Kumar Atul

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✍️ कवि | हिंदी भावनाओं की आवाज़
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🎤 मंचीय कवि व ऑनलाइन परफॉर्मर
🎧 शब्दों में जज़्बात, दिलों तक बात
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#HindiPoetry #Shayari #Kavi #PoetLife

Photos from Kumar Atul's post 26/01/2026

राष्ट्र की आज़ादी के हवन में
अपने प्राणों की आहुति देने वाले
समस्त शहीदों को आकाश भर नमन 🙏🇮🇳
और हिंदुस्तान के इतिहास के
इस सबसे गौरवशाली दिवस पर
आप सभी देशवासियों को
हार्दिक शुभकामनाएँ।
कलम भी धन्य है जिसने संविधान लिखा,
वो क़लम भी धन्य है जिसने बलिदान लिखा।
हम आज़ाद भी हैं, ज़िम्मेदार भी हैं,
गणतंत्र ने हमें ये पहचान लिखा। 🇮🇳
✍️ #अतुलकश्यप


🇮🇳

23/01/2026

माँ सरस्वती की कृपा से
हर मन में ज्ञान का उजाला हो 🌼
आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
BasantPanchami

21/09/2025

✨ नज़्म ✨

मैं लफ़्ज़ों की रवानियाँ लिखूँ,
या फिर किस्से–कहानियाँ लिखूँ?

बस लिखूँ मैं दर्द तेरा,
या ज़िन्दगी की हैरानियाँ लिखूँ?

लिख दूँ अपनी मंज़िल का ज़िक्र,
या राहों की दुश्वारियाँ लिखूँ?

मीरा के गीले आँसू लिख दूँ,
या समाज की परेशानियाँ लिखूँ?

लिख दूँ यादों का कोई मंज़र,
या उसकी मिटती निशानियाँ लिखूँ?

लिख दूँ बहारें मौसम की,
या पतझड़ की वीरानियाँ लिखूँ?

कलम मेरी भटकी हुई सी है,
बता ऐ दोस्त—मैं क्या लिखूँ?

तेरी हँसी की मिठास लिख दूँ,
या अपनी रूह की सच्चाइयाँ लिखूँ?

✍️ अतुल _कश्यप

16/09/2025

🌹 ग़ज़ल 🌹

तेरा ख्याल मेरे दिल से निकलता क्यों नहीं,
दिल टूट चुका है फिर संभलता क्यों नहीं?

इक तेरा चेहरा बसा रखा है निगाहों में,
दूसरा मेरी आँखों में उतरता क्यों नहीं?

तेरे संग जीने की ख्वाहिश अधूरी रह गयी,
ख़्वाब टूट गया तो बिखरता क्यों नहीं?

तेरे बिना अब दिल कहीं भी लगता नहीं मेरा,
वक़्त बीत रहा है पर बदलता क्यों नहीं?

लिख रहा है तेरी यादों में "अतुल" अशआर,
क़लम थक गई पर ग़म रुकता क्यों नहीं?
© अतुल _कश्यप
#अतुलकश्यप

08/09/2025

🎶 गीत 🎶
संग रहकर भी हम कुछ समझ न सके,
साथ छूटा तो सब कुछ समझने लगे।
मन मेरा जान पाता नहीं क्या हुआ,
सुलझनों की जगह हम उलझने लगे।

तेरी यादों के मेले से घिरने लगे,
ऐसा लगता है मन कहीं खो गया।
जागता मैं रहा नींद में रात भर,
नींद में रात भर जाग कर सो गया।
अश्रुओं से नयन गीले होने लगे,
जब खुद को ही हम परखने लगे।
मन मेरा जान पाता नहीं क्या हुआ,
सुलझनों की जगह हम उलझने लगे।

क्या अजब, क्या ग़ज़ब ऐसा लगने लगा,
तुम जहाँ हो वहीं से पुकारो मुझे।
तेरी तस्वीर को देखता हूँ हमेशा,
तुम जहाँ हो वहीं से निहारो मुझे।
दिल को लगता है तुम पास हो मेरे,
जब से मेघ सुधियों के बरसने लगे।
मन मेरा जान पाता नहीं क्या हुआ,
सुलझनों की जगह हम उलझने लगे।

रेत पर जो बनाया था सपनों का भवन,
तोड़ने लग गया उसको सारा नगर।
सोचा था खुशियों का होगा अपना महल,
बनते बनते महल हो गया खंडहर।
फूल आँगन में खुशियों के खिल न सके,
हरषने की जगह हम तरसने लगे ।
मन मेरा जान पाता नहीं क्या हुआ,
सुलझनों की जगह हम उलझने लगे।

©अतुल_कश्यप

06/09/2025

वक़्त -बेवक्त ,जो मुझे याद करता था,
साथ जीने-मरने की फ़रियाद करता था,
खलने लगा है उजाला उसी को अब मेरे घर का,
मेरे चराग़ से रौशन जो अपना चराग़ करता था,
©अतुल_कश्यप

14/02/2024

मिट ना सकी वो कहानी बनी है
ये चाहत में रस्म पुरानी बनी है
ज़माने में प्रेम अमर था अमर है
मुहब्बत की कब्रें निशानी बनी है
#कुमारअतुल
💖💖

Photos from Kumar Atul's post 09/02/2024

"कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है"
पूरी दुनिया को अपनी कविताओं से दीवाना कर देने वाले मेरे सहित्यिक गुरु कविराज जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ और चरणस्पर्श🙏🏻
🎂💐💐🙏🏻

07/02/2024

किसी शायर के ख़्वाब जैसी है..
आसमानी किताब जैसी है..
इक लड़की है भोली भाली सी.
जिसकी सूरत गुलाब जैसी है..
#कुमारअतुल

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