Ajay rawat
ajay raway
31/08/2022
Bakhshi tala basti road per cal subah dumper se accident ho gaya tha subah 7:30 baje jisme ladke inter College ke padhne wali thi Chhatra uski vahin per on d spot mrutyu ho g*i
12/08/2022
Har Ghar tiranga Yojana
24/06/2020
7054446343
21/08/2019
पाकिस्तानी पत्रकार और गायक ने कहा- कश्मीर का ख्वाब छोड़ दें इमरान.................................जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने को लेकर जहां पाकिस्तान की बौखलाहट कम होने का नाम नहीं ले रही, वहीं पाकिस्तान का ही एक बुद्धिजीवी वर्ग उसके इस रवैये से काफी चिंतित है। इन लोगों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पाकिस्तानी के जाने-माने पत्रकार हसन निसार और लंबे अर्से से भारत में रह रहे पाकिस्तानी गायक अदनान समी ने अपने अंदाज में इमरान खान को आईना दिखाया है। दोनों ने इमरान को नसीहत दी कि वह कश्मीर का ख्वाब छोड़ दें।
हसन निसार पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हैं। वह सरकार की कड़ी आलोचना और खुलकर बोलने के लिए जाने जाते हैं। हसन अली को पहले भी कई बार पाकिस्तानी समाचार चैनलों में सरकार की बखिया उधेड़ते देखा जा चुका है। ताजा हालात के बाद हसन का एक और वीडियो क्लिप वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो क्लिप में हसन अली एक पाकिस्तानी समाचार चैनल पर आयोजित टॉक शो में शामिल नजर आ रहे हैं। शो के दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उनसे पाकिस्तान के भविष्य के बारे में पूछ लिया। इस पर हसन निसार बरस पड़े।
आज दुनिया जहां है, उसमें पाक का योगदान क्या है?
हसन निसार ने कहा, 'आज जहां इंसान खड़ा है, इसमें आपका (पाकिस्तान का) योगदान क्या है? आपसे का मतलब है मेरा, हम सब (मुस्लिमों) का। मुस्लिम देशों में रह रहे एक अरब 40 करोड़ आम मुसलमानों का योगदान क्या है? मुस्लिम, बच्चों को डायपर तक नहीं दे सकते। ये एक बॉल प्वाइंट पेन नहीं दे सके इंसान को। ये गाड़ी की विंडस्क्रीन (खिड़कियों के शीशे) साफ करने वाला वाइपर तक नहीं दे सके।'
'किसी मुस्लिम देश में लोकतंत्र नहीं है'
हसन निसार ने आगे कहा, 'दुनिया में लगभग 56-57 मुसलमान मुल्क हैं। एक में भी जम्हूरियत (लोकतंत्र) नहीं है। डूब मरो। क्यों, सदियों से हमने (पाकिस्तान ने) एक बुद्धिमान व्यक्ति पैदा नहीं किया? इस मुल्क (पाकिस्तान) में एक बड़ा आदमी पैदा हुआ है। मैं इंटलेक्चुअल (बौद्धिक लोगों) की बात कर रहा हूं। ये मुल्क (पाकिस्तान) है, सबका है। जनाब, जिन्हा साहब के बयान रिकॉर्ड में हैं कि हिंदू अपनी जगह फलां अपनी जगह आदि। उसको आप जो भी लेवल लगाएं। डॉ अब्दुस सलाम, एक सैंद्धातिक भौतिक शास्त्री, पहले पाकिस्तानी और पहले मुस्लिम हैं, जिन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ अब्दुस सलाम, अहमदी मुस्लिम समुदाय से हैं। उसे मार-मारकर इन्होंने (पाकिस्तान ने) देश से बाहर निकाल दिया। इसके बाद उन्हें नोबल पुरस्कार से नवाजा गया। सदियों से एक बड़ा आदमी आपने (पाकिस्तान ने) पैदा नहीं किया।
सभ्यता तो भारत के पास है, आपके पास क्या है?
औकात ये है कि एक सतही स्तर का दानिश बात करता है, क्लैश ऑफ सिविलाइजेशन (Clash of Civilizations) मतलब सभ्यताओं के टकराव की। ये उसे सिर पर बैठा लेते हैं और पूरी दुनिया उस पर बहस शुरू कर देती है। क्लैश ऑफ सिलिवाइजेशन तो है ही नहीं। ये क्लैश ऑफ फेथ (Clash of Faiths) मतलब भरोसे का टकराव है। सिविलाइजेशन तो उनके (भारत के) पास है, आपके पास क्या है?
पाकिस्तान आवाम को रोटी नहीं दे सकता, इज्जत तो दे'
बकरे में पानी का इंजेक्शन लगाकर उसका वजन बढ़ाने वाले, अपने बच्चों को नापाक, गंदा, गलीच दूध देने वाले, जीवनरक्षक दवाओं में मिलावट करने वाले, जाली दवाईयां बनाने वाले। यहां न तो कोई कानून व्यवस्था है और न ही कोई संविधान है। न आवाम की कोई इज्जत है। आप (पाकिस्तान) रोटी नहीं दे सकते , कम से कम इज्जत तो दें। वो भी नहीं दे सकते। कौन सी ऐसी चीज, मुझे इतने यहां बच्चे बैठे हैं, इतने माशाअल्लाह मुल्क की क्रीम बैठी है, मैं दावा कर रहा हूं इतना बड़ा, मुझे एक बात बताएं, जिस पर आप फक्र (गर्व) कर सकें। कह सकें कि ये चीज केवल हमारे पास है, जो दुनिया में कहीं नहीं है।
चोरों की थोक मंडी है पाकिस्तान
पाकिस्तान की इमरान सरकार ने 18 अगस्त को एक साल पूरा किया है। इस मौके पर पाकिस्तान के एक टीवी इंटरव्यू में हसन निसार ने कहा, 'पाकिस्तान की हालत अभी वैसी ही है जैसे नींद से जागे इंसान की होती है। उसे थोड़ा समय लगता है पूरे होश में आने में। मैं इस सरकार को 50 फीसद से थोड़े ज्यादा नंबर दूंगा। निश्चित तौर पर पाकिस्तान में महंगाई बढ़ रही है। ये मुल्क नहीं है मंडी है। किसी के हाथ में डंडा है किसी के हाथ में डंडी है। जो भारी पड़ जाए। इन्होंने (पाकिस्तानी सरकार व नेताओं ने) इस मुल्क को चोरों की थोक मंडी में तब्दील कर दिया है। इसे सुधारने में बहुत वक्त लगेगा। सरकार ने कुछ कड़े फैसले लिए हैं, लेकिन इस देश में कुछ लाख रुपये ही टैक्स भरा जाता है। ऐसे में कड़े फैसले और अर्थव्यवस्था को मजबूत कैसे किया जाएगा?
21/08/2019
पीएम मोदी के लिए अमेरिका में अब-तक का सबसे बड़ा आयोजन, सुनने के लिए जुटेंगे 50,000 लोग................................धानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) अगले महीने 27 सितंबर को अमेरिका (America) के दौरे पर जाने वाले हैं। पीएम मोदी यहां पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ( United Nations General Assembly) में भाग लेंगे। इससे पहले पीएम मोदी ह्यूस्टन जाएंगे, जहां पर उनके लिए एक मेगा कार्यक्रम 'हाउडी, मोदी' (Howdy, Modi) का आयोजन किया जा रहा है। पीएम मोदी को सुनने के लिए लगभग 50 हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय समेत राजनीतिक और सामुदायिक नेताओं को संबोधित करेंगे। ह्यूस्टन अमेरिका का चौथा सबसे बड़ा शहर है, जहां 1,30,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकियों की जनसंख्या है। 'हाउडी' दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका में आमतौर पर दोस्ताना अभिवादन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जिसका मतलब होता है कि 'आप कैसे हैं'।
50 हजार लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
ह्यूस्टन में पीएम मोदी के इस कार्यक्रम का आयोजन गैर-लाभकारी संस्था टेक्सास इंडिया फोरम (टीआइएफ) ने किया है। ये मेगा कार्यक्रम ह्यूस्टन के एनआरजी (NRG) स्टेडियम में होगा। टीआइएफ के मुताबिक पीएम मोदी को सूनने के लिए 50 हजार से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। अमेरिका में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा। इसके अलावा अमेरका में पॉप फ्रेंसिस के बाद किसी भी विदेशी नेता को सुनने के लिए भी ये अबतक की सबसे ज्यादा लाइव ऑडियंस होगी।
'साझा सपने, उज्ज्वल भविष्य'
सम्मेलन का टैगलाइन 'साझा सपने, उज्ज्वल भविष्य' है, जो भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को उजागर करेगा जिन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने कहा है कि मैं टेक्सास में रह रहे हजारों भारतीय अमेरिकियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ह्यूस्टन में स्वागत करता हूं।
अमेरिका में पीएम मोदी का तीसरा प्रमुख भाषण
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से पीएम मोदी का अमेरिका में यह तीसरा प्रमुख भाषण होगा। 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन और 2016 में सिलिकॉन वैली में पीएम मोदी के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। दोनों ही कार्यक्रमों में 20,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया था।
07/08/2019
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की मुश्किलें बढ़ी, गुजरांवाला कोर्ट से दोषी करार....................मुंबई हमले के मास्टरमाइंड एवं आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (JUD) के प्रमुख हाफिज सईद को गुजरांवाला अदालत ने दोषी करार दिया है। इस केस को पाकिस्तान के गुजरात में स्थानांतरित किया गया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई है। अभी हाल ही में गुजरांवाला स्थित आतंक रोधी न्यायालय (ATC) ने हाफिज सईद की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। इससे पहले भी अदालत ने हाफिज सईद की न्यायिक हिरासत सात दिन के लिए बढ़ाई थी।
बता दें कि आतंक विरोधी विभाग (CTD) ने तीन जुलाई को सईद समेत जमात-उद-दावा के 13 आतंकियों के खिलाफ आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी। सईद को 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। उस दिन वह अपने खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी से पहले ही जमानत लेने के लिए लाहौर से गुजरांवाला जा रहा था। उसी दिन उसे आतंकवाद रोधी अदालत के समक्ष भी पेश कर दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए हाफिज सईद के खिलाफ कई मामले लंबित हैं।
भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक और 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद (Hafiz Saeed) की गिरफ्तारी तब की गई थी जब वह आतंकवाद निरोधक अदालत में पेश होने के लिए गुजरांवाला जा रहा था। पाकिस्तान को एफएटीएफ से ब्लैक लिस्ट होने का डर सता रहा है। यह कार्रवाई इसी को देखते हुए की गई थी। पाकिस्तान के आतंकरोधी विभाग के बयान के मुताबिक, आतंकी फंडिंग के लिए पांच ट्रस्टों का इस्तेमाल करने के लिए हाफिज के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।
उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले हाफिज सईद और उसके तीन सहयोगियों हाफिज मसूद, अमीर हमजा और मलिक जफर को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर लाहौर स्थित एक आतंकवाद रोधी एक अदालत ने अपने मदरसे के लिए जमीन के अवैध इस्तेमाल से जुड़े मामले में तीन अगस्त तक अग्रिम जमानत दे दी थी। हाफिज सईद (Hafiz Saeed) ने लाहौर हाईकोर्ट (Lahore High Court) में खुद के खिलाफ दाखिल आतंकी फंडिंग के मामलों को चुनौती भी दे रखी है।
07/08/2019
दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने वाले लेखक की आज ही के दिन हुई थी मृत्यु, जानें क्या है नाम................................क्या आप जानते हैं कि दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखने वाले लेखक का क्या नाम था? नाम जानने के लिए शायद आपको अपने दिमाग पर जोर डालना पड़ेगा। आप दिमाग पर अधिक जोर न डालें, हम आपको ऐसे विरले लेखक का नाम बता रहे हैं। उनका नाम रवींद्रनाथ टैगोर है। टैगोर को लेखन के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार दिया गया था। आज ही के दिन यानि 7 अगस्त को उनकी मौत हुई थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में लगभग 2,230 गीतों की रचना की। रवींद्र संगीत बांग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग है। टैगोर के संगीत को उनके साहित्य से अलग नहीं किया जा सकता। उनकी अधिकतर रचनाएं तो अब उनके गीतों में शामिल हो चुकी हैं।
बचपन से ही लोगों को मिल गया था आभास
रवींद्रनाथ टैगोर को जानने वाले बताते हैं कि उनको बचपन से ही कविता, छन्द और भाषा को समझने की अद्भुत प्रतिभा थी। उन्होंने पहली कविता आठ साल की उम्र में लिखी थी और सन् 1877 में केवल सोलह साल की उम्र में उनकी पहली लघुकथा भी प्रकाशित हो गई थी। उनके लेखन में गीतांजलि, पूरबी प्रवाहिनी, शिशु भोलानाथ, महुआ, वनवाणी, वीथिका शेषलेखा, चोखेरबाली, कणिका, नैवेद्य मायेर खेला और क्षणिका आदि शामिल हैं। देश और विदेश के सारे साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि उन्होंने अपने अन्दर समेट लिए थे। पिता के ब्रह्म-समाजी के होने के कारण वे भी ब्रह्म-समाजी थे। पर अपनी रचनाओं व कर्म के द्वारा उन्होंने सनातन धर्म को भी आगे बढ़ाया।
हर क्षेत्र में लिखने की थी कला
साहित्य की शायद ही ऐसी कोई शाखा हो, जिनमें उनकी रचना न हो, कविता, गान, कथा, उपन्यास, नाटक, प्रबन्ध, शिल्पकला जैसी सभी विधाओं में उन्होंने रचना की। उनकी प्रकाशित कृतियों में गीतांजली, गीताली, गीतिमाल्य, कथा ओ कहानी, शिशु, शिशु भोलानाथ, कणिका, क्षणिका, खेया आदि प्रमुख हैं। उन्होंने कुछ पुस्तकों का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया। जब उनकी प्रतियों का अंग्रेज़ी में अनुवाद हो गया उसके बाद वो पूरे विश्व में फैली।
पढ़ाई के लिए ही वो डलहौजी के हिमालयी पर्वतीय स्थल तक चले गए थे। वहां जीवनी, इतिहास, खगोल विज्ञान, आधुनिक विज्ञान और संस्कृत का अध्ययन किया था और कालिदास की शास्त्रीय कविताओं के बारे में भी पढ़ाई की थी। 1873 में अमृतसर में अपने एक महीने के प्रवास के दौरान, वह सुप्रभात गुरबानी और नानक बनी से बहुत प्रभावित हुए थे, इनको स्वर्ण मंदिर में गाया जाता था जिसके लिए रवींद्रनाथ अपने पिता के साथ जाया करते थे। उन्होंने इसके बारे में अपनी पुस्तक मेरी यादों में उल्लेख किया।
रवींद्रनाथ टैगोर के काम
रवीन्द्रनाथ टैगोर ज्यादातर अपनी पद्य कविताओं के लिए ही जाने जाते है। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई उपन्यास, निबंध, लघु कथाएं, नाटक और हजारों गाने लिखे हैं। उनकी छोटी कहानियों को सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है। उन्होंने इतिहास, भाषा विज्ञान और आध्यात्मिकता से जुड़ी कई किताबें लिखी थी। अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ उनकी संक्षिप्त बातचीत, "वास्तविकता की प्रकृति पर नोट", एक परिशिष्ट के रूप में शामिल किया गया है। 150 वें जन्मदिन के मौके पर उनके कार्यों का एक संकलन वर्तमान में प्रकाशित किया गया। इसमें प्रत्येक कार्य के सभी संस्करण शामिल हैं और लगभग अस्सी संस्करण है।
शान्ति निकेतन
टैगोर को बचपन से ही प्रकृतिक चीजें पसंद थी। वो हमेशा सोचा करते थे कि प्रकृति के सानिध्य में ही विद्यार्थियों को अध्ययन करना चाहिए। इसी सोच को मूर्तरूप देने के लिए वह 1901 में सियालदह छोड़कर आश्रम की स्थापना करने के लिए शान्तिनिकेतन आ गए। प्रकृति के सान्निध्य में पेड़ों, बगीचों और एक पुस्तकालय के साथ टैगोर ने शान्तिनिकेतन की स्थापना की।
जीवन का अंतिम समय
जीवन के अन्तिम समय 7 अगस्त 1941 से कुछ समय पहले इलाज के लिए उन्हें शान्तिनिकेतन से कोलकाता ले जाया जा रहा था तो उनकी नातिन ने कहा कि आपको मालूम है हमारे यहाँ नया पावर हाउस बन रहा है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हां पुराना आलोक चला जाएगा और नए का आगमन होगा। उसी के बाद उनकी मृत्यु हो गई थी।
सम्मान
उनकी काव्य रचना गीतांजलि के लिए उन्हें सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। सन् 1915 में उन्हें राजा जॉर्ज पंचम ने नाइटहुड की पदवी से सम्मानित किया जिसे उन्होंने सन् 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में वापस कर दिया था।
बांग्ला साहित्य को नई दिशा दी
गुरुदेव के नाम से रबीन्द्र नाथ टैगोर ने बांग्ला साहित्य को एक नई दिशा दी। उन्होंने बंगाली साहित्य में नए तरह के पद्य और गद्य के साथ बोलचाल की भाषा का भी प्रयोग किया। इससे बंगाली साहित्य क्लासिकल संस्कृत के प्रभाव से मुक्त हो गया। टैगोर की रचनायें बांग्ला साहित्य में एक नई ऊर्जा ले कर आई। उन्होंने एक दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे। 1913 ईस्वी में गीतांजलि के लिए इन्हें साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला जो कि एशिया मे प्रथम विजेता साहित्य में है। मात्र आठ वर्ष की उम्र मे पहली कविता और केवल 16 वर्ष की उम्र मे पहली लघुकथा प्रकाशित कर बांग्ला साहित्य मे एक नए युग की शुरुआत की रूपरेखा तैयार की।
जीवन परिचय
नाम- रवींद्रनाथ टैगोर
जन्म-07 मई 1861
जन्म स्थान- कलकत्ता (अब कोलकाता)
मृत्यु- 07 अगस्त 1941
कलकत्ता, ब्रिटिश भारत
व्यवसाय- लेखक, कवि, नाटककार, संगीतकार, चित्रकार
भाषा-बांग्ला, अंग्रेजी
उल्लेखनीय कार्य- गीतांजलि, गोरा, घरे बाइरे, जन गण मन, रबीन्द्र संगीत, आमार सोनार बांग्ला, नौका डूबी
07/08/2019
दिन के अनुसार बदलता था सुषमा की साड़ियों का रंग, बॉर्डर से मेल खाती थी जैकेट............................ माथे पर गोल बड़ी सी कत्थई रंग की बिंदिया, मांगों में भरा लाल सिंदूर, गले में मंगलसूत्र और नाक में लौंग (नोजपिन) के साथ दमकने वाला सुषमा स्वराज का चेहरा शायद ही कोई भूल सके। हमेशा कॉटन व सिल्क की साड़ियों में दिखने वाली सुषमा स्वराज स्लीवलेस जैकेट भी पहना करती थीं जो उनका सिग्नेचर स्टाइल बन गया।
सुषमा के लिए सोमवार को सफेद, क्रीम, मंगलवार को लाल, मैरुन, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को बैंगनी, शनिवार को नीला और रविवार को किसी भी रंग की आजादी थी। दिनों के अनुसार रंगों का चयन कर साड़ी को खूबसूरती से पहनने वाली सुषमा स्वराज के बाल कभी अस्त-व्यस्त नहीं रहे। हमेशा अपने बालों को समेटकर वे पीछे की ओर जूड़ा बांधे रहती थीं। विदेश मंत्री के तौर पर दुनिया के हर कोने में वे उन्होंने अपने इसी स्टाइल को निहायत ही खूबसूरती से पेश किया।
बता दें कि तीज-त्योहारों पर वे पूरी तरह भारतीय परंपरा के अनुसार सजती संवरती थीं। विशेषकर करवा चौथ के अवसर पर उन्हें गहनों और जेवरातों में देखा जा सकता था।
उनके पास शॉल का भी अच्छा कलेक्शन मौजूद था। उन्हें कॉटन व सिल्क साड़ियां खूब पसंद थीं। सिल्क की साड़ियों में भागलपुरी सिल्क भी वे पसंद से पहनती थीं। हर रंग की साड़ियों के साथ उनके पास जैकेट का भी अच्छा कलेक्शन था। काफी कम मौकों पर वे बिना जैकेट साड़ी पहने नजर आती थीं।
एक ट्वीटर यूजर राजेश शर्मा ने फैंसी ड्रेस के लिए तैयार अपनी बेटी की फोटो सुषमा स्वराज को टैग कर पोस्ट किया। इस तस्वीर में बच्ची ने साड़ी, जैकेट व भाजपा का स्टोल डाल रखा था। इसके अलावा माथे पर लाल रंग की गोल बिंदी भी लगाई। इसे देख तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी और खुशी का इजहार कर लिखा कि उन्हें बच्ची का जैकेट बहुत पसंद आया है।
इरान में सुषमा स्वराज पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने देश के सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था। दरअसल, वहां सुषमा स्वराज ने गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थ्ाी और अपने सिर को शॉल से ढक लिया था। जिसे स्वरूपानंद सरस्वती ने इरान का ड्रेस समझ लिया और कहा था कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इरान में भारतीय संस्कृति के अनुरूप परिधान न पहनकर विदेश में देश के सम्मान को ठेस पहुंचाया है। उन्होंने इंदिरा गांधी को उदाहरण के तौर पर पेश किया और कहा कि अपने विदेश दौरों के समय वह हमेशा उचित परिधान पहनती थीं।
मंगलवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली के एम्स हॉस्पीटल में उनका निधन हो गया। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री और विदेश मंत्री के पद पर आसीन रहीं सुषमा स्वराज ने अपने कार्य को बखूबी समझा और उसे बेहतर तरीके से निभाया।
07/08/2019
Article 370: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच इमरान खान की सेना के साथ हाई लेवल बैठक.........................................अनुच्छेद-370(Article 370) पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अनुच्छेद-370 को खत्म करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान तिलमिला उठा है। इस मुद्दे पर अपनी संसद में पूरी तरह घिर चुके पीएम इमरान खान ने इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की एक और बैठक की। इस बैठक में पाकिस्तान की सेना के तीनों प्रमुख मौजूद रहे। बता दें, भारत के आर्टिकल 370 पर लिए गए फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने कहा कि वह भारत के इस कदम का मुकाबला करने के लिए सभी संभावित विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।पाकिस्तान के अगले कदम पर भारत की पैनी नजर बनी हुई है।
भारत के खिलाफ कूटनीतिक हमले की तैयारी
इससे पहले मंगलवार को पाकिस्तान सरकार ने भारत के कदम के खिलाफ कूटनीतिक हमला बोलने के लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। पाकिस्तान सरकार के एक नोटिफिकेशन में ये जानकारी दी गई। इस कमेटी में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मंसूर खान, विदेश सचिव सोहेल महमूद और प्रधानमंत्री के विशेष अहमद बिलाल सूफी शामिल हैं। इंटर सर्विसेज़ इंटेलीजेंस (ISI) के डायरेक्टर जनरल, मिलिट्री ऑपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल (DGMO) और इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशन्स (ISPR)भी कमेटी का हिस्सा है।
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'भारत ने और पुलवामा जैसे हमलों को न्योता दिया'
इससे पहले पाकिस्तान में भारत के आंतरिक मामले को लेकर संयुक्त सत्र बुलाया गया। इस दौरान पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भारत के खिलाफ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया। इमरान खान ने कहा कि वो भारत के इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि वो इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे। इमरान खान ने यहां तक कह दिया कि भारत के इस कदम से कश्मीर में हालात और खराब होंगे। भारत के इस फैसले से इमरान खान इतने आगबबूला हो उठे कि उन्होंने यहां तक कह डाला कि अनुच्छेद-370 से छेड़छाड़ करके पुलवामा जैसे और हमलों को न्योता दिया है। इमरान खान ने कहा कि दोनों देशों के बीच कश्मीर पर हुए युद्ध का पूरी दुनिया के लिए गंभीर परिणाम होंगे।
भारत पर हमले की बात कर रहा पाकिस्तान
भारत के फैसले से पाकिस्तान पूरी तरह हिल गया है। पाकिस्तान की बौखलाहट इस कदर बढ़ गई है कि वह अब भारत पर हमले की बात करने लगा हैं। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान भारत पर हमले की बात कह रहे हैं। पाकिस्तानी पीएम के साथ उनका विपक्ष भी बौखलाहट में है। विपक्ष के नेताओं से इमरान खान ने पूछा कि विपक्ष के नेता क्या चाहते हैं? क्या मुझे पाकिस्तानी सेना को भारत पर हमले का आदेश दे देना चाहिए ? इस बयान से साफ है कि पाकिस्तान और वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान किस कदर बौखला गए है।
PAK की 'परमाणु' पर गीदड़भभकी
भारत के अनुच्छेद-370 (Article 370) को रद करने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने इसकी कड़ी निंदा की इस कदम को अवैध, एकतरफा कदम बताया है। भारत को प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान इमरान खान ने कहा कि इस कदम से दो परमाणु संपन्न देशों के बीच संबंध और खराब होंगे।
पाकिस्तानी सेना में खलबली
जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 से हटाए जाने के फैसले से पाकिस्तानी संसद ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान सेना भी बौखला उठी है। एक तरफ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट में इसको लेकर हंगामेदार बहस हुई तो दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने सभी कमांडरों के साथ एक बैठक की। पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा ने इस बैठक में भारत को धमकी देते हुए कहा कि कश्मीरियों की मदद के लिए उनकी सेना किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है।
भारत के आर्टिकल 370 हटाने के फैसले के बाद जनरल बाजवा ने सैन्य कमांडरों की बैठक बुलाई थी। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जनरल बाजवा ने कहा कि जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने और भारत में किसी भी अन्य राज्य की तरह व्यवहार करने का निर्णय घाटी में दशकों पुराने अलगाववादी आंदोलन को समाप्त करने के उद्देश्य से किया गया है।
फवाद चौधरी ने दी युद्ध की धमकी
भारत को धमकी देने वालों में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ही अकेले नहीं हैं। इमरान खान के मंत्री भी भारत को गीदड़भभकियां दे रहे हैं। इमरान खान सरकार में मंत्री फवाद चौधरी भारत को युद्ध की धमकी दी है। फवाद चौधरी ने कहा है कि अब भारत को खून और आंसू से जवाब देना होगा।
07/08/2019
राजस्थान: बूंदी के पास एक और टाइगर रिजर्व विकसित करने की कवायद............................... राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राजस्थान सरकार इसके निकट ही स्थित बूंदी जिले के रामगढ़ विषधारी वन क्षेत्र को टाइगर रिजर्व के रूप में रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल में इस बारे में विधानसभा में संकेत भी दिए थे। यदि विकसित हुआ तो यह राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व होगा।
प्रसिद्ध रणथंभौर राजस्थान का सबसे पुराना टाइगर रिजर्व है। इसके साथ ही कैलादेवी और रामगढ़ विषधारी वन क्षेत्र भी हैं जो इसे कोटा में कुछ समय पहले घोषित किए गए मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से जोड़ते हैं। रामगढ़ विषधारी बूंदी जिले में स्थित है। यह करीब 307 किमी में फैला वन क्षेत्र घना है। इसमें बहने वाली मेज नदी में सालभर पानी भरा रहता है। इसके अलावा यहां बीहड़, कंदराएं, पहाड़ी, मैदानी क्षेत्र और नाले व घाटियां हैं, जो बाघों के विचरण के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। यही कारण है कि रणथंभौर से कई बार बाघ रामगढ़ क्षेत्र में आते रहे हैं। बताया जाता है कि 80 दशक में यहां करीब 14 बाघ थे जो धीरे-धीरे खत्म हो गए।
इस बीच, रणथंभौर से यहां बाघों का आना शुरू हो गया। राजस्थान सरकार ने कुछ समय पहले जिस मुकुंदरा हिल्स को टाइगर रिजर्व बनाया है, वहां सबसे पहले एक बाघ रामगढ़ होते हुए ही पहुंचा था। बाद में सरकार ने वहां तीन बाघ और भेज दिए। रामगढ़ को बाघों का बहुत अच्छा प्राकृतिक आवास माना जाता है। इसे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग यहां जूलीफ्लोरा वाले जंगल में 15 हेक्टेयर का चारागाह तैयार कर रहा है। इस जंगल में काफी संख्या में तेंदुए, चिंकारा, भालू, हिरण, भेडि़ए और अन्य वन्य जीव हैं लेकिन बाघों को स्थायी तौर पर बसाने के लिए यहां उनके शिकार का पक्का इंतजाम करना जरूरी है।
इसी दृष्टि से अब यहां काम किया जा रहा है। दरअसल, रणथंभौर में बाघों की संख्या इसके क्षेत्रफल के मुकाबले ज्यादा हो गई है। रणथंभौर में अभी 66 बाघ हैं और उनके शावक अलग है। ऐसे में यहां बाघों के बीच इलाके को लेकर अकसर आपसी संघर्ष की स्थिति रहती है। ऐसे में यहां से बाघों को दूसरी जगह ले जाना जरूरी होता जा रहा है। रामगढ़ विषधारी का टाइगर रिजर्व के रूप में विकास बूंदी में पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों विधानसभा में कहा था कि इसे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने पर सरकार विचार कर रही है। इससे पहले वन मंत्री सुखराम विश्नोई ने भी कहा था कि राजस्थान में अन्य वन क्षेत्रों में भी टाइगर रिजर्व की मांग आ रही है और हम इस बारे में प्राथमिक चर्चा कर चुके हैं। अब इस दिशा में आगे काम किया जाएगा।
07/08/2019
गुजरात में मगरमच्छ से भिड़ गया युवक, इस तरह बचाई जान.....................गुजरात में कई दिनों तक मूसलाधार बारिश के बाद मगरमच्छ वडोदरा शहर की गलियों में घुस गए हैं। अब मगरमच्छ पानी के सहारे गांवों तक पहुंचकर लोगों को अपना शिकार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। करजण तहसील के अभरापुरा गांव में मगरमच्छ ने एक युवक का शिकार करने का प्रयास किया। 10 मिनट तक संघर्ष के बाद युवक की जान बची। उसे चिकित्सा के लिए सयाजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।
इटोला गांव का रमेश कालीदास नामक आदिवासी युवक मजदूरी के लिए करजण तहसील के अभरापुर गांव आया था। कई दिनों तक भारी बारिश के बाद चारों तरफ पानी भर गया था। इस कारण वह काम पर नहीं जा रहा था। बुधवार दोपहर वह गांव में ही बारिश से भरे पानी में हाथ धो रहा था, अचानक मगरमच्छ उसे पानी में खींचकर ले जाने लगा। इस कारण वह घबरा गया। उसने मगरमच्छ के जबड़े पर हाथ से कई बार प्रहार किए। अचानक जबड़ा खुलते ही पानी में से वह भाग खड़ा हुआ। देखते ही देखते बहुत सारे लोग मौके पर पहुंच गए। मजदूर को घायल अवस्था में बड़ौदा के सयाजीगंज अस्पताल में भर्ती किया गया हैं।
06/08/2019
अमेरिका को चीन की चेतावनी, कहा- ... तो चुप नहीं बैठेंगे, देंगे माकूल जवाब....................एशिया और प्रशांत क्षेत्र में मिसाइलें तैनात करने की अमेरिका की योजना पर चीन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। चीन ने मंगलवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें तैनात कीं तो वह चुप नहीं बैठेगा। इसका माकूल जवाब दिया जाएगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के हथियार नियंत्रण विभाग के निदेशक फू कांग ने कहा, 'इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (आइएनएफ) संधि खत्म होने से वैश्विक सामरिक स्थिरता के साथ ही यूरोप और एशिया-प्रशांत की सुरक्षा पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। चीन खासतौर पर उस बयान से चिंतित है जिसमें एक अमेरिकी अधिकारी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शीघ्र ही मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल के विकास और परीक्षण की योजना का एलान किया।
चीन चुप नहीं बैठेगा और दुनिया के इस हिस्से में अमेरिकी मिसाइल तैनाती का जवाब देने के लिए विवश होगा।' इसके साथ ही उन्होंने दूसरे देशों खासतौर पर दक्षिण कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया से आग्रह किया कि वे अपने यहां अमेरिका को मिसाइलें तैनात करने की इजाजत नहीं दें।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने किया था एलान
हाल में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर आए अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा था कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हम कुछ माह के अंदर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें तैनात करना चाहते हैं। उनके इस बयान पर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी जमीन पर अमेरिकी मिसाइल तैनाती की योजना से इन्कार किया था।
पिछले हफ्ते खत्म हुई आइएनएफ संधि
अमेरिका और रूस के बीच 1987 में हुई आइएनएफ संधि गत शुक्रवार को खत्म हो गई थी। संधि के तहत मध्यम दूरी तक मार करने वाली कई मिसाइलों को प्रतिबंधित किया गया था। इस संधि के खत्म होने से दुनिया में नए हथियारों के विकास की होड़ शुरू होने की आशंका जताई गई है।
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