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computer software क्या है इन हिंदी , computer software के प्रकार को समझाइये ,
सॉफ्टवेयर की विषेशताएँ क्या होती है इन हिंदी ( What Are The Features of Software in Hindi) ,
सॉफ्टवेयर की उपयोगिता क्या होती है इन हिंदी ( What is the usefulness of software in Hindi )
कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर क्या है इस हिंदी ( what is computer software in Hindi )
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर ,प्रोग्रामो का वह समूह है , जो कंप्यूटर हेतु लिखा जाता है | यह कंप्यूटर की समस्त गतिविधियों को संचालित करते हुए इसके उपयोगिता सम्बन्धी कार्यों का क्रियान्वयन करता है |
सॉफ्टवेयर - सॉफ्टवेयर का तात्पर्य , निर्देशों के उस समूह अथवा प्रोग्राम से स्पस्ट होता है जो हार्डवेयर को सक्रिय करता है |
सॉफ्टवेयर के प्रकार को समझाइये ( explain the type of software )
सॉफ्टवेयर मुख्यता तीन प्रकार के होते है -
सिस्टम सॉफ्टवेयर ( System Software )
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर ( Application Software )
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ( Utility Software )
1. सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या है इन हिंदी ( What is System Software in Hindi )
यह एक या एक से अधिक प्रोग्रामो का समूह है , जो कंप्यूटर सिस्टम के विभिन्न ऑप्रेशन को कन्ट्रोल करता है | ये प्रोग्राम कोई विशेष समस्या को हल नहीं करते , बल्कि ये यूजर के द्वारा कंप्यूटर से कार्य करवाने में सहायक होते है | ये कंप्यूटर में होने वाले ऑपरशनों को कण्ट्रोल करते है , डाटा को इनपुट या आउटपुट करवाते है , पेरिफेरल उपकरणों ( प्रिंटर , कार्डरीडर , डिस्क तथा टेपड्राइव आदि ) से सम्बन्ध बनाये रखते है , ये सिस्टम सॉफ्टवेयर , कंप्यूटर सिस्टम के कार्य को ज्यादा प्रभावशाली तथा सक्षम बनाते है |
सिस्टम सॉफ्टवेयर के उदाहरण है -
operating system and control program
translator / compiler
utility and service program
database
database management system
इन सॉफ्टवेयर को तीन भागों में बटां गया है -
1. सिस्टम मैनेजमेंट प्रोग्राम्स
2.सिस्टम सपोर्ट प्रोग्राम्स
3.सिस्टम डेवलोपमेन्ट प्रोग्राम्स
(अ ) सिस्टम मैनेजमेंट प्रोग्राम्स ( S M P ) - वे प्रोग्राम्स जो इनफार्मेशन प्रोसेसिंग में कई प्रकार के जॉब्स के काम को करते समय कंप्यूटर सिस्टम के समस्त हार्डवेयर , सॉफ्टवेयर तथा डाटा रेसोर्सेज़ को मैनेज करते है , सिस्टम मैनेजमेंट प्रोग्राम्स कहते है | इन प्रोग्राम्स के मुख्य उदाहरण है -
ऑपरेटिंग सिस्टम , ऑपरेटिंग इन्वायरमेंट , डेटाबेस मैनजमेंट सिस्टम तथा टेली कम्युनिकेशन मॉनीटर्स आदि |
( ब ) सिस्टम सपोर्ट प्रोग्राम्स ( SSP ) - प्रायः कंप्यूटर बहुत सी अगल - अलग तरह की सेवाएं प्रदान करता है | इस तरह के ऑप्रेशन तथा प्रबंधन (Management) के कार्य सिस्टम सपोर्ट प्रोग्राम्स (SSP) द्वारा चलाये जाते है इनके मुख्य उदाहरण इस प्रकार है - सिस्टम यूटीलिटीज , परफोर्मेंस मॉनीटर्स एवं सिक्युरिटी मॉनीटर्स आदि
(स) सिस्टम डेवलोपमेन्ट प्रोग्राम्स (SDP) - वे प्रोग्राम्स जो विभिन्न इनफार्मेशन सिस्टम प्रोग्राम्स , प्रोसीजर अथवा अन्य एप्लीकेशन प्रोग्राम्स को तैयार करते समय सहयोग प्रदान करतें है , सिस्टम डेवलोपमेन्ट प्रोग्राम्स (SDP) कहलाते है इनके मुख्य उदाहरण है - प्रोग्रामिंग लेंग्वेज ट्रांसलेट , प्रोगरामिंग इन्वायरमेंट तथा कंप्यूटर एडेड सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (CASE) पैकेज आदि |
2 . एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर क्या है इन हिंदी (What is Application Software in Hindi )
ये प्रोग्राम मुख्यत किसी विशेष कार्य को करने के लिए प्रयोग किया जाता है आम उपयोगकर्ताओ के प्रोग्रामों को हम निम्न दो भागों में बांटते सकते है -
1 . जर्नल परपज एप्लीकेशन प्रोग्राम
2 .स्पेशल परपज एप्लीकेशन प्रोग्राम |
(A) जर्नल परपज एप्लीकेशन प्रोग्राम ( General Purpose Application Programs ) -
इस प्रकार के प्रोग्राम्स उपयोगकर्ताओं की साधारण इनफार्मेशन प्रोसेसिंग आवश्यकताओ की पूर्ति हेतु बनाये जाते है | आवश्यकताएँ मुख्यतः - शिक्षा , घर , व्यापार आदि उद्देश्यों से जुडी होती है | इसके मुख्य उदहारण निम्न है - वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम्स , इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट्स , डेटाबेस मैनेजर्स , टेलीकम्युनिकेशन ग्राफ़िक्स , इंट्रीग्रेटेड पैकेजर्स आदि |
(B) स्पेसल एप्लीकेशन प्रोग्राम्स ( Special Application Programs )
ये प्रोग्राम्स किसी विशेष एप्लीकेशन टास्क को ही संचलित करती है , और किसी को नहीं | इन्हे विभिन्न भागों में बांटा गया है -
1 . कमर्शियल एप्लीकेशन प्रोग्राम्स ( Commercial Application Programs)
2 . साइंटिफिक एंड रिसर्च प्रोग्राम्स ( Scientific And Research Programs)
3 . आर्ट एंड डिजाइनिंग एप्लीकेशन प्रोग्राम्स (Art And Designing Application Programs ) इत्यादि |
(अ) कमर्शियल एप्लीकेशन प्रोग्राम्स ( Commercial Application Programs )
ये प्रोग्राम विशेष तौर पर व्यापार से जुड़े हुए विभिन्न कार्यों को संचालित करने हेतु बनाये जाते है |
उदाहरण - एकाउंटिंग , मार्केटिंग , प्रोडक्ट्स , मेनुफेक्चरिंग , फाइनेन्स , बजटिंग , मैनेजमेंट इत्यादि |
(ब) साइंटिफिक एंड रिसर्च प्रोग्राम्स ( Scientific And Research Programs )
ये प्रोग्राम्स विशेष रूप से विज्ञान से जुड़े कार्यों को संचालित करने हेतु बनाये जाते है , इनका प्रायः निम्न विज्ञान से सम्बन्ध होता है - सामाजिक , व्यावहारिक , भौतिक , प्राकृतिक , जीवविज्ञान इत्यादि |
(स) आर्ट एंड डिजाइनिंग एप्लीकेशन प्रोग्राम्स (Art And Designing Application Programs )
ये प्रोग्राम्स विशेष रूप से ग्राफ़िक व चित्रात्मक कार्यों को संचालित करने हेतु बनाये जाते है |
3 . यूटिलिटी सॉफ्टवेयर क्या है इन हिंदी ( What is Utility Software in Hindi )
यूटिलिटी प्रोग्राम सिस्टम मेंटेनेंस टॉस्क के साथ यूजर को सहायता प्रदान करती है , जैसे - डिस्क फॉर्मेटिंग , डाटा कम्पेरिजन , डाटाकीपिंग आदि | यह डाटा कम्पेरिजन फाइल्स का नॉर्मल साइज में एल्गोरिथम करता है ताकि वह डिस्क पर कम जगह घेरे | बैंक - यूटिलिटी का उपयोग प्रायः स्टोरेज मिडिया पर डाटा की कॉपी बनाने के लिए किया जाता है | जैसे - फ्लॉपी डिस्क , सी. डी. रोम ,मैगनेटिक टेप आदि |
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर को तीन भागों में बांटा गया है -
1. एन्टीवायरस प्रोग्राम्स
2. फाइल मैनेजमेंट प्रोग्राम्स
3. डिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम्स |
(A) एन्टीवायरस प्रोग्राम्स - एन्टीवायरस एक ऐसा प्रोग्राम या प्रोग्रामों का समूह होता है समस्त वायरसों को समाप्त कर देता है , साथ ही जिस डाटा को नुकसान पहुंचाता है , उसको पुनः लेन की कोसिस भी करता है | जब कंप्यूटर को वायरल इन्फेक्शन हो जाता है , तो उसे ठीक करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है , इन स्थिति में कंप्यूटर को ठीक करने के लिए प्रायः एन्टीवायरस यूटिलिटीज का उपयोग किया जाता है |
(B) फाइल मैनेजमेंट प्रोग्राम्स - यह वह प्रोग्राम्स है , जो प्रोग्रामर को डिस्क पर कॉपी अपडेट करने या डिलीट फाइल्स को परमिट करने में सहायता करता है | यह फाइल सूचनाओं को संग्रह कर के रखता है जो प्रोग्रामर के द्वारा प्रदान किया जाता है
(C) डिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम्स - फाइल मैनेजर के सामान ही इसका उपयोग भी डिस्क की लोकेशन को व्यवस्थित करने और फ्री मैनेजमेंट टास्क को प्रयुक्त करने के लिए किया जाता है इसमें यह बताया गया है की किस प्रकार डिस्क स्पेस को प्रोग्राम और डाटा द्वारा लोकेट किया जाये, इसे ज्ञात किया जाता है
सॉफ्टवेयर की विषेशताएँ क्या होती है इन हिंदी ( What Are The Features of Software in Hindi)
सॉफ्टवेयर में निम्न विशेषताएँ होती है -
1.कॉनक्युरेंस ऑफ़ सॉफ्टवेर ( Concurrence of Software )
कॉनक्युरेंस से तात्पर्य एक ही समय में कई प्रकार के कार्यों को करने से है | सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में विभिन्न कार्यों को एक साथ करने की अनुमति प्रदान करती है | जैसे - सिस्टम डिस्क से डाटा पड़ रहा है , उसी समय सी. पी. यू. कोई दूसरा कार्य कर रहा है ,उसी समय Key -बोर्ड से कोई की दबाता है |
2. रिसोर्स एंड इनफार्मेशन शेयरिंग ( Resource And Information Sharing)
कई प्रोग्राम सामान हार्डवेयर का प्रयोग करते है , अनेक यूजर विभिन्न प्रोग्रामो का प्रयोग करते है या विभिन्न प्रोग्राम डाटा बेस का है | ये यह दिखता है की किसी सिस्टम को बाहरी दुनिया से अनेक प्रकार की इंटरफेसेज होती है |
3. मॉडुलरिटी ( Modularity )
कुछ सॉफ्टवेयर सिस्टम विभिन्न स्त्रोतों के उपयोग को रोटेट करते है | इनपुट - आउटपुट डिवाइसो को विभिन्न यूजरों में बांटा जाता है |
सन 1981 में विलियम गेट्स ( William Gates ) ने दो कर्मचारियों के साथ Micro -Soft Corporation शुरू किया | इन्होने IBMPC के लिए DOS ( Disk Operating System ) बनाया , यह कॉर्पोरेशन आज भी सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है |
सॉफ्टवेयर की उपयोगिता क्या होती है इन हिंदी ( What is the usefulness of software in Hindi )
सॉफ्टवेयर की निम्न उपयोगितां है -
1. कंप्यूटर हार्डवेयर को उपयोग में लेन के लिए सॉफ्टवेयर की आवश्यकताएं होती है |
2. सिस्टम सॉफ्टवेयर प्रोग्रामो का एक समूह है जो कंप्यूटर सिस्टम एवं डाटा संसाधन प्रक्रिया को नियंत्रित करता है तथा उसको आश्रय देता है
3. सॉफ्टवेयर के अंतर्गत विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाएँ प्रचलित है अथवा चलायी जा सकती है ; जैसे - पाइथन , जावा , सी , आदि |
4. सॉफ्टवेयर में लैंग्वेज प्रोसेसर एक प्रोग्राम है जो की एक भाषा में अनुवाद स्वीकार करके अन्य भाषा में ट्रांसलेट करता है |
5. सॉफ्टवेयर में ऑपरेटिंग सिस्टम की सुविधा प्रदान होती है जिससे कंप्यूटर की विभिन्न प्रक्रियाओं को संचालित किया जा सकता है |
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03/05/2021
computer memory क्या होती है , मेमोरी के प्रकार को समझाइये , एवं उसकी विशेषता को समझाइये
जैसे की हम जानते है मनुष्य कुछ भी चीजों की जानकारी को याद रखने के लिए अपने मष्तिष्क का उपयोग करते है ठीक वैसे ही कंप्यूटर किसी भी डाटा की जानकारी को अपने मेमोरी में स्टोर करती है
तो आप आगे जानने वाले है की computer memory क्या है ? पूरी जानकारी और विस्तार से जानकारी मिलने वाली है तो बने रहें हमारे इस पोस्ट पर
WHAT IS COMPUTER MEMORY ? IN HINDI ( कंप्यूटर मेमोरी क्या है ? इन हिंदी )
कंप्यूटर मेमोरी वह मेमोरी है जिसमे सूचनाएं एवं कार्याक्रम , डाटा , निर्देश आदि संगृहीत किये जाते है कंप्यूटर मेमोरी , Computer का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है | जिसमे सभी जानकारी स्टोर अर्थात संगृहीत होती है | और मेमोरी (c.p.u) से जुडी रहती है
Memory
कम्प्यूटर में समस्त डाटा बाइनरी ( Binary ) के रूप में संगृहीत होता है | मेमोरी अनेक सैल्स ( Sells ) से मिल कर बानी होती है। प्रत्येक सेल में एक बिट ( 0 या 1 ) स्टोर करने की छमता होती है। सैल फ्लिप - फ्लॉप (Flip - Flop ) के रूप में बनाये जाते है। जो 'on ' के रूप में 1 तथा 'off ' के रूप में 0 संगृहीत करते है।
Computer Memory के विभिन्न प्रकार - Type of Computer Memory In Hindi
कंप्यूटर मेमोरी के प्रकार निम्न लिखित है -
प्राइमरी मेमोरी ( Primary Memory )
सेकंडरी मेमोरी ( Secondary Memory )
कैश मेमोरी ( Cache Memory )
#1 Primary Memory ( प्राइमरी मेमोरी ) क्या होती है ?
प्राइमरी मेमोरी को मेन मेमोरी ( Main Memory ) , इन्टर्नल मेमोरी ( Internal Memory) वा प्राइमरी स्टोर ( Primary Memory ) भी कहा जाता है | जो आमतौर पर उस प्रकार के डाटा ( DATA ) को स्टोर करती है जो उस वक्त (PROCESSING UNITE) या (C . P . U) में प्रोसेस हो रहा है | प्राइमरी मेमोरी ( PRIMARY MEMORY ) की स्टोरेज क्षमता सेकेंडरी मेमोरी से कम होती है | परन्तु सेकंडरी स्टोरेज ( H D D ) और ( S S D ) secondary memory की तुलना में primary memory अधिक तेज से कार्य करती है |
primary memory दो तरह की होती है
volatile
Non-volatile
volatile ( वोलेटाइल )
वोलेटाइल उस मेमोरी डिवाइस को कहते है जो computer के चालू रहने तक ही data को स्टोर करती है |
Non - volatile ( नॉन - वोलेटाइल )
जबकि नॉन - वोलेटाइल , वोलेटाइल की ठीक विपरीत होता है यह DATA को लम्बे समय तक Store कर सकती है
primary memory को Semiconductor से बनाई जाती है और यह secondary store के मुकाबले अधिक महँगी होती है |
Primary memory दो प्रकार के होते है
RAM ( Random access memory )
ROM ( Read only memory )
Primary Memory की विशेषताएं
ये मेमोरी (CPU) से सीधे कनेक्ट होती है
primary memory , volatile व non -volatile दो तरह के होते है
ये मेमोरी महँगी होती है secondary memory से
ये मेमोरी तेज होती है बाकि मेमोरियों से
power off होने के बाद data अपने आप delete हो जाती है
primary memory के बिना कंप्यूटर काम नहीं कर सकता है
#2 Secondary Memory (सेकेंडरी मेमोरी ) क्या होती है ?
सेंकडरी मेमोरी computer की permanent memory होती है | सेकेंडरी मेमोरी में बड़ी मात्रा में data और software program को स्थायी रूप से स्टोर किया जाता है | एक secondary memory की storage क्षमता अधिकतर 16 TB ( Terabytes ) तक होती है इसके विपरीत primary memory अधिक से अधिक 32 GB ( Gigabytes ) तक ही data स्टोर कर सकती है
इसमें data store पावर ख़त्म होने पर या computer बंद होने की स्थिति में भी सुरक्षित रहती है इसलिए इन्हे Non - Volatile कहा जाता है |
secondary memory में जो data स्टोर होता है उसे कंप्यूटर प्रोसेसर सीधे access नहीं कर सकता | उसके लिए उसको पहले primary memory (RAM ) में लोड है | देखा जाये तो Secondary Memory बाकि मेमोरी की तुलना में काफी धीमी होती है
secondary memory के प्रकार निम्न लिखित है -
Magnetic Tape
Magnetic Disk
Optical Disk
Flash Memory
secondary memory की विशेषताएं
यह Non - volatile प्रकृति की मेमोरी होती है
इसमें data को स्थायी रूप से store किया जाता है
secondary memory में कई TB डाटा को स्टोर कर सकते है
इनकी कीमत primary memory से काम होती है
कंप्यूटर में backup memory के रूप में इसका उपयोग किया जाता है
#3 Cache memory ( केश मेमोरी ) क्या होती है
केश मेमोरी (Cache memory ) , वह मेमोरी है जो की मेमोरी प्रोसेसर स्पीड 'मिस मैच ' ( mis match ) को कम करने के लिए काम आती है | केश मेमोरी (CPU) और मेन मेमोरी (Main Memory ) के बीच की एक बहुत तेज और सूक्षम मेमोरी होती है जिसका एक्सेस टाइम ( Access Time) (CPU) की प्रोसेसिंग स्पीड के पास में होती है | यह मेमोरी (CPU) और मेन मेमोरी के बीच में एक हाई स्पीड बफर ( High Speed Buffer ) की तरह काम करती है | यह प्रोसेसिंग के समय बहुत एक्टिव डाटा ( active data ) और निर्देश को कुछ समय तक स्टोर करने के काम आती है | क्युकी केश मेमोरी मेन मेमोरी ( Main Memory ) से अधिक तेज है |
Cache Memory ( केश मेमोरी ) की विशेषताएं
केश मेमोरी की स्पीड बहुत तेज होती है
यह जिस भी डिवाइस में लगी होती है उसकी स्पीड बड़ जाती है
यह CPU को फ़ास्ट काम करने में मदद करती है
इसकी स्टोरेज क्षमता सिमित होती है
इसमें डाटा अस्थायी रूप में संगृहीत करता है
आउटपुट डिवाइस क्या होता है ? what is output device ? आउटपुट कितने प्रकार के होते है ?
अब तक हम जान चुके है की कंप्यूटर क्या है ? कंप्यूटर का फुल फॉर्म क्या है ? 5 कारण कोडिंग सीखने के , और इनपुट डिवाइस क्या है ? ये हम जान चुके है हमारी पिछली पोस्ट में अब हम जानेंगे की आउटपुट क्या है ? आउटपुट डिवाइस क्या है एवं इसके कितने प्रकार है ?
आउटपुट क्या है ?
आउटपुट = जब हम इनपुट डिवाइस की मदद से कंप्यूटर को निर्देश या डाटा देते है और इनपुट द्वारा दिया गया डाटा को प्रोसेस्सर अर्थात सी. पी.यू. में जा के प्रोसेस होता है तब उसके पश्चात आउटपुट प्राप्त होता है |
👏👏
आउटपुट डिवाइस क्या है
अब जैसे की आप जान गए होंगे की आउटपुट क्या होता है ,आउटपुट डिवाइस वह होता है जिस मशीन के द्वारा हमें आउटपुट प्राप्त होता है उसे ही आउटपुट डिवाइस कहते है | जैसे = मॉनिटर ,प्रिंटर , हेडफोन्स , कंप्यूटर स्पीकर इत्यादि |
आउटपुट डिवाइस के विभिन्न प्रकार निम्न है
मॉनिटर
प्रिंटर
कंप्यूटर स्पीकर
हैडफ़ोन
1 .मॉनिटर = मॉनिटर एक आउटपुट डिवाइस है जो इनफार्मेशन को चित्र के रूप में प्रदर्शित करता है एक मॉनिटर में आमतौर पर द्रश्य को प्रदर्शित करता है , सर्कीट्री आवरण , बिजली आपूर्ति शामिल है आज कल के मॉनिटर में डिस्प्ले डिवाइस आमतौर पे एक पतली फिल्म ट्रांजिस्टर लिक्वीड क्रिस्टल डिस्प्ले (टी एफ टी - एल सी डी ) (T.F.T.- L.C.D.) होती है | जिसमे एल ई डी बैकलाइट के साथ के साथ कोल्ड-कैथोड फ्लोरोसेंट लैंप (सीसीएफएल) बैकलाइटिंग होता है। पुराने मॉनीटरो में कैथोड रे ट्यूब (C.R.T.) का उपयोग किया जाता था | कंप्यूटर से मॉनिटर ( वि जी ए ) डिजिटल विजुअल इंटरफ़ेस (डी वि आई ) इत्यादि चीजों से मिलकर बनाई जाती है मॉनिटर |
मॉनिटर के निर्माता सबसे पहले cathode ray monitor का आविष्कार Karl Ferdinand Braun ने किया था सन 1897 में जब उन्होंने पहला cathode ray tube invent किया था.
2. प्रिंटर
प्रिंटर- प्रिंटर ऐसी आउटपुट डिवाइस है जो कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छपती है | परन्तु कंप्यूटर से जानकारी का आउटपुट बहुत तेजी से मिलता है और प्रिंटर उतनी तेजी से काम नहीं कर पाता , इसलिए यह जरुरी हो जाता है की यह जानकारी प्रिंटर में कहीं स्टोर की जा सके | इसलिए प्रिंटर में भी एक मेमोरी होती है कंप्यूटर से प्रिंटर की इस मेमोरी में जानकारी भेज दी जाती है , जहाँ से ये जानकारी निकलकर धीरे - धीरे छपी जाती है | यदि कंप्यूटर से मिलने वाली जानकारी इतनी अधिक हो की इस भंडार में स्टोर न की जा सके तो इसके लिए एक बफर लगाया जाता है जो एक या दो सेकंड में कम्पुयटर से सरे डाटा ले लेता है जहाँ से प्रिंटर में धीरे - धीरे जाता है |
पहला कम्प्युटर प्रिंटर 19वीं शताब्दी में कम्प्युटर के पितामह मा. Charles Babbage ने अपने Difference Engine के लिए डिजाईन किया था. मगर 20वीं शताब्दी तक भी यह डिजाईन नही बन पाया था.
जापान की कंपनी Epson ने वर्ष 1968 में EP-101 नामक पहला इलेक्ट्रॉनिक प्रिंटर का आविष्कार किया. ये शुरुआती प्रिंटर आमतौर पर टाईपराईटर तथा टेलीटाईप मशीन का संकर होते थे.
3. कंप्यूटर स्पीकर = कंप्यूटर स्पीकर वैसे तो आउटपुट डिवाइस ही है क्यूंकि ये कंप्यूटर के (c.p.u.) में एक (usb) केबल से कनेक्ट होता है फिर आपके कंप्यूटर के वीडियो में जो भी ऑडियो होगा वह आपके स्पीकर से सुनाई देगा |
अब हलाकि आप सभी को पता होगा कहि की स्पीकर क्या होता है पर मै आपको बेसिकली क्या होता वो बताऊंगा स्पीकर - एक बहुत ही कॉमन output devices होते हैं स्पीकर . इन्हें computer systems में इस्तमाल किया जाता है. जहाँ कुछ speakers को design किया गया होता है specifically कुछ computers के साथ, वहीँ दूसरों को किसी भी sound systems के साथ इस्तमाल किया जा सकता है.
चाहे उनकी design कुछ भी हो speakers का मुख्य काम ही होता है audio output पैदा करना जिसे की एक आम इन्सान सुन सके.और अपना मनोरंजन कर सके
4. हैडफ़ोन = यह एक आउटपुट डिवाइस होता है जिसको हम अपने मिनी कंप्यूटर अर्थात फ़ोन्स में यूज़ करते है , पहले तो आते थे वायर वाले हैडफ़ोन परन्तु अब टेक्नोलॉजी के बढ़ने के वजह से हेडफोन्स में भी कई सरे परिवर्तन आये है जैसे - अब ब्लूटूथ हेडफोन्स , वायरलेस हेडफोन्स , और अब तो वॉच हैडफ़ोन आने लगे है |
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