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16/07/2023
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महत्वपूर्ण तारीखें
17 जुलाई सावन माह का पहला दिन
22 जुलाई सावन की पहली सोमवारी
29 जुलाई सावन की दूसरी सोमवारी
05 अगस्त सावन की तीसरी सोमवारी
12 अगस्त सावन की चौथी सोमवारी
15 अगस्त सावन माह का अंतिम दिन
सावन माह में इस बार कई शुभ संयोग, हरियाली अमावस्या पर 125 साल बाद पंच महायोग का संयोग
सावन माह में इस बार कई शुभ व बड़े संयोग बन रहे हैं। 17 जुलाई को सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन वज्र और विष कुंभ योग भी बन रहा है। सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। इसके अलावा 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन एक ही दिन मनेगा। एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग का संयोग बन रहा है। दावा है कि यह संयोग लगभग 125 साल के बाद आ रहा है मुरारी शास्त्री ने बताया कि बहुत दिनों के बाद सावन में कई बड़े संयोग बन रहे हैं। एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग का संयोग बनेगा। जो लगभग 125 साल बाद आ रहा है। इस दिन पहला सिद्धि योग, दूसरा शुभ योग, तीसरा गुरु पुष्यामृत योग, चौथा सर्वार्थ सिद्धि योग और पांचवां अमृत सिद्धि योग का संयोग है। पंच महायोग के संयोग में कुल देवी-देवता तथा मां पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही प्रकृति के हरे भरे रहने की संभावना है।
सावन की तीसरी सोमवारी के दिन नागपंचमी
इस बार नागपंचमी का शुभ पर्व भगवान शिव के विशेष दिन सोमवार (पांच अगस्त) को है। सोमवार और नागपंचमी दोनों ही दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। इसलिए इस बार नागपंचमी का विशेष महत्व होगा। नागपंचमी के दिन चंद्र प्रधान हस्त नक्षत्र और त्रियोग का संयोग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग, सिद्धि योग और रवि योग यानी त्रियोग के संयोग में काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजा करना फलदायी होता है।
⚛ सुख - दुःख का रहस्य ⚛
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एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा की प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही दुःखी है आप उसे और ज्यादा दुःख प्रदान करते हैं और जो सुख में है आप उसे दुःख नहीं देते है। भगवान ने इस बात को समझाने के लिए माता पार्वती को धरती पर चलने के लिए कहा और दोनों ने इंसानी रूप में पति-पत्नी का रूप लिया और एक गांव के पास डेरा जमाया। शाम के समय भगवान ने माता पार्वती से कहा की हम मनुष्य रूप में यहां आए है इसलिए यहां के नियमों का पालन करते हुए हमें यहां भोजन करना होगा। इसलिए मैं भोजन कि सामग्री की व्यवस्था करता हूं, तब तक तुम भोजन बनाओ।
भगवान के जाते ही माता पार्वती रसोई में चूल्हे को बनाने के लिए बाहर से ईंटें लेने गईं और गांव में कुछ जर्जर हो चुके मकानों से ईंटें लाकर, चूल्हा तैयार कर दिया। चूल्हा तैयार होते ही भगवान वहां पर बिना कुछ लाए ही प्रकट हो गए। माता पार्वती ने उनसे कहा आप तो कुछ लेकर नहीं आए, भोजन कैसे बनेगा। भगवान बोले - पार्वती अब तुम्हें इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। भगवान ने माता पार्वती से पूछा की तुम चूल्हा बनाने के लिए इन ईटों को कहां से लेकर आई तो माता पार्वती ने कहा - प्रभु इस गावं में बहुत से ऐसे घर भी हैं जिनका रख रखाव सही ढंग से नहीं हो रहा है। उनकी जर्जर हो चुकी दीवारों से मैं ईंटें निकाल कर ले आई। भगवान ने फिर कहा - जो घर पहले से ख़राब थे तुमने उन्हें और खराब कर दिया। तुम ईंटें उन सही घरों की दीवार से भी तो ला सकती थीं। माता पार्वती बोली - प्रभु उन घरों में रहने वाले लोगों ने उनका रख रखाव बहुत सही तरीके से किया है और वो घर सुंदर भी लग रहे हैं ।
ऐसे में उनकी सुंदरता को बिगाड़ना उचित नहीं होता। भगवान बोले - पार्वती यही तुम्हारे द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर है। जिन लोगो ने अपने घर का रख रखाव अच्छी तरह से किया है यानि सही कर्मों से अपने जीवन को सुंदर बना रखा है उन लोगों को दुःख कैसे हो सकता है। मनुष्य के जीवन में जो भी सुखी है वो अपने कर्मों के द्वारा सुखी है, और जो दुखी है वो अपने कर्मों के द्वारा दुखी है। इसलिए हर एक मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे ही कर्म करने चाहिए की, जिससे इतनी मजबूत व खूबसूरत इमारत खड़ी हो कि कभी भी कोई भी उसकी एक ईंट भी निकालने न पाए।
क्या आपका घर भी गलत तरीके से बना है
दक्षिण-पश्चिम में ढलान नहीं होना चाहिए। मैंने कई ऐसे मकान देखे हैं, जो बड़े-बड़े वास्तुविदों ने बनाए, लेकिन उसमें रहने वाले तबाह हो गए हैं। थोड़े से लालच व अधिक से अधिक जगह घेरने की मंशा ही घर का वास्तु बिगाड़ देती है।
उत्तर दिशा में पानी रखना शुभ होता है।
आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने के लिए उत्तर में सेफ होना चाहिए।
ईशान में शौचालय भी बरबादी का कारण बनता है, स्नानघर हो तो चल जाएगा
आग्नेय कोण में रसोईघर होना शुभ रहता है।
किसी भी सूरत में सीढ़ियों के नीचे मंदिर नहीं होना चाहिए। अकसर जगह के उपयोग व कमी को देखते हुए ऐसे अधिकांश घरों में मंदिर बना लेते हैं, जो गलत है
हो कोई भी समस्या,घर बैठे पाये समाधान जयोतिष के द्वारा
*अंक ज्योतिष ओर मूलांक 5,6,7*
मूलांक:-5 ~> आपका जन्म किसी भी महीने कि 5, 14, 23 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 5 होगा । अंक 5 का स्वामी ग्रह बुध है ।
इस अंक वाले बडी सरलतापूर्वक किसी को भी अपना मित्र बना लेते है । इनकि मानसिक शक्ति बहुत तेज होती है । इन्हे तनाव भी हमेशा बना रहता है । ये व्यक्ति किसी भी बात पर तुरन्त निर्णय लेने कि क्षमता रखते है ।यह धन कमाने के नये नये तरीकों पर विचार करते रहते है । यह अपनी विलक्षण बुद्धि से किसी भी समस्या का समाधान तुरन्त खोज लेते है । इन्हे अधिक मानसिक तनाव से बचना चाहिये ।
मूलांक 6:- आपका जन्म किसी भी महीने कि 6,15,24 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 6 होगा । इस अंक का स्वामि शुक्र है । इस अंक वाले व्यक्ति भावुक, आकर्षक, सफाई पसन्द, होते है । पाँच अंक वालों के समान ये भी अपने हँसमुख स्वभाव से किसी को भी अपना मित्र बना लेते है । जब ये किसी से प्रेम करते है तो गुलामों कि तरह
समर्पित होजाते है । यह भोगी प्रवृत्ति के होते है ।
मूलांक7:-- आपका जन्म किसी भी महीने कि 7,16,25 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 7 होगा । इस अंक का स्वामी केतु ग्रह है । इनका स्वभाव मूलांक 2 वालों से मिलता जुलता होता है । ये घूमना फिरना बहुत पसन्द करते है । यह परम्परागत मान्यताओं को स्वीकार नहीं करते है ।इनका झुकाव अध्यात्म, भक्ति,दर्शन, तंत्र-मंत्र तथा ज्योतिष कि तरफ भी होता है । एसे व्यक्ति दूरदर्शी होते है । तथा प्रकृति से प्रेम करने वाले होते है । इनके नींद में देखे हुये स्वप्न बडे विचित्र होते है ।
इन लोगों को भी मूलांक 2 वालों के भाँति प्रेम में धोखा निश्चित रूप से मिलता है ।
अधिक जानकारी हैतु काल करें।
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विवाह शीघ्र उपाय- शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से यह प्रयोग प्रारम्भ करेँ। पूजा गृह मेँ शिव- पार्वती विवाह का चित्र स्थापित करेँ, शुध्द घी का दीपक जला कर रूद्रक्ष की माला से
-ॐ नम: मनोक्षिलषितँ वरँ देही ह्लीँ ॐ गौरा पार्वती देव्यै नम:
मँत्र की पाँच माला प्रतिदिन चालीस दिन तक जाप करना चाहिए,बेसन के पाँच लड्डू प्रतिदिन चढायेँ ।
किसी भी उपाय को करने से पूर्व तन व मन की शुध्दी तथा ईश्वर पर पूर्ण विश्वास परमावश्यक है
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शनिवार को हनुमानजी का दिन माना जाता है और इस दिन की पूजा-अर्चना की जाती है ताकि भगवान सुख हो जाएं और भक्तों की मनोकामना पूरी करें। शनिवार को अक्सर ही देखा जाता है कि हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर (चोला) चढ़ाया जाता है। चोला चढ़ाते समय अगर आप एक खास मंत्र का जाप करेंगे जो आपके काम में आ रहीं रूकावटें दूर हो सकतीं हैं।
मंत्र-
सिन्दूरं रक्तवर्णं च सिन्दूरतिलकप्रिये।
भक्तयां दत्तं मया देव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम।।
विधि
- सुबह जल्दी उठकर हनुमान मंदिर पर जाकर अच्छे मन से चोला चढाना चाहिए और इसके बाद भगवान की आरती करनी चाहिए।
- श्री हनुमान की ऐसी उपासना नियमित रूप से भी करें तो शांत मन से पैदा ईश्वर व खुद के प्रति विश्वास व्यावहारिक रूप से मनचाही सफलता व यश दिलाने वाला साबित होगा।
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01/08/2018
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