Kavi Kumar prince Rastogi
Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Kavi Kumar prince Rastogi, Writer, Lucknow.
05/09/2025
नमस्ते मित्रों!
Winword infraprojects Pvt.LTD लेकर आया है
लखनऊ सिटी में मोहन रोड और रायबरेली रोड पर
Best Location पे पाएं रेजिडेंशियल प्लॉट,
दाखिल खारिज। कैश और किश्त दोनों में उपलब्ध,
मात्र 599 ₹ sqft से शुरू..... अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
कंसल्टेंट प्रिंस रस्तोगी से..
9519262712
या MSG करे......
Big shout out to my newest top fans! Rox Amar Rastogi
एक बार ज़रूर पढ़े मित्रों!
कैसी लगी कहानी अवश्य बताएं?
एक कहानी परिवेश
खड़े खड़े न जाने कितने घंटे बीतने वाले थे, ये ना मैं जानता था ना कोई और अगर कोई जानता तो वह सिर्फ ऊपरवाला ही जानता था। बस अब यही बचा था शायद जीवन में आने जाने वालों को देखना छत पर से छज्जे से देखना क्या मिलता है? आखिर बाहर से आने जाने वाले लोगों को देखकर, अभी खड़े हुए घंटा भर भी नहीं हुआ था कि ना जाने लोग किस रफ्तार से अपनी गाड़ियों को दौड़ाए जा रहे थे। यह ज़माना कितना आगे निकल चुका है यह बात बदलते परिवेश की पीढ़ी की भाषा शैली एवं पहनावे से बखूबी बयां हो रही थी। अब स्वयं को जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर चलाने और उसी रफ्तार से मैं भी चलूं मुझे भी कोई सड़क पर देखें और मेरे बारे में बात करे। जाड़े का मौसम था तो छतों पर कहीं खेलकूद तो कहीं नन्हें मुन्नों की मालिश कर उन्हें मजबूती बनाया जा रहा था, छोटे साहब की माँ ने कहा आज फिर राघव के चक्कर में इन्हें फिर दफ्तर जाने में देरी हो गई। दो मकान छोड़ पीछे वाली बुढ़िया अपने एकांतमय में जीवन को कैसे वह काट रही थी तंगी से तंग आकर अपनी कुपुत्रो को फिर कोस रही है एक बेटी ही तो थी उसकी कभी कभार दवा, खाना पानी दे जाती थी, कभी वह मंदिर की दर पर बैठ जाया करती थी कम से कम दो वक्त की रोटी तो मयस्सर हो जाती थी। मकान मालिक के जिम्मे बुढ़िया के कुछ पैसे ही जमा जिम्मेदारी थे, बुढ़िया नहीं, वह आता तो बातों से ख्याल करता है अम्मा आज नमस्ते लाया हूँ टाइम वही 11:00 बज गए उठने में, वही आते महीना 6 महीना में वहीं दो कदम दूरी पर मकान तो है, कोई जरूरत हो तो बताना अम्मा। चबूतरे पर खड़े हुए हैं अभी कुछ घंटे ही हुए होंगे की भीड़ मेरी ओर तेज कदमों से मानो दौड़ी चली आ रही थी मैं जैसे कोई मिठाई की दुकान पर खड़ा हूँ। किंतु यह दुकान तो दवा की है मर्ज की है एक करके दुकानदार से कहने लगे मुझे यह दवा दो, मुझे वो दवा दो, ये लो पर्चा एक भाई ने पुराने फटे हुए नोट पर्स से सीधे करके अपना गणित लगाकर बोला भाई ज़रा ये पर्चा देखकर दवा दे देना और वह दवा देते हुए। अभी पेड़ पर नई कोपलें फूटीं भी नहीं थी जिमखाने से लेकर तरह तरह की बातें अपनी को दूसरों से अलग बड़ा बनाने के लिए स्वयं को आतुर हुए जा रहे थे नौजवान, मुझे न जाने क्यों यह सब हस्यास्पद लग रहा था। जीवन के भिन्न भिन्न पड़ावों को मैं पार कर
28/12/2024
एक शेर पेश है
कि मंज़ूर हो जाए वो ज़माने इश्क ही क्या ! ।
तक़दीर तुमसी कहां कन्हैया बंसी राधा पुकारे राधा कन्हैया ।।
कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी,लखनवी....
कठिन शब्दार्थ - मंज़ूर - स्वीकार करना।
तक़दीर- किस्मत।
25/10/2024
My new look!
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Culinary Team
Attire
Contact the public figure
Telephone
Website
Address
Lucknow