Naam Mahima
vrindavan
21/03/2026
अगर श्री राधा नाम का जप करते हो, श्री राधा को अपना ईष्ट मानते हो, और भगवान की लीलाओं के अंदर अगर राधा के दर्शन नहीं हो रहे हैं, तो अभी आपके जप अधूरे हैं, आपकी भक्ति अधूरी है।
जब कृष्ण की लीलाओं के अंदर श्री राधा के दर्शन होने लग जाएँ, जो गोवर्धन लीला है जिसके अंदर भगवान श्री कृष्ण अपने कनिष्ठकापर श्री गोवर्धन को धारण कर रहे हैं, तो धारण करने वाली भी भगवती श्री राधा है। जब दोनों में अभेद आप देखने लग जाओगे, अभेद दृष्टि आपकी हो जाएगी, तब जाकर श्री राधा नाम की भक्ति, श्री राधा नाम का संकीर्तन आपके जीवन के अंदर फलदायी हो जाएगा।
जब तक श्री कृष्ण से श्री राधा को अलग मानकर आप जीते रहोगे, जब तक तर्क के विषय पर श्री राधा को कसते रहोगे, तब तक श्री राधा की कृपा का जो आनंद है वो आप नहीं ले पाओगे, जो कृपा अद्भुत कृपा श्री भगवती राधा हम पर नृत्य कर रही है, उस कृपा का आलिंगन हम नहीं कर पाएंगे, उस प्रेम का रसपान हम नहीं कर पाएंगे।
इसलिए हमें श्री कृष्ण के जीवन की जो भी लीलायें हैं, उन लीलाओं के अंदर भगवती राधा के दर्शन करना अनिवार्य है, क्योंकि श्री कृष्ण ब्रह्मस्वरूप हैं और जो भी श्री कृष्ण की शक्ति हमें वहाँ पर दिखाई दे रही है, और भगवान श्री कृष्ण जिस भी शक्ति से जो कर रहे हैं, वह स्वयं भगवती श्री राधा है, क्योंकि श्री कृष्ण से श्री राधा कभी अलग हो ही नहीं सकती राधे राधे 🙏⛳
20/03/2026
18/03/2026
कुछ लोगों ने पूछा है कि हम भगवान का नाम जप तो करते हैं लेकिन हमें अनुभूतियाँ नहीं होती हैं, किसी तरह का लगाव, किसी तरह का कनेक्शन भगवान के प्रति जुड़ाव ऐसा कुछ महसूस नहीं होता है, उनके अनुभव में नहीं आता है।
तो उनको मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ कि जब आप अपने खेतों में पानी लगाते हैं, मतलब समझिएगा कि खेत है और आपने पानी शुरू कर दिया है तो तुरंत ही खेतों में पानी नहीं दिखता है। पानी खेत में उतरता है और खेत में जो पुराने नए गड्ढे बने हुए हैं पहले उनमें पानी भरता है। एक घंटा, दो घंटा, दस घंटा भी लग सकता है और जब खेत में जो बने गड्ढे हैं वे सारे के सारे तृप्त हो जाते हैं, भर जाते हैं पानी से तब उसके बाद पानी का स्तर खेत में ऊपर उठता है और आपको खेत में जल ही जल दिखाई पड़ने लगता है।
ठीक वहीं स्थिति भगवान के नाम जप में है कि आप भगवान का नाम जप ले तो रहे हैं लेकिन आपको अनुभूति नहीं हो रही है। तो आप समझ लीजिएगा कि भगवान के उन नाम जाप से आपके पाप कट रहे हैं, आपके वही गड्ढे हैं जो भर रहे हैं। जब ये गड्ढे भर जाएंगे, जब आपके सारे पाप कट जाएंगे, जब आप पूरी तरह से पाप मुक्त हो जाएंगे, तब आपको भगवान की भर्ती का अनुभव होगा और उनसे लगाव का अनुभव होगा और रोम-रोम कंपित होगा।
और नाम जप करते समय आप भगवान की लीला प्रसंगों में खूब करके आप भी उसी तरह से आंसू बहाएंगे। रोमांच होगा और भगवत भक्ति में आप खेल उठेंगे।
तो मित्रों घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान का नाम जप आप करिए। जब तक अनुभूत नहीं होती है तब तक धैर्य धारण करिए और अनवरत नाम जप करिए। क्योंकि अगर आपको अनुभूत नहीं हो रही है और नाम जप चल रहा है तो इसका मतलब कि आप पाप मुक्त हो रहे हैं और ऐसा होने के बाद आपको तुरंत ही भगवान से लगाव का अनुभव होगा और आप भगवान की भक्ति में झूमना शुरू कर देंगे।
तो बोलिए सिया भर रामचंद्र की जय 🙏⛳
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