिर कब जागेगी सरकार… और कब सुनी जाएगी जनता की पुकार?

23/04/2026

Voices Unheard, Pain Unseen…
Ken–Betwa cries in silence.
Noida workers stand unheard.
Manipur is still burning…
People are suffering,
Workers are fighting for dignity,
Lives are breaking quietly every day…
But the noise that should matter
is being buried under distractions.
When truth is ignored,
when pain is silenced,
it’s not just news that is lost—
it’s humanity.

19/04/2026

देश में 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव महिला सशक्तिकरण के नाम से बेचा जा रहा है जबकि असलियत में ये जनता की जेब काटकर नेताओं की नई कॉलोनी बसाने का प्लान है।

अभी 543 सांसद हैं, हर एक पर सरकार महीने का लगभग 8 से 12 लाख खर्च करती है। मतलब एक सांसद साल का लगभग 1 करोड़ के आसपास बैठता है। अब 300 नए सांसद जोड़ दे तो हर साल 500 से 700 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ सीधे आपके टैक्स से जाएगा।

ये तो सिर्फ वेतन-भत्ते हैं, अगर बंगले, सुरक्षा, हवाई यात्रा, मुफ्त बिजली 50,000 यूनिट, पानी लाखों लीटर जोड़ दे, तो सालाना खर्च 1500 करोड़ पार जाएगा केवल एक सांसद का। और तूम सोच रहे हो देश आगे बढ़ रहा है।

भाजपा ने महिला आरक्षण के लिए 2023 में कानून पास किया, ढोल पीटा कि 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं को देंगे। लेकिन अंदर ऐसा जाल बिछाया कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन, होगा तब जाकर लागू किया जाएगा। यानी सीधा-सीधा 2029 तक ठंडे बस्ते में डाल दिया।

अगर नीयत साफ होती तो अभी 543 में से करीब 180 सीटें महिलाओं को दे देते। लेकिन ऐसा करते ही आधे बड़े-बड़े नेताओं की कुर्सी जाती और पार्टी में बगावत खड़ी हो जाती। क्योंकि 543 सांसदों में 180 महिला सांसदों को एडजस्ट करते तो बीजेपी के लगभग 120 पुरुष सांसद घर पर बैठते

तो क्या किया सीटें 850 कर दो और 280 सीटें महिलाओं के नाम पर दे दो, बाकी में पुराने नेता भी सेट होजाएंगे। मतलब जनता को लगा क्रांति हो गई, और नेताओं का भी कुछ नहीं बिगड़ा। राजनीति में इसे कहते हैं “दोनों तरफ माल”।

आज भी पंचायत में महिला सरपंच जीतती है, लेकिन कुर्सी पर उसका पति बैठता है। “प्रधान पति” नाम यूं ही नहीं पड़ा। उसमें आज तक सरकार ने कोई सुधार नहीं किया और वही मॉडल अब संसद में लागू होगा। बड़े नेता अपनी पत्नी-बेटी को टिकट देंगे और खुद पीछे से रिमोट से चलाएंगे। नाम महिला का, सत्ता आदमी की होगी। ये सशक्तिकरण नहीं, ये सेटिंग है।

ये वही सरकार है जो खुद को महिला हितैषी बताती है। लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है? बिलकिस बानो केस में दोषियों को रिहा किया गया और माला पहनाकर स्वागत हुआ। महिला पहलवान महीनों तक सड़क पर न्याय मांगती रहीं, लेकिन सिस्टम किसके साथ खड़ा था सबने देखा। महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े हर साल बढ़ रहे हैं, लेकिन भाषणों में “नारी शक्ति” का जप चलता रहता है।

जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल किया, जैसे तमिलनाडु, केरल उनकी सीटें कम बढ़ेंगी। और जहां आबादी बेकाबू बढ़ी, जैसे यूपी, बिहार वहां सीटों की बरसात होगी। मतलब जिसने जिम्मेदारी निभाई वो सजा पाएगा, जिसने लापरवाही की वो इनाम ले जाएगा।

कल को सिर्फ हिंदी बेल्ट जीतकर कोई भी सरकार बना लेगा, दक्षिण की आवाज साइड में डाल दी जाएगी।

जिन राज्यों में विपक्ष की पकड़ है, वहां सीटें कम बढ़ेंगी। जहां भाजपा मजबूत है, वहां सीटें ज्यादा। मतलब चुनाव शुरू होने से पहले ही मैदान झुका दिया गया।

अभी 543 सांसदों में ही बहस का टाइम नहीं मिलता, 850 में क्या होगा? संसद नहीं, मेला लगेगा। कानून ऐसे पास होंगे जैसे टिकट कटते हैं बस स्टैंड पर।

ये महिला आरक्षण नहीं है, ये 2029 का चुनावी ट्रैप है। ये सीटें बढ़ाना नहीं है, ये नेताओं की फौज खड़ी करना है। ये सुधार नहीं है, ये सिस्टम को अपने हिसाब से मोड़ना है।

अगर अभी भी किसी को लग रहा है कि ये सब महिलाओं के भले के लिए हो रहा है, तो वो या तो भक्ति में डूबा है या फिर उसे सच सुनने की हिम्मत नहीं है।

जनता को भावनाओं में उलझाओ, आंकड़ों से डराओ, और फिर टैक्स के पैसे से अपना साम्राज्य बढ़ाओ यही चल रहा है इस समय देश में.....✍️

17/04/2026

केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ छतरपुर/पन्ना में विस्थापन के डर से आदिवासी और किसान जल सत्याग्रह, सांकेतिक फांसी और पंचतत्व सत्याग्रह के माध्यम से तीव्र विरोध कर रहे हैं। यह आंदोलन नदी, जंगल, जमीन और जीवन की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है, जिसमें प्रशासन के खिलाफ संघर्ष जारी है।

सांकेतिक फांसी, मिट्टी साही विल सत्याग्रह और पंचतत्व सत्याग्रह के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध मे संघर्ष जारी है।

नदी, जंगल, जमीन और जीवन की रक्षा के लिए हमारी आवाज बुलंद है।

13/04/2026

जरूरी सूचना सालासर बालाजी घटना के बाद खाटू श्याम जी मंदिर कमेटी ने किया सुधार

13/04/2026

Jindgi ke rang..

12/04/2026

भारत आज विश्व में अकेला है।
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका दोनों का चहेता है
और ये किसी एक युद्ध के कारण नहीं हुआ है।

मैं कोई जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट नहीं हूं,
पर 12 साल की विदेश नीति देखकर इतना समझ गया हूं —
नफरती राजनीत कूटनीति की सबसे बड़ी दुश्मन होती है।

• पड़ोसी देश
मालदीव — “India First” से “India Out”
बांग्लादेश — दोस्त से “घुसपैठिया”
नेपाल — अब नक्शा चुनौती देता है
श्रीलंका — जहाँ हमें होना था, वहाँ चीन है
भूटान — सबसे बड़ा समर्थक अब खामोश
म्यांमार — हुआ तो हम खामोश

• दुनिया का ताकतवर मंच
रूस — चीन के करीब
अमेरिका — बार बार धमकाता है
भारत…?
प्रचार में इतना उलझा कि प्रभाव ही खत्म हो गया

• सबसे बड़ा टेस्ट — Iran–Israel conflict
पाकिस्तान के दोयम दर्जे के नेता रोल निभा रहे हैं
शाहबाज समझौता करवा रहा है
मुनीर शांति करा रहा है
और विश्व गुरु ?
ना नेतृत्व
ना पहल
ना असर

यही फर्क है…
जो देश कभी पूरे विश्व को दिशा देता था,
आज म्यूट स्पेक्टेटर बन कर रह गया है

“विश्व गुरु” बोलने से कोई विश्व गुरु नहीं बनता
उसके लिए चाहिए —
गांधी की शांति
नेहरू का विजन
इंदिरा का साहस

नफरत से देश चल सकता है…
लेकिन दुनिया नहीं जीती जाती

भारत अब “वसुधैव कुटुम्बकम्” नहीं कहता,
बल्कि “देशद्रोही” और “घुसपैठिया” चिल्लाता है

भारत आज अकेला है और दुनिया सोच रही होगी
बुद्ध और गांधी का देश इतना बेबस कैसे हो गया
🙏🙏

#घोरकलजुग

12/04/2026

खाटू मंदिर में विवाद
जीण माता मंदिर में विवाद
खरनाल तेजाजी महराज मंदिर में विवाद
बुटाटी धाम मंदिर के विवाद
गोगाजी महराज मंदिर विवाद
रामदेवजी महराज मंदिर विवाद

के बाद पेश ह सालासर बालाजी मंदिर विवाद

बार बार मंदिरों में विवाद क्यों होता ह?

इसका कारण ह मंदिरों का राजनीतीकरण

आज जितने भी मंदिर ह उनके कोई सकारात्मक कार्य नहीं हो रहा ह
सिर्फ और सिर्फ धन उपार्जन के साधन बन गए ह

और सबकी नजर उस धन पर ह

किसी भी मंदिर के पुजारी आज धनाढ्य बने बैठे ह
कई कई मंदिरों के पुजारी तो बड़े बड़े नेता ह

क्या यह आस्था ह?

मंदिर समाज में बनाए क्यों गए थे? पता भी ह?

नहीं देश के 90प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं कि मंदिर क्यों बने थे? क्यों बनाए गए थे?
मंदिर हमरे समाज की वो रीढ़ थे जिनसे समाज को हर तरह से संबल मिलता था

इसके कई उदाहरण मैं बताता हूं

1 मंदिरों से गुरुकुल चलते थे जिनसे शिक्षा मिलती थी
पैसे वाले लोग दान देते थे लेकिन ये सब बंध हो गया ह
मंदिर में 100 रु देकर हम भगवान से लॉटरी मांगते है

2, मंदिरों से असहाय जरूरतमंद लोगों की सहायता की जाती थी जो अब बंद ह जिसको मौका मिला उसी ने खा लिया

3 पुराने जमाने में गांव के घर कच्चे , दीवारें झाड़ियों से बनी होती थी
कई बार गांव के गांव जल जाते थे
तो मंदिर शरणगाह बनते थे और गांव को पुनः बसाया जाता था

4 मंदिरों के भजन, सत्संग जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करके पूरे गांव को एकजुटता में बांधने का कार्य होता था जो अब बंद ह

5 मंदिरों से धार्मिक , सभ्यता की शिक्षा दी जाती थी
संस्कृति के पाठ पढ़ाई जाते थे सो बंध ह

6 सार्वजनिक बात रखनी या कोई बात लागू करवानी हो तो मंदिर एक उपयुक्त जगह थी

7 और तो और किसी व्यक्ति से जुर्म कबूल करवाने में मंदिर का अहम रोल होता था
और 99प्रतिशत चांस यह था कि कितना भी बड़ा अपराधी हो मंदिर में चढ़कर झूठ नहीं बोल पाता था

ये बाते खून में भरने का काम मंदिरों ने किया

फिर हमारे मंदिर आज किस काम के?
सिर्फ पुजारियों के घर भरने हेतु?

आज जगह जगह मंदिरों में होती लड़ाइयां बता रही ह कि हम
हमारा सामाजिक परिवेश, सिस्टम खो चुके ह

इसलिए हर जगह लड़ाइयां
और पुजारियों की लूट जारी ह
। कल सालासर बालाजी मंदिर में हुई मारपीट एक ताजा उदाहरण है

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