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29/05/2026
सरदार पटेल चौराहा (BPL चौराहे) पर प्रशासन ने बेरीकेट्स हटाए
09/05/2026
*मंदसौर का कालाखेत मार्केट पहले ओर अब।*
*मंदसौर कालाखेत मार्केट से प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण।*
05/02/2026
26/01/2026
"पहला दरवाजा.....पहले वेश्या से भोग विलास करो...फिर चले जाना...
वहाँ एक वेश्या खड़ी थी।
शर्त लिखी थी— “वेश्या से संबंध बनाने पर ही दरवाजा खुलेगा।” सज्जन व्यक्ति ने इसे पाप समझा और आगे बढ़ गया....
दूसरा दरवाजा:
वहाँ एक गाय बंधी थी।
लिखा था— “गाय को लात मारने पर ही दरवाजा खुलेगा।”
गाय को लात मारना अधर्म था, इसलिए वह यहाँ से भी लौट गया....
तीसरा दरवाजा:
वहाँ मांस रखा था।
शर्त थी— “मांस खाने के बाद ही प्रवेश मिलेगा।”
उसने मांस को घृणा से देखा और चौथे दरवाजे की ओर बढ़ गया....
चौथा दरवाजा:
वहाँ शराब की एक बोतल रखी थी।
लिखा था— “पूरी बोतल पीने पर ही दरवाजा खुलेगा।”
महल में जाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था। उसने सोचा—
“पिछली शर्तों की तुलना में यह कम अधर्म है।”
उसने पूरी शराब पी ली....
शराब पीते ही उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई।
नमकीन खाने की तलब हुई— उसने मांस खा लिया।
कामवासना जागी— उसने वेश्या से संबंध बना लिए।
गुस्से में आकर उसने गाय को भी लात मार दी।
और अंत में— वह महल के अंदर चला गया।
मोरल (नीति शिक्षा):
शराब ने उससे वे तीनों अपराध करवा दिए,
जो वह जीवन भर कभी नहीं करना चाहता था।
इसलिए शराब को हल्के में मत लीजिए।
यह रिश्ते, धन-दौलत, परिवार, स्वास्थ्य
और वर्षों में कमाया हुआ पुण्य—
सब कुछ नष्ट कर देती है ।।।।
माँ ने वकील बेटे को फोन किया। बेटा तेरे पिता की तबियत बहुत खराब है। दो दिन से खाना भी नही खा रहे। आज तो कुछ बोल भी नही रहे। तू जल्दी से गाँव आ जा। उन्हे किसी डॉक्टर को दिखा ला। " बेटा बोला " माँ तुम तो जानती हो मेरा काम कितना बिजी है। आज एक महत्वपूर्ण मुकदमे की पैरवी करनी है। मै नही आ सकता। और तुम तो जानती हो पापा अब बीत चुके हैं। उन्हे ईश्वर के पास जाने दो।" इतना कह कर बेटे ने फोन काट दिया। माँ की आँखों मे आंसू आ गए। चार साल से बेटा घर नही आया था।वह जैसे तैसे पति के साथ गांव मे गुजर बसर कर रही थी। बेटे से कोई शिकायत नही थी मगर उसके सुहाग को बिता हुआ बता कर बेटे ने उसके हृदय को छलनी कर दिया था। तीन दिनों तक वह भूखी प्यासी पति की सेवा करती रही। फिर चौथे दिन पति ने हमेशा के लिए आँखे मूंद ली। उसने आखरी बार बेटे को फोन किया " बेटा तेरे पिता नही रहे। यहाँ आकर उनका अंतिम संस्कार कर दे।" बेटा आया तो देखा। पिता खटिया पर मृत अवस्था मे लेटे हुए थे और माँ उनकी छाती पर सिर रखकर सो रही थी। बेटे ने माँ को उठाना चाहा तो महसूस किया कि माँ भी दुनिया छोड़ कर जा चुकी है। उसके बाद वकील बेटे ने बड़ी धूम धाम से माता पिता को अंतिम धाम पहुंचाया। डीजे पर अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया। फूलों और सिक्को की बरसात की गई। सात गांवों को मृत्युभोज खिलाया गया। जी भर कर पंडितों को दक्षिणा दी गई। लोगों ने बेटे के इस कार्य पर दिल खोल कर उसकी तारीफ की। यही है सांसारिक प्रेम का रूप।
22 वर्षों बाद मां से मिला बेटा, एस.आई.आर. से चला पता चला बेटा जीवित है
मंदसौर 10 जनवरी 26/ थाना प्रभारी नईआबादी उप निरीक्षक कुलदीप सिंह राठौर निर्वाचन आयोग भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R) जिसका उद्देशय मतदाता सूची को अपडेट करना है जिसके फलस्वरूप पिछले 22 वर्षो से गुमशुदा विनोद पिता बालुराम गायरी उम्र 45 साल निवासी ढाकरिया मोहल्ला खिलचीपुरा मंदसौर द्वारा एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम जुडवाने हेतु ग्राम पंचायत से माता-पिता का ईपीक नम्बर चाहा गया उक्त जानकारी गुमशुदा की माता को प्राप्त हुई । जिसके पश्चात गुमशुदा के माता द्वारा थाना नई आबादी मंदसौर पर एक लेखी आवेदन प्रस्तुत किया मामले की गंभीरता को लेते हुए फरियादीया की सूचना पर थाना प्रभारी नई आबादी उनि. कुलदीपसिंह के नेतृत्व में थाना नई आबादी पर एक टीम गठीत की गई । गठित टीम द्वारा ग्राम पंचायत व तहसील निर्वाचन कार्यालय मंदसौर से संबधित के संबंध में जानकारी एकत्रीत कर गुमशुदा के वर्तमान पते की जानकारी प्राप्त कर गुमशुदा व उसकी पत्नी व उसके 02 बच्चे का पता लगाया गया बाद गुमशुदा व उसके बच्चो को सकुशल गुमशुदा की माँ की पीडा को देखते हुए लाने का प्रयास किया गया। थाना नई आबादी मंदसोर पुलिस द्वारा की गई इस कार्यवाही से एक लम्बे समय से बिछडे परिवार को पुनः मिलाने की दिशा मे महत्वपुर्ण सफलता प्राप्त हुई है।
*शीत लहर के चलते नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों का अवकाश घोषित*
*5 जनवरी और 6 जनवरी को रहेगा अवकाश*
मंदसौर 4 जनवरी 2026 / जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मंदसौर ने जानकारी दी है कि जिले में वर्तमान में शीत लहर के कारण न्यूनतम तापमान में अत्यधिक गिरावट दर्ज की जा रही है। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए मंदसौर जिले के अंतर्गत संचालित समस्त शासकीय एवं अशासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए दिनांक 05 जनवरी 2026 से 06 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है।
उन्होंने बताया कि उक्त अवधि में अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक गतिविधियाँ, जैसे परीक्षाएँ आदि, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार संचालित रहेंगी।
जिला प्रशासन द्वारा मौसम की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार आगे निर्णय लिया जाएगा।
गोल चौराहा डॉ पाटीदार वाली गली में फायरिंग की ख़बर, तीन लोगों की मौत
मै एक होटल में मैनेजर था। अच्छी इनकम थी। मजे से जिंदगी गुजर रही थी कि एक दिन होटल के हॉल में नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी की एक मीटिंग हुई। मैने भी उसमें भाग लिया। इतने सपने दिखाए गए कि मुझे अपनी जिंदगी तुच्छ लगने लगी। कुछ दिनों मे करोड़पति बनना कितना आसान था। लोगों ने अपनी इंकमटैक्स डिटेल दिखाई। किसी की लाखों में तो किसी की करोड़ों में थी। करना कुछ नहीं था बस तीन आदमी जोड़ने थे और प्रोडक्ट खरीदना था। इतना सरल काम और इतनी ज्यादा इनकम। मैने उसी दिन कंपनी ज्वाइन कर ली। इसके बाद जिंदगी इतनी बीजी हो गई कि बता नहीं सकता। चार साल बाद हालत ये है कि अब मेरे पास कोई नौकरी नहीं है। होटल मैनेजर की नौकरी कब की छूट गई। घर पर बेरोजगार बैठा हूं। सभी रिश्तेदार अब मुझे गालियां देते है।क्योंकि मैने अपने साथ उनको भी कंपनी में जोड़ कर बर्बाद कर दिया। सबसे यही कहना चाहूंगा। भूलकर भी ऐसे लोगों के चक्कर में न आए। दो सौ रुपए का प्रोडक्ट दो हजार में बेचकर ये लोग लोगों को बरगलाते है। पैसे सिर्फ कंपनी कमाती है। या ऊपर जुड़े लोग। नीचे वालों को ये लोग भिखारी बना देते है। पोस्ट को शेयर कर देना ताकि कोई इनके झांसे मे न आये।
मै बीवी बच्चों के साथ दस साल से
शहर मे रह रहा था। गाँव मे भाईयों से
लड़ कर आया था। दस साल से बोलचाल बन्द थी। भाईयों के साथ प्रॉपर्टी का मुकदमा भी चल रहा था । बैठे बेठे विचार आया कि मुझे लड़ने झड़ने से मिला क्या? दस साल से किराये के मकान मे रह रहा हूँ। ना कोई रिश्तेदार है न कोई फिक्र करने वाला। आज बीवी बीमार है अकेले हॉस्पिटल मे बैठा हूँ। दो दिन से नहाया भी नही हूँ। अगर मेरे अपने मेरे साथ होते तो मेरी ऐसी हालत होती क्या? अचानक मैंने अपने बड़े भाई को फोन
मिला दिया। पूरी रिंग गई मगर भैया ने नही उठाया। हिम्मत करके दुबारा फोन मिलाया। इस बार भैया ने फोन उठा लिया। मगर कुछ आवाज नही आई। मै बोला " भैया? " उधर से भैया का कर्कस स्वर सुनाई दिया " फोन क्यो किया? " मै बोला " आपकी बहु बीमार है भैया। दस दिन से हॉस्पिटल मे भर्ती है। बच्चे घर मे अकेले है। मै थक गया हूँ भैया" कहते हुए मुझे रोना आ गया। भैया की वही भारी आवाज सुनाई दी। " दस दिन हो गए और तु अब बता रहा है। रो मत मै आ रहा हूँ उसके बाद घण्टे भर मे भाई भाभी, भतीजे सब आ गए। आते ही उन्होंने सब सम्भाल लिया। उनके आते ही महसूस हुआ कि मेरी असली ताकत तो यही लोग है। उन्हे देखते ही हिम्मत सौ गुनी हो गई थी। उनके आने पर पत्नी की तबियत भी जल्दी ठीक हो गई। फिर मै भाईयों के साथ गांव लौट आया। मोरल:- जिंदगी वही है जो अपनो के साथ गुजरे। अपनो के साथ कैसा झगडा? कैसी लडाई? कैसी इग्गो? दुख सुख मे यही तो काम आयेंगे। भाई हिम्मत है। भाई रक्षा कवच है। भाई हो तो पीठ सुनी नही पड़ती। इसलिए बेशक अलग रहो मगर भाइयो से अनबन मत रखो
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