RADIO JUNCTION

RADIO JUNCTION

Share

India's First Transgender Supportive And Social Awareness Entertainment and much more.

04/06/2026

आज की महफ़िल सजेगी ग़ज़लों से ..... श्रोताओं में ग़ज़ल प्रेमियों की भेजी गई शायरियों को मिलेगा पूरा सम्मान ... जुड़िये रात 9 बजे

03/06/2026

आज का शब्द - इंतज़ार
तलाषये गीतों को और भेजिए।

01/06/2026

ओल्ड इज़ गोल्ड
बेशुमार एहसासों को समेटे हुए गीतों की सरगम जब बिखरती है तो सुनहरी किरण सी लगती है।
आइए मिलकर बिखेरते हैं पुरानी यादों को फरमाइशों के साथ आपकी चिट्ठियों में पिरोकर।
रेडियो जंक्शन का एप डाऊनलोड करें playstore से - https://play.google.com/store/apps/details?id=com.radio.rjunction

01/06/2026

🌟🎙️ सप्ताह के सितारे 🎙️🌟
इस सोमवार रात बाकी... बात बाकी... में
याद करेंगे उस शायर को, जिसने मोहब्बत को अल्फ़ाज़ दिए,
ज़िंदगी को नज़रिया दिया और गीतों को रूह दी...
🌹 साहिर लुधियानवी 🌹
उनके लिखे गीत सिर्फ गीत नहीं,
ज़िंदगी के पन्नों पर लिखे हुए एहसास हैं।
कभी प्रेम की कोमलता,
कभी समाज की सच्चाई,
तो कभी इंसानी जज़्बातों की गहराई...
साहिर साहब के कलम ने हर रंग को शब्द दिए।
🎶 "मैं पल दो पल का शायर हूँ..."
से लेकर
🎶 "अभी न जाओ छोड़कर..."
तक, उनके गीत आज भी दिलों में उसी ताज़गी से बसे हैं।
📩 साहिर लुधियानवी के लिखे अपने पसंदीदा गीत हमें हमारे FB पेज पर भेजिए और इस विशेष प्रस्तुति का हिस्सा बनिए।
🎙️ सुनिए —
✨ रात बाकी... बात बाकी... ✨
🕘 सोमवार रात 9 बजे
🌐 radiojunction.in⁠�
📻 Radio Junction — No More Tension

28/05/2026

दोस्तों…
आज कुछ शब्द सचमुच ख़ामोश लग रहे हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे ग़ज़लों की दुनिया का एक बहुत अपना चेहरा धीरे से हमसे दूर चला गया हो।
Bashir Badr साहब…
एक ऐसा नाम, जिसे सिर्फ़ उर्दू शायरी नहीं,
बल्कि महसूस करने वाला हर दिल जानता है।
सच कहूँ…
बशीर बद्र साहब को सुनना हमेशा ऐसा लगता था
जैसे कोई बहुत अपनापन लेकर ज़िंदगी की बातें कर रहा हो।
न आवाज़ में शोर…
न अल्फ़ाज़ में दिखावा…
बस सादगी… और दिल को छू लेने वाली बात।
उन्होंने मोहब्बत लिखी…
लेकिन सिर्फ़ प्रेम की नहीं।
उन्होंने इंसानों के बीच की दूरियाँ लिखीं…
रिश्तों की थकान लिखी…
अकेलेपन की आवाज़ लिखी…
और उम्मीद भी लिखी।
“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी,
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता…”
देखिए ना…
सिर्फ़ दो लाइनें…
लेकिन कितने रिश्तों की पूरी कहानी कह जाती हैं।
उनकी शायरी में शिकायत भी होती थी,
लेकिन तहज़ीब के साथ।
दर्द भी होता था,
लेकिन उम्मीद का हाथ पकड़े हुए।
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए…”
ये शेर सुनते ही ऐसा लगता है
जैसे कोई अपनेपन से कह रहा हो —
“अच्छी यादों को संभाल कर रखिए…
यही मुश्किल वक़्त में रोशनी बनती हैं।”
दोस्तों,
आज की दुनिया में लोग बहुत जल्दी बदल जाते हैं…
बहुत जल्दी दूर हो जाते हैं…
लेकिन बशीर बद्र साहब की ग़ज़लें हमें रिश्तों की अहमियत याद दिलाती हैं।
“कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो…”
आज भी ये शेर उतना ही सच लगता है
जितना बरसों पहले था।
उनकी सबसे बड़ी खूबसूरती यही थी कि
उन्होंने मुश्किल बातों को भी आसान शब्दों में कहा।
इसीलिए उनकी शायरी किताबों से निकलकर लोगों की ज़िंदगी तक पहुँची।
किसी की तन्हा रातों में…
किसी के अधूरे प्यार में…
किसी की चुप यादों में…
आज भी बशीर बद्र साहब मौजूद हैं।
और शायद हमेशा रहेंगे।
क्योंकि कुछ लोग दुनिया से जाते नहीं…
वो अपने शब्दों में बस जाते हैं।
बशीर बद्र साहब…
आपकी ग़ज़लें, आपकी सादगी, आपका एहसास…
हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगा।
आपको Radio Junction परिवार की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🌸

28/05/2026

आज की महफ़िल सजेगी अनसुनी ग़ज़लों से ..... श्रोताओं में ग़ज़ल प्रेमियों की भेजी गई शायरियों को मिलेगा पूरा सम्मान ... जुड़िये रात 9 बजे

26/05/2026

सफ़र ये गीतों का ,रेडियो का ज़िन्दगी का, हमारा, आपका, खुशियों का ग़म का ... कोई भी हो चलता रहेगा .... भेजिए गीतों की सौगात जो सफर पर ले चले ......

26/05/2026

Coming soon This June
Every Sunday

लिखिए अपने दिल की बातें अपनी रेडियो डायरी में इस लिंक के ज़रिए
https://forms.gle/J3uNiUs76haWbrKx8

Want your business to be the top-listed Media Company in Lucknow?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Telephone

Address


Lucknow