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08/09/2018
साहित्यकार शिरोमणि सम्मान से नवाजे गए कथाकार शिवमूर्ति राष्ट्रीय पुस्तक मेला रवीन्द्रालय चारबाग: तीसरा दिवस नई जगह किताबें करा रही ताजगी का अहसास लखनऊ, 07 सितम्बर 2018: शब्द.....
02/09/2018
चारबाग के "रवीन्द्रालय लान" में पुस्तक मेला 5 सितम्बर से :
लखनऊ के चारबाग रवीन्द्रालय लान चारबाग में कवि और गीतकार गोपालदास नीरज को समर्पित राष्ट्रीय पुस्तक मेला शिक्षक दिवस पांच सितम्बर से 10 दिन तक चलेगा। मेले के उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल राम नाईक आमंत्रित है। निःशुल्क प्रवेश वाले इस पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों को विभिन्न प्रकार की पुस्तकें नये कलेवर में प्राप्त हो सकेंगी।
मेला आयोजक देवराज अरोड़ा ने पत्रकारों को बताया कि गागर में सागर भरने जैसा काम करने वाले इस मेले के साहित्यिक कार्यक्रमांे की शृंखला में पुस्तकों के लोकार्पण, संगोष्ठी, विचारगोष्ठी का आयोजन, काव्य गोष्ठी, कवि सम्मेलन, मुशायरा नियमित आयोजित होंगे।
पुस्तक मेला में निर्मला सिंह, अलका प्रमोद आदि साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण होगा। सर्च फाउण्डेशन की ओर से प्रशासनिक अधिकारियों का कवि सम्मेलन भी होगा।
पुस्तक मेला में साहित्यकार शिरोमणि सम्मान कथाकार शिवमूर्ति को प्रदान किया जायेगा।
लखनऊ सेवा रत्न सम्मान विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करने प्रतिष्ठित मनीषियों मो.अली साहिल (शायर), सुल्तान शाकिर हाशिमी (पत्रकार), पद्मा गिडवानी (लोक संगीत), मुनव्वर अंजार (खेल), डाॅ.रंगनाथ मिश्र ‘सत्य‘ (साहित्य), अनिल रस्तोगी (नाटक), संजीव जायसवाल ‘संजय‘ (बाल साहित्य), बिन्दु जैन (उद्घोषणा), पृथ्वीराज चैहान (प्रसारण) व आत्मप्रकाश मिश्र (साहित्यिक प्रस्तुति) को दिया जायेगा। ‘लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड’ से शायर मुनव्वर राना अलंकृत होंगे।
नवांकुर कवियों को प्रोत्साहन देते हुए नये हस्ताक्षर कविता प्रतियोगिता का आयोजन होगा। बच्चों की विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियाँ मेले का मुख्य आकर्षण होंगी। इस मौके पर भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी, संयोजक देवराज अरोड़ा, संरक्षक अनिल टेकरीवाल, राज आहूजा, विजय अरोड़ा, सर्वेश अस्थाना, डा.अमिता दुबे, गौरव, रूपा शतरूपा पाण्डेय व बिन्दु जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पुस्तकों को जनजन तक पहुचने का सबसे सरल माध्यम पुस्तक मेला है। इसका जितना अधिक आयोजन हो कम है।
13/09/2017
सुनाओ कहानी, न फिर आज नानी
तुम्हें याद तो हैं, बहुत सी ज़ुबानी..
कहानी जो' लगती थीं' लोरी के' जैसी,
कि चन्दा की' प्यारी चकोरी के' जैसी,
पता ना चले नींद आनें की' आहट,
दबे पाँव आ जाए' भागी वो' सरपट,
लगे पीठ पर एक थपकी रूहानी..
सुनाओ कहानी न फिर आज नानी,
तुम्हें याद तो हैं बहुत सी ज़ुबानी..
गले चाँद को भी लगाएंगे' फिर से,
नया एक रिश्ता बनाएंगे' फिर से,
वो' मामा बड़ा दूर रहनें लगा है,
यही बात हर रात कहनें लगा है,
मुझे ला के' दे दो वो' मामी पुरानी..
सुनाओ कहानी न फिर आज नानी,
तुम्हें याद तो हैं बहुत सी ज़ुबानी...
थी' बिल्ली जो' मौसी, था' कुत्ता जो' टॉमी,
वो' बन्दर सा' मामा,बंदरिया सी' मामी,
डराती चुड़ैलें थी' पीपल के' नीचे,
कोई साँस रोके,कोई आँख मीचे,
वो' झरनों से' गिरता पहाड़ों का' पानी...
सुनाओ कहानी न फिर आज नानी,
तुम्हें याद तो हैं बहुत सी जुबानी...
बड़ा था बहादुर वो' राजा छबीला,
लिये साथ अपनें था' घोड़ा सजीला,
भुजाओं में' उसके बहुत जोर भी था,
मगर दिल का थोड़ा वो' कमजोर भी था,
उसे प्यार करती थी' परियों की' रानी...
सुनाओ कहानी न फिर आज नानी,
तुम्हें याद तो हैं बहुत सी ज़ुबानी....
:-"सौरभ
Saurabh Srivastava
27/02/2017
अब आगरा में
27/02/2017
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