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11/03/2024
जिस तरह मर्यादा पुुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र को लेकर कहा गया है कि ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता…’ उसी प्रकार भगवान कृष्ण के मुखार बिन्दु से प्रस्फुटित हुई श्रीमद् भगवत गीता का सार भी अतल गहराइयों वाला है। विद्वानों ने अपने-अपने तरह से गीता के रहस्य को समझने और समझाने का प्रयास किया है।
मेरे और तेरे के भेद से हुआ महाभारत - Hindustan Samachar श्रीमद् भगवत गीता का प्रबोध-1 जिस तरह मर्यादा पुुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र को लेकर कहा गया है कि ‘हरि अनंत हरि कथ....
03/01/2024
पाप का फल ही दुख नहीं है। पुण्यमिश्रित फल भी विघ्न है। ऐसा कौन सा इनसान है जिसको संसार में विघ्न नहीं है। तो भगवान महापापी होंगे, इसलिए उनको दुख आया होगा। 14 साल वन में गए। यदि पाप का फल ही दुख होता तो राज्यगद्दी की तैयारियां हो रही हैं और तुरिया बज रही हंै, नगाड़े गुनगुना रहे हैं और राज्याभिषेक की जगह पर अब कैकेयी को मंथरा की चाबी चली और रामजी को बोलते हैं वनवास। एक तरफ तो राज्याभिषेक की तैयारी और दूसरी तरफ वनवास। राज्याभिषेक को सुनकर चित्त में हर्ष नहीं होता और वनवास सुनकर चित्त में शोक नहीं होता, दस इन्द्रियों के बीच रमण करने वाला दशरथ कहता है कि राम का राज्य होना चाहिए और गुरु बोलते है कि हां! करो। गुरु जब राम राज्य का हुंकारा भरता है तो दशरथ को खुशी होती है, लेकिन राम राज्य होने के पहले दशरथ कैकेयी की मुलाकात में आ जाता है। दशरथ की तीन रानियां बताई- कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण। जब सत्वगुण में से, रजो गुण में से हटकर दशरथ (जीव) तमोगुण में जाता है, रजोगुण में, तमोगुण में, फंसता है, तमस मिश्रित रजस में फंसता है, कैकेयी अर्थात कीर्ति में, वासना में फंसता है तो रामराज्य होने के बदले में राम वनवास हो जाता है। राम का राज्य नहीं, राम वनवास! और सब हैं, राम ही जा रहे हैं।
03/01/2024
22 जनवरी को भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दशक पुराना प्रण भी पूरा होगा। मोदी इस दिन नए मंदिर में मुख्य यजमान के रूप में रामलला की आंखों से पट्टी हटाए जाने के बाद पहला दर्शन करेंगे। इसी के साथ 14 जनवरी 1992 को जन्मभूमि में रामलला के सामने ली गई उनकी भावपूर्ण प्रतिज्ञा साकार हो जाएगी। 11 दिसंबर 1991 में कन्याकुमारी से शुरू हुई भाजपा की एकता यात्रा 14 जनवरी 92 को अयोध्या पहुंची थी।
इस दौरान प्रतिज्ञा ली कि अब मंदिर में विराजमान होने के बाद दर्शन करने आएंगे। 25 सितंबर 1990 में जब भाजपा अध्यक्ष के तौर पर लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए राम रथयात्रा शुरू की तो इसके मुख्य सूत्रधार मोदी ही रहे। तब वह संघ के पूर्व प्रचारक और गुजरात भाजपा के संगठन महासचिव के रूप में काम कर रहे थे। वर्ष 1998 में मोदी मॉरीशस में अंतरराष्ट्रीय रामायण कांफ्रेंस में गए थे। वहां उन्होंने रामलला और उनकी जन्मभूमि अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर अपने मन की बात की थी।
साल 1992 को जन्मभूमि में रामलला को देख लिया था प्रण : पीएम मोदी - Hindustan Samachar अयोध्या। 22 जनवरी को भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दशक पुराना प.....
हिफी अपने पाठकों को ज्ञानवर्द्धक एवं प्रेरणा देने वाले आध्यात्मिक आलेख समय-समय पर मुहैया कराता रहता है। रामचरित मानस पर आधारित ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता के बाद श्रीमद्भागवत गीता की विशद् व्याख्या को क्रमबद्ध जारी करने के बाद हम महाज्ञानी अष्टावक्र और विदेह कहे जाने वाले राजा जनक के मध्य संसार और मुक्ति पर, ज्ञानी और मूर्ख पर संवाद को क्रमशः प्रस्तुत करेंगे। महात्मा अष्टावक्र शरीर से वक्र थे लेकिन प्रखर मेधा प्राप्त की थी। वे जब 12 वर्ष की उम्र के थे तभी राजा जनक के दरबार में विद्वानों को निरुत्तर कर दिया था। अष्टावक्र को देखकर विद्वान हंस पड़े तो अष्टावक्र ने उन्हंे चर्मकार कहा। राजा जनक को यह अपमानजनक लगा लेकिन जब अष्टावक्र ने कहा कि ये लोग मेरे शरीर (चमड़ी) को देखकर हंसे, आत्मा नहीं देखी तो शरीर को देखने वाले चर्मकार ही हो सकते हैं….। राजा जनक इससे बहुत प्रभावित हुए और उनके चरणों मंे शिष्य की तरह बैठकर ज्ञान प्राप्त किया था। राजा जनक ने ज्ञान, मुक्ति और बैराग्य के बारे मंे अष्टावक्र से अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया था।
13/09/2023
राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढना चाहिए : मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि महिलाएं विज्ञान, प्रौद्योगिकी, रक्षा या खेल हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और इसे देखते हुए राजनीति में भी उनका प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।
श्रीमती मुर्मु ने यहां राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशनश् (नेवा) का उद्घाटन किया और गुजरात विधान सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “ जब महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, चाहे वह विज्ञान और प्रौद्योगिकी हो, रक्षा या खेल हो, तो राजनीति में भी उनका प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।” उन्होंने कहा कि देश भर के शैक्षणिक संस्थानों के दौरे के समय उन्होंने लड़कियों में जीवन में आगे बढ़ने और देश और समाज के लिए कुछ करने की आकांक्षा देखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उचित अवसर मिले तो वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए आधी आबादी की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है।
13/09/2023
अष्टावक्र को विश्वास हो गया कि राजा जनक को तत्व बोध हो गया है। इसकी उन्होंने परीक्षा भी ली। तत्पश्चात बंधन और मुक्ति का उपदेश दिया।
11/09/2023
डा. शर्मा को प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाकर उसे देश में एक माडल के तौर पर स्थापित करने के लिए जाना जाता है। उनके शिक्षा विभाग की कमान संभालने के दौरान ही यूपी में नकल विहीन परीक्षा कराने, पाठ्यक्रम का परिवर्तन शुल्क नियंत्रण अधिनियम निजी विश्वविद्यालय एक्ट सभी विश्वविद्यालय में शोधपीठ सत्र नियमितीकरण रिक्त स्थानों पर अध्यापकों एवं प्रधानाचार्य की पारदर्शी नियुक्ति, 78 000 लेक्चरर्स की डिजिटल लाइब्रेरी शोध गंगा पोर्टल अनुदानित विद्यालयों में अलंकार योजना अवकाश के समय सभी देयों का भुगतान संस्कृत संस्थान का संगठन संस्कृत अध्यापकों की नियुक्ति संस्कृत निदेशालय निर्माण की प्रक्रिया का प्रारंभ होना आदि ऐसे कार्य थे जिन्होंने बीजेपी का संकल्प भी पूरा किया था। डा. शर्मा के समय में प्रदेश को नई शिक्षा नीति को लागू करने में अग्रणी रहने का सौभाग्य मिला था। उनके समय में उच्च शिक्षा क्षेत्र में की गई तपस्या का परिणाम है कि आज प्रदेश के विश्वविद्यालयों को नैक की रेटिंग में ए़़ ग्रेड मिल रहा है। उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा के कोर्स में आजादी के बाद पहली बार परिवर्तन का कार्य भी उनके कार्यकाल में सम्पन्न हुआ। शिक्षा क्षेत्र में यूपी को अग्रणी बनाने के साथ ही उन्होंने प्रदेश को मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी अग्रणी बनाया था। आज देश में बनने वाले 100 मोबाइल में से 70 प्रदेश में ही बन रहे हैं।
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