Ananya Rai Parashar

Ananya Rai Parashar

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AUTHOR N POET
MOTIVATIONAL SPEAKER
Numerologists
REIKI HEALER
Social Worker

06/12/2023

फ़लक और भी हैं ज़मीं और भी हैं

ख़ुदा के हसीं जा-नशीं और भी हैं

मिरे ही लिए क्यों लिखो शा'इरी तुम

जहाँ में कई आफ़रीं और भी हैं

मुझे रश्क क्यों है कहानी पे अपने

मोहब्बत के क़िस्से हसीं और भी हैं

ये सूरज ये तारे ये चाँद और दुनिया

यहाँ हैं मगर क्या कहीं और भी हैं

'अनन्या' अभी साँप निकले नहीं सब

अभी बाक़ी कुछ आस्तीं और भी हैं

© Ananya Rai Parashar

06/12/2023

The entire program, combined with your gracious hospitality, made the evening one we will always remember. Thank you so much

Video credit :-

06/12/2023

इंसान की सबसे बड़ी उपलब्धि है सम्मान और इज्ज़त । कुछ इस तरह का प्यार और आशीर्वाद मुझे मिला अयोध्या के इक प्यारी बच्ची शिवानी श्रीवास्तव तथा उनके परिवार से । आज पहली बार मुलाकात हुई इस इवेंट के दौरान जहां पता चला की वो कब से सिर्फ इसलिए बैठे हैं ताकि मुझसे मिल सके । उनका ये निश्चल प्रेम और सम्मान देख मैं बिल्कुल भावुक हो गई । माता जी का आशीर्वाद लेने झुकी ही थी की उन्होंने थामते हुए गले से लगाया और कहने लगी जो हृदय में बस गए हो उनकी जगह चरणों के रज में नहीं । काफ़ी वक्त बाद किसी परिवार से मिलकर अत्यधिक हर्ष की अनुभूति हो रही है । इस प्रकार की ममता और वात्सल्यता एक मां से ही मिल सकती है। आपको मेरा प्रणाम माई❤️❤️🙏🙌

साथ में कवियत्री कोमल वाणी , अपर्णा जयसवाल,फैशन डिजाइनर एवं ब्लॉगर वंशिका त्रिपाठी तथा अन्य

06/12/2023

Hai kabhi wo Paak kabhi bebaak Nazar
Uski Nazar hai is qadar chalaak Nazar

Kisne Kiya hai aurat ka samman Yahan
Padti Rahi hai humpe sada naapaak Nazar

Dhoond leta hai wo gham hansne me mere
Ishq me ho tou ho aisi saffaak nazar

Thoda thahar ke dekhiye apni hasti ko
Jab bhi aa jaaye kahin bhi khaak Nazar

Izzat Jo de tou ye saro'n pe taaj rakhe
Warna kar jaati hai ye gareeba'n chaak Nazar

Hum hain ananya wo Jo Kisi ko dekh len jab
Chodti jaati hai phir uspe dhaak Nazar

© Ananya Rai Parashar
Ananya Pandey

06/04/2023

✌️️✌️️✌️️😉😉😍

06/01/2023

क्या बताऊं के क्या है तेरे बिन
ज़िंदगी हादसा है तेरे बिन

मेरे सीने में मेरा दिल हर पल
मुझसे रूठा हुआ है तेरे बिन

बे सबब मेरी शक्ल-ओ-सूरत है
बे सबब आइना है तेरे बिन

लब पे नगमे हैं बस उदासी के
मुस्कुराना सज़ा है तेरे बिन

कौन अब समझे सादगी मेरी
कौन अब हमनवा है तेरे बिन

मिट चली है सेहर अनन्या की
शाम की इब्तिदा है तेरे बिन

© Ananya Rai Parashar

Photos from Ananya Rai Parashar's post 13/11/2022

Thank you so very much 🙏🙏 ❤️
A lot of appreciation as well as a lot more applause, which all these NGOs actually deserve because of the very work you are actually doing for the very welfare of our society. Not everyone actually has these many guts to do so. When you work for some of the other social causes, then you are actually working in the very direction for the welfare of your people and your society.I believe that we all must make some other steps towards the very welfare of our very society, and today, I feel so much more obliged to thank and all the very NGOs and the very activists for all of their wonderful work. The MSG Foundation

11/10/2022

"एक महामारी ऐसी भी"

"महामारी" यह शब्द सुनते ही बिजली के तरंगों की भांति हमारे दिमाग़ में विचारों की रेस शुरू हो जाती है । किसी को किसी भयानक बिमारी के बाद का दृश्य नज़र आता है तो किसी को आपदा के बाद ज़मीन पर बिछी लाशें।
कैसा लगेगा सुनकर अगर मैं ऐसा कहूं कि एक ऐसी ही महामारी आज हम ९९% लोगों के अंदर पनप रही है और वही महामारी उनके स्वास्थय ,मान - सम्मान , विचारधारा , आत्मविश्वास, धन - दौलत सभी
मार्गों के बीच इकलौते अवरुद्ध का कारण है ।

अजीब लगना जायज़ है । शायद आप सब यह पड़कर मुझपर ज़ोर से हस सकते हैं लेकिन मैं फ़िर भी १०१% विश्वास के साथ हर बार यही कहूंगी कि आप और सफ़लता के बीच अगर कुछ रुकावट का कारण है तो वो सिर्फ़ आपके अंदर पनप रही यह महामारी जिस से आप शायद अवगत तो हैं लेकिन उसे एक महामारी के रूप में स्वीकारने को तैयार नहीं हैं ।
जी हां.... ,
और आपकी यह महामारी कुछ और नहीं बल्कि आपके अंदर पनप रहा आपका भय, आपके अंदर की घबराहट है ।

आप इस बात से अपरिचित हो सकते हैं लेकिन अंजान नहीं कि "व्यर्थ का पनप रहा भय आपके अंदर भ्रम पैदा करता है।" और इस कल्पित भय से हम अपनी परेशानी को और बढ़ा लेते हैं । और हमारा यही भय और यही भ्रम , यही घबराहट हमें महामारी से भी भीषण हानि पहुंचाता है । हमारी कामयाबी के बीच रोड़ा अटकाता है ।
हम सभी कामयाब होना चाहते हैं ,आगे बढ़ना चाहते हैं , हर किसी के लिए कामयाबी की परिभाषा उनके ज़रूरत के हिसाब से अलग हो सकती है । जैसे कि अगर मैने ज़िंदगी में आर्थिक तंगी महसूस की है तो मेरे लिए कामयाबी का मतलब ढेर सारा धन प्राप्त करना हो सकता है । ठीक उसी तरह अगर किसी की ज़िंदगी में शिक्षा का अभाव रहा है तो उसके लिए कामयाबी अच्छी शिक्षा ग्रहण करना , अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करना हो सकता है । ऐसा कोई भी नहीं जो कुछ हासिल ना कर सके।
हम सभी की कुछ न कुछ इच्छा अवश्य होती है और हम उसे पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं । कभी हम सफलता की सीढियों पर अव्वल खड़े होते हैं तो कभी निराशा हमारे कदम खींच लेती है । कुछ इस निराशा से ऊपर उठकर पुनः प्रयास करते हैं और कुछ के अंदर पनपने लगता है पुनः भय और होने लगता है खुद पर भ्रम । ऐसे लोगों को उस घड़ी यह नहीं भूलना चाहिए कि "एक आनंदमयी आशा और खुद पर अटल विश्वास ही उनका सबसे बड़ा पथ प्रदर्शक है ।"

लेकिन इस भय और भ्रम की महामारी से ग्रसित लोग यह भूल जाते हैं और शुरू कर देते हैं कोसना अपनी किस्मत को । इसमें उसका क्या दोष ??
भगवान ने सभी को एक सा बनाया है । और वो हम ही हैं जो नकारात्मक रवैये से अपने ओर आ रहे हर नए और सुनहरे मौके का गला घोंट देते हैं। ।
कुछ का कहना है कि हमनें अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सब कुछ आजमा लिया लेकिन कभी सफ़लता नहीं मिलती । मेरे दोस्त , अगर आप पहले से ही मानसिक दरिद्रता को पाल -पोश कर फूलने फलने दोगे अपने जीवन में तो समृद्धि तो दूर जाएगी ही।

हर मनुष्य अपने नियम कानून तो याद रखते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि हमारे मन का भी कोई नियम है । यह शरीर हमें उपहार स्वरूप विधाता ने प्रदान की है और इसके कुछ अपने कायदे कानून भी हैं ।

अगर इसी बात को उपनिषद् की भाषा में समझाऊं तो , "कठोपनिषद" में कहा गया है कि:-

आत्मानं रथिनं विद्धि
शरीरं रथमेव तु
बुद्धितु सारथि विध्दि
मन प्रग्रहमेव च
इंद्रियानि हयानांविषयास्तेषु गोचरान
आत्मेंद्रिय मनोयुक्तमू भोक्तेतत्याहुर्मनीषिणः।।

यानी आत्मा रथी है , बुद्धि उसका सारथी शरीर रथ है मन लगाम है । इंद्रियां घोड़े हैं , शब्दादि विषय ही मार्ग के चरागाह हैं।

सरल शब्दों में कहूं तो " मैं जो बोलती हूं मेरे विचार उस से प्रभावित होते हैं । वो विचार मेरे मन में जाते हैं । मेरा माइंड मेरे ब्रेन को बोलता है । मेरा ब्रेन मेरे बॉडी को ऑर्डर करता है और वो चीज़ ऑटोमेटिकली प्रोसेस होती है । "

" शब्दादि विषय ही मार्ग के चरागाह है ।"
यानी हम जो विचार रखते हैं, हम जैसा सोचते हैं उस से हमारा जीवन भी प्रभावित होता है और हम अपने विचारों से अपने सोच से वैसी ही चीजें आकर्षित करते हैं ।

इसी बात को अगर अंग्रेजी में कहूं तो किसी ने बहुत बेहतरीन बात कही है कि "OUR speech influences our thoughts , and our thoughts train our mind to do that . "

इसलिए सदैव अपने आप की महत्ता को समझें और अपने आस - पास इस तरह की महामारी के घेराव के लिए इक सकारात्मक घेरा तैयार कर खुद को भय ,भ्रम और नकारात्मकता की इस विशाल बीमारी से ग्रसित ना होने दें।

© Ananya Rai Parashar

07/10/2022

रात इक ऐसा ख़्वाब मैने देखा
मैं कहीं दूर चली जा रही थी
तेज़ झोंके हवाओं के
मेरी जुल्फों से उलझते जाते थे
मेरे आंचल को किसी परचम की तरह
वो उड़ाते लहराए जाते थे
तन्हा चलती जा रही थी सख़्त राहों पे
अश्क आंखो में थे और उदासी थी
एक पत्थर वो सख्त राहों का
मेरे कदमों को रोकने के लिए
बनके ठोकर मुझे गिरा बैठा
मुझको हिम्मत नहीं थी उठने की
उठके फिर हौसले से चलने की
और फिर कोई मदद के नर्म हाथ
एक खुशी का सबब बनके बढ़ें मुझ तक
आंखें अचानक चमक उठी
और उदासी भी मिटने लगी

मैने जैसे वो हाथ थामे

नींद गहरी थी फिर भी टूट गई
एक उम्मीद ख्वाब में ही छूट गई

© Ananya Rai Parashar

05/10/2022

रूख़ सफ़र का सुकूं को मोड़ा जाए
ख्वाहिशों को यहीं पे छोड़ा जाए

जिस मुहब्बत का हुस्न तोड़ा गया
उस मोहब्बत का हुस्न जोड़ा जाए

जो नहीं है हमारी चाहत में
उस त'आक़ुब में सर ना फोड़ा जाए

वो मुझे ख़्वाब में ही हासिल है
क्या ज़रूरी है ख़्वाब तोड़ा जाए

एक मुद्दत से आंखें गीली हैं
अब के सावन इसे निचोड़ा जाए

© Ananya Rai Parashar

27/09/2022

भर के ज़ुलमात दिल दुखाएगी
रात भर रात दिल दुखाएगी

मेरी ओक़ात पूछने वालों
मेरी ओक़ात दिल दुखाएगी

इतनी दीवानगी भी ठीक नहीं
हुस्न की ज़ात दिल दुखाएगी

अब के बरसात तुम नहीं होगे
अब के बरसात दिल दुखायेगी

वस्ल की रात याद आयेगी जब
हिज्र की रात दिल दुखाएगी

हाए गुज़रेगी मेरे कूचे से
उसकी बारात दिल दुखाएगी

आखिरी बार हम मिलेंगे और
ये मुलाक़ात दिल दुखाएगी

ऐसा सोचा ना था अनन्या कभी
उसकी अब बात दिल दुखाएगी

© अनन्या राय पराशर

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